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  • 5 hours ago
30 मई 1996, दिल्ली की तिहाड़ जेल—जहां एक सांसद बंद है और देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी उसे हौसला देने के लिए ख़त लिखते हैं। यह कहानी है बृजभूषण शरण सिंह की, जिनके लिए उत्तर प्रदेश की राजनीति में जननेता और बाहुबली के बीच की रेखा हमेशा धुंधली रही है। गोंडा–बलरामपुर की ज़मीन से उठकर छात्र राजनीति, दंगल, राम मंदिर आंदोलन, टाडा, तिहाड़ जेल, सत्ता, टकराव और बार-बार की राजनीतिक वापसी तक—यह सफ़र सिर्फ़ एक नेता का नहीं, बल्कि ताक़त, विवाद और प्रभाव की पूरी कहानी है। चार भाइयों की मौत, बचपन की हिंसा, गंभीर आरोप, मुकदमे और फिर भी छह बार सांसद बनना—क्या बृजभूषण शरण सिंह एक मज़बूत जननेता हैं या यूपी की राजनीति का सबसे चर्चित बाहुबली? पूरा वीडियो देखें और खुद फैसला करें।

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Transcript
00:00क्या और दिश के तत्कालीन प्रधानमंतरी उसे व्यक्तिगत चठी लिख रहे हैं
00:19चठी में लिखा है प्रिय ब्रज भूशन जी हिम मत रखिये अच्छे दिन नहीं रहे तो बुरे दिन भी हमेशा नहीं रहेंगे
00:27Yeah.
00:34Mm-hm.
00:39This story utilized a lot of us.
00:494-5-9-1989
00:57तिया पार्वारिवारिक दुश्मनी उर्महेज 16 साल की उम्र में पैत्र घर का तोड़ दिया जाना
01:06इन घटनाओं ने उन्हें भीतर से जग जोर दिया
01:10कई बार उन पर हमला हुए, डर और आसुरच्छा के महौल में उन्हें पढ़ाई के लिए घर से दूर भेजा गया
01:18लेकिन हालात ने उनके भीतर एक कठोर और लड़ने वाला वेक्तित्व तयार कर दिया
01:25कॉलेज के दिनों में एक घटना ने उनकी जिन्दगी की दिशा बदल दी
01:30रास्ते में कुछ लड़कियों से छेड़ खानी हो रही थी
01:34ब्रजभूशन ने इसका विरोध किया और भिड़ गए
01:38यही घटना उन्हें छात्र राजनीती में ले आई
01:421979 में उन्होंने छात्र संग चुनाव जीता
01:46और देखते ही देखते युवाओं के बीच एक दबंग छात्र नेता के रूप में पहचान बना ली
01:52यही वादौर था जब छात्र नेता ब्रजभूशन धीरे धीरे बाहुबली नेता बनने लगे
01:581980 के दशक तक पूर्वांचल के कई जिलों में उनका नाम गूंजने लगा
02:04कुष्ती, दंगल और ताकत के अखाडों में उनकी छवी मजबूत होती गई
02:10इसी दोर में राम जन्म भूम आंदोलन तेज हुआ
02:13ब्रजभूशन साधू संतो के करीबाय और लाल क्रेश्न आडवानी की राम रत यात्रा में सक्रिय भूम का निभाई
02:22इस आंदोलन ने उन्हें हिंदू वादी राजनीती का एक जाना पहचाना चहरा बना दिया
02:271991 में उन्होंने पहली बार गोंडा से लोक सभा चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीत हासिल की
02:35लेकिन इसके बाद विवादों का सिलसिला शुरू हो गया
02:391992 में विवादे धाचा गिराने के मामले में CBI ने उन्हें आरोपी बनाया
02:461996 में टाडा के तहत उन्हें तिहार जेल भेज दिया गया
02:51मुंबई के JJ हॉस्पिटल शूट आउट केस में भी उनका नाम आया
02:56और अंदरवर्ड से जुड़ने के आरोप लगे
02:59आरोप बेहत संगीन थे लेकिन समय के साथ इन मामलों में उन्हें क्लीन चिट मिलती चली गई
03:06जेल में रहते हुए भी उनकी राजनीतिक पकड़ कम नहीं हुई
03:10उनकी पतनी केतकी देवी ने चुनाव लड़ा और बड़ी जीत दर्ज की
03:15यहीं बीजेपी को एहसास हुआ कि अगर अटल बिहारी वाश्पेई की पहली राजनीतिक कर्म भूमी बल्रामपुर सीट वापस चाहिए
03:24तो ब्रजभूशर सरर्ण सिंग ही सबसे बड़ा दाओं हैं
03:281999 में जेल से बाहर आते ही उन्होंने बल्लामपुर से चुनाव लड़ा और समाजवादी पार्टी के बाहुबली नेता रिजवान जहीर को हरा दिया
03:392004 में उन्होंने दोबारा जीत दर्ज की इसके बाद सत्ता और टकराओ दोनों बढ़े
03:45मायवती द्वाराग गोंडा का नाम बदलने के एलान के खिलाब व्रजभूशर खुल कर सामने आए
03:52आंदोलन हुआ मामला प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाश्पेई तक पहुचा और अंतता फैसला वापस लेना पड़ा
04:00या राजनीतिक जीत थी लेकिन इसके बाद बीजेपी से उनके रिष्टे बिगड़ने लगे
04:062009 में उन्होंने पार्टी छोड़ी और समाजवादी पार्टी से कैसरगन सीट जीत ली
04:13हाला कि या सफर भी लंबा नहीं रहा 2014 से पहले उन्होंने दोबारा बीजेपी में वापसी की
04:20और फिर चुनाव जीत लिया
04:221991 से 2019 तक ब्रजभूशर सरन सिंग 6 बार सांसत बने
04:28कई मुकदमे, कई विवाद लेकिन किसी में सजा नहीं
04:32कुस्ती संग के अधिक्षता, सिक्षा संस्थानों का नेटवर्क, महंगी गारियां और आकरामक बयान
04:39सब उनकी छवी का हिस्सा बनते चले गए
04:422020 में 28 साल पुराने विवादि धाचा गिराने के मामले में
04:48जब वे बरी हुए तो समर्थकों ने इसे उनकी सबसे बड़ी जीत बताया
04:53आज भी गोंडा, बल्लामपुर और कैसर गंज में उनका नाम
04:57ताकत, विवाद और राजनीती तीनों का प्रतीक है
05:01ब्रेट भूशर सरनर सिंग एक जननेता है या बाहु बली
05:05इसका फैसला अब आप पर है
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