00:03दोस्तों बेबाग भाषा में आपका स्वागत है आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसी किताब और एक ऐसे
00:10शक्स के बारे में जिसकी पहली किताब है मेरे हिस्से की खुशी अभिशेक सिंग कुटुच जिनको मैं बहुत लंबे समय
00:19से जानती हूं लेकिन इनका कवी रूप अ
00:23अभिशेक आपका स्वागत है कवी रूप कैसे सामने आया और यह जो सो कविताएं हमारे सामने आई हैं मेरे हिस्से
00:32की इसी नाम से आप लगातार सोशल मीडिया पर भी पोस्ट करते रहें बच्चों के ऊपर जो कामकाश आप लगने
00:39समय से कर रहे हैं कैसे सोचा और यह कव
00:46कर रूप तो बच्पन से है बच्पन से बलकि कहना चाहिए कि जब बैटके पड़ाई करते थे सुमेरे शायद लेकिन
00:57हर किताब के पीछे कुछ ना कुछ शेयर या तुग बंदी कुछ ना कुछ दिखा हुआ घरता तो तब से
01:03लिखते आ रहे हैं लिखते लिखते लिखते
01:11कि शापेंगे लोगों को शेर करना है लोगों के साथ में कभी महीं लिखा भी है कि मैंति दिखता हूं
01:24खुद को सुना लेता हूं सो वह मेरा फलस्फारा है हमेशा से लेकिन पिछले कुछ समय पहले भी घर में
01:31बचों ने वाईप ने लिटरी कहा सकते हैं कि बंदू रखी �
01:35कि नहीं बहुत हो गया अब आप फैटा कीजिए और इंको फबिश्ट कीजा कुछ लोगों पेट लीस्ट को जानने को
01:43मुटा मिले कुछ
01:43inspiration करने के लिए अज करते हैं करने के लिए लोगों को इंस्पार करने के लिए फिरॉइसा तुकि जिस तरह
01:51की
02:20कोई संजीदा किसी की पोईट्री है आपको हिलाने वाली पोईट्री है
02:21इस समाज भी है कि आपके बच्चे मेरे बच्चे और वक्षे जो सच पर अपने उसके साथ करते हैं कि
02:43अधे परीवारों के साथ में काम करते आ रहे हैं
02:48हैं पड़ाई के मामले में खासतार पर माईलाओं को लेकर के तो वहां पर एक जहां सोचल मीडिया पर जातर
02:55नेगेटिव चीज़ें देखना को मिलती हैं तो कुछ पॉजिटिव चीज़ें जो कुछ भी थोड़ा वहाँ हम लोग करें क्रेडिट लेने
03:01के लिए नहीं हम लो�
03:03हम यह मैआ रही कि मुषी मुझे क्या मुझे बच्छे को कुछान में खूशिं मिलती हैं आसनु किसी को कप्रे
03:11दिला दिला शुकूल में किसी और बात भी तो उसके लिए झालने के लिए के दुन जा जना पड़ा, वो
03:29नम और वी त creeping थे प्र पहले में तयже नहीं पूदा क
03:33आपने कई अवतार लिये हैं, आपने पढ़ाई इंजिनिरिंग की की, फिर उसके बाद मार्केटिंग में गए, और फिर उसके बाद
03:45सोशल फील्ड में आप गए, और अब आप एक कवी के तौर पर अलग-अलग जगों पर जा रहे हैं,
03:52आपनी कवीताओं का पार्ट कर रहे ह
03:54हैं, मैं आपको लखनों से जानती हूँ जब से आप स्कूल में पढ़ते थे उस समय से, तो यह जो
04:00एक यात्रा है, कि पढ़ाई कुछ की, फिर कुछ किया, फिर बैंगलोर में बस गया है, आप बैंगलोर में बसे
04:07हुए हैं, और काफी सकरिये हैं, तो यह जो चेंज है, यह
04:13कैसे हैं, यह सब सारे रूप आप में इन बिल्ट थे, जैसे आपने बताया कि कभी आप बुनियादी तोर पे
04:18आप कभी थे, आप लिखना पसंद करते थे, स्कूल के किताबों में भी कॉपियों में लिखते थे, लेकिन बाकी जो
04:27आपके रोल्स चेंज हुए हुए वो, रो
