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  • 11 minutes ago
इंडियन एक्सप्रेस की एक इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट में चुनाव आयोग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जबकि चुनाव आयोग ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट को बेबुनियाद करार दे दिया है। दरअसल इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयोग के भीतर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया को लेकर दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में 14 बार लिखित आपत्ति जताई है। जबकि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने इसे सिरे से नकार दिया है। चुनाव आयोग ने SIR को लेकर चुनाव आयुक्तों में मतभेद से जुड़ी रिपोर्ट को खारिज कर दिया और कहा पिछले एक साल में लिए गए सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं, किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इसका मकसद पारदर्शिता बनाए रखना और कानूनी नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

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Transcript
00:28indian express
00:30indian express की रिपोर्ट के मुताबिक
00:32SIR को लेकर तीम में से
00:34दो चुनाव आयुक तो ने
00:3514 बार आपत्ती जताई है
00:37चुनाव आयुक सुखबीर सिंग संधु
00:40और विवेक जोशी ने
00:4110 महीने में 14 बार
00:43चुनाव आयुक के फैसलों पर
00:45आपत्ती दर्ज कराई
00:47जिसमें नए वोटर जोडने
00:49नाम हटाने और बहाल
00:51करने के फैसलों पर सवाल
00:53उठाए गए हैं साथ ही
00:55SIR के लिए बनाए गए
00:56Form 6 में बदलाव को
00:58अनधिकृत और अवैद बताया है
01:01इसके लावा वोटर डेटाबेस
01:03के दिल्ली केंद्री करण
01:04और राज्यों के अफसरों की
01:06पहुच नहीं होने पर भी
01:07चिंता जताई है
01:09इन दोनों आयुक्तों ने
01:11वोटर सॉफ्टवेर और
01:12आईटी सिस्टम को लेकर
01:13काबिनिट सचीव से शिकायत की है
01:16इंडियन एक्स्प्रिस के रिपोर्ट के बाद
01:18चुनाव आयोग ने इसे सिरे से नकार दिया
01:21चुनाव आयोग ने ऐसायान को लेकर
01:23चुनाव आयुक्तों में
01:25मदभेट से जुड़ी रिपोर्ट को
01:26खारिच कर दिया
01:28और कहा कि पिछले एक साल में लिए गए
01:30सभी फैसले सर्वसमीती से हुए हैं
01:33किसी भी संस्थान में
01:34विचार विमर्ष के दौरान
01:36अलग-अलग राय और टिपणियां आना
01:39सामान निप्रक्रिया का हिस्सा है
01:40और इसका मकसद
01:42पारदर्शिता बनाए रखना
01:44और कानूनी नियमों का पालन सुनिशित करना है
01:47ये तो चुनाओ आयोग की ओर से दी गई सफाई थी
01:51अब आपको बताते हैं कि चुनाओ आयोग में
01:53रिपोर्ट में गलत क्या कहा है
01:55तो चुनाओ आयोग के मताबिक
01:57सदस्यन निकाए के भीतर
01:59असहमती को अलग होना नहीं कहा जाता
02:02फॉर्म सिक्स में भी कभी अवैद रूप से
02:05कोई बदलाव नहीं किया गया था
02:07मदाता सूची में
02:09तेरा दशमलव तीन साथ करोड नाम
02:12हटाए जाने का दावा और आकडा भ्रामक है
02:15चुनाओ आयोग में कहा कि
02:17पश्चिम बंगाल में सभी अपीले
02:19चुनाओ आयोग की तरफ से
