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Upload date: 04/02/26

उत्तर प्रदेश के ज़िला शामली के गाँव एलम में 25 जनवरी 2026 को किसानों और मजदूरों के साहित्यकार प्रगतिशील कवि शमशेर बहादुर सिंह के अपने ही गांव एलम में 'काल, तुझसे होड है मेरी' के रूप में शमशेर बहादुर कला मंच और जन संस्कृति मंच के द्वारा विचार गोष्टी कार्यक्रम किया। जिसमें दिगम्बर ने शमशेर बहादुर सिंह के कविताओं को लेकर अपना नजरिया रखा उन्हें सुनने के लिए बहुत से नौजवानों ने हिस्सा लिया ।
CCA की रिपोर्ट।
टीम – विशाल स्टोनवाल, राशिदा अख्तर सिद्दीकी ,मौ. सावेज़ चौहान, शाकिब यामीन रंगरेज़, इकरा अय्यूब सैफ़ी

On 25 January 2026, in the village of Ailum in the district Shamli of Uttar Pradesh, a discussion program was organized by Shamsher Bahadur Kala Manch and Jan Sanskriti Manch in the form of 'Kaal, Tujhse Hod Hai Meri' by the progressive poet Shamsher Bahadur Singh, the writer of farmers and laborers, in his own village Ailum. During the seminar, Digambar presented his perspective on Shamsher Bahadur Singh's poems, and many young people attended to listen to him.
CCA Report.
Crew - Vishal Stonewall, Rashida Akhtar Siddique, Mohd. Savez Chauhan, Shakib Yameen Rangrezz, Ikra Ayub Saifi

#YouthDialogue #ProgressivePoetry #ShamsherBahadurSingh #PoetryAndResistance #PeopleLiterature #FarmersPoet #LabourVoices #CulturalMovement



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00:00CCA की और वीडियोज देखने के लिए सब्सक्राइब करें और बेल आइकॉन को दबाएं
00:30नेता रोज भटकाने के लिए उल्टे सीधे बयान देते हैं ना सिर्फ अपने बयान में बलकि कविताओं में उन्होंने बार
00:38बार अपनी विचारधारा और अपनी प्रतिवध्यता पक्सधर्ता के बारे में भोशनाएं की हैं कि किस तरह से आज भी बहुत
00:45है कि आया राम गय
00:59हुए बीच धारा अगम थी गुड़म गुम हुए महां मठ मठाधीश जो बने हुए हैं जो सब पर फातवा देते
01:08थे मुक्तिबोज से लेकर समशेर तक उनको यह शेर नहीं समझ में आ रहा है
01:19कि साथियों कि बहुत ही खुशी का मौका है कि हम लोगों के बीच में आज
01:29के एक बहुत ही अच्छे जन्ता के साथ अपनी पक्षधर्ता मजबूत पक्षधर्ता के साथ खड़े कवी और एक बहुत ही
01:43अच्छे आलोचक हमारे बीच में है
01:46इसके अलावा इस हॉल में मैं मतन कश्यप जी को की बात कर रहा हूं और आशुतोष जी की बात
01:57कर रहा हूं जो आलोचना पत्रिगा के संबादक दी हैं और दिल्ली विश्विध्याले में पढ़ाते हैं
02:05और लगातार ऐसे आयूजन दिल्ली में करते ही रहते हैं जो हमारी प्रगति सील और जनवादी धारा के कवियों को
02:18लोगों तक पहुँचाने का काम करें और नए लेखकों कवियों को प्रेडित करने का काम करें
02:25साथियों ये जो हमलों की आज की माफिल है इसमें बहुत बीवित प्रकार के लोग हैं वैसे समशेर पे तो
02:35बहुत सारे कारिकरम होते हैं
