00:00महँगाई फिर से बढ़ने लगी है अगस्त में खुद्रा महँगाई दर 4.83% थी जो सितंबर में बढ़कर 5
00:06.54% हो गई है लेकिन सबसे जादा चिंता खाने पीने की चीजों को लेकर हैं अगस्त में खाद महँगाई
00:13दर 5.97% थी जो सितंबर में बढ़कर 7.74% तक पहुच �
00:18यानि घर का राशन खरीदने से लिकर रोजमर्रा की जरूरते पूरी करने तक आम आदमी के खर्च पर दबाव बढ़
00:25रहा है।
00:25सवाल है कि आखिर महंगाई बढ़ क्यों रही है।
00:40उसी की कीमत 9 अक्टूबर को करीकरी 96.73 रुपए तक पहुच गई थी।
00:45जब भारत मिदेश ते तेल खरीदता है, सोना और दूसरी चीजे खरीदता है तो उसका फुकतान बड़े पैमाने पर डॉलर
00:51में करना पड़ता है।
00:52ऐसे में डॉलर महंगा होने का मतलब है कि उसी समान के लिए जादा रुपए खर्च करने पड़ सकते हैं।
00:57लेकिन क्या डॉलर की बढ़ती कीमत का असर आपकी रसोई तक पहुच रहा है।
01:01क्या रुपए की कमजोरी महंगाई को और बढ़ा सकती है।
01:04और इसे रोकने के लिए भारतिय रिजब बैंक यानि की RBI क्या कदम उठा रहा है।
01:08नमस्कार मैं हूँ सुमीत कुमार और आप देख रहे हैं Good Returns।
01:11आज समझेंगे कि CPI यानि की उप्भोगता मोल्य सुचकां क्या बताता है।
01:15महंगाई बढ़ने के पीछे कौन से कारण है और रुपए डॉलर की चाल का आपकी जेप से क्या कनेक्शन है।
01:21सरकार की ओर से जाड़ी आक्रों के मुताविक सितंबर में ग्रामिन इलाकों में खुद्रा महंगाई दर 6.08% और
01:27शहरी इलाकों में 4.88% रहें।
01:30यानि महंगाई का दबाओ ग्रामिन शित्र में जादा देखने को मिले।
01:33CPI यानि की उभुपता मुल्य सुचकांग के जरिये यह पता लगाया जाता है कि आम लोग जिन बस्तूओं और सेवाओं
01:39पर खर्च करते हैं उसकी कीमत में समय के साथ कितना बदला वाया है।
01:44इससे खाने पीने की चीज़े कपड़े, अवास, इंधन और दूसरी घरेलू जरूरते शामिल होती है।
02:14खाने पीने की चीज़े की कीमतों में लगतार सीधा असर पड़ता हुआ दिखाई दिया।
02:18असर घर के बज़र तक महुँच गया। क्योंकि भोजन पर खर्च हर परिवार की जरूरत होती है।
02:23सबजिया, अनाज और दूसरी खादे वस्तूएं महंगी होने पर लोगों को उतने ही समान के लिए जादा पैसे खर्च करने
02:29पड़ते हैं।
02:30लेकिन महंगाई के कहाने सिर्फ खाने पीने की चीजों तक सीमित नहीं है।
02:33भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है।
02:37अंतरा श्रीय वाजार में तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है।
02:41इसके साथ अगर डॉलर भी महंगा हो जाये तो तेल खरीदने के लिए और ज्यादा रुपए खर्च करने पर सकते
02:47हैं।
02:47इससे परिवहन और उत्पादन की लागत पर दबाव पर सकता है और आगे चल कर दूसरी वस्तूओं की कीमते भी
02:52प्रभावित हो सकती है।
02:54और इससे ही खाने पीने की चीजों पर सीधा असर पड़ता हुआ दिखाई देता है।
02:57यहीं पर रुपए और डॉलर का कनेक्शन भी समझना जरूरी है।
03:00मालेजिए किसी भारतिये कमपनी को विदेश ते 100 डॉलर का समान खरीदना है।
03:05जब 1 डॉलर 89 रुपए का था तब कमपनी को 8900 रुपए देने पड़ते थे।
03:09लेकिन डॉलर की कीमत 97 रुपए हो जाए तो उसी समान के लिए 9700 रुपए खर्च करने होगे।
03:15यानि बिदेशी वाजार में समान की कीमत नहीं बदली लेकिन रुपए की कमजोरी के कारण कमपनी की लागत 800 रुपए
03:22तक बढ़ गे।
03:22अगर कमपनियों का कच्चा माल, मशीने या जरूरी पूर्जे आयाद से आते हैं तो बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा
03:27ग्रापों तक पहुँच सकता है।
03:29अर्थव्योस्ता में इस तरह आयाद की लागत बढ़ने से महंगाई पर जो दबाव बनता है उससे आयातित महंगाई कहा जाता
03:35है।
03:59विदेशी निवेस, निर्याद से होने वाली कमाई, तेल की कीमते और वैश्विक वाजार की स्थिती इसमें भूमिका निभाते हैं।
04:59वाजूर डॉलर महंगा होने से घरेलू कीमतों पर दबावा सकता है।
04:59दॉलर खरीदने का दबाव कम करना, RBI ने विदेशी मुद्रा से जुड़े कुछ लेंदेन और जोखिम से बचाओ के नियम
05:05भी सकत किया है।
05:06इन कदमों से रुपए में उतार जढ़ाव कम करने में मदद मिल सकती है, लेकिन तेल की उची कीमते और
05:11विदेशी निवेशकों की विक्वाली जैसी चुनोतियां बनी रह सकती है।
05:15अब आते हैं CPI यानि की महंगाई के आकड़ों को लेकर तो महंगाई के आकड़ों पर नजा रखना भी ज़रूरी
05:34होगा।
05:45कि इसका संबंध आप पीरसोई, यात्रा, खरीदारी और बचत से भी है।
05:49आप बताइए बढ़ती महंगाई का सबसे जादा असर आपके घर में किस चीज पर पढ़ता हुआ नजारा रहा है।
05:54अपनी दाए कमेंट सेक्शन में जरूर साजा कीजिए और ऐसे ही तमाम अपडेट्स और शियर मार्केट से जोड़ी तमाम जानकारी
05:59के लिए आप बने रहें गुड रिटरंस डिश्टल के साथ।