00:00CCA की और वीडियोज देखने के लिए सब्सक्राइब करें और बेल आइकॉन को दबाएं
00:30नेता रोज भटकाने के लिए उल्टे सीधे बयान देते हैं ना सिर्फ अपने बयान में बलकि कविताओं में उन्होंने बार
00:38बार अपनी विचारधारा और अपनी प्रतिवध्यता पक्सधर्ता के बारे में भोशनाएं की हैं कि किस तरह से आज भी बहुत
00:45है कि आया राम गय
00:59हुए बीच धारा अगम थी गुड़म गुम हुए महां मठ मठाधीश जो बने हुए हैं जो सब पर फातवा देते
01:08थे मुक्तिबोज से लेकर समशेर तक उनको यह शेर नहीं समझ में आ रहा है
01:19कि साथियों कि बहुत ही खुशी का मौका है कि हम लोगों के बीच में आज
01:29के एक बहुत ही अच्छे जन्ता के साथ अपनी पक्षधर्ता मजबूत पक्षधर्ता के साथ खड़े कवी और एक बहुत ही
01:43अच्छे आलोचक हमारे बीच में है
01:46इसके अलावा इस हॉल में मैं मतन कश्यप जी को की बात कर रहा हूं और आशुतोष जी की बात
01:57कर रहा हूं जो आलोचना पत्रिगा के संबादक दी हैं और दिल्ली विश्विध्याले में पढ़ाते हैं
02:05और लगातार ऐसे आयूजन दिल्ली में करते ही रहते हैं जो हमारी प्रगति सील और जनवादी धारा के कवियों को
02:18लोगों तक पहुँचाने का काम करें और नए लेखकों कवियों को प्रेडित करने का काम करें
02:25साथियों ये जो हमलों की आज की माफिल है इसमें बहुत बीवित प्रकार के लोग हैं वैसे समशेर पे तो
02:35बहुत सारे कारिकरम होते हैं
02:37इन्वर्सिटी कॉलेज में होते हैं जहां पर अकादमिक चर्चाये होती हैं वहां एक ही तरह के लोग होते हैं और
02:44बहुत थोडी संख्या में बैठके बहुत गम्भीर चर्चाये करते हैं यहां कुछ अगर हम इसको परिभाशित करेंगे किस तरह की
02:53बाथित हो रही है तो न �
03:06तरफ जहां बहुत ही उच अस्तर की समझ और जानकारी रखने वाले लोग हैं, वहीं फुद खेतों में खटने वाले
03:17किसान भी आ हैं, मजदूर भी हैं, मजदूरों को संगठित करने वाले संगठन करता भी हैं, किसानों के बीद संगठन
03:26बनाने वाले कारिकरता भी हैं, इसक
03:35तिक्स्त को कि मिसे बहुत लगाव रखने वाले लोग हैं और चुकि कभी गोश्टी है तो कविता कभी भी है
03:45और कभी कविता मेर उची रखने वाले लोग भी है तो बहुत बिवित प्रकार के लोगों की ये माफिल है
03:51उन सब को एक सुत्र में जोडने वाली जो चीज है वो ह
03:56है कि सभी लोग समसेज से प्यार करते हैं उनके बारे में कुछ जानना चाहते हैं और जो उनका उनकी
04:04विचार धारा थी कहीं न कहीं उसके साथ जुड़कर जो उनके सपने थे उसको साकार करने में अपने अपने तरीके
04:14से लगे हुए
04:19तो ऐसे में जाहिर है कि जो अभी हमसे पहले दो साथियों ने अपनी बात चित रखी और दोनों ने
04:33ही समशेज के उस पहलू को सामने लाने का प्रयास किया जो उनके प्रतिवधता का पहलू है
04:40उनकी विचारधारा का पहलू है जनता से उनके जुडाव का पहलू है मजदूरों किसानों के प्रतिव जो उनकी संबेदना है