02:37इन्वर्सिटी कॉलेज में होते हैं जहां पर अकादमिक चर्चाये होती हैं वहां एक ही तरह के लोग होते हैं और
02:44बहुत थोडी संख्या में बैठके बहुत गम्भीर चर्चाये करते हैं यहां कुछ अगर हम इसको परिभाशित करेंगे किस तरह की
02:53बाथित हो रही है तो न �
03:06तरफ जहां बहुत ही उच अस्तर की समझ और जानकारी रखने वाले लोग हैं, वहीं फुद खेतों में खटने वाले
03:17किसान भी आ हैं, मजदूर भी हैं, मजदूरों को संगठित करने वाले संगठन करता भी हैं, किसानों के बीद संगठन
03:26बनाने वाले कारिकरता भी हैं, इसक
03:35तिक्स्त को कि मिसे बहुत लगाव रखने वाले लोग हैं और चुकि कभी गोश्टी है तो कविता कभी भी है
03:45और कभी कविता मेर उची रखने वाले लोग भी है तो बहुत बिवित प्रकार के लोगों की ये माफिल है
03:51उन सब को एक सुत्र में जोडने वाली जो चीज है वो ह
03:56है कि सभी लोग समसेज से प्यार करते हैं उनके बारे में कुछ जानना चाहते हैं और जो उनका उनकी
04:04विचार धारा थी कहीं न कहीं उसके साथ जुड़कर जो उनके सपने थे उसको साकार करने में अपने अपने तरीके
04:14से लगे हुए
04:19तो ऐसे में जाहिर है कि जो अभी हमसे पहले दो साथियों ने अपनी बात चित रखी और दोनों ने
04:33ही समशेज के उस पहलू को सामने लाने का प्रयास किया जो उनके प्रतिवधता का पहलू है
04:40उनकी विचारधारा का पहलू है जनता से उनके जुडाव का पहलू है मजदूरों किसानों के प्रतिव जो उनकी संबेदना है
04:49और जिसे वो अपनी कविता में ढालने का प्रयास करते हैं उसको सामने रखने का प्रयास किया
04:55समसेर कवियों के कवी हैं और समसेर के अंदर निश्चित तोर पे जिस कहा जाता है कि उनमें दुरूरता है
05:06या कठिनाई है उन बहुत कठिन कवी हैं
05:10कि लिश्चिता है तो ये चीजें उनके उनकी सारी कविताओं के बारे में नहीं कही जा सकती है और जैसा
05:21कि अशुतोष जी ने बताया भी कि कठिन और आसान तो खुद उनके जो आलोचक रहे हैं जिन्होंने ऐसा ऐसी
05:34घोशनाएं किये हैं फत्वे जारी किये हैं उनकी अ�
05:40लुकस के देखना चाहते थे ये नहीं कि वह क्या कहें हैं उसको समझने का प्रयास किया जाए बलकि वह
05:47क्या कहवाना चाहते थे उनसे और वैसा कहते तो कितना मजा आता इस चक्कर में उन्होंने उनको जबरदस्ति कुछ-कुछ
05:56चीजें उन पर आरोपित की और बहुत अ�
06:10रोज ही बोलते हैं इनकी गाउं में लीला शब्द ज्यादा लीला मत फैलाओ बहुत लीला कर रहे हो तो यह
06:20समझदारी इसका मतलब उनकी वोके वुलरी में जो परियाए वाची शब्दों की सीमा है जिसके चलते हो नहीं समझ पाए
06:28सम्षेर को सम्षेर कठी नहीं पर
06:42पिर भी उनमें जो उनकी कविताओं में उनके बिम्ब प्रतीक और शिल्पगत जो विशेस्ताइं हैं वो हैं और वो शमसेर
07:02की खुबसूरती है
07:05जैसे दरिया उनके हाँ कई रंगों का है अभी जो साथियों ने एक छोटा सगीत जो परियाग शुकल ने जिसका
07:13धुन बनाया
07:15कि पीले गुलाबों का एक दरिया बह रहा पीले गुलाबों का और एक जगह नीला दरिया बहता है
07:25दरिया के अलग-अलग रंग आते हैं अलग-अलग छबियां आती हैं और जैसा कि जानते ही हैं कि वो
07:32चितरकार भी थे उनकी संगीत में बहुत रुची थी
