00:00UP के करजिलों में बार का पानी कम होने लगा है, लेकिन सियासत कम होनी का नाम नहीं ले रही
00:06है।
00:06एक बर फिर सपा सुप्रिमों अखिलेश आदव ने बीजेपी सरकार पर तीखा अमला बोला है।
00:11साथी 17 सितंबर को जले दियों का जिक्र कर सियासी टंपरेचर को और बढ़ा दिया है।
00:41कर रही है। बीजेपी को क्या आम जनता गरीबों, सोशितों, वंचितों और बाड़ पीड़ितों का रत्ती भर भी खाया नहीं
00:49है।
00:49बीजेपी सरकार ततकार बोजन पानी, दवाई और अन्य देनन दिनी जरूरतों के लिए राहा सामागरी पहुँचाए।
00:56या कह दे कि जनता से उसे कोई मतलब नहीं है।
01:00जहां बाड़ प्रभावी तिलाकों का योगी खुद हवाई निरिक्षण कर रहे हैं, राहा सामागरी बाट रहे हैं, वहीं अखिलिय श्यादव
01:08का आरोब है कि जनता नाराज है और उसको राहा सामागरी नहीं मिल रही।
01:13वही करनाच के पूर्व बीजेपी सांसद सुबरत पाठक सपा सुप्रीमों को आयना दिखा रहे हैं और दावा कर रहे हैं
01:19कि सपा सरकार में बाड़ पीड़ितों की मदद में भी भेदभाव होता था।
01:43पाठक सपा पर गर्म हैं वही योगी सरकार की जमकर तारीफ कर रहे हैं और कह रहे हैं कि पहली
01:48बार बाड़ पीड़ितों की बिना किसी बेदभाव के मदद हो रही है।
02:13तो छोड़ो 2047 तक समाजवादी पार्टी सत्ता में आने वाली नहीं है वो मुगेरी लाल के हसीन सपने जितना देखना
02:19चाहते हैं देख ले लेकिन कमल खिला हुआ है कमल खिला रहेगा।
02:23वैसे बार पर सियासत करने वाले नेताओं को ये भी बताना चाहिए उन्होंने अपने कारेकाल में बार का स्थाई समधान
02:29निकालने का प्रयास किया या नहीं।
02:32वैसे जनिता को भी सियासत नहीं समधान चाहिए। सवाल ये है कि आखिर बार जैसे मुद्दो पर सियासत की बचाए
02:38हर दल एक साथ आकर काम क्यों नहीं करता।
02:41वैसे खिलेश आदम ने तीखे वार में देए का जिकर कर सियासत को सुलगा दिया है।
02:46कुल मिलाकर कहें तो यूपे में चुनाव से पहले सियासी तनाव बरता जा रहा है।
02:51वैसे अब चुनाव के नतीजे ही बताएंगे कि जनिता किस से खफा है और किस के साथ खड़ी है।
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