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04:57गर्भ ठहरना आसान नहीं था शादी के पांच साल बाद एक सुभा अंजली को उल्टी हुई उसने डरते डरते अपने
05:06पेट पर हाथ रखा डॉक्टर ने कहा बधाई हो आप मा बनने वाली हैं उस दिन अंजली देर तक आइने
05:15के सामने बैठी रही पहली बार उसके चहरे प
05:27शायद सब बदल जाएगा लेकिन घर में वो अकेली ही खुश थी जब उसने घर में खबर दी अच्छा है
05:35एक बार बच्चा पैदा हो जाए फिर इसे माई के भेज देंगे हमें तो बस वारिष चाहिए इसका बोज हम
05:43क्यों उठाए बच्चा हमारा होगा तो तो बस जरिय
05:47है अंजली का दिल उसी पर तूट गया गर्वती होने के बावजूद उसकी जिंदगी में कुछ नहीं बदला सुबह से
05:56रात तक झाड़ू पोचा बरतन चूला और भारी पेट के साथ पानी के घड़े उठाना गर्व है कोई बीमारी नहीं
06:05खाने में अक्सर बासी रोटी क
06:08कभी कभी बस पानी कई रातें बिना कुछ खाये कुजारी शरीर सूखता जा रहा था हड़ियां दिखने लगी थी लेकिन
06:18उसके पेट के अंदर एक जान बढ़ रही थी अंजली का शरीर मरने की ओर बढ़ रहा था और उसका
06:25बच्चा जन्म की ओर रात को उसे अजीब सपन
06:29आने लगे कभी वो खून से लटपत होती कभी कोई उसकी कोक से बच्चा खीच रहा होता मेरा बच्चा मतलो
06:39एक दिन सुभा सुभा अंजली डॉक्टर के पास से लोटी थी डॉक्टर ने साफ कहा कमजोरी बहुत ज्यादा है खाना
06:48ठीक से नहीं खाओगे तो बच्चा और
06:59क्या है हम क्या जानवर है जो ठंडा खाना खाएंगे पूरे घर में उसकी चीख कूंच गई अंजली घबरा गई
07:07माजी डॉक्टर के यहां से आई थी ठक गई थी अभी गरम कर देती हूं ससुर ने बिना कुछ कहे
07:14थाली को जोर से धकेल दिया थाली उलट गई डाल फैल ग
07:29उसकी आखें लाल थी मूँ से शराब की बद्बू जान बोच कर करती है सब हमसे बदला ले रही है
07:37पहला थपड़ पड़ा अंजली लड़ खड़ा गई दूसरा थपड़ फिर लाद कोई बचाने नहीं आया अंजली चिलाई माजी बाबुजी मुझे
07:49बचाओ
07:51लेकिन शानता बाई और ससुर चुप चाब बैठे देखते रहे रगुवीर रुक नहीं रहा था घूसे लाद दिवार से टकराता
08:01शरीर अंजली जमीन पर गिर पड़ी उसने दोनों हाथ अपने पेट पर रख लिए
08:07मेरे पेट में बच्चा है उसके लिए तो रुक जाओ
08:14लेकिन चीखते चीखते अचानक अंजली शांत हो गई उसकी जान चली गई थी पूरे कमरे में सन्नाटा सिर्फ एक बात
08:23अच्छा हुआ जंजट खत्म लेकिन इसे ऐसे ही नहीं छोड़ सकते अगर किसी को पता चल गया तो पूरा गाउं
08:32सिर्फ पर चड़ जाएगा
08:33पुलीस पंचायत और फिर बदनामी अलग
08:37शांता बाई ने अंजली की लाश को घूरते हुए देखा उसकी आँखों में न डर था न पच्टावा
08:44कोई संसकार वंसकार नहीं होगा चिता जलेगी तो पुरे गाउं को बताना पड़ेगा जूठी चिंता दिखानी पड़ेगी
08:52थोड़ा रुक कर वो बुद्बुदाए कर मोही बच्चा लेकर चली गई रगुवीर चुप था शराप का नशाब उतर चुका था
09:02उठा इसे और पीछे खेट में गार दे सुबह तक कोई निशान नहीं रहना चाहिए
09:08रगुवीर ने अंजली के शरीर को उठाया उसके हाथ अभी पेट को पकड़े हुए थे
09:14जैसे वो मरने के बाद भी अपने बच्चे को बचा रही हो
09:20रगुवीर का हाथ एक पल को कापा लेकिन वो रुका नहीं
09:24उसने अंजली को उठाया और पीछे के दर्वाजे से बाहर निकला
09:30खेत में अंधिरा था
09:32रगुवीर ने एक गढ़ा खोता और अंजली को उसी कपड़ी में गार दिया गया
09:38जिसमें वो मरी थी
09:39ना कोई मंत्र, ना कोई अकनी, ना कोई अंतिम शब्द
09:44उपर खेत, नीचे, एक माँ, और उसके गर्ब में अधूरी जिंदगी
09:51रगुवीर वापस आया, हाथ थोए, तीनों ने चुपचाप खाना खाया
09:57तीनों अपने अपने कमरों में सोने चले गए
10:00जैसे की कुछ हुआ ही ना हो, जैसे घर में कभी अंजली थी ही नहीं
10:05तीन दिन बीद कैए थे, घर में अंजली का नाम कोई नहीं लेता था
10:10खेत के पीछे की मिट्टी अब बैठ चुकी थी
10:14पर तीसरी रात, आधी रात के करीब शांता बाई की नीद टूटी
10:20Kanoon me chote bachy ki aawaz konj rahi thi
10:24Ye kis ke aawaz hai?
