00:00जिनको वक्रतुंड महाकाय बोला जाता है उनके एब्स दिखा रखी थी गणपति के रूप के वर्णन में ही ये निहित
00:08है कि उनका पेट निकला हुआ है लेकिन भक्त ने अपनी छवी उनके उपर लाद दी आज कल तो एब्स
00:16होना मांगता तो गणपति के एब्स और ये एक
00:20भक्त ने नहीं किया होगा इतनी लोग आए होंगे प्रतिमा का दर्शन करने प्रणाम करा होगा नमन करा होगा किसी
00:25ने भी आपति नहीं करी कि वक्रतुंड महाकाय के एब्स कहां से आ गई क्योंकि मामला बहुत सीधा है हम
00:31जैसे होते हैं वैसा ही हम अपने भगवान को भी
00:34रच देते हैं जब कोई रेसिपी होती है तो उसमें अंत में लिखा होता है ना नमक स्वादानुसार सब कुछ
00:40बता देंगे अंत में नमक स्वादानुसार वैसे हमारा रहता है नमन स्वादानुसार
00:46जहां स्वाद आया वहां नमन कर लिया
00:48ज्यान और भक्ति अलग-अलग नहीं है
00:51भक्ति को आखें देता है ज्यान
00:54भक्ति को शुद्धता देता है ज्यान
00:56और ज्यान को फ्रिदय देती है भक्ति
01:00और भक्ति और कुछ नहीं है
01:02विशुद्ध प्रेम के अलावा
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