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  • 2 hours ago
Today, we are presenting Sultan Salahuddin Ayyubi's biography in a documentary style. Salahuddin was the commander who not only showed bravery in battlefields but also showed mercy to his opponents. Today, we'll uncover every truth surrounding him and his rule.

سلطان صلاح الدین (رح) کی زندگی پر اس ویڈیو میں ہم نے 300 سے زائد نت نئی تصاویر کا استعمال کیا ہے جنہیں ہم نے AI ٹیکنالوجی کی مدد سے ہر scene کی مناسبت سے بنائی ہیں اور اس کام کی تکمیل کیلئے 2 ہفتوں کا وقت لگا۔ امید ہے آپ ناظرین ضرور ویڈیو کو لائک اور چینل کو سبسکرائب کرکے ہماری حوصلہ افزائی کرینگے!🌹

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Transcript
00:18ھے جوان لڑکی کھڑی ہے جو خوف سے بری طرح کان پر decreyہ
00:38
00:54This is not a good idea.
01:00This is a good idea that Salahuddin has been a great citizen of the army.
01:05He has been a great commander in the army.
01:10He has been a great commander in the army.
01:13When he was a king of the army, he has been a great owner of the army.
01:20He has been a great owner of the army.
01:22He had a great opportunity.
01:52filmeikk sunaan ki qiadet mei ye inntahai khofnaak qatil te
01:55cheo raati k e andhere mein apna shikar kar te te
01:58ar unhenei ek naihi bolki kaip hi baare sultan ki jaan lene ki kochis ki
02:02Sara is inntahai khofnaak raat ke baare mein sochi e
02:06sultan apne khameh mei geheri nien so rattan hai
02:09che acanak hunki aankh kelti hai
02:11وہ dhekthate hain kei khameh ke sarei chirag buch chuk hiin
02:15ایک ajeeb sa sannaata hai
02:17اور jab roshni ki jati hai
02:19तो उनके बिस्तर के बिलकुल करीब एक जहर आलूद खंजर रखा होता है
02:23और उसके साथ एक कच्ची पढ़्ची जिस पर लिखा था
02:27बादशा सलामत अब हमारे रह्मो करम पर हैं
02:30सोचकर ही रॉंटे खड़े हो जाते हैं न
02:32ये किसी की भी हमत तोड़ने के लिए काफी था
02:35मगर उसके बाद जो हुआ
02:36वो सुल्तान की दानिशमंदी का एक शानदार मास्टर स्ट्रोक था
02:40आम तोर पर कोई भी घुस्से में आकर पागल हो जाता
02:43लेकिन सुल्तान ने क्या किया
02:45वो उन दुश्मनों की जंगी सलाहियतों और उनकी दलेरी से बहुत मतास्सर हुए
02:50और इंतहाई हैरत अंगेस तोर पर अपने इसी जानी दुश्मन
02:54शेख सुनान के साथ दोस्ती और इताहत का फैसला कर लिया
02:57बिलकुल उन्होंने एक ऐसे दुश्मन को
03:00जो कल तक उनके खून का प्यासा था अपना एक बेहद ताकतवर इतहादी बना लिया
03:05ये होती है असल क्यादत
03:06आब आते हैं उनके सबसे बड़े चैलेंज की तरफ
03:10फिलस्तीन में मौझूद सुलेबी सल्तनत
03:12शुरू में तो सुल्तान इन सुलेबियों के साथ
03:15अम चाहते थे जिनका 1099 से यरुशलम पर कबजा था
03:19मगर हालात खराब होते गए
03:221177 में रमला के मकाम पर सुल्तान को
03:25अपनी जिन्दगी की सबसे बड़ी शिकस्त का सामना करना पड़ा
03:28लेकिन एक अजीम लीगर की पहचान यही है
