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  • 7 minutes ago
नवरात्रि को लेकर दिल्ली के कालकाजी मंदिर में तैयारियां पूरी, देखें सजावट

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00:25रविवार से शुरू हो रहे सार्दिय नौरात को लेकर कालकाजी मंदिर में
00:29व्यात कि तैयार्यां की गई है हम आपको इहां-क助रेंग दिखा देते हैं आप देख सकते हैं हैं मंदिर को
00:37खुँफ्शूरत् leftover city रिचν करोसगा बतादे कालकाजी मंदिर में उसकर बादो सालू भर भक्त आते हैं
00:53लेकिन विश्य स्रूप से नौरात्रों के दोरान बरी संखा में भक्त दिल्ली, NCR, सही देश के अलग-अलग हिस्सों से
01:01पहुशते हैं
01:01और उनकों लेकर के तमाम तैयारियां की जाती है और इस बार भी यहां पर तैयारियां की गई है
01:09दरसल भक्तों के परवेश के लिए ओखला, लोटस टेमपल और नहरू प्लेस के तरफ से परवेश बनाया गया है
01:16तो वही जो निकास भी दिया गया है और इसी तरीके से जो है विवस्ता के तहत भक्त जो पूरे
01:25नौरात्रों के दुरान आएंगे
01:27और धर्शन कर सकेंगे वही सुरक्षा के भी 4-4-4 दिजा में पर किये गए हैं
01:32दिली पूलिस के जवानों के साथ ही अर्टथ सेनिक बलो को भी तैनात किया जा रहा है
01:38और इसके अलावे और सेनिक बलो को भी तैनाद किया जा रहा है, साथ ही CCTV कैमरे से भी निगरानी
01:47रखी जा रही है, लगतार जो है पूरे नौरात्रों के दुराने पूरी सुरक्षा इंतिजाम रहेगा, एनॉंस्मेंट लगतार किया जाएगा, और
01:56CCTV कैमरे से पूरे इलाके की
01:59मुलेटरिंग की जाएगी, तो तमाम सुरक्षा के इंतिजाम सही घीर मनेजिमेंट के इंतिजाम जो है, यहां पर किये गए हैं,
02:07और तमाम तैयारियों के बीच भक्त, पूरे नौरात्र, मा कालका के दर्सन करेंगे, सार्दिये नौरात्र के सुर्वात रविवार से होने
02:15�
02:15जा रहे हैं, और इसको लेकर के कालकाजी मंदिर में व्यापक तैयारियां की गई है, अब इस पर बात करने
02:20के लिए हमारे सांथ कालकाजी मंदिर के पिठागी सुर्वारम महन सुर्वारनात ओधुची है, हम इसे बात करेंगे, महन जी, क्या
02:28कहेंगे नौरात्री की सुर्�
02:39आसना का विशेश पर्व है, जहां एक और ब्रह्मान वे बनने वाले विशेश योगों के काल, इस समय की गई
02:45पूजा अचरा विशेश फंदाई होती है, वहीं आयवेद के मतामसार भी इस काल को बहुते महत्पून मताय गया है, रिश्यों
02:53ने इस रित्व का संक्मन काल को
02:57जिस समय नाना प्रकार की जाजियों के उत्पन होने का भै बना रहता है, ऐसे भी उपवास रखते हुए सयोमित
03:04आहर वियार करने से शरीश को नही उर्जा प्राप्त होती है, इसलिए भी इसको शक्ति का पर्व कहा जाता है,
03:11नवरात्र के अवसर पर भगवती दुर्गा क
03:14के साथ साथ नव दुर्गा के साथ पूजा अर्चना भी की जाती है, सरपर्तम भगवती दुर्गा का ध्यान करते हुए
03:21ओम विद्धुजान संप्रग्राम, मुरद्पती सकंध इस्तिताम भिष्णाम, कन्याभी करवाल खेट, विलसताथ शताविरा सेविताम, हस्ते चकर
03:31पूजान से खेट विषिकाम, चापम चे गुनम तरजिनिंग, विभ्वाना मनलात निकाम, शशिधारम दुर्गाम प्रेनियत्ताम, हरेव भगवती दुर्गा करते हैं, पहले
