00:00आज पूरे देश में डांक सुविधाएं जैसे चिठियां पारसल यहां तक कि फंड निवेश के लिए भारतिय डांक विफाग सबसे
00:06भरोसे मन्द माना जाता है
00:08लेकिन क्या आप जानते हैं कि गौालियर में चिठियों को डांकिये द्वारा उनके पते तक पहुँचाने की शुरूआत 1885 में
00:15हो गई थी
00:15आईए विश्व डांक दिवस पर जानते हैं गौालियर के उस एतिहासे डांक घर के बारे में जिसने अपने जीवन काल
00:21में एक सदी से ज्यादा सावन देख लिए और आज भी लोगों के लिए भरोसे का दूसरा नाम है
00:26गौालियर उस रियासत का नाम है जिसने भारत में सबसे बड़ी डांक सेवा संचालन की शुरूआत की थी
00:31डांक विभाग भले ही भारत में 1854 में शुरू हुआ लेकिन गौालियर खुद की डांक सेवा संचालन करने वाली देश
00:39की सबसे बड़ी रियासतों में से एक था
00:421885 में गौालियर में पोस्ट आफिस सीक्रिट हुआ 1886 से 1909 तक लशकर की एक बिल्डिंग में इसका संचालन हुआ
00:49था
00:50इसके बाद 1909 में सिंधियर रियासत के महराज जियाजी राव सिंधिया की देख रेक महराज बाड़ा पर एक इटाइलियन शेली
00:58की बिल्डिंग का निर्मान पूरा हुआ
00:59जिसे नूतन महल नाम दिया गया इसी बिल्डिंग में 1909 से ग्वालियर रियासत के पोस्ट आफिस का हेड आफिस बनाया
01:05गया जो आज तक इत्यास की गवाई दे रहा है
01:09वरिस्ट पत्रकार देव श्रीमाली कहते हैं कि सिंधिया रियासत नवाचार में शुरू से ही आगे रही है
01:15फिर चाहे वाई ट्रेन का संचालन हो ये जल्पोत और दूसरे मामले इसी तरह ग्वालियर में केंदरी करत डांक सेवाएं
01:221885 में शुरू हुई
01:23बिल्कुल देखी ग्वालियर रियासत जो थी सिंधिया रियासत वो शुरू से ही जो नवाचार होते थे उसमें ओमले में एडवांस
01:30रहती थी चाहे ट्रेन का मामला रहा हो चाहे और दूसरे मामले रहा हो जल्पोत रहे हो इसी तरीके से
01:37डांक सेवा जो शुरू हुई वो
01:391885 में यहां वालियर में शुरू हुई अला कि इस्थानी इस तरपन इस रियासत सुरू करती थी संचालित करती थी
01:49लेकिन अंगरेज्यों के साथ उन्होंने वाकाइदा एक संधी करके एक सम्योता करके इसको पूरे देश से बनकर पूरी दुनिया से
01:56जोड़ा 1885 में और 65 �
02:01पूरे अपनी रियासत में जो देश में सरवादिक थे अपनी रियासत की अगरम तुलना करें तो देश में सरवादिक 65
02:08थे महराज बाड़े को जहांके गुर्खी महड भी हुआ करता था सिंधिया का और उनका सेक्रेट्रियट था उससे एड़ जोइनिंगी
02:15ही इसकी सुर�
02:16सब्सक्राइब की और उसके बाद जो है एक बड़ा भब डागर बनवाया गया जो आज भी है पूरे देश में
02:22मुझे लगता कि सबसे खुल सूर्ट डागर भी है और सबसे पुराना भी है यहां साइद 1909-10 में यह
02:31सिफ्ट हुआ और उसके बाद से आज तक उसमें संचान
02:35तो डाग की सेवाओं के विस्तार में गौलियर को एक गोरव का कि गोरव के रूप में उलेख है और
02:43आज भी अच्छी बात यह है कितने सालों बाद भी जब उस समय अठारा सफिचाशी में जब सिंदिया रियासत में
02:50सुनूंती और आज जो तरह दित सिंदिया जो गौलिय
03:05के हैड ऑफिस के पोस्ट मास्टर मलखान सिंग लोधी से जब हमने बात की तो उन्होंने बताया कि गौलियर में
03:101814 में ही पोस्टल सर्विसे शुरू हो गई थी लेकिन डांक सेवाओं का विस्तार अंग्रेजों के समझोते के बाद 1885
03:18में हुआ यह भवन स्वीक्रित किया �
03:20था जो 1909 में बनकर तैयार हो गया था इसके तुरंत बाद इसी बिल्डिंग में हैड ऑफिस शिफ्ट किया गया
03:26था जो आज तक संचालित है कहा जाए तो पिछले 117 वर्षों से निरंतर इस भवन में डांक सेवाओं का
03:31संचालन किया जा रहा है वोस्ट मास्टर मलखान सिं
03:50ये डांक विभाग की चिटियां एक मातर विकल्ब था कहा जाए तो पोस्ट ऑफिस देश की रीड था ये दोगों
03:57को दिलों से जोडने का माध्यम था और अगले 100 वर्षों तक यह सिलसला इसी तरह चड़ा पोस्ट कार्ड चिटियां
04:03तार मनी ओर्डर के माध्यम से छोटी
04:19मान ये संचार मंतरी हैं और उनके परदादाओं और पुर्खों ने लिया रियासत में लियर एडांक्शेवाओं की सुरुबात किए
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05:00Thank you very much.
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