04:49और जिसे वो अपनी कविता में ढालने का प्रयास करते हैं उसको सामने रखने का प्रयास किया
04:55समसेर कवियों के कवी हैं और समसेर के अंदर निश्चित तोर पे जिस कहा जाता है कि उनमें दुरूरता है
05:06या कठिनाई है उन बहुत कठिन कवी हैं
05:10कि लिश्चिता है तो ये चीजें उनके उनकी सारी कविताओं के बारे में नहीं कही जा सकती है और जैसा
05:21कि अशुतोष जी ने बताया भी कि कठिन और आसान तो खुद उनके जो आलोचक रहे हैं जिन्होंने ऐसा ऐसी
05:34घोशनाएं किये हैं फत्वे जारी किये हैं उनकी अ�
05:40लुकस के देखना चाहते थे ये नहीं कि वह क्या कहें हैं उसको समझने का प्रयास किया जाए बलकि वह
05:47क्या कहवाना चाहते थे उनसे और वैसा कहते तो कितना मजा आता इस चक्कर में उन्होंने उनको जबरदस्ति कुछ-कुछ
05:56चीजें उन पर आरोपित की और बहुत अ�
06:10रोज ही बोलते हैं इनकी गाउं में लीला शब्द ज्यादा लीला मत फैलाओ बहुत लीला कर रहे हो तो यह
06:20समझदारी इसका मतलब उनकी वोके वुलरी में जो परियाए वाची शब्दों की सीमा है जिसके चलते हो नहीं समझ पाए
06:28सम्षेर को सम्षेर कठी नहीं पर
06:42पिर भी उनमें जो उनकी कविताओं में उनके बिम्ब प्रतीक और शिल्पगत जो विशेस्ताइं हैं वो हैं और वो शमसेर
07:02की खुबसूरती है
07:05जैसे दरिया उनके हाँ कई रंगों का है अभी जो साथियों ने एक छोटा सगीत जो परियाग शुकल ने जिसका
07:13धुन बनाया
07:15कि पीले गुलाबों का एक दरिया बह रहा पीले गुलाबों का और एक जगह नीला दरिया बहता है
07:25दरिया के अलग-अलग रंग आते हैं अलग-अलग छबियां आती हैं और जैसा कि जानते ही हैं कि वो
07:32चितरकार भी थे उनकी संगीत में बहुत रुची थी
07:35और तमाम ललित कलाओं के प्रती उनका जो अगाध प्रेम था उन सारे चीजों से वो जिन्दगी की यथार्थ को
07:49देखते थे और उसके दोनों को मिला के जो चीज निकलती है वो उनकी कविताओं में दिखाई देता है
07:57तो ये ठीक बात है कि इसके लिए विद्वान अपने अपने तरीके से व्याख्याएं किये भी हैं क्योंकि समशेर पर
08:06कितनी ही थीसिस लिखे गए कितनी किताबे लिखी गए विशेशांक निकले हैं लेख लिखे गए हैं हम समझते हैं कि
08:15समशेर का जो दूसरा पहलू है उ
08:27और हमें करना चाहिए कि जो आसान कविताय हैं उनको ही संकलित कर दिया जाए तो एक नई चीज बनेगी
08:34उनका एक नया व्यक्तित तो सामने आगा जैसे यह कविता के बारे में अभी चिक्र आया गवालियर के मजदूरों पर
08:44जो गोली कांड़ा था मेरी सबसे पसंदीदा कव
08:47कविता थी जब मैं शुरुआती दिनों में कविता की तरफ बढ़ रहा था कविता के परती हमारा लगाओ बढ़ रहा
08:53था तो यहीं कविता थी जो मुझे सबसे अधा प्रभावित की यह शाम है कि आसमान खेत है पके हुए
09:01अनाज का मतलब एक जुलूस जा रहा है और जो �
