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Houthi-Saudi War: यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की सुरक्षा रणनीति और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती पेश की है। आधुनिक हथियारों और सैन्य ताकत के बावजूद हूतियों से निपटना इतना मुश्किल क्यों बना हुआ है? सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष ने पूरे मिडिल ईस्ट की राजनीति, तेल बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित किया है। अब तेल और गैस की कमाई में हिस्सेदारी की मांग को लेकर भी चर्चा तेज है। इस वीडियो में जानिए हूतियों की ताकत, उनकी रणनीति, अमेरिका की भूमिका और सऊदी अरब के सामने खड़ी चुनौतियों की पूरी कहानी।

Houthi-Saudi War: Yemen’s Houthi rebels continue to pose a major challenge to Saudi Arabia and regional security. Despite advanced weapons, military power, and intelligence capabilities, countering the Houthis remains a complex task. Their strategic position, asymmetric warfare tactics, and influence across the Middle East have raised serious concerns about Saudi Arabia’s security and regional stability. Reports and claims about demands for a share of oil and gas revenues have added another dimension to the conflict. Watch this report to understand the Houthi movement, Saudi Arabia’s challenges, the role of US intelligence, and the wider implications for Middle East geopolitics and global oil markets.

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~PR.540~HT.408~ED.106~GR.508~VG.HM~

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Transcript
00:07दुनिया के सबसे आधुनिक लडाकु विमान अर्वो डॉलर के हथियार और अमेरिका की खुफिया मड़त
00:13सौधी अरब के पास हूती विद्रोहियों से लड़ने के लिए इन सब की ताकत हैं
00:18इसके बावजूद यमन के ये विद्रोही सौधी अरब के लिए लंबे वक्त से बड़ी शनोती बने हुए हैं
00:25सौधी अरब ने सालों तक हवाई हमले किये हथियारों पर भारी पैसा खर्च किया और हूतियों को पीछे धकेलने की
00:33कूशिश की
00:34लेकिन लड़ाई का नतीजा उसकी उम्मीद के मुताबिक नहीं निकला
00:38अब इस संगर्ष में तेल और गैस से होने वाली कमाई का मुद्दा भी एहम हो गया है
00:44हूति चाहते हैं कि यमन के संसाधनों से मिलने वाले राज़त सुका बटवारा उनकी शर्तों के मुताबिक हो
00:51यानि लड़ाई अब सिर्फ जमीन के कबजे की नहीं बलकि पैसे, सत्ता और यमन के भविश को लेकर भी है
00:59सौधी अरब के लिए सबसे बड़ी परिशानी ये है कि हूतियों को कमजोर करने के लिए सेन ताकत का इस्तेमाल
01:06करने के बावजूद उनका प्रभाव खत्म नहीं हुआ है
01:09दूसरी और हूतियों ने कम खर्च वाले ड्रोन और मिसाइलों के जरिये ये दिखाया है कि बड़ी सेन ताकत रखने
01:17वाले देशों को भी लंबे वक्त तक दबाव में रखा जा सकता है
01:21इस पूरी कहानी को समझने के लिए यमन में शुरू हुई उस लड़ाई को देखना होगा जो एक दशक से
01:27जादा समय बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है
01:312014 में हूती विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सना पर कबजा कर लिया था इसके बाद देश की अंतराश्तिय मानता
01:39प्राप्त सरकार कमजोर पड़ गई और यमन में राजनीतिक संकट गहरा हो गया
01:43मार्च 2015 में सौदी अरब ने कई देशों के साथ मिलकर हूतीयों के खिलाफ सेन अभियान शुरू किया
01:51सौदी अरब का मकसद यमन की सरकार को दोबारा सत्ता में लाना और हूतीयों के कबजे को खत्म करना था
