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कूटनीति से राजनीति तक: जानिए विदेश मंत्री एस जयशंकर के सफर की पूरी कहानी

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00:17मस्कार बेहुनेहा बातम और आप देख रहे हैं कहानी 2.0
00:20आज कहानी एक ऐसे शक्स की जिसने करीब चार दशक तक दुनिया के अलग-अलग देशों में भारत की कूट
00:27नीती को करीब से देखा और समझा है
00:29चीन से लेकर अमेरिका तक एक राजनेक के तौट पर भारत की बात दुनिया के सामने रखी है
00:35अलग-अलग देशों के साथ बदलते रिष्टों को करीब से जाना और फिर 2019 में कैसा मोड आया जब एक
00:42अधिकारी सीधे देश की राजनीती के केंदर में आ गया
00:45आखरी कैसे संभव हुआ आज कहानी दुनिया के बड़े बंचों पर भारत की आवाज रखने वाले एस जैशन करती
01:00इस ग्लोबलाइज दुनिया में हम नहीं कह सकते हैं यह आपका वेशाई यह नहीं है
01:06मेरा इतना ही माने जवाब था कि अगर आप कुछ कहना चाहते हैं तो बेशक कहिए
01:13पर फिर आप सुनने की क्रपा करें क्योंकि उसके बाद मैं भी बोलूँ का और मैं भोलूंगा जो आपने कहा
01:20उस पे भी बोलूंगा और जो आपकी स्थिती है उस पे भी मैं भोलूँगा
01:25परिमान empathy में नाहिक में पूर्म व्राइब में प्रहरीण में काई डिय।
01:30एक्षरакिशिय की मेन ध्रच्रश्ट दूर्स STOP
01:33प्रॉस्ड प्रेचर धर्टॉस्सक, च्रचौ प्रॉस्ट देखरी को
01:42भर्चौ सosity में परेजुद सेंधिड।
01:49बीकु एर की हम अटारशे छाल्मीन एलावर्बान कि अछिप गनुमन AGर की इन्पोरम की अच्पल मेंट के पॉपुलत इंक व्पानिट
02:08इंज की जिट में घराथजिक दोदीन है
02:14and supply of food grains and energy सेंट राष्ट का बड़ा बंच तुनिया के बड़े देशों की मौजूद्गी और यहां
02:22भारत की बात रखने वाले
02:24एस जैशंकर का अंदास लगा था चर्चा में शाम चेहरा, सधी हुई भाषा और मौका आने पर बिलकुल साफ जवाब
02:32यही उनकी पहचान बन चुका है
02:34विदेश मंतरी के तौर पर कई मुश्किल सवालों का सामना करते हुई उन्होंने हर बार अपना अलग अंदास दिखाया
02:41प्रधामित रहीन मोदी के साथ भारत की बात दुनिया तक पहुँचाने वाले इस चेहरे की कहानी बहत दिल्चस्प है
02:52सेयुक्तराश्ट का मंच दुनिया की निगाहें और यहां जब भारत की आवाज गुँचती है तो एक चेहरा खास तोर पर
02:59सामने आता है
03:04एक ऐसी शक्सियत जिसने दुनिया के सामने भारत की कूपनीति का अंदास बदला
03:15नाम है एस जैशंकर
03:36एस जैशंकर
03:40मुद्य की बात करते हैं बिना किसी लाग लपेट के जो सवाल से बचते नहीं सवाल पूछने वालों को उल्जाते
03:47हैं लेकिन जैशंकर की
03:48तहनी को सिर्फ उनके बयानों से समझना शायद पूरी तस्वीर देखना नहीं होगा यह उस राजने की कहनी है जिसने
03:56दशकों तक दुनिया को करीब से देखा
04:13अमेरिका को समझा चीन को समझा
04:22रूस को समझा
04:29योरोप की रैजनीती और बदलती वैश्वीच समिकर्णों को करीब से जाना और फिर जब भारत की तरफ से दुनिया के
04:36सामने बोलने का मौका आया तो सिर्फ विदेश नीती नहीं बताई भारत का नजरिया सामने रखा
04:48पूछ समझा
04:50पूस्टन्ट्राइब टूस्ट्स्टन थूप्राइब
04:52अ पर्सितंट थर्सन थैजर्ण्टर थाजर्स्ट समझा
04:55प्रस्टन से चिते शूटे को श्रोबस को अनियत टूब टूस्या
05:12in our zero-tolerance approach towards terrorism.
05:16Yesterday, a serial practitioner of terrorism
05:20misrepresented facts before this assembly.
05:25Arguments were invoked to normalize terrorism
05:28and claim immunity from its consequences.
05:32That will not stand.