03:41सरपतर पंचोप चार से हथवा सोट्वचार से उनका पूजा करते हैं, दूप, दीप, गंद
03:47लेवेद्यादी अर्पन करने के पाष्षाद या सोट सोट चार से भगवती का पूजन करने के बाद नव दुर्गा के पूजा
03:53अर्चना की जाती है, पर्थम शहल पुत्री चे दितियम मचारनी, दितियम चंद्र गंटेती कुश्मान लेती चे तृत्र कम, पंचवम सकं�
04:06नौमम सिदुदाति चे नव दुर्गा प्रकृतिता के प्रतेग जीन अलग अलग भगवती के सुरुपूर का पूजन अर्चन किया जाता है,
04:14नौ दिन में नौ दुरुगा का पूजन किया जाता है, सरपरसम नव रात्र के पतन दिन गट स्थापना करने के
04:21बाद उसमें �
04:22जो है तेतिस कुटी देवी देवताव का वहान किया जाता है और उसमेन मित्रपती आवाहित देवताव पूजुन करने के बाद
04:28उनके दाहिनी और जो है गणे शंभिका, सब्तगर्ध्मात्रिका, सब्चरणजीव और अगनी कॉन में गोगनी पीठ पनाया जाता है और अवा
04:52मंदिर में इस तरीके से आरियां किगई है जुकि भक्त काफे आते हैं इस दव्राना
04:58काल का जी मंदिर में नवरात्र के पाउफ나�ी पष्षि श्री सक्षंदी महायक का जिन किया सालेreek जी सीocado
05:18उसके बाद जो है, सभी का पुजन करने के पाष्चाट जो हमन किया जाता है, नौरात्र के अउसर पर काल
05:25-का मंदिर के प्रांगन में ही जो है,
05:27पुलिस चोकी का निव्णान करा दिया जाता है,
05:30जिसमें जो है अतिरिक पुलिस बलकि वतनालती के साथ
05:34अतिरिक पुलिस बलकि के साथ
05:36वोरर से और श्वैम सेवी संस्ताह Netz वी जो है दिल्डराध
05:41भक्तो पूज रखशान कराने में संदख रहते हैं
05:56और उनके निकास के लिएciones पारि सरके टरफ से और मोधी मिल की तरफ से उनका निकास रखा गया घा
06:04गुरुजी किस तरीके से मतलब कल पुझा कल कौन मादा की पहली माऑ की पुझा है तो किस तरीके से
06:10प्टुझा करनी है प्लाव districts
06:13नवरात्र के पसंदी भगवती शहल पुत्री के आरादने की जाती है, वंदे वांचित लावाय, चंद्राद कि शेक राम, पृषारू रुड़ां,
06:22शूल्द राम, शहल पुत्रिम जास्वनिंग, भगवती बहल पर सवार जिनके ताहिने हाथ में तर्शूर है, बाएं हाथ
06:40पूर होकर क्यान का अलोग जो जीवर में फैलता है, इमाले राज के यहां जन देने के कारणी भगवती जो
06:45है, शहल पुत्री कहलाई, और शहल पुत्री के नाम से सुविक्षाथ हुई, नौरात्रों के दुरान माता की कब से पट
06:52खुल जाएंगे भगतों के दसमें, नौ
07:10उसके बाद तो प्रातकाल की जो आरती套ी है, वह लगवक से नौ और शह बजे के करीब की जाती है
07:28और मन्दर आतनी की जो आरती है
07:33जिन्होंने बताया कि किस तरीके से पुरी तैयारिया की गई है कलकाजी मंदिर में ताकि जुक्त हैं ऊसलों गाएं मुझे
07:52हैं
07:57कि सो रहा हूं तो पिता जी को
08:03गुजरेंगे और चौपाई बोलेंगे
08:04प्रात काल उठीके रघुनाथा
08:09मात पिता गुरु नावई
08:11माता
08:12कभी कभी मैं गुस्से में उठकर के रहे पापा
08:15चरण इस परश्कीया रोगया वने काम मत उठाना

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