04:41सारों तक काम किया, करीब तीन दश्कों तक काम किया है, अभी भी करते आ रहे हैं, थोड़ा बहुत काम,
04:46और जारतर बच्चों को पढ़ाने का, जहां सोशल मीडिया, सोशल फील्ड की बात आप कर रहे हैं, कि समाथ सेवा
04:51जिसको आप बोलते हैं, मैं उसको एक करियर कितना
05:11यह मेरा हमेशा से मानना रहा है, तो इसलिए हम लोग भी जो एक प्लैटफर्म हमारा है, जान बूच करके
05:16समस्था के नाम पर हमने उसको रेजिस्टर करके, हम लोग फॉंड्स इखटे करेंगे, यह करेंगे, उस तरह कि कुछ नहीं
05:22है, जैसे कि जहां कभी जरूरत होती है
05:26हमेशा से करते हैं, इस एक तरह से बोलते हैं, एक हिस्सा बन चुका है, तो हाँ, रोजी रोटी के
05:35सबको कुछ ना कुछ करना पड़ता है, वह बात अलग है, लेकिन अपना जो एक दाईत है, हमारा समाज के
05:40प्रति, हमारे आसफास के लोग के प्रति, सिर्फ कहने के बजा�
05:56प्रति, हमने देखा है कि कितने गरीब हट गये, गरीब ही वही रहे गई, तो मेरा वह आईडिया नहीं है,
06:01मेरा तरीका है कि हम लोग वहाँ पार जा करके, क्या जरूरत है, क्या कर सकते हैं, करके, कवी परीचे
06:08में लिखा है, बर्गत की घनी चाहों छोड़कर, खुद्ध
06:24में दिल्चस्प हैं, अलग रोस से सीरे सीरे पता चलता है, कई खंड में बटा हुआ है, तकरीबन चार पांच
06:33खंड में आपकी टोटल कवीता हैं, और पहला खंड है, आदमी और इंसान में फर्क वाली खुशी, यह खंड आपने
06:43रखा है, तो इसमें मेरे हिस्से की खु�
06:53जब मैंने अपने सोचल मीडिया प्लैटफॉर्म शुरू किया था, तो उस जमाने में मैंने इस कविता का जो आखरी अंच
07:00था, वो मैंने उसका बैंदर बना के रखा था, खाली होई था उस जमाने में, लेकिन पर जब यह हुआ
07:05किताब है, किताब का नाम मेरे हिस्से की क�
07:22क्या है, लोगों के साथ, बचेस के साथ, जो मैसूस करते हैं, हैं, जितना ही थोड़ा अहिसा नहीं को बढ़ी
07:28तोफ है, वहाँ-बढर काम करते हैं, थोड़ा बहु में, यह कउपदा है, तो उसको कविता है, शायद कुछ लोगों
07:35को
07:37मालूम होगी कि मैसूस कर पाएंगे कि क्यों क्यों इदर कुड़ेदान में पड़ी हैं चार रोटियां क्यों इदर कुड़ेदान में
07:44पड़ी हैं चार रोटियां उसको जिन्दा रखने के लिए तो सिर्फ एक ही काफी थी एक जगा भुकमरी के बात
07:50होती है एक जगा हम लो�
08:10तो यह चीज वहीं से आती है कि क्यों इदर कुड़ दाने पड़ी है चार रोटियां उसको जिंदा रखने के
08:16लिए तो सिर्फ एक ही काफी थी शिकायत नहीं है
08:19मैं कम्लेट नहीं कर रहा हूं कि वह आपके पास पैसे हैं आप खरीद सकते हैं शिकायत नहीं है मुझे
08:23तुम्हारे भरे हुए पेट से पर मेरा जिन्दा रहना यह हक है मेरा तो यह कवीदा इस वहां से शुरू
08:29होती है और फिर जो बच्चे फुट पाथ पर पड़े खेलते
08:44में लेकर उस स्कूल के रजिस्टर में शायद नाम हो मेरा पढ़ना कुछ बनना यह हक है मेरा यह उन
08:52बच्चों की तरफ से और फिर जो मजदूर लोग हमारा आपका घर बनाते हैं बिल्डिंगे बनाते हैं यह बनाया फिर
08:58वहां से कहीं और चल दिये अपना खुद का उनक