05:34Our right to defend ourselves against terrorism
05:38will be exercised.
05:40Mr. President, friendship and goodwill
05:44cannot coexist with terrorism.
05:46And understandings premised on that
05:49will naturally be called into question.
05:53It is for the perpetrator of terrorism
05:56to mend its ways.
06:30I would suggest that your attention should be focused on Europe, which probably we do by some
06:40energy, which is necessary for our energy security.
06:43But I suspect looking at the figures, probably our total purchases for the month would be less than what Europe
06:50does in an afternoon.
06:52So, you might want to think about it.
06:58रूस यूक्रेन युद्ध हो, रूसी पेल का मुद्दा हो, अमेरिका के साथ भारत के रिष्टे हो, चीन के साथ स्कीमा
07:05विवाद हो, आतंकवाद का सवाल हो, या फिर पश्शिमी देशों की तरफ से भारत की नीत्लियों पर उठाएगे सवाल?
07:13चेशंकर का अंदाज लगभग एक जैसा रहता है। पहले भारत का हिट फिर दुनिया के सवाल है।
07:42मेरा इतना ही मने जवाब था कि अगर आप कुछ कहना चाते हैं तो बेशक कहिए, पर फिर आप सुनने
07:50की कृपा करें, क्योंकि उसके बाद मैं भी बोलूगा, और मैं बोलूगा जो आपने कहा उस पे भी बोलूगा, और
07:56जो आपकी स्थितिय है उस पे भी मैं बोलूगा, �
07:58तो ये वन वे नहीं होगा है।
08:28दुनिया में भारत के हितों और प्रभाव को मजबूती से स्थाविप करना।
08:37मोदी की राजनितिक नेतर तुक शमता और जैशंकर का लंबा कूपनितिक अंभव।
08:43इन दोनों के तालमिल ने भारत की विदेश नीति को एक ऐसा चेहरा दिया है जिसमें संबाद भी है, रणीती
08:50भी है और अपने हितों पर स्पोश्टता भी है।
08:54प्रदान मंतरी ने प्रेजडेंट पूतिन को फोन किया और कहा कि हम जो हैं, हम उस दिशा में जा रहे
09:01हैं और आप अपने फोच को कहें कि वहां फाइरिंग न करें।
09:06तो वहां फाइरिंग जो है, वो रूस के साइट से हो रहा था और उन्होंने उस समय फाइरिंग रोग दिया,
09:11हमारे बच्चे जो हम वहां गए, वहां से पिक अप हुए, वहां से बस में बिठा के वो उनको बहार
09:18ले आए।
09:20जैशंकर मानते हैं, कूटनिती सिर्फ मुस्कुरा कर हाथ मिलाने का नाम नहीं, कूटनिती कभी बातचीत है, कभी बातचीत के बीज
09:29खामोशी है, और कभी बहुत नपे तुले शब्दों में एक बेहत सक्त संदीश.
09:49प्रसियों साल से, डिफेंडिंग इंडियास पुजीशन, तो वो एक बहुत बड़ा उनका बैगराउंड रिखाता है, बट इनके बातचीत में लहिजे
09:58में वो भी दर्शाता है कि इंडिया की फॉरन पॉलिसी में एक डॉक्टरिन का शिफ्ट हुआ है, जो कि पहले
10:04हम न�
10:17कई बार एग्रेसिव भी हो जाता है, लेक्चर सुनने के आदी नहीं है, ये तो पब्लिक फेस है एक देश
10:24का भारत का, जो की अपने को नाच्रल राइट में अवम इस ग्लोबल स्टेज पे आ गए है।
10:47एक धावी पर हुई बातचीत ने उसकी जिन्दगी की दिशा कैसे बदल दी, दुनिया के अलग-अलग देशों में राजनईक
10:54रहते हुए उन्होंने क्या सीखा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद जिन्दगी में क्या बदला, और आखिर वो कौन
11:02सा �
11:02जिसने एक राजनईक को सीधेर राजनेती के केंद्र में ला खड़ा किया।
11:32कैसे करना था, तो मैं कहूंगा कि हमारा कमफोर्ट लेवल जो है उस विजित के बाद ज्यादा बड़ा है।
12:02तक पहुंचाने की कोशिश करता है।
12:04तक पहुंचाने की कि अव्या से राजने क्वाशने को प्रेशबस्ट का प्रेंग ठाजने की अवड़ा है।
