00:00अच्छा जी गनेजी से जूड़ी एक परमपरा है जिसमें सबसे पहले हम गनेजी को अपने घर पे लेके आते हैं
00:05और फिर पूजा वेरने के बाद बाहर विस्तरचित भी कर देते हैं ऐसा क्यों जो कुछ भी है गणतत्य के
00:12विश्य में वो इशारा है कहीं को चाहे वो सर हो �
00:18चाहे वो सूंड हो चाहे वो मुदक हो चाहे वो चुहा हो चाहे उपेट हो भक्रतुन्द महाकाय ये सब के
00:27सब किसी दिशा की और संकेत किये जा रहे हैं वो दिशा महत्वपून है उस दिशा की और संकेत करने
00:38वाली वो जो भौतेक उंगली है वो जो रूप है मूर्तिका �
00:43वो कम मतुपूर्ण है यह परंपरा कहती है कि लाओ बूर्ति को बड़ा प्यार दो बड़ा सम्मान दो और पिर
00:52अंततह जैसे प्रक्रति से जैसे मिट्टी से मूर्ति उठी थी उसी तरह उसको जाकर के वापस देवी प्रक्रति को समर्फित
01:01कराओ इससे यही पता चल रहा है क
01:05प्रक्रति का सही इस्तेमाल यह है कि वो हमारे लिए साधन के तौर पर सूचक के तौर पर प्रतीक के
01:11तौर पर काम करें प्रक्रति माने पूरा जीवन हमारा जीवन ही प्रक्रति कि पूरा जीवन ही इसलिए रहे कि वो
01:17हमें आकाश की और इशारा दे जाए और फिर एक दिन
01:21जैसे जीवन को चले जाना है
01:23वैसे ही हम मूर्ति को विसर्जित कर देते हैं
01:25ये शरी भी तो मूर्ति है ना एक तरह का
01:27ये भी तो एकिन विसर्जित होई जाएगा
01:30भारत में तो हम नदियों में विसर्जित करते हैं
01:32लेकिन विसर्जित होने से पहले
01:34इस शरीर की इस जीवन की सार्थक्ता इसमें है कि वो आपको आकाश से मिलवा दे कि वो आपको जो
01:43उच्चतम है उससे प्रेम सिखा दे
01:46तो यह कोई आपक्ति की बात नहीं है बहुत लोग कहते हैं कि यह क्या तरीका है कि मूर्ति को
01:55आपने इतना आधर दिया और आप में जाद कर दिया यह कुछ चतम बात है आपक्ति प्यारी बात है
02:06हाँ, इसमें पर्यावरन का ख्याल रखा जाना चाहिए, और धर्म की मर्यादा का भी ख्याल रखा जाना चाहिए, इन चीजों
02:18पर हम लोग कई बार चूप जाते हैं, इनका पूरा ख्याल रखा जाए, अन्यथा जो इस प्रथा के माध्यम से
02:27सिखाने की कोशिश की जा रही है
02:29वो बाद बहुत अच्छी है
02:31वो बाद सीखी जानी चाहिए
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