03:31कि वो गिर कर उठता है
03:32उन्होंने इस शिकस्त से जबर्दस सबक सीखा
03:35अपनी फौज को दुबारा खड़ा किया
03:38और सिर्फ दो साल बाद
03:401189 में शाह बालडवन चोहारम को
03:42इबरतनाक शिकस्त दे कर
03:44पूरा पासा ही पलड़ दिया
03:45लेकिन ये जंग आखर शुरू क्यूं हुई
03:48जराय बताते हैं
03:49कि असल वज़ा एक सलीबी सरदार
03:52रे नॉल्ड आफ चैटलन था
03:53जिसने तमाम हद्दे पार कर ली थी
03:55इस शखस ने बार बार अमन
03:57मौाइदे तोड़े और धोका दिया
03:59यहां तक कि उन हाजियों के काफलों पर
04:01हमले किये जिन में सल्तान की
04:03सगी बहन भी शामिल थी और बात
04:05सिर्फ यहीं खतम नहीं हुई
04:06उसने मदीना मुनवरा में पेगंबर
04:09इंसलाम के रोजा मुबारक पर हमला
04:11करने की नापाक धंकी भी दे डाली
04:13ऐसी खुली देशतगर्दी
04:15और मौहेदों की खलाव वर्जी के बाद
04:17जाहिर है जंग तो अब होकर ही
04:19रहनी थी फिर आती है
04:21हतीन की जंग जो सुल्तान की
04:23जंगी महारत का सबसे
04:25बड़ा शाहकार है उन्होंने इस इलाके
04:4120 किलोमीटर लंबे सहरा
04:43में चलने पर मजबूर कर दिया
04:45फिर रात के वक्त उन्होंने
04:47सुखी भास को आग लगा दी
04:48तपती गर्मी, धुआं और पानी
04:51की बून तक नहीं अगले दिन
04:53जब उन्होंने इस थकी हारी
04:5485 पर हमला किया तो वो जीत
04:57नहीं बलके दुश्मन के लिए
04:58एक मुकम्मल बिचाया हुआ जाल था
05:01इस जंग के बाद
05:02कयादत का जो मेयार देखने को
05:04मिलता है वो कमाल है
05:06एक तरफ सुल्तान ने जंग के
05:08उसूलों को निभाते हुए कैद किये
05:10गए शागाय को ठंडा अरके
05:12गुलाब पेश किया और उसकी चान
05:14बख्ष दी लेकिन दूसरी तरफ
05:16रेनॉल्ड उसकी बार बार
05:18की घदारी और धोके बाजी
05:20के लिए कोई रियायत नहीं थी
05:22सुल्तान ने खुद अपने हाथों से
05:24उसको उसकी एहद शिकनी की सजाए
05:26मौद दी ये रहम
05:27और सख्त इनसाफ का एक बिलकुल
05:30बहतरीन तवाजन था
05:31और ये सब हमें एक इंतहाई
05:34एहम और तारीही हिंद से
05:36की तरफ ले जाता है अठासी साल
05:38जी हाँ ठीक
05:40अठासी साल ये वो अरसा था
05:42जबसे यरुश्यम मुसल्मानों के
05:44हाथों से निकल कर सलीबियों के
05:46कबजे में जा चुका था
05:47हतीन की इस अजीम फतह के बाद
05:49रास्ते खुल चुके थे और
05:51सुल्तान ने आखरकार इस शेहर का
05:53महासरा करके इसे वापस
05:55हासिल कर ही लिया
05:56लेकिन यहाँ जो बात सबसे
05:59ज्यादा हिरान करती है न वो यह है
06:01कि इस शेहर की दुबारा
06:03फतह में कतरे बराबर भी
06:05खुन रेजी नहीं हुई जरा सोचिए
06:0788 साल पहले
06:09जब सलीबियों ने कबजा किया था
06:11तो वहाँ खुन की नदियां बहा
06:13दी थी मगर सुल्तान ने
06:15उन्होंने इंतकाम लेने के बजाए
06:17बहुत मामूली फिदिया मकरर किया
06:19मर्दों के लिए सिर्फ दस दीनार
06:21औरतों के लिए पांच
06:22और जो गरीब ये पैसे नहीं दे सकते थे
06:24उन्हें गुलाम बनाने के बजाए
06:26बिलकुल मुफताजाद कर दिया गया
06:28ऐसी मिसाल तारीख में कहा मिलती है
06:30इस रहम दिली को अगर हम थोड़ा सा मुवाजना करें
06:33तो तारीख का एक बड़ा ही तलख तजाद सामने आता है
06:37एक तरफ यरूशिलम में सुल्तान सलाह الدین थे
