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वीडियो जानकारी: 20.06.2026, वेदांत संहिता

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Transcript
00:00मैं बनारस गया हुआ था और वहाँ पे एक मनी करनी का घाट पे गया था और एक टेमपल पे
00:05गया था तो जब मनी करनी का घाट पे गया ऐसा लग रहा था कि सारी बाते बहुत आसानी से
00:11समझ में आ रही है बट जब मैं टेमपल गया तो मेरे मन में ये प्रशन कौन था कि इस
00:16
00:16कि मेरे जीवन में क्या उप्योगिता है
00:18क्योंकि वहाँ पे कुछ भी ऐसा नहीं था
00:20जिससे मैं कुछ सीख पाया
00:21या मुझे कुछ मिला वहाँ
00:22तो ये तो
00:24आपकी मर्जी है मत सीखिए
00:26मुझे वो दिखा ही नहीं उस जगह पे
00:28आपकी मर्जी आप मत देखिए
00:30जिने देखना है वो देख लेंगे
00:32जिने नहीं देखना हो नहीं देख रहे
00:34मंदिर किसी ने बनाया हुगा
00:36किसी उद्देश से
00:37वो उसका उद्देश है आपका क्या उद्देश है
00:40खुद को जानना
00:42आप खुद को जानने ये बैठके मंदिर के वा जा रहे है
00:47क्या रटे रटाई जवाब दे रहें, आप खुद को जनना, क्या है ऐसे ऐसे, जिसे आछारी जैसे आचारे जी
00:52एक चुनाओ शया कि आगा कि चौनो निकलता हूं
00:54देख था हूं जाता हूं खुद के बारे में और कुछ समझ में आएगा, मंदिर
00:59में आपको लोग दिखाई दिये थे जी बिलकुल तो वो लोग आप जैसे नहीं थे हां तो उनको देखके खुद
01:05के आरे में नहीं सोजवाया कुछ यह दिखा कि बस एक दौड है जिसमें सब सामिल हो रहे हैं जिसमें
01:11सब मंदिर पहुंच गए हैं हां आप भी पहुंच गए
01:36लोग क्या कर रहे हो कहीं भी जाते हो तो उमीदें बांध के जाते हो यह मिलेगा वो मिलेगा
01:44मंदिर में शिव नहीं मिले, उपनिशद में रिशी नहीं मिले, सत्र में ब्रह्म नहीं मिले, ऐसे थुड़ी होता है, जहां
01:55जा रहे हो देखो क्या हो रहा है, वहाँ पहले से ही तै करके गए हो कि ये होगा वो
02:00होगा, ये मिलेगा, वो मिलेगा, मनिकर्णिका से तो कोई निर
02:07लगता है लाश वाश जल रह ये बढ़ियां नाट कियता है भई
02:25लाल साडी में ऑफ्र। दुदुदुदुदुदुदुदुद०ु भगी उठ के या और जोड़ दो
02:46अखबार मौत की खबरों से भरे रहते हैं जिन्दगी खबर से भरे रहते हैं और यह आम जिन्दगी ही तो
02:51है जो जाकर के फिर घाट पर जल जाती है

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