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  • 17 minutes ago
आदिवासी थीम पर बांस की छाल से बनी प्रतिमा रायपुर के डगनिया में स्थापित की गई है. संवाददाता रितेश तंबोली की रिपोर्ट

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00:05આपने मुंबई के लाल बाग्चा राजा का नाम तो खुब सुना होगा, लेकिन आज हम आपको दर्शन कराने जा रहे
00:11हैं, राइपुर में विराजे कभीले के राजा के, आदिवासे लुक में तैयार बप्पा के इस प्रतिमा को कभीले के राजा
00:18की तर्श पर बनाया गय
00:19है, इतना ही नहीं, उनकी सवारी मुशक भी आदिवासी रंग में है, आसपास खड़े चार मुशक, महराज तीर धनुष पकड़े
00:28हुए तैनात नजर आ रहे हैं, खास बात ये है कि उस पूरी प्रतिमा को मिट्टी से नहीं, बलकि बास
00:35की छाल से बनाया गया है
00:49इसाप से बनाया गया है, और यहां जैसे देखे तो गनेश भूवाल अलगी है, मतलब दूसरे जगह जो देखे सब
00:57मिट्टी का है और कुछ-कुछ अलग अलग डिजाइन में है, लेकिन ये इसका अलग ही गेटप में बनाया गया
01:02इसको
01:19ना सेफ प्रतिमा बलकि डगनिया इस्थित इस पूरे पंडाल को आदिवासी थीम पर तयार किया गया है
01:26इससे भी ज्यादा सरहनी ये पहलिया है कि इसे विश्व बास दिवस जो 18 सितंबर को मनाया जाता है उसे
01:33डेडिकेट किया गया है
02:11जहां बास से प्रतिमाय बना कर प्रकृती और परियावरन का ध्यान रखा गया है
02:16वहीं आदिवा सिल्लुक देकर 36 गड़ की संस्कृती को भी संडक्षित करने का प्रयास है यानि पंडाल एक और सरहनी
02:23ये पहल अनेक
02:24रतेश तंबोली, ETV भारत, रायपुर
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