12:12तक पहुंचान अज्या जा प्रेंग एक्षित एंड़ा टार्विस्ट में बड़ा है।
12:42सवाल कोई भी हो मंच कोई भी हो सामने वाला देश कोई भी हो जैशंकर अकसर जवाब को सिर्फ आज
12:50की घटना तक सीमित नहीं रखते
12:51वो इतिहास का संदर्व लाते हैं पुराने आक्रों की बात करते हैं अंतर राश्री कानून का हवाला देते हैं और
12:58फिर उसी संदर्व में भारत का पख्ष रखते हैं
13:07अगर मैं खुद अप विदेश नीति का पिछले सतर असी साल के ऑडिट करो तो मुझे अगर कहीं कमी दिखाई
13:16देती है यह दिखाई देती है कि हम लोग जो हैं अपने हित को सामने नहीं करते हैं कि कभी
13:21कभी हम जैसे मैंने कहा कि
13:23इतने रोजी हैं कि पहले चीन को पहले आप पहले आप पहले सेक्यूरिटी काउंसल में घुच जाईए उसके बाद मैं
13:30आऊँगा आपको कहनी कि क्या ज़रूरत थी अगर मैं भारत का प्रधान मंतरी या विदेश मंतरी होता मुझे तो अपने
13:37देश के बारे में सोचना है
13:41जैशंकर ने भारत की विदेश नीटी को सिर्फ फाइलों, बैठकों और बंद कमरों की बाच्ची तक सिमित नहीं रहने दिया
13:48उसे दुनिया के सामने एक सारवजनिक संबात का हिस्सा बनाया
13:52एक तरफ मोधी की राजनितिक त्रिष्टी और नेत्रित्व, दूसरी तरफ जैशंकर का कूट नीतिक अनुभव और संबात का अंधास
14:00इन दोनों के तालमेल में भारत की विदेश नीति की वो तस्वीर दिखाई देती है
14:05जिसमें भारत दुनिया से संबंध भी चाहता है, साज़दारी भी चाहता है
14:10लेकिन अपने राष्टे हितों को सबसे उपर रख करते हैं
14:29विदेश मंत्री के भाषनों में कूट नीति है, उनके जवाबों में रणीति है
14:33उनके शब्दों में भारत के हितों की प्राथ मिक्ता है
14:36और उनके अंदाज में एक ऐसा भारत दिखाई देता है
14:39जो दुनिया के साथ चलना जाता है
14:42लेकिन अपनी पहचान और अपने हितों के साथ
15:04ने देखे ऐसा है ये दूसरों के अंदरूनी विशह पे टिपनी करनी जो है ये कोई नहीं बात नहीं है
15:11ये लोगों की पुरानी आदत है बुरी आदत है
15:14खाली फरक ये है एक जमाना था लोग कहते थे और हम जहलते थे
15:22अब वो जमाना बंद हो गया जमाना बदल गया
15:27एस जर्शंकर की कहानी सिर्फ एक राजनई की कहानी नहीं है
15:31ये उट शक्सियत की कहानी है जिसने भारत की विदेश मीत को दुनिया के सामने एक नई आवाज दी
15:37और प्रधान मंतरी नरेंदर मोदी के नित्रितु के साथ उस आवाज को दुनिया के बड़े मंचों तक पहुँचाने में एक
15:45एहम भूमिका निभाई
15:50आज जिस शक्सियत की कहानी हम आपको सुना रहे हैं और दिखा रहे हैं वो कहानी सिर्फ एक विदेश मंतरी
15:57की नहीं है
15:57एक कहानी उस अफसर की है जिसने करीब चार दशक तक दुनिया के अलग लग देशों में भारत की कूटनीती
16:03को करीब से देखा
16:04चीन को करीक से समझा, अमेरिका के साथ रिष्टों को संभाला, फूस के साथ फारश्ट के रिष्टों को आगे बढ़ाया
16:11और फिर 2019 में एक राजनेक सीधे देश की राजिती के फ्रंट फुट पर आ गया
16:33चलने का अंदाज
16:39हाथ मिलाने का अंदाज
16:47बात करने का अंदाज और सवालों के जवाब देने का अंदाज
17:00एस चैशनकर की हर अदा में एक अलग आत्मश्वास दिखाई देता है
17:05दुनिया के बड़े नेताओं के बीच कभी मुस्कुराते हुए, कभी गंभीरता से सुनते हुए
17:10और कभी बिलकुल सीधे शब्दों में भारत की बात रखते हैं
17:17करीब चार दशक तक दुनिया को करीब से देखने वाला ये राजनैक
17:22आज भारत की विदेश नीती का एक जाना पहचाना चेहरा है
17:26और प्रधानवंतरी नरेंद्र मोदी के नित्रित्व में बदलती भारती विदेश नीती को दुनिया के सामने रखने में एस जैशंकर की
17:34भूमिका भी एहम रही है
17:38लेकिन ये अंदाज बना कैसे?
