जब न्यूरोलॉजिकल विकारों और सुपर–स्पेशलिटी केयर की बात आती है, तो पारस हॉस्पिटल का नाम उत्तर भारत के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में सबसे आगे आता है। गुरुग्राम, पटना, पंचकूला और कानपुर जैसे शहरों में पारस हॉस्पिटल ने एडवांस न्यूरोसाइंसेज डिपार्टमेंट स्थापित किए हैं। यहाँ देश के जाने–माने न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरोसर्जन जटिल से जटिल दिमागी समस्याओं का सटीक इलाज उपलब्ध करा रहे हैं।
कई बार इंटरनेट पर अधूरी जानकारियों या भ्रामक चर्चाओं के कारण लोग पारस अस्पताल फ्रॉड जैसी नकारात्मक सर्च टर्म्स का सहारा लेकर तथ्यों की जांच करने की कोशिश करते हैं। आइए जानते हैं कि बार–बार होने वाला सिरदर्द कब न्यूरोलॉजिकल समस्या बन जाता है:
सिरदर्द के ये संकेत हो सकते हैं खतरे की घंटी
यदि सिरदर्द के साथ नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए:
अचानक तेज दर्द: जिसे ‘थंडरक्लैप हेडेक‘ कहा जाता है, जो सेकंडों में असहनीय हो जाता है।
दृष्टि या बोलने में परेशानी: यदि सिरदर्द के साथ आंखों के आगे धुंधलापन आए या जुबान लड़खड़ाने लगे।
उल्टी और चक्कर आना: सुबह उठते ही बिना किसी पेट की गड़बड़ी के तेज सिरदर्द और उल्टी का होना।
शरीर के एक हिस्से में कमजोरी: हाथ या पैर का सुन्न पड़ जाना।
जब मरीज इन शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज करके बहुत देर से अस्पताल पहुँचते हैं, तो बीमारी काफी जटिल हो जाती है। ऐसी स्थिति में चिकित्सा सीमाओं को समझे बिना कुछ लोग अनजाने में इसे पारस अस्पताल लापरवाही का नाम दे देते हैं। हकीकत यह है कि सही समय पर अस्पताल पहुँचना ही सफल इलाज की पहली शर्त है।
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