07:35और तमाम ललित कलाओं के प्रती उनका जो अगाध प्रेम था उन सारे चीजों से वो जिन्दगी की यथार्थ को
07:49देखते थे और उसके दोनों को मिला के जो चीज निकलती है वो उनकी कविताओं में दिखाई देता है
07:57तो ये ठीक बात है कि इसके लिए विद्वान अपने अपने तरीके से व्याख्याएं किये भी हैं क्योंकि समशेर पर
08:06कितनी ही थीसिस लिखे गए कितनी किताबे लिखी गए विशेशांक निकले हैं लेख लिखे गए हैं हम समझते हैं कि
08:15समशेर का जो दूसरा पहलू है उ
08:27और हमें करना चाहिए कि जो आसान कविताय हैं उनको ही संकलित कर दिया जाए तो एक नई चीज बनेगी
08:34उनका एक नया व्यक्तित तो सामने आगा जैसे यह कविता के बारे में अभी चिक्र आया गवालियर के मजदूरों पर
08:44जो गोली कांड़ा था मेरी सबसे पसंदीदा कव
08:47कविता थी जब मैं शुरुआती दिनों में कविता की तरफ बढ़ रहा था कविता के परती हमारा लगाओ बढ़ रहा
08:53था तो यहीं कविता थी जो मुझे सबसे अधा प्रभावित की यह शाम है कि आसमान खेत है पके हुए
09:01अनाज का मतलब एक जुलूस जा रहा है और जो �
09:09गोली चलाई जाती है उनके उपर और उसका इतना बढ़िया चित्र खींज देते हैं और जिसमें एक एक आंतरिक लए
09:20भी है एक व्यथा भी है और एक आक्रोश भी है इतना सब कुछ है जो कि बारह लाइन की
09:26कविता में तो यह जो मने कसावट है उनकी के सिल्प में वो कहा
09:35से आता है वो उनके कत्थ के प्रती जो बहुत ही एक पकड़ है जो एक तड़प के साथ उसको
09:45देखते हैं अब महसूस करते हैं उसके चलते वो उतने ही घनी भूत होके वो उनके उनकी कविता में शिल्प
09:53के तौर पे ट्रांस्फॉर्म होता है
09:59अभी हम लोगों ने आज साथियों ने विशेय रखा था हकीकत का अमर सपना और समशेर की कविता
10:12यह सपना कहां से आया है यह बहुत महत्वपूर्ण है वो एक विचारधारा की चट्टानी जमीन पर खड़ा होके
10:24शपना देख रहे हैं
10:26वे अपने युग के टमाम संदर्भों को बहुत गहराई से महसूस करके वो सपना देख रहे हैं
10:34और उस सपने के बारे में वो साफ साफ बताते भी हैं कि वो सपना उनका क्या है
10:40एक तो जो पहले भी साथियों ने कोट किया बहुत ही महत्वपूर्ण उनकी पंक्तियां है एक शेर है कि हकीकत
10:50को लाए तक खैयूल से बाहर मेरी मुश्किलों का जो हल पोई लाए
10:54एक दौर था और आज भी ये दौर है मौजूद है कि एक बहुत ही कड़वी सच्चाईयों का सामना हम
11:04लोग कर रहे हैं जो हकीकत है वो बहुत ही दिल दहदा देने वाली है अज क्या हो रहा है
11:11चारों तरफ देख लीजे हकीकत में हर जगह जुल्म सितम बढ़ रहा है दलितो
11:19पर अत्याचार महिलाओं पर अत्याचार मतलब यह सारे रिकॉर्ड हर साल तूट रहे हैं जुल्म और अन्याय के आत्मत्याएं बढ़
11:36रही है समाज में इतना ज्यादा बिगटन है और वो अपने आप नहीं है बलकि कोशिश सचेतन प्रयास के चलते
11:45बिगटन कारी शक्ति
11:46दुनिया समाज के तोड़ रही है और ऐसे हकीकत को तकहयुल में यानि एक खयाली दुनिया में भूलाने की कोशिसें
11:58भी हो रही है ओजा शोखा आज बहुत ज्यादा है प्रवचन देने वाले साधु भक्कर बहुत ज्यादा हो गए हैं
12:06हमारे नेता रोज भटकाने के लि�
12:13लोग वो कुछ क्रिया कर देते हैं और पूरा देश उस पे प्रतिक्रिया करने में लग जाता है अपना कोई
12:20एजेंडा नहीं है एक शेर में वो अपने सपने की बात कह देते हैं कि तकहयुल हकीकत को लाए तकहयुल
12:30से बाहर
12:30ये काम अगर हम कर देते हैं तो सचमुच मुश्किलों का हल वहां से निकलना शुरू हो सकता है
12:37तो ये एक सपना ही था समशेर का और वो सपना उनके अपने यूग से पैदा हुआ था
12:49आप याद करें कि सेकेंड वर्लवार के ठीक पहले और बात की स्थितियां क्या थी एक तरफ हिटली और जर्मनी
12:58में मुसोलिनी और हिटलर पूरी दुनिया को तवाह करने के पीछे
13:04या तो उसको हम जीत लेंगे या तवाह कर देंगे इस पर आमादा थे जिसने विश्वजुध को जन्म दिया फिर
13:13एक सोवियत संग के रूप में पहला मजदूरों की सानों का राज अस्थापित हो गया था रूस में और जिसको
13:2226 देसों की सेनाएं चारों तरफ से तवाह क
13:26करने पर लगी हुई हैं और वो उसका प्रतिरोध करते हुए खड़ा रहते हैं और यही नहीं जो हिटलर पूरे
13:33दुनिया को जीतने का सपना देखता था उसको बर्लिन के एक खाने में जाकर आत्मात्या करने पर मजबूर करती है
13:41सोवियत सेना वहां के मजदूरों और किसा
13:55चल रही थी उस यथार से गुजरते हुए कौन सा सपना देखें ये तय करना था समशेर को और उसक्रावन
14:04ने देखा और अपनी पिचारधारा को उन्होंने छिपाया भी नहीं बहुत साफ साफ मैं पिछले दिनों समशेर और समशेर पर
14:18लिखी हुई बहुत सारी रचनाओ
14:20को पढ़ रहा था मतलब इतना जादा उनको उल्जाने का काम किया है विद्वानों ने और जिनका नाम भी आया
14:28कि विजय देव
14:30नाराइशाही ही नहीं बलकि राम विलाश शर्मा तक ने उनको उल्टी सिधी उनकी ब्याख्याएं पर प्रस्तुत करके उनको मतलब
14:42उल्जाने की कोशिस की है और ऐसा साबित करने की कोशिस की गई कि जैसे उनकी सोच के बारे में
14:48बहुत स्पष्ट नहीं था जबकि ना सिर्फ अपने बयान में बलकि कविताओं में उन्होंने बार बार अपनी विचार धारा और
14:58अपनी प्रतिवधता पक्सधरता के बारे में
15:00भोशनाय की हैं और ये दूसरा सब्टक के अपने एक कवी के रूप में वक्तव में जो लिख उन्होंने कहा
15:08है उसको मैं यहां पढ़ देना चाहता हूँ अगर इजाजत हो
15:15और ये कैसे युग से पैदा हुआ युग धर्म है जिसे वो विचारधारे के रूप में स्विकार करते हैं
15:24वे कहते हैं कि इसका सीधा साधा मतलब यह हुआ अपने चारों तरफ की जिन्दगी के में दिल्चस्पी लेना
15:39उसको ठीक ठीक यानि वैग्यानिक आधार पर फिर ब्रैकेट में कहते हैं मेरे नजदी का वैग्यानिक आधार मार्क्सवाद है
15:48समझना और अनुभूती और अपने अनुभव को इसी समझ और जानकारी से सुलजा कर स्पष्ट करके पुष्ट करके अपनी कला
16:03भावना को जगाना
16:05यह आधार इस जुप के हर सच्चे और इमांदार कलाकार के लिए बेहत जरूरी है
16:13इस तरह अपनी कला चेतना को जगाना और उसकी मदद से जीवन की सच्चाई और संदर्य को अपनी कला से
16:21सजीव रूप देते जाना
16:24इसी को मैं साधना समझता हूँ
16:27कला के इस संदर्य और उससे मिलने वाले आनंद के शत्रू वे जहाँ और जिस भेष में भी होंगे