09:15मेरे बच्चों के सिर्पे मेरा हाथ कम पढ़ता है मेरे बच्चों के सिर्पे मेरा हाथ कम पढ़ता है उनका खुद
09:22का एक आंगन यह हक है मेरा और एक और बजर्ग होते हैं हम सबके घरों में बजर्ग हैं कुछ
09:30लोग एक दवाई तक नहीं खरीच सकते हैं क्योंकि दवा�
09:44काम तो सिस्टम के लिए भी एक काश दुआउं में इतना असर होता काश दुआउं में इतना असर होता न
09:52कम पढ़ते पैसे बुड़ी मा के इलाज में और उसके कफन के लिए खुश न सही खुश न सही उसे
10:01जिन्दा रखूं उस दवा की बोतल पर हक है मेरा और आखरी जो क�
10:14सब लोग को साथ में लेकर चलने वाली की कौन हो मैं कहां पैदा हुआ कौन हो मैं कहां पैदा
10:21हुआ जात मेरी क्या रंग मेरा कैसा नहीं जानता जानता और मानता हूं सिर्फ इतना कि मेरे हिस्से की खुशी
10:29पर हक है मेरा और मुझे लग रहा था कि जब यह आपके सुन रह
10:51ऐख मेश के कहते हैं हम लोगों को अचिता है में तक हम दों
10:59किसले करते हैं नहीं कि तुम हम लोगों को ऑगाथ़ीहें थे थीक है
11:10हम लोग को कोई स्वारग नहीं मिल गया ठीक है अंग्रेज चले गए तो जब चले गए तो लोग राइता
11:19के गई बिल्कि मैं कहांगो कि हम लोग की जाव में मठड़ा के चले गए वो लोग कि यह लोग
11:24तो कुछ नहीं होगा तो लेकिन आसी साल के बाद हम लोग अभी उसकी
11:40सब्सक्राइब करता हूं जहां पर पीने का पानी नहीं है
11:58टॉइलेट नहीं है और बिजली नहीं है तीन मूलबूत सुवधायं लोगों के पास नहीं है लेकिन जब पॉजिटिव चीज मैंने
12:08उन लोगों के माथे पर शिकरण नहीं देखी ए उन लोगों को हश्ते खेलते देखा है अब जब भी जाते
12:13हैं उन को वह में रोते नहीं
12:17पाते हैं हाँ बलकि हमारे अपने घरों में अगर दोस लेकिन के लिए वाइफाई चला जाए तो हम लोग सब
12:22परिशान हो जाते हैं वह ही वो लोग रहते हैं जहां पर शाम के बाद लाइट नहीं आती है तो
12:28उनको आज़त पर चुकी है उन्हें अपनी इत्नियती मान लिया ह
12:31और लोग खाना बेदोश हैं कहीं और से आयके वहां ठहरे हुए हैं तो उसके बावजूद भी मतलब कि आप
12:37से सोचें कि जहां से आए हैं उन जगों में क्या परिस्थितिया होती होंगी आज की थारीक में भी आज़ाद
12:43भारत और जो भी अन्बुक बात करते हैं तो बैसे
12:59ऐसी कवीता हैं जो लोगों ने बहुत पसंद की और खास तोर से जिस समय हम बात कर रहे हैं
13:06दोहजार चबश में उस समय नफरत ने बहुत विक्राल रूप ले लिया है आज सपास रिष्टों में पॉलिटेक्स में पॉलिटेक्स
13:14में जो नफरत है वो तो बहुत पुरानी ह
13:16बहुत बढ़ गई है हिंदु मुसल्मान आप लखनों से आते हैं मैं लखनों से आती हूं हमने बश्चमन में देखा
13:23है और जो देखा आज उसका भसमा सुर्व हमारे सामने कड़ा है इसने रिष्टों पर भी बहुत फर्ख डाला है
13:30ऐसे में जो बीड़ी आपकी कवीता है
13:33बीड़ी कवीता कब आपने लिखी और उसको पढ़के लगता नहीं है कि आपने साल पहले लिखी होगी बीड़ी कवीता मैंने
13:42लिखी थी जब मैं शायद नविया दसी में रहूंगा शायद 1990 के आसपास की बात होगी उस जमाने उनिस्टों पिचांबे
13:51या उनिस्टों न�
