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  • 10 minutes ago
बढ़ते कंक्रीट के जंगलों के कारण हमारे घरों और आंगनों से चहचहाने वाली गौरैया धीरे-धीरे गायब होती जा रही हैं, लेकिन ओडिशा के संबलपुर में एक शख्स ने इन्हें वापस लाने की ठान ली है. पेशे से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर सुब्रत नाथ पिछले 3-4 सालों से गौरैया के संरक्षण की एक बेहद खास मुहिम चला रहे हैं. सुब्रत खुद अपने हाथों से पक्षियों के लिए सुरक्षित घोंसले तैयार करते हैं और स्थानीय लोगों को मुफ्त में बांटते.सुब्रत की यह मुहिम अब उनके घर से निकलकर संबलपुर के 'ऑक्सीजन हाउस' यानी बुधराजा रिजर्व फॉरेस्ट तक पहुंच गई है. युवाओं और वॉलंटियर्स की मदद से पेड़ों पर घोंसले लगाए जा रहे हैं और उनके लिए दाना-पानी का इंतजाम किया जा रहा है. इस शानदार पहल से इलाके में गौरैयों की संख्या में फिर से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है.

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Transcript
00:22ुदिशा के संबलपुर में एक शक्स ने ठान लिया है गोराया को सिर्फ तस्वीरों में नहीं
00:27फिर से अपने आंगन में देखना है
00:30ये कहानी है संबलपुर के सुबरत नाथ की
00:33पेशे से electronics and telecommunication engineer होने के बावजूद
00:38वो पिछले 3-4 सालों से गोराया के सिन्रक्षन में जुटे है
00:42उन्होंने सबसे पहले अपने घर से इस मुहीम की शुरुवात की
00:47लेकिन शुबरत की मुहीम सिर्फ घोसला लगाने तक सीमित नहीं है
00:51वो पक्षियों के लिए दाना और पानी का भी इंतिजाम करते हैं
00:56खास बात ये है कि घोसले वो खुद तयार करते हैं
00:59और स्थानियल लोगों को मुफ्त में बाट देते हैं
01:03लोगों को बताते हैं कि घोसला कहां लगाया जाए
01:06कैसे लगाया जाए और पक्षियों के लिए उसे सुरक्षित कैसे किया जाए
01:12अब ये मुहीम उनके घर से निकल कर बधुराजा रिजर्फ फॉरेस्ट तक पहुच कई है
01:18संबलपुर शहर के बीचो बीच मौजूद ये जंगल स्थानियल लोगों के लिए शहर का ऑक्सीजन हाउस माना जाता है
01:25और अब यही हर्याली गोरईयों के लिए भी नया आशियाना बन रही है
01:30सुबरत के साथ कई यूवा वॉलेंटियस पेडों पर सुरक्षित जगहों पर घोसले लगा रहे हैं
01:36जिसका असर भी अब दिखाई देने लगा है
01:39सुबरत के मताबिक पिछले 3-4 साल में उनके लगाए घोसलों के बाद गोरईयों के संख्या में बढ़ोतरी देखी गई
01:47है
01:47संबलपूर के राजेंद्र सतनामी हो या देवगड के चात्र तनमय कुमार बारिक
01:53सभी का मकसद एक है पक्षियों को सुरक्षित घर और पानी मोहया कराना
02:04गर्मियों में पानी की कमी से कई पच्छीयों की मौत हो जाती है
02:08वहीं बारिस के दोरान उनके घोसले भी नश्ट हो जाते हैं
02:12ऐसे में पच्छीयों के लिए सुरचित इंतजाम करना हमारी जिम्मेदारी है
02:20जिन जगहों पर कभी दो-तीन गोरायय नजर आती थी
02:49Bureo Report, ETV Bharan
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