17:40एक शान्त और सधे हुए राजनैक की ये पहचान आखिर किन बड़ावों से होकर यहां तक पहुँची
17:46एक वक्त था जब विदेश नीती की बातें आम हिंदुस्तानियों के रोजमर्रा की चर्चा का हिस्सा नहीं होती थी
17:53लेकिन पिछले कुछ सालों में जैशंकर के भाष्णों और जवाबों ने विदेश नीती को आम बात्चित का हिस्सा बना दिया
18:05देखें मोधी जी और जैशंकर जी की जो जुगलबंदी है फॉरन पॉलिसी में यह एक सरे का टू ट्रैक मॉडल
18:11मन गया है हमारी फॉरन पॉलिसी का
18:13बोष्टी जी प्रवाइड करते हैं परस्नलाइज लीडर टू लीडर कैमेस्ट्री और बड़े जेश्च्यर्स और विजर परस्नल डिप्लो मिस्टी राइट इक
18:22पिक्चर में लेके लीडर टू लीडर वहां मोधी जी एक ट्रैक को चलता है उसके पैनल ले जो ट्रैक चल
18:43मिनिस्टर जैशंकर तो यह दो ट्राक सामेटर ने सी चल रहे हैं इस पॉलिसी में
18:51यही वो अंदाज है जिसने एस जैशंकर की सारवजनिक छवी को बदल दिया
18:55लेकिन सवाल यह है कि यह अंदाज आया कहा से इसका जवाब उनकी जिन्दगी के उन पड़ाओं में छिपा है
19:02जहां पड़ाई से लेकर विदेश सेवा तक हर कदम ने उनके व्यक्तित को आकार दिया
19:21नौजनवरी को नई दिल्ली में एक बच्चे का जन्मुगा
19:23सुब्रमनियम जैशंकर पिता थेक के सुब्रमनियम देश के जाने माने रणनीतिक वामलों के विशेशज्य और पूर उनकर्शा
19:32जैशंकर ने जिस घर में आखे खोली वहाँ देश की सुब्रक्षा दुनिया के राजनीति और भारत के राष्टिय हिप जैसे
19:38मुद्दों पर चर्चा होना आसामाननी बात नहीं थी
19:41यही पारिवारिक महौल आगे चलकर उनके सोचने के तरेके का हिस्सा बना
19:53लेकिन चैशंकर के सफर में एक दिल्चस्प मोड अभी पाकी था
19:57रसायन विज्ञान में पढ़ाई के बाद उन्होंने आईटी दिल्ली में केमिस्ट्री में मास्टर्स के लिए दाखिला लिया
20:03यानि रास्ता पूरी तरह विज्ञान का था लेकिन मन दुनिया की राजनीती में ज्यादा लग रहा था
20:09साल था 1973 आईटी दिल्ली में पढ़ाई के दौरान एक दिन एस जैशंकर केमपस के धावे पर पहुँशे
20:16वहां बातकीत के दौरान उन्हें पता चला कि जवाहरलाल नहरु विश्व इद्याले में दाखिले के फॉर्म अभी भी मिल रहे
20:23हैं
20:23बस यहीं से कहनी ने करवट ली जैशंकर ने जैशंकर ने जैन्यू का फॉर्म लिया और दाखिले के लिए आविदन
20:29कर दिया
20:31जैशंकर ने अपना रास्ता बदलने का फैसला कर लिया था
20:34जेन्यू में दाखिला हुआ और IIT की केमिस्ट्री से निकल कर जैशंकर पहुँच गए जेन्यू की दुनिया में
20:40यहां उन्होंने राजनीती विज्ञान की पढ़ाई शुरू की
20:44दुनिया की राजनीती, सोवियत संग, चीन, भारत और दुनिया के रिष्टे इन सब को समझने की उनकी दिलचस्पी अब पढ़ाई
20:53का हिस्सा बन चुकी थी
20:54यही वो दौर था जब रसाइन विज्ञान पढ़ने वाला एक छात्र धीरे धीरे अंतरराश्टी राजनीती को समझने लगा
21:02साल 2000 में जैशंकर को चेगन राजी में भारत का राजदूद बनाए गया
21:07यह उस लंबे सफर का एक और एहम पढ़ाव था
21:10इसके बाद 2007 से 2009 तक सिंगापूर में भारत के उच्चा युक्त रहे
21:15और फिर आया उनके करियर का बेहद महतुपूर अध्याय साल 2009
21:20जैशंकर चीन में भारत के राजदूद बने
21:23करीब चार साल उन्होंने बीजिंग में भारत की तरफ से काम किया
21:28ये वो दौर था जब भारत चीन के रिष्टों में व्यापार भी था
21:32साज़दारी की संभावनाएं भी थी और सीमा को लेकर चिंता भी