09:09गोली चलाई जाती है उनके उपर और उसका इतना बढ़िया चित्र खींज देते हैं और जिसमें एक एक आंतरिक लए
09:20भी है एक व्यथा भी है और एक आक्रोश भी है इतना सब कुछ है जो कि बारह लाइन की
09:26कविता में तो यह जो मने कसावट है उनकी के सिल्प में वो कहा
09:35से आता है वो उनके कत्थ के प्रती जो बहुत ही एक पकड़ है जो एक तड़प के साथ उसको
09:45देखते हैं अब महसूस करते हैं उसके चलते वो उतने ही घनी भूत होके वो उनके उनकी कविता में शिल्प
09:53के तौर पे ट्रांस्फॉर्म होता है
09:59अभी हम लोगों ने आज साथियों ने विशेय रखा था हकीकत का अमर सपना और समशेर की कविता
10:12यह सपना कहां से आया है यह बहुत महत्वपूर्ण है वो एक विचारधारा की चट्टानी जमीन पर खड़ा होके
10:24शपना देख रहे हैं
10:26वे अपने युग के टमाम संदर्भों को बहुत गहराई से महसूस करके वो सपना देख रहे हैं
10:34और उस सपने के बारे में वो साफ साफ बताते भी हैं कि वो सपना उनका क्या है
10:40एक तो जो पहले भी साथियों ने कोट किया बहुत ही महत्वपूर्ण उनकी पंक्तियां है एक शेर है कि हकीकत
10:50को लाए तक खैयूल से बाहर मेरी मुश्किलों का जो हल पोई लाए
10:54एक दौर था और आज भी ये दौर है मौजूद है कि एक बहुत ही कड़वी सच्चाईयों का सामना हम
11:04लोग कर रहे हैं जो हकीकत है वो बहुत ही दिल दहदा देने वाली है अज क्या हो रहा है
11:11चारों तरफ देख लीजे हकीकत में हर जगह जुल्म सितम बढ़ रहा है दलितो
11:19पर अत्याचार महिलाओं पर अत्याचार मतलब यह सारे रिकॉर्ड हर साल तूट रहे हैं जुल्म और अन्याय के आत्मत्याएं बढ़
11:36रही है समाज में इतना ज्यादा बिगटन है और वो अपने आप नहीं है बलकि कोशिश सचेतन प्रयास के चलते
11:45बिगटन कारी शक्ति
11:46दुनिया समाज के तोड़ रही है और ऐसे हकीकत को तकहयुल में यानि एक खयाली दुनिया में भूलाने की कोशिसें
11:58भी हो रही है ओजा शोखा आज बहुत ज्यादा है प्रवचन देने वाले साधु भक्कर बहुत ज्यादा हो गए हैं
12:06हमारे नेता रोज भटकाने के लि�
12:13लोग वो कुछ क्रिया कर देते हैं और पूरा देश उस पे प्रतिक्रिया करने में लग जाता है अपना कोई
12:20एजेंडा नहीं है एक शेर में वो अपने सपने की बात कह देते हैं कि तकहयुल हकीकत को लाए तकहयुल
12:30से बाहर
12:30ये काम अगर हम कर देते हैं तो सचमुच मुश्किलों का हल वहां से निकलना शुरू हो सकता है
12:37तो ये एक सपना ही था समशेर का और वो सपना उनके अपने यूग से पैदा हुआ था
12:49आप याद करें कि सेकेंड वर्लवार के ठीक पहले और बात की स्थितियां क्या थी एक तरफ हिटली और जर्मनी
12:58में मुसोलिनी और हिटलर पूरी दुनिया को तवाह करने के पीछे
13:04या तो उसको हम जीत लेंगे या तवाह कर देंगे इस पर आमादा थे जिसने विश्वजुध को जन्म दिया फिर
13:13एक सोवियत संग के रूप में पहला मजदूरों की सानों का राज अस्थापित हो गया था रूस में और जिसको