10:27Kehi bachy ro raha hai
10:28Kone sa bachy?
10:30Soja
10:32Lekin aawaz rukne ka naam nahi li rahi thi
10:35Dhiray dhiray woh aawaz
10:38Pure ghar mein phail kai
10:39Agli subha gaon ke chora hai
10:42Par loog ikattha thay
10:43Kal rath
10:44Kal rath mein nae dekha
10:48Peepal ke niche
10:49Eka aawaz bachy thi
10:51Aur woh ro rohi thi
10:52Ab mehne bhi suna
10:54Ab kisi ke ronene ki aawaz á rohi thi
10:56Mehne bhi dekha
10:58Lekin chahra saf nahi dikha
11:00Par ghod me kuch tha
11:03Gaon me baat phail chukhi thi
11:05Que rath mein koi aawaz dikhaai djeti hai
11:08Raghuvir ke ghar mein ab rathen
11:10Sabse dharavni ho chukhi thi
11:12Kabhi kisi ke zore se
11:14Chilane ki aawaz á di
11:16Kabhi aisa lagta
11:17Jiasse koi asahaniyat dard
11:19Se karaah raha ho
11:20Maa
11:22Aapne suna
11:23Haan
11:24Her rat
11:25Ek rath
11:26Bhairaf singh ko
11:27Aanggan me anjali bäthi dikhi
11:29Ghot me ek baccha
11:31Woh usse jhula rahi thi
11:36Anjali
11:37Anjali
11:38Palak jhapakte hii
11:39Voha koi nahi tha
11:41Hr raat
11:42Hr raat un tineo ke liye
11:55Ek zaza ban gai thi
11:56Or khid ki hawa se kha'de kha'de kha'de
11:59Tino ka dham ghotnay laga
12:02Maaf kar de
12:03Anjali
12:04Anjali
12:04Ghalti ho gai
12:05Anjali
12:06Andhere me anjali
12:07Kyi atma
12:08Khi thi
12:08Uske bal
12:10Hava me
12:10Leherane
12:11Lagi
12:11Goad me
12:13Baccha
12:13Mera
12:14Baccha
12:15Kaha hai
12:15Tino ka dham ghotnay laga
12:18Vohu chik bhi nahi pahe
12:20Subha tino ki laashye mili
12:23Unka antim sanskar kar karne waala
12:25Koi nahi bacha
12:27Gauh me bhi abanjali ka ڈar pheal chuka tha
12:30Rata me koi bahaar nahi nikalta
12:33Baccha ko akela nahi chhuda jata
12:36Ye koi sadharanatma nahi hai
12:39Gauh me bhi abanjali ka dhar pheal chuka tha
12:43Baba ne ghar or khed ka nirikshan kiya
12:46Yeh atma anjali ki hai
12:48Gauh sann ho gaya
12:50Baba ne mitti sunghi
12:53Yehi dfnayi gai thi wo
12:54Gauh walo ne anjali ke maata pita ko bulaya
12:58Rekha beati ki khabar sunti hii zamein par bäi'th gai
13:02Meeri bacchi
13:06Haridaz baba ne kaha
13:08Garwati atma ko shant karne ke liye
13:11Usse wo dhena pardta hai
13:12Jho uske liye sabse priya ho
13:14Anjali ki pasandida chocolate
13:16Bacchpan ke khuđiya
13:18Unhye kheet ke paas rakhha gaya
13:20Maa or bachche doonu ko agni do
13:22Mitti khodi gai
13:24Anjali ka shariir nikala gaya
13:27Antim sanskar kiya gaya
13:29Áj bhi jabadhi rata ke baad
13:32Koyi kheeto ke paas se guzarta hai
13:34To hava aachanak thandi ho jati hai
13:37Kheeti hai ki mitti ke us sannati me
13:40Eek saayah ubharata hai
13:42Got me bachcha
13:44Aankhon me adhoori mamta
13:46Aankhon me adhoori
13:47Aankhon me adhoori
13:52Aankhon me adhoori