01:58सौधी अरब को उमीद थी कि उसकी वायुसेना और आधनिक हतियारों के सामने हूती जादा वक्त तक नहीं टिक पाएंगे।
02:06शुरुवाती दौर में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किये गए, खूतियों के ठिकानों, सैन ठिकानों और हतियारों के भंडार को
02:13निशाना बनाया गया, लेकिन हवाई हमलों के बावजूद खूतियों की पकड़ पूरी तरह खत्म नहीं हुई, समय के साथ ये
02:21लडाई स�
02:24सैन अभियान बन गई, यमन में मानुवे संकट बढ़ा और युद्ध के राजनीतिक समाधान की कोश्चे भी चलती रही, 2022
02:32में सन्युक्त राष्ट की मध्यस्था से हुआ संगर्ष विराम कुछ वक्त के लिए हिंसा कम करने में मददगार रहा, इसके
02:40बावजूद यमन के
02:41राजनीतिक संकट का स्थाई समाधान नहीं निकल पाया, आज भी हूती यमन के बड़े आबादी वाले इलाकों पर नियंत्रण रखते
02:49हैं, उनकी मौझूदगी सौधी अरब की दक्षणी सीमा के पास है और उनके पास ऐसे हथियार हैं जिनसे वे सीमा
02:57पार हमला करने की छ
03:09जवाल ये है कि अमेरिका से आधुनिक हथियार और खूफिया मदद लेने के बाद भी सौधी अरब हूतियों को निर्णायक
03:17रूप से क्यों नहीं हरा पाया, इसका पहला कारण दोनों पक्षों के लड़ने के तरीके में अंतर है, सौधी अरब
03:24एक बड़ी और आधुनिक स
03:38हथियारों, तकनीक और खूफिया जानकारी के छेतर में सहयोग मिलता रहा है, लेकिन खूटी किसी दूसरे देश की नियमित सेना
03:46की तरह लड़ाई नहीं लड़ते हैं, वे छोटे समूहों में काम करते हैं, अपने ठीकाने को बदलते रहते हैं और
03:53ऐसे हथियारों का इस्त
04:07प्रानी और हमले दोनों में कामा सकते हैं, ऐसी इस्थिती में सिर्फ जादा आधुनिक हथियार होना जीत की गारंटी नहीं
04:15देता, किसी हमले को रोकने के लिए पहले उसका पता लगाना, फिर ये तै करना कि वो किस दिशा से
04:21आ रहा है, उसके बाद सही समय पर उसे रोकना
04:25जरूरी होता है, अगर एक साथ कई दिशाओं से ड्रोन और मिसाइले आती हैं, तो हवाई सुरक्षा व्योस्था पर दबाव
04:32बढ़ सकता है, दूसरी बड़ी चुनोती खर्च की है, एक सस्ता ड्रोन बनाने या इस्तिमाल करने में जितना पैसा लग
04:39सकता है, उसे हवा में
04:41नश्ट करने के लिए इस्तमाल होने वाली इंटर्सेप्टर मिसाइल की कीमत उससे कई गुना जादा हो सकते हैं, हर हमले
04:48का खर्च एक जैसा नहीं होता, लेकिन ये अंतर सौधी अरब जैसे देशों के लिए महतपूर है, माल लीजिए, हूती
04:55कम कीमत वाले कई ड्रोन भे�
04:57सौधी अरब को अपने तेल ठीकानों, हवाई अड़ों और शहरों की सुरक्षा के लिए उन्हें रोकने के वास्ते महंगी हत्यार
05:05इस्तिमाल करने पड़ सकते हैं, अगर ऐसा लंबे समय तक चलता है, तो सुरक्षा पर होने वाला खर्च बढ़ता जाता
05:12है, यही असमानता
05:14हूतियों की रणीती का एक एहम हिस्सा है, उन्हें सौधी अरब की पूरी सेन ताकत को खत्म करने की जरूत
05:20नहीं है, वे सीमित संसाधनों से भी लगातार खत्रा बनाए रखकर सौधी अरब को अपनी सुरक्षा पर भारी रकम खर्च
05:29करने के लिए मजबूर कर सकते हैं, स�
05:41किसी विद्रोही संगठन के ठिकानों का पता लगाना आसान नहीं होता, हवाई हमले किसी इमारत या सेन ठिकाने को मुकसान
05:49पहुचा सकते हैं, लेकिन इस से ये तय नहीं होता कि उस इलाके पर अस्थाई नियंतन भी मिल गया है,
05:55हूती लंबे वक्ट से यमन में सक्रिये है
05:58उनके पास अस्थानी एस्तर पर संगठन, लडाई का अनभव और राजनीतिक प्रभाव हैं, उन्हें पूरी तरह पीछे हटाने के लिए
06:06केवल हवाई हमले काफी नहीं हो सकती, इसके लिए जमीन पर नियंतन, स्थाई समर्थन और एक सिर राजनीतिक व्योस्था की
06:14भी ज