13:2226 देसों की सेनाएं चारों तरफ से तवाह क
13:26करने पर लगी हुई हैं और वो उसका प्रतिरोध करते हुए खड़ा रहते हैं और यही नहीं जो हिटलर पूरे
13:33दुनिया को जीतने का सपना देखता था उसको बर्लिन के एक खाने में जाकर आत्मात्या करने पर मजबूर करती है
13:41सोवियत सेना वहां के मजदूरों और किसा
13:55चल रही थी उस यथार से गुजरते हुए कौन सा सपना देखें ये तय करना था समशेर को और उसक्रावन
14:04ने देखा और अपनी पिचारधारा को उन्होंने छिपाया भी नहीं बहुत साफ साफ मैं पिछले दिनों समशेर और समशेर पर
14:18लिखी हुई बहुत सारी रचनाओ
14:20को पढ़ रहा था मतलब इतना जादा उनको उल्जाने का काम किया है विद्वानों ने और जिनका नाम भी आया
14:28कि विजय देव
14:30नाराइशाही ही नहीं बलकि राम विलाश शर्मा तक ने उनको उल्टी सिधी उनकी ब्याख्याएं पर प्रस्तुत करके उनको मतलब
14:42उल्जाने की कोशिस की है और ऐसा साबित करने की कोशिस की गई कि जैसे उनकी सोच के बारे में
14:48बहुत स्पष्ट नहीं था जबकि ना सिर्फ अपने बयान में बलकि कविताओं में उन्होंने बार बार अपनी विचार धारा और
14:58अपनी प्रतिवधता पक्सधरता के बारे में
15:00भोशनाय की हैं और ये दूसरा सब्टक के अपने एक कवी के रूप में वक्तव में जो लिख उन्होंने कहा
15:08है उसको मैं यहां पढ़ देना चाहता हूँ अगर इजाजत हो
15:15और ये कैसे युग से पैदा हुआ युग धर्म है जिसे वो विचारधारे के रूप में स्विकार करते हैं
15:24वे कहते हैं कि इसका सीधा साधा मतलब यह हुआ अपने चारों तरफ की जिन्दगी के में दिल्चस्पी लेना
15:39उसको ठीक ठीक यानि वैग्यानिक आधार पर फिर ब्रैकेट में कहते हैं मेरे नजदी का वैग्यानिक आधार मार्क्सवाद है
15:48समझना और अनुभूती और अपने अनुभव को इसी समझ और जानकारी से सुलजा कर स्पष्ट करके पुष्ट करके अपनी कला
16:03भावना को जगाना
16:05यह आधार इस जुप के हर सच्चे और इमांदार कलाकार के लिए बेहत जरूरी है
16:13इस तरह अपनी कला चेतना को जगाना और उसकी मदद से जीवन की सच्चाई और संदर्य को अपनी कला से
16:21सजीव रूप देते जाना
16:24इसी को मैं साधना समझता हूँ
16:27कला के इस संदर्य और उससे मिलने वाले आनंद के शत्रू वे जहाँ और जिस भेष में भी होंगे
16:36जो भी होंगे परिस्थितियां, व्यक्ति या दल हर इमांदार कलाकार के शक्त्रू होंगे
16:52क्योंकि आज घोर और बढ़ती हुई अंधी प्रतिक्रिया के रहते
16:58चारों और अबाद फैले जीवन की पूरी शक्तियों और सारे सौंदरी को कलाकार मुक्त रूप से कैसे दर्सा सकेगा
17:11यहीं से उठती है सच्चे प्रगतिसील साहित्य की बहस उसकी जिम्मेदारियां
17:18मतलब इससे स्पष्ट और क्या हो सकता है
17:21इसके अलावा काल तुमसे होड है मेरी कविता है जिसमें वो स्पष्ट रूप से अपनी पतिवध्यता और अपनी विचारधारा का
17:32डिकलेरेशन करते हैं