21:36चीन को करीब से देखने और समझने का ये अनुवव आगे चलकर
21:40उनकी विदेश मीति की सोच में बेहद महतुपूर रहा
21:45आप बटाईये मुझे कितनी सचाई थी इसमें ये बात तो तत्य है कि आप लॉंगेस्ट सर्विंग भारत के अमबासडर रहे
21:51चीन में लगभग साड़े-चार साल आपने बिताय थे उससे में बहुत सारी चीजें थी जो हुई थी उस्टेपल वीजा
21:58का विवाद हुआ थ
22:10था क्या सचमुच में आपने उस समय कह दिया था कि प्रीमेर को आना है पहले सेना पीछे हो जाए
22:16देखे ये पबलिक में कहना उच्छित नहीं होगा जवाब मिल गया है सब को
22:30और इसी चीन प्रवास के तौरान 2011 में जैशंकर की मुलाकात ततकालिन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई
22:38मोदी चीन के दौरे पर थे और जैशंकर वहाँ भारत की राज्टू उस वक्त शायद किसी ने नहीं सोचा होगा
22:44कि कुछ साल बाद यही राजनेक मोदी सरकार में देश के विदेश मंत्री के जिम्मदारी संभालेगा
23:11साल 2013 में जैशंकर को अमेरिका में भारत का राजदूद बनाए गया अब सामने था दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति
23:19के साथ भारत का रिष्टा और अगले ही साल भारत की राजनीती में भी बड़ा बदलाव होने वाला था
23:322014 में नरेंद मोधी प्रधान मंत्री बने और अमेरिका में भारत के राजदूद के तौर पर जैशंकर की भूमिका भी
23:38महत्तपूर्ण हो गई
23:40प्रदामिंत्री मोदी की 2014 की अमेरिका यात्रा उसके बाद 2015 में बड़ाक उबामा की भारत यात्रा इस दौर की बड़ी
23:48कूतने तिंखटनाओं में शामिल है
23:502018 में एस जैशंकर का विदेश सचिव के तोर पर कारिकाल खत्म हुआ और मई 2018 में जैशंकर ताटा संग
23:57से जुड़े ऐसा लग रहाता कि करीब 4 दशक का राजनेक सफर अब एक नए मोर पर है लेकिन अगला
24:02साल उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोर लेकर आने वाला
24:26विपर विकार, विपर विष्वार, विपर विजाय
24:54आल 2013 में देश में लोगसभा चुनाव की आहट सुनाई देने लगी थी
25:01नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर दिल्ली की राजनिती में अपनी जगा बनाने की तैयारी कर रहे थी
25:11और ठीक उसी वक्त एस जैशंकर की पोस्टिंग हो रही थी दुनिया की सबसे बड़ी ताकत माने जाने वाले देश
25:18अमेरिका में
25:20सितमबर 2013 में जैशंकर को अमेरिका में भारत का राजदूत न्यूक्त किया गया
25:25दिसंबर 2013 में उन्होंने वाशिंग्टन में जिम्मेदारी संभाली
25:28लेकिन अमेरिका पहुचते ही उनके सामने आसान माहल नहीं था
25:32भारत और अमेरिका गृष्टों में कई संबेदन शील मुद्दे थे
25:36और इसी दोर में हारती राजने दिव्यानी खोबरागडे का मामला भी सामने आया
26:06जब तक मुझे नहीं मिलता तो मैं जहां पर भी अपील कर सकते हैं
26:09मैं वहां करूँगी अपील क्योंकि मैंने कोई गलती नहीं किये तो मैं क्यों चोप रहूँ
26:13जैशंकर को भारत अमेरिका रिष्टों की इस मुश्किल स्थिती को संभालना था
26:25इस तनाव के बीच मार्च 2014 में एस जैशंकर ने अमेरिकी राष्टपती बराक अबामा के सामने भारत के राजदूद के
26:33तौर पर अपना परिचय पत्र पेश किया
26:35अब जैशंकर सेफ अमेरिका में भारत के प्रतनीती नहीं थे उन्हें कैसे रिष्टे को संभालना था जो आने वाले सालों
26:42में भारत की विदेश नीती के लिए बेहद महत्यूपूर होने वाला था
27:04फिराया साल 2014 भारत में लोकसवा चुना हुए और नरेंद्र मोधी प्रधान मंत्री बने