16:36जो भी होंगे परिस्थितियां, व्यक्ति या दल हर इमांदार कलाकार के शक्त्रू होंगे
16:52क्योंकि आज घोर और बढ़ती हुई अंधी प्रतिक्रिया के रहते
16:58चारों और अबाद फैले जीवन की पूरी शक्तियों और सारे सौंदरी को कलाकार मुक्त रूप से कैसे दर्सा सकेगा
17:11यहीं से उठती है सच्चे प्रगतिसील साहित्य की बहस उसकी जिम्मेदारियां
17:18मतलब इससे स्पष्ट और क्या हो सकता है
17:21इसके अलावा काल तुमसे होड है मेरी कविता है जिसमें वो स्पष्ट रूप से अपनी पतिवध्यता और अपनी विचारधारा का
17:32डिकलेरेशन करते हैं
17:34रोषना करते हैं इसके अलावा अब जब वो नया साहित पत्रिका निकाल रहे थे जो एक वामपन्ती पत्रिका थी संघठन
17:51की पत्रिका थी वे पार्टी के दफ्टर में कम्यून में रहके वो काम कर रहे थे संपाधन का काम यह
17:58भी एक तथ्थ है
18:06अब जो उनकी पर्तिबध्यता और उनकी कविताओं पर जो आरोप लगाए गए हैं
18:14जो दुनियाद बेसिर पैर है और मनगढ़ंत है उसके पचड़े में हम जाना नहीं चाहते
18:21कारण यह है कि और जबकि इस पर बहुत सारी बाते हैं और एक बहुत मज़दार बात यह है कि
18:28जब अग्ये की पत्रिका में किसी कवित्री ने
18:32इनके उपर कोई कमेंट किया, उसमें उन्हों ने एक छोटी सी लग एक नाटिका लिखी थी, पद्धिनाटिका, और वो बहुत
18:45ही मज़िदार है, बहुत ही दिल्चस प्यांग्र से भरा हुआ, लेकिन इसमें हम जाने की कोछ नहीं जा सकते हैं,
18:51समय नहीं है, कि वो पोलिमिक
18:54कविता में पॉलिमिक्स करते थे ये भी है उनके कविताओं में किस तरह से अपने बिरोधियों को जबाब दिया जाता
19:01है इसी को छाटा जाए तो एक बढ़िया एक बात्चीत का भी शेयर हो सकता हुआ
19:07कि मैं यह बताना चाहूंगा यहां बैठे हुए बहुत सारे हमारे नौजवान साथी हैं जो समाजी कामों में भी लगे
19:17हुए हैं कवितायन लिखना शुरू किये हैं मैं कैसे
19:23समसेर एकदम जनता के कभी थे एकदम मुझे उन्होंने कवाली की तरज पर एक गजल लिखी थी और वो मुझे
19:32बहुत पसंद पसंद आया है मैं उसको थोड़ा सब तुनाओ जाए इसको शेयर
19:59कि एक चीज और है उनकी कविताओं में जो जितनी भी कलात्मक्ता है
20:06उसमें शिल्क गत अनोखापन और विचित्रता भी है जो निश्चित तोर पे थोड़ा सा परिस्क्रित अगर सौंदर बोध हो तो
20:16बहुत बहुत अच्छा भी लगता है
20:18लेकिन जहां तक एक जनता के कभी से उमीद करते हैं लोग तो जहां वो शायरी करते हैं वो एकदम
20:27बेबाक और एकदम दोटूप करते हैं
20:30कि वहां कोई जटिलता नहीं होती है मज़िदार है कि अजादी के एक साल बाद यह लिख रहे हैं कि
20:39किस तरह से आज भी बहुत है कि आया राम गया राम और अब तो खुले आम होर्स ट्रेडिंग हो
20:46रहा है
20:47पूरा का पूरा विधान सभाही खरिद लिया जा रहा है तो कहते हैं कि हाए लीडर दुरंगी नकम गुम हुए
20:59बीच धारा अगम थी गुडम गुम हुए
21:04इनकलाबी हमारे नकम गुम हुए लेके साइकिल हमारी नीगम गुम हुए
21:15एक बहुत ही शांदार गुरु जी जानते ही है वरकर ठीक है ना तो वो गुरु जी के बारे में
21:24कहते हैं और मनु जी को तो आप लोग जानते ही है
21:27क्या गुरुजी मनुजी को ले आएंगे, क्या गुरुजी मनुजी को ले आएंगे, हो गए जिनको लाखो जनम गूम हुए, जिस
