00:05जाने दिल जाना
00:08जाने दिल जाना
00:31कहां चला गया
00:34निश्यती महल में से कोई होका
00:37अन्यता एतनी शीक्रता से वो जाने ही सकता
00:57बड़े उफास की बात है महराज
01:00सुन्दर्ता के पुजारी है ना आप
01:04और मधुमती के तो सुन्दर्ता पे बड़ा गर्ब है आपको
01:09वो मधुमती तो किसी और के साथ ही संबन बनाए हुए
01:13उफास के पात रहें आप
01:29जाज से जाज से एकि प्यारी है टाज बसे आपको किसी हाँ
01:47सुर्मई शाम में है नशा और है सुरू
01:56ठलती हुई शाम में रहो ना यू हमसे दू
02:05ये मेरे जिसम जा रंग दो जाना तेरे रंग में
02:14नजदीक आओ ना करो ना हम पे सितम
02:23महकता है पदन आज छून दो सनम
02:32जाने कैसी अगन जागी मेरे अंग अंग ने
02:39कुछ कहें अनकही ये मेरी धड़कनी
02:48बेताब है ये पहर पल ये गए है ठहर
02:55जाके कोई प्यास है दिल में
03:03कुछ कहें अनकही ये मेरी धड़कने
03:11कुछ कहीं अनकहीं ये मेरी धड़कनी
03:33महराज
03:39जब भी हम लड़कना कर खिरते हैं
03:44तुम्हें अकर हमें सारा क्यों देते हैं
03:51महराज
03:52आए
03:53मैं आपको के कक्ष में लेखे जाते हैं
03:55यह
03:57हम अपने कक्ष में खुछ जासें
04:00महराज
04:04आए
04:04आए महराज
04:05आए
04:06आए
04:20महराज
04:23दासे
04:25जी
04:25वानी
04:28हमें
04:30सनान कक्ष में लेखे
04:33महराज
04:33आप तो अपने कक्ष में भी स्वयम ही आने वाले थे
04:37फिर
04:38वा
04:40हम महराज है
04:43हमारी आज्या का पालन हो
04:48सर फट रहा है
04:50हमें चली
04:52सनान कक्ष में लेखे
04:54चलो
04:56चलो
04:57चलिये महराज
05:27हमें लेखे
05:29अज्या
05:31झाल
05:35अज्छ
05:38जाल
05:48झाल
05:56झाल
06:24झाल झाल
06:37झाल झाल
07:04झाल
07:28तो ने जो छुलिया
07:32मुझे को ये क्या हुआ
07:40नस नस में बहती है किचिनगारी
07:49तुने जो छुलिया
07:52मुझे को ये क्या हुआ
07:56में तब आख हो गई
08:00आगर हो गई
08:04हो गई
08:06हो गई
08:08हो गई
08:13शमा कीचे महराज
08:15हमें जाने दीचे
08:41हमारा हाट ठीक है
08:42हम स्वस्थ है
08:44हमारा हाट ठीक है
08:46हम स्वस्थ है
08:48हमारा हाट
08:52पाप का आंथ निकट है पट्रानी
08:55ये क्या कह रही हो जुम्पा
09:06पेच्छ
09:08पेच्छ
09:08पेच्छ
09:09पेच्छ
09:10पेच्छ
09:10पेच्छ
09:11पेच्छ
09:11पेच्छ
09:12पेच्छ
09:12पेच्छ
09:14पेच्छ
09:15पेच्छ
09:25पेच्छ
09:37तुम पठ्राने के हत्या करना चाहते जिए, इतना दुर्साथ, नहीं महाराज, तेरे ऐसा नहीं किया, उनकी उनकी इच्छा शक्ति देखे,
09:47देखे उनका हाथ,
10:01इसे आकरांत तिधी कहते हैं, उजे एक वैठ जी ने बताया था, ऐसे वह अतंकित त्यत्ति, अपनी ओ सांगा भी
10:09प्रयोग करता है, जो निस्चल पड़ा, आपका हद तो, तो इसलिए तुमने ये बिच्छो अचानक हमारे उपर फेका था कि
