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पूरा वीडियो: हिंसा हमारी राष्ट्रीय संस्कृति कब से? (ज़ायका बड़ी बात, ज़िंदगी छोटी बात?) || आचार्य प्रशांत (2026)

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वीडियो जानकारी: 14.09.2026, संत सरिता

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Transcript
00:00भारत की असी प्रतिशत आबादी मास खाती है तो जो भी काम असी प्रतिशत लोग करते हों वो पूझे पावन
00:08पवित्र हो जाता है दुनिया में असी प्रतिशत लोग कभी सलेवरी भी सही मानते थे तो सही हो गई भारत
00:15में असी प्रतिशत लोग कभी सतीप्रथा का समर्थन
00:17करते रहोंगे तो हु� Kinder भारत में 90 प्रतिशत लोग आज
00:22भी जात पात मानते हैं तो हुझ अहीं हो गया तो यहह कहां
00:26का तरख है कि 80 प्रतिशत लोग भारत में मासहारी है
00:31इससे तो यहीं पदा जलता है कि भाई अभिब भॉत काम करना
00:35बाकी 80 प्रतिशत लोग घोर अज्ञान अरंधेरे में हैं पर इस बात को ऐसे प्रस्तुत किया जा रहा है कि
00:41जैसे लोगों के लोगतांत्रिक और समवेधानिक अधिकारों का उलंगन हो रहा है अगर उन्हें जानवर का खून बहाने को नहीं
00:48मिल रहा तो
00:50मनुश्यत्य का इतिहास देख लो तो अलग-अलग जगों पर अलग-अलग देशों में अलग-अलग काल खंडों में जो
00:58बहुमत रा है जो मेजारिटी रही है वो न जाने कैसी-कैसी बाते मानते रहें और न जाने क्या-क्या
01:03करते रहें
01:04तो 80 प्रतिशयत, 90 प्रतिशयत इस तरह की बातें उच्छालने से आप क्या साबित कर लोगे
01:09ज्यादातर लोग तो कभी भी बहुत जागे हुए नहीं रहे
01:13लेकिन क्या करें जब राजनीती में होते हैं
01:16तो बहुमत गिनना बड़ी सुवधा की बात हो जाती है
01:19क्योंकि राजनेता को और सत्ता मिलनी कैसे है
01:22बहुमत गिन के ही तो बहुत तपाक से आदमी फिर गिराता है
01:27कि 80 प्रतिशत लोग हैं वो जानवर काटते हैं तो जानवर तो कटना चाहिए
01:33इनकी मजबूरी हम समझ सकते हैं
01:34असी प्रतिशत का आकड़ा ही इतना लुभावना है
01:37इतना टैम्टिंग है यह 80% वोट मिल जाएं
01:40तो कर इनको सत्ता मिल जाए
01:41तो इसलिए 80%, 80% भले ही उस 80% के पीछे कितना रक्तपात हो
01:47और कितने भी तरकहीनता हो
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