13:53धियुकvä की बात है वह था में कैसे एक चोटी सी बात करे लाइक बनाना और लोग कैसे कैसे तैयार
14:06बैट हैं अपने रोटी सहे
14:08के लिए उन चीजों पर उसे कैसे क्या हो जाता यह चोटी सी कविता उस समय में लिकी ती और
14:15एक चीज जैसे मैंने आप से
14:16कहा था कि मैं मानता हूँ की कविता की एक होती है तो वीच साल तीस साल पहरे लिखिया को
14:23आज मैं आज के
14:24तका!...ट परिप्रिक्ष में बदलने की कोशिश करूं कि लोग अच्छी लगें समझ में आए मैं वह नहीं करते मैं पर्फा
14:29करता हूं कि जैसी चीज थी उसको वहीं
14:32वहीं रहने दिया जाए समझ में आएगी लोगों को अच्छी बात है क्योंकि कुछ चीजें हैं जो कभी नहीं बदलती
14:36जो इस कविता में जो भी चीजें लिखी है वो चीजें भी जो तब थी वह आज भी है तो
14:42यह चोड़ी सी कविता है कविता का शीशे के बीडी एक गरी�
14:50की भीडी से उसका घर जल गया सब फुक गया आदमी दब के मर गया कुछ धर्म वाले आए कुछ
15:00नारे लगवाए कुछ को भरकाया एक और घर जलवाया अगली रात अगली रात छे घर फुक गये चार और लोग
15:10मर गये
15:12पुलिस आयी सेना आई और मैंने रिपोर्टर को भी नहीं छोड़ा कि पुलिस आई सेना आई
15:21रिपोर्टर ने बीडी सुलगाई अहवार में खाबार आई मैं खबार आई सामपरदाइक हिंसा दर जनो
15:43पड़ी खबर के तूर पर पर डिकिन है अभी बिलम्राइब है अभी की सेट अब सेट का पर चैसे का
15:56पय नहीं कि बारे में किसी के
15:59लोगों को काफी पसंद आई है मुझे सप्राइज की ऐसा क्या है लेकिन आप लोग सुनिये- खुथी-बताईये कि
16:05क्या है इस
16:19सबसे बड़ा उन सब भूखे पेटों से बड़ा जिन्हें हजम करके वह इतना बड़ा हुआ है
16:27उसका तो धंदा ही उन पेटों के सारे चलता है एक दिन के लिए शायद एक बार के लिए शायद
16:34बकासुर का पेट भर सकता है लेकिन सेट का पेट कहां भरता है
16:40रोज सवेरे गरीब भी निकलता है पेट के लिए अपने और घर में सब के पेट के लिए
16:49जब कभी पूरे पैसे नहीं मिलते वो मायूस हो जाता है फिर भी तयार रहता है अपना पेट काट कर
16:58बीवी बच्चों का पेट भरने के लिए
17:00से कंबगत वहां भी सेट बीच मत आ जाता है और सेट से पहले उसका पेट बीच मत आ जाता
17:08है और सब
17:10हजम कर जाता है उस गणरीब गरीब के बच्चों के हिस्से का और ढपार भी नहीं लेता तो अब यह
17:21वी उसी हजieben के
17:24टेक ओवर है हमारे आसपास सारी संपत्तियों का उसका एक
17:31माइक्रो एनलिसेज है कि इससे में क्या चल रहा है यह मेशा सही को जो एक समाज में एक डिवाइड
17:38रहा है ना हमेशा
17:39से तो इसे आपने इंद मुसल्मान की बात की वह एक और चीज़ की जो मैं थोड़ी सी
17:55कटर इंसान के यह आप लोग जब मैं कहता हूं कभी समय लड़ों में की चलिया आप लोग बहुत बाते
18:04कर चुके मैं आप हिंदू मुसल्मान की बात करूंगा तो लोग थोड़ा सा यह क्या हो गया अभी कहा हमारे
18:10चैनल बेहन करवा देगा यह
18:11हिंदू की मुसल्मान की बात करेगा तो मेरी मेरा नजर यह तो अलग है मेरी कविता का नाम है कटर
18:18इंसान
18:19तुम कटर हिंदू और कटर मुसल्मान
18:23मैं सिर्फ कटर इंसान
18:26तुम बोते रहो जहर के बीज