27:18इधर भारत में पीम नरेंद्र मोधी बन गए और उधर अमेरिका में बैठे भारत के राजदूत एस जैशंकर के सामने
27:25एक नई जिम्मेदारी आ गई
27:27प्रधान मंत्री मोधी की अमेरिका की पहली यात्रा की तैयारी
27:36प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका पहुचते हैं और जैशंकर इस पूरी यात्रा की तैयारियों में महतुपूर्ण भूमिका निभा रहे थे
27:43अमेरिका की सरकार के साथ बातचीत, भारती मूल के लोगों से जुड़ा कारिक्रम और पुर्धानमंत्री की यात्रा का पूरा कूटने
27:50तिक माहॉल
27:50एस जर्शंकर को समझना था अमेरिकी सत्ता के गलियारों को भी और भारत की नई सरकार की प्रात्मिताओं को
28:05अमेरिका जाने वाले थी, जो आपको याद होगा मैडिसें स्क्वएर गार्डन वाला विजिटी तो उस समय जो है वो बहुत
28:13बड़ी विजिट और उसकी बहुत तएरी भी करनी थी और एक नई किसम के विजिटी ती क्यूएन में जो कारिक्रम
28:23जो हुआ
28:24अभी तक ऐसा तब तक ऐसा कभी करिक्रम हुआना
28:28पब्लिक डिपलोमसी को, कम्मुनिटी डिपलोमसी को आप एक तो बड़े स्केल में कर रहे
28:34पर मुझे अभी भी याद है कि उनके ये इंस्रेक्शन थे, उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा इवेंट चाहिए
28:42जिस जो वाशिंटन तक पूरे दुनिया में सुनाई दे, कि हम एक किसम से दुनिया को मेसेज कर दे थे
28:51भले वो इवेंट न्यूँ यॉर्क में, तो इसकी जो तैयारी जो थी, इसको कैसे करना था
28:57तो मैं कहुँगा कि हमारा कमफोर्ट लेवल जो है उस विजिट के बाद ज्यादा बढ़ा
29:04इसके कुछी महीनों बाद जनवरी 2015 में बराक उबामा भारत आए
29:16उबावां गरतंतर दिवस समारों के मुख्य अतिथी बने
29:19भारत अमेरिका रिष्टों के लिहाज से ये एक महत्वपूर दोर था
29:23लेकिन जैशंकर को शायद अंदाजा भी नहीं था कि उबामा के भारत से लोटने के बाद
29:27उनकी अपनी जिंदगी में सबसे बड़ा बदलाव होने वाला है
29:37बराक उबामा की भारत यात्रा खत्म हुए सिर्फ दो दिन हुए थे
29:41दिल्ली में विदेश मंतराले के गलियारों में एक बड़ा फैसला होने जा रहा था
29:45उस वक्त विदेश सचिव थी सुजाता सिंग
29:48उन्हें विदेश मंतरी सुठमा स्वराज के कारियाले से एक मुलाकात के लिए बुलाये गया
29:52मुलाकात हुई और उन्हें बताये गया कि प्रधान मंतरी नरिंदर मोदी एस जैशंकर को विदेश सची बनाना चाहते हैं
29:59यानि जो अधिकारी कुछ महिने पहले तक अमेरिका में भारत का राज़दूत था अब उस देश के विदेश मंतराले की
30:05सबसे बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी मिलने जा रही थी
30:11इनकी परफारमस ऐती रही है कि प्राम मिनिस्टर मोदी इंप्रेस हुए होते रहे हैं
30:18पहली इनकी मुला का शहएद दो जब ग्यारा में थे हिन मोदी जी चाइना गए ते वहां हुई थी
30:23तो वहां पर यह समय चाइना में पॉस्टिट थे तो इन्होंने मोदी की विजट को एक अच्छी का शुक्सेस्फुल विजट
30:28मदद करके कंड़क करवाया था
30:31दोरा था प्राइम मिनिस्टर मोदी का पहली बार अमेरिका का भी बहुत सक्सेस्फुली जैशंगर ने कंड़क करवाया था
30:37तो वो आइटिंक मोदी जी को इंप्रिस करा इनकी सारी इबिलिटीज को देखते हैं
30:42ये कहेंगे कि मेरिट पर इंडिया की पुजीशन को रखना आगे ले जाना
30:49मोदी जी की जो विजन है उसको कनवर्ट करना इंडिया की विजन दुनिया के पटल पे रखना
30:56इन सब पर अच्छे खरे उतर रहे हैं मिनिस्टर जैशंगर
31:02और यहां कहानी में एक दिल्चस्प बात है