06:40जिनोंने शहरियों की जान बक्षी और गरीबों को आजाद किया
06:44और दूसरी तरफ तीसरी सलीबी जंग के दौरान
06:47अक्का के मकाम पर रिचर्ड शेर दिल
06:50जब वहां जंग रुकी तो रिचर्ड ने इंतहाई बेदर्दी से
06:54चार हजार कैदियों का कतल आम करवा दिया
06:57इन दोनों का मवाजना करें तो सच में रॉंक्टे खड़े हो जाते हैं
07:01लेकिन इतनी खौफनाक दुश्मनी के बावजूद
07:04एक वाक्या ऐसा है जो सोचने पर मजबूर कर देता है
07:07जब जंग बहुत लंबी खेंच गई और इंगलिस्तान का वही बादशा रिचर्ड शेर दिल
07:12बुरी तरह बीमार पढ़ गया तो पता है सुल्तान ने क्या किया
07:15उन्होंने इंसानी हमदर्दी की बुनियाद पर अपने इस सबसे बड़े और जानी दुश्मन के लिए
07:37निडाल हो चुकी थी तो एक हकीकत पसंदाना अमन मौाहिदा तैपाया
07:41इस से ये साबित हो गया कि दोनों में से कोई भी दूसरे को मुकमल तोर पर खत्म नहीं कर
07:46सकता
07:47सलीबियों के पास जाफा और अक्का जैसे साहिली शहर रहे गए जबकि मुसल्मानों ने यरुशलम पर अपना कंट्रोल बरकरार रखा
07:54और इस मौाहिदे की सबसे खुबसूरत बात ये थी कि मजभी आजादी का इहतराम करते हुए
07:59बगेर हतियार के आने वाले इसाई जाहरीन को यरुशलमानी की मुकमल और महफूज इजाज़त दे दी गई
08:05वक्त गुजरता गया और जंग के खात्मे के बाद 1192 के आखिर में सुल्तान वापिस दमिश्क आ गए
08:12उनके आखरी दिन बड़े ही पूर्सकून थे लेकिन एक बहुत गहरी हस्रत के साथ
08:17उन्होंने पूरी जिंदगी मैदान जंग में गुजार दी और इस वज़ा से वो कभी हज अदा नहीं कर सके थे
08:23जब उन्होंने हाजियों का काफला देखा न तो वो खुद को रोक नहीं पाए और उनकी आँखों से आंसू आ
08:28गए
08:29इसके ठीक कुछ अर्से बाद वो बिमार पड़े और चार मार्च 1193 को कुरान मजीद की तिलावत सुनते सुनते इंतहाई
08:37सुकून से इस दुनिया से रुखसत हो गए
08:38अब अगर हमें लगता है कि ये कहानी यहीं खतम हो गई तो जरा ये सुनिए
08:43जराय बिलकुल गेर जानिबदाराना तोर पर बताते हैं कि सदियों बाद पहली जंग अजीम के दोरान जब एक फ्रांसीसी जेनरल
08:50हेंरी गरूड वहां पहुँचा तो उसने सुल्तान सलाओदीन के कबर पर ठोकर मारते हुए कहा हम वापस आ गए हैं
08:57ये वाकिया दिखाता है कि जदीज जिग्राफियाई सियासत में भी इन सदियों पुरानी सलीबी जंगों को आज तक इसी नजर
09:03से देखा जाता रहा है
09:04तो इस कहानी से हमें आखर मिलता क्या है सुल्तान सलाओदीन अयूबी की मिरास सिर्फ एक फाते होने तक महदूद
09:11नहीं
09:11वो एक ऐसे लीडर थे जिन्होंने दिलों को जोड़ा और जिसकी पहचान उनकी सकती नहीं बलके उनका बेपनाह रहम, उनकी
09:19फराखदिली और उनका इनसाफ था
09:22और ये हमारे लिए एक बहुत ही एहम सवाल छोड़ जाता है
09:25क्या हमारी आज की ये मुनकस्म दुनिया और जदीद रहनुमा माजी के इस अजीम सुल्तान के रहम और आला जर्फी
09:33से कुछ सीख कर वाकी बहतर और पुर अम्न दुनिया की बन्याद रख सकते हैं?
09:37जरा सूचिएगा
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Clien Hub
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Real Story of Sultan Salahuddin Ayyubi in Urdu || Documentary on Saladin

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