00:05भूक, बिमारी और सड़क हाथसों का शिकार होने वाले इन बेजुबान जानवरों का दर्द समझने वाला इनसानों की इस बस्ती
00:14में कौन है?
00:15ओडिशा की राजधानी भूबनेश्वर में इस उदासीनता के खिलाफ दो फरिष्टे खड़े हुए हैं।
00:21डॉक्टर निरंजन साहू और दुर्गा प्रसाद पाधी जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इन बेसहारा जानवरों की सेवा में छोक दी है।
00:31रिटायर्ट सरकारी पसुचिकितसक डॉक्टर निरंजन साहू पिछले 45 सालों से जानवरों का इलाज कर रहे हैं।
00:38साल 2018 में अधिकारी पत से रिटायर होने के बाद भी उनका बेजुबानों से मुख नहीं छूटा।
00:46आज वो पीपल फॉर एनिमल शेल्टर में न सर्फ मुफ्त इलाज करते हैं बलकि दवाईयों के लिए भी अपनी जेब
00:53से पैसे खर्च करते हैं।
00:55पशू चिकितसा सिर्फ एक पेशा नहीं है, यह अवलोकन, धैरे और सहन भूती पर बना एक रिश्टा है।
01:02आप तब तक जानवरों का इलाज नहीं कर सकते जब तक कि आप उनके साथ भावनात्मक रूप से जूर ना
01:08जाएं।
01:09वे बोल नहीं सकते, इसलिए हमें उनकी शारिरिक मुद्रा, वेवार और हाव भाव को देखकर उनकी समस्याओं को समझना होगा।
01:17मैंने पारिवारिक जरूरतों या स्वास्त समस्याओं को आरे आने दिये बिना खुद को इन बेजुमान जानवरों के लिए समर्पित कर
01:26दिया है।
01:27यहां तक कि जब मैं शहर से बाहर यात्रा करता हूं, तब भी मैं ऑनलाइन जुरा रहता हूं और पेराज
01:33पशुर्चिकित्सकोग का मार्ग दर्शन करता हूं कि अलग-अलग जानवरों को कून सी दवा और भोजन दिया जाना चाहिए।
01:41इस मिशन में उनके साथ ही है दुर्गा प्रसाद पाधी, जो पिछले 27 सालों से घायल जानवरों को रेस्क्यू कर
01:48रही हैं।
01:491999 के महाचकरवात में बेजुबानों की तबाही देखकर उनका दिल ऐसा पसीजा कि उन्होंने आवारा पश्यों की सेवा के लिए
01:58आजीवन कुवारा रहने का एक बड़ा फैसला ले लिया।
02:02शुरुवात में घायल कुटों को बचाते समय मुझे डर लगता था, लिकिन अब मुझे वह डर महसूस नहीं होता।
02:09सालों के अनुभब ने या सिखाया है कि किसी घायल जानवर की आकरमकता अक्सर दर्द और डर से पैदा होती
02:16है, ना कि शत्रुता से।
02:19जानवर भी प्यार की तलास करते हैं, चहाए वह कुटा हो या कोई अन जानवर, वह आम तोर पर डर
02:26के कारण हमला करते हैं, वास्तब में वह हमारे जीवन का एक अटूट हिस्सा हैं।
02:32भूबनेश्वर के बाहरी इलाके में स्थित इस शेल्टर में आज 400 से जादा मविश्यों की देखभाल हो रही है।
02:39डॉक्टर साहू और दुरगा बाबू की यह जुगल बंदी हमें याद दिलाती है कि इंसानियत की परीधी सिर्फ इंसानों तक
02:46सीमित नहीं है।
02:48ETV भारत के लिए भूबनेश्वर से भवानी शंकर दास की रिपोर्ट