00:00तुम अपने आपको बहतर बनाने की कोशिश करते रहो, करते रहो, करते रहो, एक दिन पाओगे, कोई बहतर इनसान तुम्हारी
00:07जिन्दगी में आ गया है।
00:10तुम सही दिशा में चलने की कोशिश करते रहो, करते रहो, करते रहो सही राह पर
00:15एक दिन अनायास पाओगे कि उसी राह पर सही दिशा में चलता हुआ कोई हमसफर मिल गया है
00:23पर वो जो हमसफर है वो तुम्हारा उद्देश्य नहीं होना चाहिए
00:27सही राह और सही मंजिल तुम्हारा उद्देश्य होना चाहिए
00:31फिर उस सही राह और सही मंजिल से इतनी ताकत मिल जाती है
00:35कि हमसफर की तलाश छोटी चीज हो जाती है
00:39तुम कहते हो राह भी सही है, मंजिल भी सही है
00:42हमसफर मिले तो मिले, नहीं मिले तो नहीं मिले
00:45और जब भी कह देते हो ना कि मिले तो मिले नहीं मिले तो नहीं मिले
00:50तो कई बार बहुत अच्छा हमसाफर मिल जाता है