31:04जैशंगर उस वक्त सिर्फ एक वरिष्ट राजनेग नहीं थे
31:07वो चीन में भारत के राजदूत रह चुके थे
31:10अमेरिका में भारत का प्रतिनिधित्तु कर रहे थे
31:12और प्रधानमंत्रि मोधी से उनकी मुलाकात
31:142011 में चीन में हो चुकी थी
31:17मोधी सरकार के पास एक ऐसा अधिकारी था
31:19जिसके पास चीन का अनुहववी था
31:21अमेरिका का अनुहववी और करीब 4 दशक की
31:24विदेख्श सेवा का अनुहववी
31:2829 जिनवरी 2015 को
31:30जैशंकर की विदेश्ट सचिब के रूप में न्यूक दी हुई
32:02इस समय आख समय के साथ में सुवीट संग थे
32:07टो दुनिया में इंटर्नाशनल 05 होता है कि
32:10देश किसी के साथ जूरते हैं कभी एक दूसरे के साथ काम करते हैं
32:17कभी नहीं करते तो इसमें कोई बुराई नहीं है
32:21और यह स्वार्थ नहीं है यह किसम से मैं कोँगा � common sense
32:30इसके बाद करीब तीन साल विदेश नेती से जुड़े बड़े फैसलों और बाचीत के केंदर में जैशन कर रहे हैं।
32:37भारत-अमेरिका रिष्टे, भारत-चीन संबंद, पड़ोसी देशों के साथ रिष्टे और दुनिया के बदलते समी करन।
32:43विदेश सचीव के तौर पर उनकी भूमिका सिर्फ मंत्राले चलाने तक सीनित नहीं थी।
32:48उन्हें सरकार की विदेश नेती को दूसरे देशों तक पहुचाना था और दूसरे देशों की सोच को भारत तक लाना
32:55था।
33:03लेकिन 2018 में उनका विदेश सचीव का कारिकाल खत हुआ और मई 2018 में जैशंकर टाटा संस से जुड़ गये।
33:11करिब चार दशक की सरकारी सेवा के बाद अब वो सरकारी नौकरी से बाहर थे।
33:15ऐसा लग रहा था कि उनका राजनेक सफर एक नए पड़ाव पर पहुच चुका है।
33:19लेकिन ये कहानी अभी खत नहीं हुई थी। क्योंकि अगले ही साल एक ऐसा फैसला आने वाला था जिसने जैशंकर
33:26को भारत की राजनीति के केंद्र में ला दिया।
33:38एक दौर था जब भारत की कूटनीति को अकसर बहुत नपे तुले, बहुत सधे हुए और बेहद आपचारिक शब्दों में
33:45सुना जाता था।
33:47आज भारत वही कूटनीति कहीं जादा मुकर अंदास में करता दिखाई देता है।
34:17ला देश की कोटी कोटी नागरिकों ने इस फकीर की जोली को भर दिया।
34:25जो थे तपी निराज नहीं हुए, दोबारा आए, तो भी न हमारी नम्रता छोडेंगे, न हमारी बिबेग छोडेंगे।
34:37अगर कोई विजय हुआ है तो हिंदुस्तान विजय हुआ है
34:44नम्रता पुर्वक इस विजय को जन्ता जनार्धन के जर्णों में समर्पित करते हैं
34:59साल 2019 में हुए लोगसभा चुनाव में एक बार फिर विजय पी जीत गई
35:06नरेंद्र मोदी के नेत्रित्त में दूसरी बार सरकार बनने जा रही थे
35:22मैं नरेंद्र दामोदर्दास मोदी इश्वर की सपट लेता हूँ
35:33नई सरकार का शपट ग्रहन हो रहा था और इस लिस्ट में एक ऐसा नाम था जिसने सब को हैरान
35:39कर दिया था
35:39एस जैशंकर ना उन्होंने लोगसभा का चुनाव रड़ा था ना वो किसी राजनेतिक दल के सक्रिय नेता थे फिर भी
35:50उन्हें केंद्रिय मंत्री मंदल में जगह हुए और 30 मई 2019 को उन्होंने विदेश मंत्री के तौर पर शपत लिए
36:00जब मुझे पहले से कुछ बिलकुल पता नहीं था और जो जब मुझे बताया गया फ्रैंक्ली I would say to
36:13say it was unexpected
36:14मने शॉक नर्मली यूज इस नेगेटिव बट इस रियल सप्राइज सावट से तो मैं तो हैरान था
36:21मैं हैरान था क्यूंकि मेरे मन में ये कभी मेरे परिवार में कोई राजनीती में नहीं है
36:27मेरे खुद जो डिप्लेमसी में होते हैं वो राजनीती को अनलाइस तक है
