00:00हो जी पहली बार है कि मैंने कंमल को ऐसे खिलते हुए देखाuen
00:07बार बार सबस्टाइक शात्रों में की कंमल जैसे रहो तो मिलाव उसका अर्थ क्या होता है
00:14तरह यह गुल घूडगाओ में कंमल तरह का है कर दो क्नासरों में कंमल की बात होती है
00:22क्योंकि ये पत्ता देख रहे हैं ये पत्ते लिख। ये सारे के सारे पानी पर तैर रहे हैं पानी के
00:30अंदर नहीं जा रहे हैं पहली बार को और दूसरी बात देखो जैसे वह पत्ता उस पे पानी की बूंदे
00:36हैं जहां पानी की बूंदे हैं भी तो ये पत्ते उन बूंदों
00:44तो न तो यह पानी में डूपते हैं, दूबा भी जाएगा जब यह पानी और ना इनके ऊपर डाल दो
00:50पानी तो भी उस पानी को नहीं सोपते हैं
00:53तो शास्त्र करते हैं ऐसे ही जीना होता है तो इसलिए कमल पवित्र माना गया है
00:59इन इट उन्टश्ट बाइट इसी दुनिया में हैं इसी संसार में हैं लेकिन फिर भी इससे असपरशित हैं
01:09और यह नहीं कि इस दुनिया में छुप के जी रहे हैं देखो कैसे खुल करके फैले हुए यह बत्ते
01:17और फूल भी कैसे खुल करके खिले हुए हैं
01:20इसी दुनिया में खुल करके खिलेंगे लेकिन फिर भी इस दुनिया तो अपने उपर चड़ नहीं जाने देंगे।
01:30कमलवत जीए। कमल होकर जीए।
01:32यहीं खिलेंगे यहीं खिलेंगे।
01:37लेकिन इस दुनिया की इधनी आउकात नहीं कि ये हमारे हृदय में प्रवेश कर जाए हृदय तो किसी और के
01:44लिए अरक्षित है
01:46जब ज्यान बढ़ता है बहुत तो बस उसे कह देते हो सत्य
01:53जब थोड़ा और निजी नाता रखना जाते हो तो उसको कोई अपना प्यारा नाम बेदेते हो राम प्रिश्न कुछ भी
02:01कहलो सत्य कहलो कि प्रिश्न कहलो
02:05रिदय में वही रहना चाहिए रिदय में जगत नहीं घुस जाना चाहिए