18:28तुम काटते रहो नफरत की फसल
18:30तुम बाटते रहो मजभ़ के नाम पर
18:33मैं तो हर लुकमा बाट कर खाऊंगा
18:37ये जो रोज-रोज बाद बाद पर हमें लडाते हो तुम मुझे मालूम है
18:42पर्दे की पीछे सब मिलबाट के खाते हो तुम मुझे मालूम है
18:47जिस आग को लगा कर तुम हाथ सेकते हो
18:50हाथ जले भी तो मैं वो आग बुझाओंगा
18:54खुद को कोडे मारता शरीर
18:56जलती राख और काँच पे चलता शरीर
18:59सलीब पे चड़ा हुआ वो फकीर
19:01नहीं समच सका उस मा की पीर
19:05जवान बेटे की लाश दोरा बाप
19:09नकारते रहो तुम अपने सारे पाप
19:11तुमारी आुलाद की आखों में तुम्हें आईना दिखलाऊंगा
19:17जलते मकान और जुलसी हुई दोती
19:21मुझे न तिलक नजर आता है और न टोपी
19:24देखता है तो सिर्फ खून लाल
19:26जो तुमारा कब का सफ़ेद हो चुका
19:30जो नहीं होने थे वो हाथ से देखे हैं इन आखोंने
19:34अब आखों का पानी भी खुश्क हो चुका है
19:38फिर तुरह सा पॉजिटिव करते हुए कि
19:41अभी आगी मैं क्या करने वाला हूँ कि
19:42मैं मैं उमीद का नया भीज हूँ
19:44मैं कलियुक का रख्त भीज हूँ
19:47तुम और कितने काटोगे इनसान
19:49हर खून की बून से पैदा होंगे हजारों कटर इनसान
19:53वो ढाप देंगे सारा संसार
19:56खड़ी कर देंगे एक दिवार
19:58तुम्हारे चारों और
19:59और घुटन से चीखोगे तुम
20:01ठीक वैसे ही
20:02जैसी चीखों को सुनकर
20:04तुम अट्टहास करते आए हो
20:06अब मेरी बारी है एक कटर इनसान की
20:12संख्या कितनी होगी कितने बढ़ेंगे क्योंकि तस्वीर तो दूसरी तरफ दिखाई देरी है कि कविता का अंत बड़ा पॉजिटिव है
20:22अभी तख इस रिस्पॉंस के लिए है लिए कि 10 0 grasp काफी अच्छा है लोगों ने कई तरु है
20:37कि रिष्टों को कवर किया है
20:39ने कुछ स्टास हार बी है
20:45हमोपत की चीजब है लोगों has
20:55चलो कि यह जंन से बाते करें राध बर रात बर आए चंद तो चांद की बाते करें unfre
21:14और रात बर बात करने से भी बात खतम न होगी तो अगली मुलाकात की बाते करें रात बर सो
21:19उस तरह का थ्रोड़ा सा हर तरह की चीज़ें कवर करने की कोशिश किये हैं लिखना मेरा काम है जिसको
21:25मेरे मैं मनता हूं जैसी इसकी सोच इसको समाज में आ जाए अच्छी बात है �
21:30जूते भी सलाँखों पर मुझे उसमें कोई दिकत नहीं है अपनी महबबत तुम से है ये कहने की तो बात
21:47नहीं या तुम जानो या मैं जानू दुनिया के बसकी बात नहीं हर पल तुमको चाहा है हर लमा तुमको
21:55याद किया
21:56ना ख्याल तुम्हारा हो दिल को ऐसा कोई दिन कोई रात नहीं
22:02हो पास बहुत पर दूर हो तुम
22:04बिल्कुल मेरे साए की तरह
22:07जब चाहूं तुमको देख लूपर मुम्किन अपनी मुलाकात नहीं
22:12कई बार ये जी में आता है
22:14जाहिर कर दूँ खुद को तुम पर
22:16हर बार मैं चुकार जाता है
22:19कि बसमें मेरे हालात नहीं
22:21बहुत बहुत शुक्रिया
22:23और बहुत बढ़रकबाद
22:24मेरे हिस्से की खुशी को
22:27लाने के लिए
22:28और एक अलग धंका
22:30जो कहने का तरीका है
22:32लिखने की रिवायत है
22:34उसको जिन्दा रखने के लिए
22:35चुक्रिये, बहुत बहुत दनेवाद