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  • 17 minutes ago
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया. 'द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स' थीम पर आयोजित इस खास सम्मेलन में पीएम मोदी ने कार्बन उत्सर्जन  और रिन्यूएबल एनर्जी को लेकर दुनिया को कड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से प्रकृति के मामले में दुनिया का मार्गदर्शन करता रहा है, लेकिन कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी अक्सर विकासशील देशों पर गलत तरीके से डाल दी जाती है.सम्मेलन में पीएम मोदी ने भारत के नॉन फॉसिल एनर्जी और रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों पर भी जोर दिया. इस कार्यक्रम में 17 देशों के जजों और न्यायिक प्रतिनिधियों के अलावा केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और NGT चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव समेत कई गणमान्य हस्तियां शामिल हुईं. जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण से जुड़ी भावी चुनौतियों को लेकर पीएम मोदी के पूरे संबोधन को सुनने के लिए वीडियो को अंत तक जरूर देखें.

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Transcript
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00:29The days ago, Bharat has a great belief in its own their commitment to its own and their experiences of
00:50the Madam.
00:52foreign
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00:55and now the climate challenges are also given to the climate challenges.
01:01They have been given the carbon emissions that this is the responsibility of the country.
01:34in the wrong way.
01:38भारत की तुलना में 6 गुना ज्यादा प्रति व्यक्ति कार्बन एमिशन हो रहा है
01:47प्रधान मंत्री मोधी ने नौन फॉसिल एनर्जी को लेकर भी अपनी बात रखी
01:52इस सेक्टन में प्राइबेट प्लेयर्स को भी लाने का रास्ता बनाया गया है
01:59इन कोशिसों की वज़े से आज भारत की नौन फॉसिल एनर्जी केपिसिटी करीब करीब चार गुना बढ़ गई है
02:12प्रधान मंत्री की माने तो सरकार का मुख्यधान रेन्यूएल एनर्जी पर रहा है
02:17और इसने पर्यवरण संरक्षन में बड़ा योगदान दिया है
02:2119 और 20 सितंबर को हो रहे इस सम्मेलन में भारत के मुख्य न्यायधीश जस्टिस सूर्यकांग, कींद्रिय पर्यवरण मंत्री भुपेंद्र
02:29यादव, अटॉनी जनरल आर वेंकटर मणी और NGT चेर्मेन जस्टिस प्रकाश श्रिवास्तव समीत कई वरिष्ट हस्तियां शा
02:51जूदा और भविष्य की चुनोतियों पर चर्चा होगी। इसका उद्देश पर्यवरण और जलवाईू चुनोतियों से निपटने के लिए एक साजह
02:58रोड मैप तयार करना और अलग-अलग संस्थानों के बीच सहयोग मजबूत करना है।
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