17:34रोषना करते हैं इसके अलावा अब जब वो नया साहित पत्रिका निकाल रहे थे जो एक वामपन्ती पत्रिका थी संघठन
17:51की पत्रिका थी वे पार्टी के दफ्टर में कम्यून में रहके वो काम कर रहे थे संपाधन का काम यह
17:58भी एक तथ्थ है
18:06अब जो उनकी पर्तिबध्यता और उनकी कविताओं पर जो आरोप लगाए गए हैं
18:14जो दुनियाद बेसिर पैर है और मनगढ़ंत है उसके पचड़े में हम जाना नहीं चाहते
18:21कारण यह है कि और जबकि इस पर बहुत सारी बाते हैं और एक बहुत मज़दार बात यह है कि
18:28जब अग्ये की पत्रिका में किसी कवित्री ने
18:32इनके उपर कोई कमेंट किया, उसमें उन्हों ने एक छोटी सी लग एक नाटिका लिखी थी, पद्धिनाटिका, और वो बहुत
18:45ही मज़िदार है, बहुत ही दिल्चस प्यांग्र से भरा हुआ, लेकिन इसमें हम जाने की कोछ नहीं जा सकते हैं,
18:51समय नहीं है, कि वो पोलिमिक
18:54कविता में पॉलिमिक्स करते थे ये भी है उनके कविताओं में किस तरह से अपने बिरोधियों को जबाब दिया जाता
19:01है इसी को छाटा जाए तो एक बढ़िया एक बात्चीत का भी शेयर हो सकता हुआ
19:07कि मैं यह बताना चाहूंगा यहां बैठे हुए बहुत सारे हमारे नौजवान साथी हैं जो समाजी कामों में भी लगे
19:17हुए हैं कवितायन लिखना शुरू किये हैं मैं कैसे
19:23समसेर एकदम जनता के कभी थे एकदम मुझे उन्होंने कवाली की तरज पर एक गजल लिखी थी और वो मुझे
19:32बहुत पसंद पसंद आया है मैं उसको थोड़ा सब तुनाओ जाए इसको शेयर
19:59कि एक चीज और है उनकी कविताओं में जो जितनी भी कलात्मक्ता है
20:06उसमें शिल्क गत अनोखापन और विचित्रता भी है जो निश्चित तोर पे थोड़ा सा परिस्क्रित अगर सौंदर बोध हो तो
20:16बहुत बहुत अच्छा भी लगता है
20:18लेकिन जहां तक एक जनता के कभी से उमीद करते हैं लोग तो जहां वो शायरी करते हैं वो एकदम
20:27बेबाक और एकदम दोटूप करते हैं
20:30कि वहां कोई जटिलता नहीं होती है मज़िदार है कि अजादी के एक साल बाद यह लिख रहे हैं कि
20:39किस तरह से आज भी बहुत है कि आया राम गया राम और अब तो खुले आम होर्स ट्रेडिंग हो
20:46रहा है
20:47पूरा का पूरा विधान सभाही खरिद लिया जा रहा है तो कहते हैं कि हाए लीडर दुरंगी नकम गुम हुए
20:59बीच धारा अगम थी गुडम गुम हुए
21:04इनकलाबी हमारे नकम गुम हुए लेके साइकिल हमारी नीगम गुम हुए
21:15एक बहुत ही शांदार गुरु जी जानते ही है वरकर ठीक है ना तो वो गुरु जी के बारे में
21:24कहते हैं और मनु जी को तो आप लोग जानते ही है
21:27क्या गुरुजी मनुजी को ले आएंगे, क्या गुरुजी मनुजी को ले आएंगे, हो गए जिनको लाखो जनम गूम हुए, जिस
21:39मनुजी को गूम हुए लाखो जनम हो गया, उनको गुरुजी लाने वाले हैं, और अब तो उसको एकदम बाजापता लाने
21:47की कोशिश हो रही
21:50और ये बात अनतालिस की है साथ ये है जनता का कविता अपनी किस्मत को यो रो रहे हैं चियांग