21:39मनुजी को गूम हुए लाखो जनम हो गया, उनको गुरुजी लाने वाले हैं, और अब तो उसको एकदम बाजापता लाने
21:47की कोशिश हो रही
21:50और ये बात अनतालिस की है साथ ये है जनता का कविता अपनी किस्मत को यो रो रहे हैं चियांग
22:01ये भी मैजदार चियांग का इसे की बात हो रही है क्योंकि उन्चास में जो है चीन आजाद हुआ था
22:07ठीक है और अनतालिस की कविता है इस पर क्यों नहीं दिमाग लगा रहे �
22:14थे सर्मा जी हमारे महां मठ मठाधीज जो बने हुए हैं जो सब पर फत्वा देते थे
22:23मुक्तिबोज से लेकर समशेर तक उनको ये शेर नहीं समझ में आ रहा है इसमें कौन सा रहस्य और कौन
22:31सा घोटाला है
22:32अपनी किस्मत को यू रो रहे हैं चियांग रह गए हम लंडूरे सनम गूंगे ये हैं समशेर शमशेरियत में सिर्फ
22:45पारीक सूत लोग देखते हैं अब जो खदर नहीं देखते हैं जो करगे पर बिना हुआ जो क्या कहते हैं
22:53दूतई और खेस नहीं देखते हैं
22:57सिर्फ उनके पास पश्मीना ही नहीं है दोनों को देखना चाहिए फिर तै करना चाहिए
23:12उसी तरह से और उतने ही मज़िदार एक और ही और भी है उनकी गदल
23:24यह है तो सातियों समय भी कम है
23:34हाँ यह है यह भी बहुत मज़दार है राह तो एक थी हम दोनों की आप कहां से आए गए
23:47हम तो लुट गए पिट गए आप तो राज महल में पाए गए
23:58जितना लाउडी स्पीकर चीखा उतना ही इस्वर दूर हुआ उतने ही दंगे फैले जितने दीन धरम फैलाए गए
24:10दीन धरम की बात कर रहे हैं और आपस में लोगों को लडा रहे हैं
24:16मूर्ती चोर मंदिर में बैठा और ग्राहक अमरीका में दान दक्षिना लाखों डॉलर गुपत दान करवाए गए
24:31तो साथियों समशेर को किसी बिद्वान की नजर से देखने की जरुवत नहीं है
24:40किसी बड़े आलोचक की आलोचना पुस्तकों से होकर गुजरना हमारी कोई मजबूरी नहीं है
24:47यह किताब है जो उनकी लिखी हुई है ऐसी ही बहुत सारी उनकी रचनाएं हैं सीधे हम लोग परत्यक सुरूप
24:55में पढ़ें और न सिर्फ पढ़ें यह तो मैं कहूंगा कि जो साथी उनकी कवितागार है ते बात बोलेगी
25:04यह कवाली गाएं और यह गाने लिख है और यह घजल गाएं दो मैंने नमोने के तर पे रखा है
25:12और भी बहुत हैं दंगों के उपर है और जितना पाखंद धोंग और जंता को लूटने की जितनी साजिशें हो
25:21रही हैं सब पर समसेर ने कलम चलाया है उनको लोगों तक ले �
25:26जाने की जरुवत है उनको पोश्टर के रूप में उनको सभाओं में गा कर बोल कर लोगों तक पहुंचाने की
25:35जरुवत है क्योंकि हमने बताया कि किस तरह से एक शेर में वो कितनी कितनी बातों को गूत के रख
25:42देते हैं जो बात हम एक घंटे में भाशन में नहीं का पाते व
25:49अपनी छोटी सी एक कविता में कह देते हैं ये समसेर की खासियत है बहुत ही कसी हुई शैली में
25:57और जंता के दर्द को इतनी गहराई से महसूस करके इतनी पीड़ा के साथ और इतनी गुसे के साथ वो
26:05लोगों के बीच रख देते हैं यही कवी का धर्म भी है और यह उसको उन
26:26इस QR कोट पर स्कैन करें और CCA के दोस्त बनें
26:49झाल झाल झाल झाल झाल
27:19झाल झाल झाल
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