00:00तुमने कभी यह सोचा है लड़कों को लड़के इतना ज़्यादा धूखा क्यों नहीं देते तुम्हारे मेल फ्रेंड्स भी होंगे है
00:08ना
00:16उनसे होता है इस यह नुपात में धूखा या धूखा देने का सब ठेका लड़कियों नहीं उठा रखा है
00:23लड़का अगर इस लायक नहीं है कि उस पर यकीन किया जाए तो जल्दी ही पकड़ लेते हो
00:28समझ में आज आती है बात क्या देते हो न क्या रहे बेकार आदमी है इससे कौन दोस्ती रखेगा
00:33क्या देते हो न?
00:35क्या देते हो कि नहीं क्या देते हो?
00:38लड़किओं से इतना भारी-बारी धोका क्यों खाना बढ़ता है?
00:41बेटा समझ में तो ओहां भी आ गया था
00:43पर वही है जब काम भरा हो आझमी
00:49अगर धोका खाने की तुम्हारी इतनी ही वृत्ति होती
00:52तो तुमने बच्चों से, बूढ़ों से, चिंपैंजी से सबसे धोखा खाया होता, नहीं खाते न, होता है कि सबजी वाला
01:01आया लूट के ले गया, कपड़े से लवाने गए उसने कपड़े उतार लिये, ऐसा होता है, नहीं होता है, तो
01:09जब non female interactions की बात आती है, तो वहां तो
01:16तुम बड़े चतोरो, सयाने हो खूब, मजा लेकि आटो वाला तुमसे दस रुपए भी फालतो ले ले, लेकिन जब opposite
01:24gender की बात आती है, तो वहां क्याते है, अरे, धोखा हो गया, चोट लग गई, ये हो गया, वो
01:30गया, कारण सीधा है, ना, धोखा कुछ नहीं हो गया,