00:04ब्रज के वरक्त संद पदमश्री रमेज बाबा ने मंगलवार को आखरी सांस ली है
00:0988 साल की उमर में बाबा ने बरसाना के गहवर वन इस्थित मान मंदिर में अंतिम सांस ली
00:15उनको उमरी की वज़त से काफी कमजोरी हो गई थी पिछले कुछ वक्त से बिमार रहने लगे थे
00:19मान मंदिर परिसर में ही वो रहते थे
00:22बाबा ने अपना पूरा जीवन राधारानी की भक्ती गौसेवा और ब्रच की प्रकृतिक विरासत को बचाने के लिए समर्पित कर
00:29दिया
00:29उनके निधन की खबर मिलते ही मान मंदिर और बरसाना में अनुयाईयों और श्रधालूँ में शोक है
00:34अन्तिम संसकार कब और कहां होगा इस देकर अभी नर्ण नहीं टिया गया है
00:38रमेश बाबा का जन्म 1938 में तीर्थ राज प्रयाग में हुआ था
00:42उनके पिता विख्यात जोतिशाचारे बलदेव प्रसाथ शुक्ल और माता हमेश्वरी देवी थी
00:48बताया गया कि माता पिता ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से रामेश्वरं में पुत्र कामेश्टी यग्य कराया था
00:54इसके बाद 1938 में पोश मासक के कृष्न पक्ष की सब्तमी तिथी को दुपहर 12 बजे बाबा का जन्म हुआ
01:00बाबा की पिता ने जन्म के बाद ही उनके ललाट को देखकर कहा था कि ये बालग ग्रहस्त जीवन में
01:06नहीं जाएगा और ब्रम्यचारी रहेगा
01:08रमेच बाबा ने प्रियाग में ही शिक्षा ग्रहन की जब वो युवा थे तब से ही उनका जुकाव आध्यात्मिक्ता की
01:14तरफ था
01:15ब्रज आने की इच्छा में उन्होंने दो बार जन्म भूमी छोड़ने की कोशिश की लेकिन मा के प्यार की बज़ा
01:21से वो वापस लोट पड़े
01:22तीसरी बार वो घर छोड़कर ब्रज भूमी आये तो फिर नहीं लोटे
01:25साल 1953 में 15 साल की उम्र में वो बरसाना पहुँचे
01:30ब्रज आने के बाद रमेज बाबा राधरानी मंदिर में ब्रदंग बजाते थे
01:35धीरे धीरे उनका पूरा जीवन राधरानी की भक्ती में रम गया
01:38उन्होंने बरसाना के ब्रामान्चल परवत पर मानमंदिर आश्रम बनाया
01:42और ठाकूर मान बिहारी की सेवा शुरू की बाद में गहवर वन में मौजूद
01:47मानमंदिर उनकी साधना और सेवा का सबसे एहम केंदर बन गया
01:51रमेज बाबा की पहचान सबसे बड़े स्तर पर गौसेवा के काम से भी रही है
01:55साल 2007 में उन्होंने दो गौवंश के साथ माता जी गौशाला संचालन शुरू किया था
02:01धीरे धीरे ये गौशाला बड़े गौसेवा के इंदर में बदल गई
02:03आज बड़साना में माताजी गौशाला में करीब 65,000 गौश संरक्षन का दावा किया जाता है
02:10रमेज बाबा का जीवन केवल साधना तक सीमित नहीरा उन्होंने धार्मिकास्ता को ब्रज की प्रकृती और गौशेवा से चोड़ा
02:17पहाडियों और जंगलों में अवैत खनन के खलाब आंदोलन से लेकर यमुना शुद्धी करण और प्राचीन सरोवरों के संरक्षन तक
02:24उन्होंने लगतार अभ्यान चलाए
02:26बड़साना में उनका मंदिर आश्रम और माताजी गौशाला उनके इसी काम की पहचान बने
02:31उनके निधन के बाद अब उनके द्वारा खड़े किये गए इन सेवा और संरक्षन कारियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी
02:37भी बड़ा सवाल है
02:39फिलाल आप क्या कहना चाहेंगे रमेज बाबा के बारे में कॉमेंट सेक्शन में हमें लिकर जरूर बताएं वीडियो को लाइक
02:43करें शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल नभूलें