02:20दायर नहीं की गई थी
02:22जबकि गुवा में सौफ्ट्वेर की कमी थी
02:25मताधिकार से वंचित करने की
02:27योजना नहीं थी
02:28चुनाओ आयोग ने कहा कि
02:30केंद्री करण एक चिंता का विश्य है
02:32सिद्ध निश्कर्ष नहीं है
02:34सुप्रीम कोट ने इस कारूनी प्रश्न
02:36का पहले ही निप्टारा कर दिया है
02:39और SIR प्रक्रिया में
02:40पहले से ही सुरक्षा उपाए
02:42मौजूद है
02:43SIR एक नियमित प्रक्रिया है
02:45और ये पहली बाद नहीं हो रहा है
02:48अब सवाल ये है
02:50कि अगर किसी मुद्दे पर
02:51मुख्य चुनाव आयुक्त और दूसरे
02:54आयुक्तों के बीच की राय
02:55अलग-अलग हो तो क्या होगा
02:57जैसा कि इंडियन एक्सप्रेस ने
02:59अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है
03:01इस प्रश्न का जवाब मुख्य चुनाव
03:03आयुक्त और अन्य चुनाव
03:05आयुक्तों की न्युक्ती सेवा
03:07शर्ते और कार्यकाल से जुड़े
03:09कानून में है इस कानून
03:11का नाम Chief Election Commissioner
03:13and Other Election Commissioners Act
03:152023 है
03:17इस कानून के मुताबिक
03:19आयुक का काम जहां तक संभवो
03:21सवसमिती से किया जाना चाहिए
03:23लेकिन अगर
03:33तीन सदस्य आयोग में
03:35अगर दो चुनाव आयुक्त एक राय पर है
03:38तो C.E.C. उन से
03:39अलग राय रखते हैं
03:41तो केवल C.E.C. होने के कारण
03:43उनकी राय को अंतिम नहीं माना जा सकता
03:46फैसला बहुमत के
03:47आधार पर ही होगा
03:49जहे समझ नहीं आती
03:50क्योंकि इलेक्शन कमिशन में
03:52जो कानून है काम करने का
03:55उसके अनुसर तीनों कमिशनर्स
03:57बराबर हैं और
03:59फैसले जो हैं
04:00तीनों बैठके सर्वसमती से लेंगे
04:03या फिर वोटिंग करके लेंगे
04:05तो जो मिज़रिटी जिस तरफ होगी उदर वोट होगा
04:07तो अगर दोनों एक तरफ हैं
04:11तो इसका मतलब
04:12उनकी मरजी से फैसले हुए होंगे
04:14तो प्रेस नोट में जो यह कहा गया है
04:17कि सर्वसमती से हुए है
04:19क्योंकि आप आपती अलग से लिखके दे रहो
04:20इसका कोई मतलब नहीं है
04:22फैसला अगर हो गया
04:23तो यही माना जाएगा कि मिजोरिटी
04:25सर्वसमती से हुआ है
04:26मिशनर जो सम्विधानिक संस्ता है
04:28सम्विधानिक हस्ती है
04:30वो गर यह आरोप लगा रहा है
04:31तो उसे वहां बैठने का हकी खतम हो जाता है
04:34उसे तो सीधे राश्पती किया जाना चाहिए
04:37कि हमें जानकारी नहीं दी जा रही है
04:39हमें बिल्कुल एक
04:44ऐसे ही समझ के ट्रीट किया जा रहा है
04:46चुनावा योग को नहीं चलने देना चाहिए उनको
04:48उन्हें वहां बैठने का जरूरत क्या है फिर
04:51अगर उनको जानकारी नहीं है
04:52और सब चीज़ा उनके पास नहीं आ रही है
04:54वो हर फैसले में उनकी राए नहीं ली जा रही है
04:57क्योंकि बिना उनकी राए के फैसला हो ही नहीं सकता
05:00ये तो कानून है चुनावा योग का
05:02मुझे ये लगता है कि चुनावा योग के
05:49
05:51authority नहीं है सम्विधान CEC को विशेश सुरक्षा देता तो है लेकिन फैसला लेने में उसे कोई विशेश वीटो पावर
05:59नहीं देता तीन सदस्य आयो की विवस्था का मकसद ही सामोहिक निर्णे और संतुलन बनाए रखना है

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