00:22ुदिशा के संबलपुर में एक शक्स ने ठान लिया है गोराया को सिर्फ तस्वीरों में नहीं
00:27फिर से अपने आंगन में देखना है
00:30ये कहानी है संबलपुर के सुबरत नाथ की
00:33पेशे से electronics and telecommunication engineer होने के बावजूद
00:38वो पिछले 3-4 सालों से गोराया के सिन्रक्षन में जुटे है
00:42उन्होंने सबसे पहले अपने घर से इस मुहीम की शुरुवात की
00:47लेकिन शुबरत की मुहीम सिर्फ घोसला लगाने तक सीमित नहीं है
00:51वो पक्षियों के लिए दाना और पानी का भी इंतिजाम करते हैं
00:56खास बात ये है कि घोसले वो खुद तयार करते हैं
00:59और स्थानियल लोगों को मुफ्त में बाट देते हैं
01:03लोगों को बताते हैं कि घोसला कहां लगाया जाए
01:06कैसे लगाया जाए और पक्षियों के लिए उसे सुरक्षित कैसे किया जाए
01:12अब ये मुहीम उनके घर से निकल कर बधुराजा रिजर्फ फॉरेस्ट तक पहुच कई है
01:18संबलपुर शहर के बीचो बीच मौजूद ये जंगल स्थानियल लोगों के लिए शहर का ऑक्सीजन हाउस माना जाता है
01:25और अब यही हर्याली गोरईयों के लिए भी नया आशियाना बन रही है
01:30सुबरत के साथ कई यूवा वॉलेंटियस पेडों पर सुरक्षित जगहों पर घोसले लगा रहे हैं
01:36जिसका असर भी अब दिखाई देने लगा है
01:39सुबरत के मताबिक पिछले 3-4 साल में उनके लगाए घोसलों के बाद गोरईयों के संख्या में बढ़ोतरी देखी गई
01:47है
01:47संबलपूर के राजेंद्र सतनामी हो या देवगड के चात्र तनमय कुमार बारिक
01:53सभी का मकसद एक है पक्षियों को सुरक्षित घर और पानी मोहया कराना
02:04गर्मियों में पानी की कमी से कई पच्छीयों की मौत हो जाती है
02:08वहीं बारिस के दोरान उनके घोसले भी नश्ट हो जाते हैं
02:12ऐसे में पच्छीयों के लिए सुरचित इंतजाम करना हमारी जिम्मेदारी है
02:20जिन जगहों पर कभी दो-तीन गोरायय नजर आती थी
02:49Bureo Report, ETV Bharan
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