36:33वो खुद राजनीती में भाग नहीं लेते
36:37एक करियर डिप्लोमेट जो दशकों तक दूसरे देशों के साथ भारत की बाचीत करता रहा अब खुद भारत सरकार का
36:45हिस्सा बन चुका था
36:46जुलाई 2019 में राज्य सभार के सदस्य बन गए और अब उनके सामने सिर्फ राज नई की जिम्मेदारी नहीं थी
36:53अब संसतती राजनितिक जवाब देही थी और देश के लोगों के सामने विदेश नेती को समझाने की जिम्मेदारी भी
37:02कि पर दूआ करें विशह कर..थ, आतंकवाट की इन्डेस्ट्री बन चुकी है।
37:07. कि रेकूरुट करते हैं, खुलेहां हम रेकूरुट करते हैं
37:10ट्रेव्सटेंनिंग करते हैं, फंडिंग करते हैं, वहां से लोग आते हैं, वापस जाते हैं
37:14इसका इसकी रन्नीति क्या है कि आतंकवाद के दबाव में भारत जो है बाने कॉंसरेंस टेबल नेगोशेटिंग टेबल पर आएगा
37:25तो आप मैं तो उल्टा आपसे पूछ होगा कि हमने इतने साल ये बर्दाश क्यों किया और हमें करना चाहिए
37:34थे
37:39इसके बाद जैशंकर की सार्वजनीक भूमिका और बड़ी होती गई
37:45रूस यूक्रेन युद्ध, रूसी तेल, अमेरिका के साथ रिष्टे, चीन के साथ सीमा विवाद, आतंकवाद और पश्चिमी देशों के सवाल
37:53हर मुद्धे पर जैशंकर का एक खास अंदाज दिखाए दिया
37:57सीधा सवाल, सीधा जवाब, कभी इतिहास का स्तंदर्व, कभी पुराने आक्रे और कभी भारत के राश्टी हितों की बार
38:04ऍटने का साथ मेरी का संदर्थ, साथ पर जहाई का सवाल थाब फर लूड़ रच्टी आट्रे बार प्तरावा स्यात्रा जब्स
38:15दीदा धेश है विवाद रूड़ की तर मेरी प्यादी दोड़ियों के सवाल तर स्वाल
38:37लेकिन विदेश मंत्री की भूमिका सिर्फ दुनिया के मंचों पर बोलने तक सिमित नहीं रही।
39:23लेकिन विदेश मंत्री के रूप में उनका अनुवव कई दशकों में फैल चुका था।
39:40और फिर साल दुहजार चब्वीज दुनिया तेजी से बदल रही।
39:46अमेरिका, चीन, रूस, योरोप, पश्मेशिया और ग्लोबल साउट।
39:52भारत को एक साथ कई देशों के साथ रिष्टे संभालने हैं और विदेश मंत्री के तौर पर जैशंकर लगातार इस
40:00कूटनितिक संभाद का हिस्सा है।
40:02प्रदान मंत्री के साथ जब मैं विदेश साचिफ था तबी मैं जाता था अभी कभी कभी जाने का मुका मिलता
40:09है।
40:10बाकि जो पलिटिकल लीडर्स है न वो ऐसे उसकी ऐसे बात करते हैं कि भाई आपके लीडर्र और कभी कभी
40:19प्रदान मंत्री को सीधा कहते है।
40:22कि उनके लिए तो यह बहुत माने सचमच कुछ अलगी बात है। और मुझे लगता है कि इसका ग्लोबल मेसेजिंग
40:32है कि भारत की ताकत, भारत की टालेंट, भारत की एक किसम से भारत की फुट्प्रिंट जो है अब ग्लोबल
40:43हो चुकी।
40:452026 में भी विदेश मंत्राले के रिकॉर्ड में अमेरिका, योरोप, पशिमेशिया, ग्लोबल साउथ और दूसरे एहम उक्षेत्रों से जुड़े उनके
40:54लगातार दोरे और संबाद दर्ज है।
40:57लेकिन जैशंकर की कहानी को सिर्फ तारिखों में समेटना मुश्किल है।
41:011955 में नई दिल्ली में जन्व, 1977 में विदेश जिवा और फिर 2019 में विदेश मंत्री।
41:09एक ऐसा सफर जिसमें हर पड़ाव अगले पड़ाव की तयारी करता दिखाई देता है।
41:14और इस कहानी में एक तरफ है प्रधान मंत्री नरेंद्र मोधिकार गाजनितिक नित्रतुर, तो दूसरी तरफ दश्कों के कोटनितिक समझ
41:22रखने वाले एस जैशंकर।
41:26फिलाल कहानी में साथ अभी कले बस इतना ही, मुझे दीजे इजाज़त देशों दुनिया की तमांग के बिरुक ले दिखते
41:31रहें आज तरह।

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