10:21हम स्वम का पच्छाव कर सके, �
10:24अची, हमें एक शमा लीची, उसे समझने में दूटी है, विच्छो पहले से ही मृत था, वो निशती नहीं पहुचा
10:32सकता था महाराज, हम तुम्हारा ये आभार कभी नहीं भूलेंगे जुम्पा,
10:39मैंने आपको साथ दिवस्प में फून रोप से स्वस्थ करने का पच्छन दिया था पच्छान, बस अपना बच्छन फून करना
10:46चाहती है,
11:08जाने दिल जाना, जाने दिल जाना, जाने दिल जाना,
11:25महाराज,
11:32अब तो आपको विश्वास हो गया न, के हम ठीक हो सकते हैं,
11:46कृच्छन भालराभ के उलोचन बच्छन करना खाएंग,
11:48जाने दिल जाना दो न, जाना खाएंग,
11:49भावास न, मिलिया था टून के लावास स्वस्थिजड़ क्या止 सीछ,
11:56यावास में याओः,
11:58में प्राभ दो प्राभ,
11:59कर दो कर दो
12:29कर दो
13:24एड़ पाप, नहां जारें?
13:28नहीं आई होके राजमेल में, इस गलियारे के अंदर जाने के किसी गौनमती नहीं है
13:37शमा किजी
13:44इस गलियारे के आगे राजा के सिफ़क कोई भी नहीं जा सकता
13:49ऐसा क्या है यहां?
13:52यहां अवश्य कोई न कोई रहस्य छिपा
13:57पेश दिंगारिखा, हमें किसी के वचन पर रिश्वास दें
14:02रिश्वास है तो बस तुछ पर
14:07अगर साथ दिनों के अंदर जुंपा पटरानी का हाथ ने ठीक कर पाई तो
14:12तो कितना दुख होगा मालिक हो
14:17और हम उनकी यह पीडा सेंड करवाएगे
14:23जिंगारिखा, हम जानते हैं कि तू सिर्फ हमारी पीडा दूर करते हैं
14:27सिर्फ हमारी लेचा मतकार करते हैं
14:29लेकिन आज ही बिलती है उसे
14:35हमारी मालनी का हाथ तुना स्वास्त करते हैं
14:42हम तेरा एरण जीवन भर भूल ने पाएंगे
14:47मालनी को स्वास्त करते हैं
14:49पर अगर तू स्वयम यह नहीं कर सकती ना
14:52तो किसी और को इतनी शक्ती दे के
14:57वह पत्रानी को ठीकत रहा है
15:01हां वही हैं चमतकाल की पुलिया जुम्पा
15:05जुम्पा लंबे दूंदत वाली मदुमत्ती की दासी
15:09अब पतलानी की सेवा कर लिए
15:11उल हां उसे ने किया वह चमतकाल
15:14कि पतलानी का हाथ अब हिलने दुनने लगये
15:17और अब तो उपर लीचे भी होला था
15:20यह जुम्पा क्यों मेरे कारी में विगने डाल दिये
15:24लुको अलाम से बटाती हो
15:25पहले माया थी छीवी का थी
15:27फिल मदुमत्य ले दई
15:28अब पतलानी उसका खुब लाब इठा ली है
15:31जुम्पा दिनों दिन बहुत उन्टी कली है
15:35निपटना पड़ेगा इस जुम्पा से
15:36पहले पतलानी से तो निपतो फिल से उनका हाथ किला दो अपनी काली विद्या से
15:41काली विद्या में मेरे भी शक्ति जाती है
15:44एक बार को मैं बार-बार नहीं कर सकती
15:46आपके तो हाथ पैठ ठीक है
15:48अरे निपट मुर्ख अंतर की शक्ती जाती है
15:53रख सूपता है तुम नहीं समझोगी
15:56तो अब क्या दलेंगे
16:13जिलो
16:24सुनो
16:26प्रनाव
16:28ये कपले लाने नामी का के कक्ष में ले जाओ
16:30ताव फिगली
16:32जी मार
16:48रूखो