06:26इसी वज़ा से सैन ताकत होने के बावजूद किसी विद्रोही संगठन को पूरी तरह खट्म करना बेहत कठिन हो सकता
06:33है, इस लडाई में इरान की भूमिका भी महतपूर है, इरान और हूतियों के बीच लंबे वक्त से संबंध है,
06:40सौधी अरप और अमेरिका आरोप लगा
06:42आते रहते हैं कि इरान हूतियों को हत्यार, प्रशिक्षण और तकनीकी मदद देता है, इरान पर लगे इन आरोपों को
06:49समझना इसलिए भी जलूरी है क्योंकि इससे ये पता चलता है कि यमन का संगर्ष केवल दो पक्षों के बीच
06:57सीमित नहीं है, इसे पीछे मिडिलिस्�
06:59चेत्रिय राजनीती भी काम करती है, इरान और सौधी अरप लंबे वक्त तक चेत्र में एक दूसरे के प्रतिदुन्दी रहे
07:06हैं, ऐसे में हूतियों की ताकत सौधी अरप के लिए सुरक्षा की चिंता बढ़ाती है, हाला कि हूतियों को केवल
07:13इरान के इशारे पर चलने व
07:27यही वज़ा है कि संगश को केवल हथियारों की मदद से समझना मुश्किल है, इसमें यमन की घरेलू राजनीती, छेत्रिय
07:35प्रतुदनता और आर्थिक खित भी जुड़े हुए हैं, इसका असर सौधी अरप की तेल वियोस्था पर भी पढ़ता है, सौधी
07:42अरप की अर्थ
07:56बाजार और निवेशकों के भरोसे पर भी इसका असर पढ़ सकता है, भूतियों ने अतीत में सौधी अरप के भीतर
08:04तेल पुतिष्ठानों और दूसरे एहम ठीकानों पर हमले किये हैं, तैसे हमलों ने दिखाया है कि यमन की लडाई का
08:10असर सिर्फ सौधी अरप की सीमा तक
08:26बटवारा भी एक बड़ा मुद्दा बन गया है, यमन में तेल और गैस से मिलने वाला राजस लंबे समय से
08:32राजनीतिक विवात का हिस्सा रहा है, देश में अलग-अलग इलाकों पर अलग-अलग पक्षों का प्रभाव है, ऐसे में
08:39तेल उत्पादन, निर्यास से होने वा
08:53और दूसरी जरूरतों को पूरा करने में किया जाए, वे राजस के बटवारे में अपनी भूमी का चाहते हैं, उनका
09:00तर्क है कि देश के संसाधनों से मिलने वाली कमाई का इस्तेमाल जनता की जरूरतों के लिए होना चाहिए, दूसरी
09:07और यमन की अंतराश्टिये मानता प
09:23उसके पास प्रशासन चलाने, कर्मचारियों को वेकन देने और अपने प्रवाव को मजबूर करने के ज़्यादा साधन होगी, इसलिए तेल
09:32और गैस की कमाई का बटवारा यमन की सत्ता की लड़ाई से सीधे जुड़ा हुआ है, सौधी अरब के लिए
09:37भी ये मुद्दा मह
09:38पूर है, क्योंकि यमन में इस खिरता उसके अपने सुरक्षा हितों से जुड़ी हुई है, अगर राजस्त के बटवारे पर
09:46कोई सहमती नहीं बनती, तो राजनीतिक तनाव जारी रह सकता है, लेकिन अगर किसी समझोते में हूतियों की मांगों को
09:53जगा मिलती है, तो उससे
09:54यमन की सत्ता व्योस्था और छेत्रे संबंधों पर असर पड़ सकता है, इसका मतलब ये नहीं है कि हूतियों ने
10:01सौधी अरब को पूरी तरह हरा दिया है, या वे अपनी हर मांग मनवा चुके हैं, असल इस सित्ती इस
10:08से ज़्यादा जटिल है, सौधी अरब के पास अब भ
10:21पूनिक हथियारों से ले सेना के लिए घी किसी विद्रोही संगठन को हराना केवल बंबारी या मिसाइल हमलों का मामला
10:29नहीं होता, जब विरोधी पक्ष कम खर्चवाले हथियारों अस्थानिये पकड़ और लंबे संघर्ष की रणीतिक सहारे टिकता है, तो सेन
10:37बढ़त क
10:38राजनीतिक जीत में बदलना मुश्किल हो जाता है, सौधी एरब भूतियों के बीच जारी संगर्ष इसी का उधारन है, एक
10:45तरफ आधरिक लड़ाकों विमान है, अमेर की मदद महेंगे सुरक्षा सिस्टम है, दूसरी तरफ ऐसे विद्रोही जो सिमित संसाधनों के
10:53बाव
11:07जानीतिक लिए और आपना स्थाइब और आपना के लिए लिगनान पंदेव जान देवनान है, सौँए सौदि अण विए दूसरी है,
11:14आपनाम है, जो लादे खनाला मुश्किल है, लिए टाजसरी आपनों पिल्क्स्तार है, आपना के लिए्स तरफे जाते हैं सौफेरिक �

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