22:01ये भी मैजदार चियांग का इसे की बात हो रही है क्योंकि उन्चास में जो है चीन आजाद हुआ था
22:07ठीक है और अनतालिस की कविता है इस पर क्यों नहीं दिमाग लगा रहे �
22:14थे सर्मा जी हमारे महां मठ मठाधीज जो बने हुए हैं जो सब पर फत्वा देते थे
22:23मुक्तिबोज से लेकर समशेर तक उनको ये शेर नहीं समझ में आ रहा है इसमें कौन सा रहस्य और कौन
22:31सा घोटाला है
22:32अपनी किस्मत को यू रो रहे हैं चियांग रह गए हम लंडूरे सनम गूंगे ये हैं समशेर शमशेरियत में सिर्फ
22:45पारीक सूत लोग देखते हैं अब जो खदर नहीं देखते हैं जो करगे पर बिना हुआ जो क्या कहते हैं
22:53दूतई और खेस नहीं देखते हैं
22:57सिर्फ उनके पास पश्मीना ही नहीं है दोनों को देखना चाहिए फिर तै करना चाहिए
23:12उसी तरह से और उतने ही मज़िदार एक और ही और भी है उनकी गदल
23:24यह है तो सातियों समय भी कम है
23:34हाँ यह है यह भी बहुत मज़दार है राह तो एक थी हम दोनों की आप कहां से आए गए
23:47हम तो लुट गए पिट गए आप तो राज महल में पाए गए
23:58जितना लाउडी स्पीकर चीखा उतना ही इस्वर दूर हुआ उतने ही दंगे फैले जितने दीन धरम फैलाए गए
24:10दीन धरम की बात कर रहे हैं और आपस में लोगों को लडा रहे हैं
24:16मूर्ती चोर मंदिर में बैठा और ग्राहक अमरीका में दान दक्षिना लाखों डॉलर गुपत दान करवाए गए
24:31तो साथियों समशेर को किसी बिद्वान की नजर से देखने की जरुवत नहीं है
24:40किसी बड़े आलोचक की आलोचना पुस्तकों से होकर गुजरना हमारी कोई मजबूरी नहीं है
24:47यह किताब है जो उनकी लिखी हुई है ऐसी ही बहुत सारी उनकी रचनाएं हैं सीधे हम लोग परत्यक सुरूप
24:55में पढ़ें और न सिर्फ पढ़ें यह तो मैं कहूंगा कि जो साथी उनकी कवितागार है ते बात बोलेगी
25:04यह कवाली गाएं और यह गाने लिख है और यह घजल गाएं दो मैंने नमोने के तर पे रखा है
25:12और भी बहुत हैं दंगों के उपर है और जितना पाखंद धोंग और जंता को लूटने की जितनी साजिशें हो
25:21रही हैं सब पर समसेर ने कलम चलाया है उनको लोगों तक ले �
25:26जाने की जरुवत है उनको पोश्टर के रूप में उनको सभाओं में गा कर बोल कर लोगों तक पहुंचाने की
25:35जरुवत है क्योंकि हमने बताया कि किस तरह से एक शेर में वो कितनी कितनी बातों को गूत के रख
25:42देते हैं जो बात हम एक घंटे में भाशन में नहीं का पाते व
25:49अपनी छोटी सी एक कविता में कह देते हैं ये समसेर की खासियत है बहुत ही कसी हुई शैली में
25:57और जंता के दर्द को इतनी गहराई से महसूस करके इतनी पीड़ा के साथ और इतनी गुसे के साथ वो
26:05लोगों के बीच रख देते हैं यही कवी का धर्म भी है और यह उसको उन
26:26इस QR कोट पर स्कैन करें और CCA के दोस्त बनें
26:49झाल झाल झाल झाल झाल
27:19झाल झाल झाल
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