16:49ये बसर रानी धनिका ने दिये
16:54रानी अनामिका को देने के लिए
16:56बस इसलिए बीतल जा रही है
16:58जाओ
16:58धन्याद
17:02रानी अनामिका
17:07रानी अनामिका
17:15कहां चले गई है रानी अनामिका रानी धनिका ने ये पस्र दिये कहां रखो
17:31लगता है कक्ष में नहीं यही रख देती हूं
17:45मेरे लक्ष में बाधा बन रही थी पट्रानी का उक्चार करेगी अब तीरा उक्चार कौन करेगा जब काल कोठ्री के
17:55अंधीरों का ज्वड चरेगा
18:02सैनिक जी महरानी अभी अभी मेरे कक्ष में कौन आया था वो घुंगट वाली लड़की जुम्पा कुछ वस्तर लेकर आई
18:09थी और अक्कर चली गई
18:13और कोशिश कीजिए उस्ता नहीं उठ्राज इतना पहले उठाया था देखे आप चिंता मुद कीजिए मानी जल्दी आपके साथ चमत्कार
18:26होगा और आप स्वस्त हो जाएगा
18:30महराज आप इतना विश्वार से कैसे कह सकते क्योंकि हमने
18:37क्योंकि हमने प्रार्टना किया है पाभगबती से वह मा
18:47अच्छा हो अमाराज अप यही मिल गए हमारे कक्ष में चोड़ी हुई है
18:51क्या जी माराज बहु मुल्ले हार की हमारे महल में चोड़ी किस ने की जुम पाले
19:04जुमपा ने नहीं नहीं वो ऐसी नहीं है जिस त्री का मुग भी ना देखा हो उस पर विश्वास कैसे
19:12करे और वैसे भी इस सैनिक ने स्वयम मेरे कक्ष के भीतर उसको आते जाते देखा है
19:20बताओ
19:22जी महाराज मैंने जुमपा को वस्त रखते हुए देखा था
19:27आपको समझने में कोई तोटी हुई होगी अनामिका
19:31जुमपा एक अच्छी नेक स्त्री है अभी के अभी उस नेक स्त्री का रवान मिल जाएगा
19:37चली महाराज अब स्वयम चल के देख लीजिए कि वो नेक है या चोट
19:45अगर वो दोशी है तो से दर्ण अवश्यम देगा
20:13जुमपा बाहर आओ
20:22प्रणाम
20:26तुम्हारे जिवा से महाराज के समक्ष किवल सत्ती है निकलना चे
20:31हमारे प्रश्न का सीधा सीधा उत्तर दो
20:34क्या तुम हमारे कक्ष में गई थी
20:36जी महाराणी मैं गई थी
20:39वो कपड़े किवल जितना पूछा गया है उतना ही उत्तर चाहिए
20:44अब बताओ हमारे कक्ष में से हमारा बहुमल्ले हार क्यों उठाय तुम्हें
20:50हार?
20:52मैंने कोई हार नहीं उठाया महाराणी
20:54तुम्हारी सत्यनिष्ठा का नकली घुंगर आज हम उतार के रहेंगे
21:02जाओ धनीका इसके कक्ष में से सारा समान लेक्याओ
21:18ये तुमाली पोतलिये न जुम्पा
21:21ची महाराणी
21:24ओल अगल इसमें से हाल मिला तो त्या होगा
21:28तो आप मुझे जो डंड देंगी वो मुझे सुईकार होगा
21:31खोलो इस पोट लिखो
21:43इसमें कोई हार नहीं
21:44आपको तुरुटी हुई है महाराणी इसमें कोई हार नहीं
21:48सब बहार निकालो अच्छे से देखो
21:50झालो इसमें कोई प्राइब जो इसमें अजय जो प्रता नहीं
21:56मिला प्रता नहीं
21:58अजय कोई हो फ्रता नहीं
22:10कर दो कर दो
22:33जाने दिल जाना
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