00:00इतिहास खुद को दोराता है बस चेरे बदल जाते हैं
00:03जरादिली का यह मंजर देखिए चारो तरफ मुस्तायद अतियार बंद फाउजे
00:07तैयारी ऐती है मानो सीमा पार से कोई दुस्मन आ रहा हो
00:11लेकिन सामने तो अपने ही जैस के नियत्ते नागरिक है
00:14जो एक अहिंसक पड़रसन के लिए जुटे है
00:16इसे देखकर साल और नाइस और जलिया वाला बाग का वो काला दिन याद आ गया
00:22ज़क जनरल डायर ने भी नियत्ती जनता को घेर कर बंदू के तान दी थी
00:27हर कसी बितना है कि तब हुकूमत विदेशी थी और आज हुकूमत अपनी है
00:31पर फितरत वही है दोस्तो तभी तो एक युनानी का हावत याद आती है
00:35जो फोज अपनी ही जनता की तरफ बंदू के तान कर खड़ी हो
00:39उस फोज की पीठ हमेशा असली दुस्मन की तरफ होती है
00:42जलिया वाले बाग से हमने तो यही सीखा है
00:45सोचिये का जरूर दोस्तों और ऐसे ही अबडेट के लिए आप चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल मिना भूलिएगा