00:18ھے جوان لڑکی کھڑی ہے جو خوف سے بری طرح کان پر decreyہ
00:38।
00:54This is not a good idea.
01:00This is a good idea that Salahuddin has been a great citizen of the army.
01:05He has been a great commander in the army.
01:10He has been a great commander in the army.
01:13When he was a king of the army, he has been a great owner of the army.
01:20He has been a great owner of the army.
01:22He had a great opportunity.
01:52filmeikk sunaan ki qiadet mei ye inntahai khofnaak qatil te
01:55cheo raati k e andhere mein apna shikar kar te te
01:58ar unhenei ek naihi bolki kaip hi baare sultan ki jaan lene ki kochis ki
02:02Sara is inntahai khofnaak raat ke baare mein sochi e
02:06sultan apne khameh mei geheri nien so rattan hai
02:09che acanak hunki aankh kelti hai
02:11وہ dhekthate hain kei khameh ke sarei chirag buch chuk hiin
02:15ایک ajeeb sa sannaata hai
02:17اور jab roshni ki jati hai
02:19तो उनके बिस्तर के बिलकुल करीब एक जहर आलूद खंजर रखा होता है
02:23और उसके साथ एक कच्ची पढ़्ची जिस पर लिखा था
02:27बादशा सलामत अब हमारे रह्मो करम पर हैं
02:30सोचकर ही रॉंटे खड़े हो जाते हैं न
02:32ये किसी की भी हमत तोड़ने के लिए काफी था
02:35मगर उसके बाद जो हुआ
02:36वो सुल्तान की दानिशमंदी का एक शानदार मास्टर स्ट्रोक था
02:40आम तोर पर कोई भी घुस्से में आकर पागल हो जाता
02:43लेकिन सुल्तान ने क्या किया
02:45वो उन दुश्मनों की जंगी सलाहियतों और उनकी दलेरी से बहुत मतास्सर हुए
02:50और इंतहाई हैरत अंगेस तोर पर अपने इसी जानी दुश्मन
02:54शेख सुनान के साथ दोस्ती और इताहत का फैसला कर लिया
02:57बिलकुल उन्होंने एक ऐसे दुश्मन को
03:00जो कल तक उनके खून का प्यासा था अपना एक बेहद ताकतवर इतहादी बना लिया
03:05ये होती है असल क्यादत
03:06आब आते हैं उनके सबसे बड़े चैलेंज की तरफ
03:10फिलस्तीन में मौझूद सुलेबी सल्तनत
03:12शुरू में तो सुल्तान इन सुलेबियों के साथ
03:15अम चाहते थे जिनका 1099 से यरुशलम पर कबजा था
03:19मगर हालात खराब होते गए
03:221177 में रमला के मकाम पर सुल्तान को
03:25अपनी जिन्दगी की सबसे बड़ी शिकस्त का सामना करना पड़ा
03:28लेकिन एक अजीम लीगर की पहचान यही है
03:31कि वो गिर कर उठता है
03:32उन्होंने इस शिकस्त से जबर्दस सबक सीखा
03:35अपनी फौज को दुबारा खड़ा किया
03:38और सिर्फ दो साल बाद
03:401189 में शाह बालडवन चोहारम को
03:42इबरतनाक शिकस्त दे कर
03:44पूरा पासा ही पलड़ दिया
03:45लेकिन ये जंग आखर शुरू क्यूं हुई
03:48जराय बताते हैं
03:49कि असल वज़ा एक सलीबी सरदार
03:52रे नॉल्ड आफ चैटलन था
03:53जिसने तमाम हद्दे पार कर ली थी
03:55इस शखस ने बार बार अमन
03:57मौाइदे तोड़े और धोका दिया
03:59यहां तक कि उन हाजियों के काफलों पर
04:01हमले किये जिन में सल्तान की
04:03सगी बहन भी शामिल थी और बात
04:05सिर्फ यहीं खतम नहीं हुई
04:06उसने मदीना मुनवरा में पेगंबर
04:09इंसलाम के रोजा मुबारक पर हमला
04:11करने की नापाक धंकी भी दे डाली
04:13ऐसी खुली देशतगर्दी
04:15और मौहेदों की खलाव वर्जी के बाद
04:17जाहिर है जंग तो अब होकर ही
04:19रहनी थी फिर आती है
04:21हतीन की जंग जो सुल्तान की
04:23जंगी महारत का सबसे
04:25बड़ा शाहकार है उन्होंने इस इलाके
04:4120 किलोमीटर लंबे सहरा
04:43में चलने पर मजबूर कर दिया
04:45फिर रात के वक्त उन्होंने
04:47सुखी भास को आग लगा दी
04:48तपती गर्मी, धुआं और पानी
04:51की बून तक नहीं अगले दिन
04:53जब उन्होंने इस थकी हारी
04:5485 पर हमला किया तो वो जीत
04:57नहीं बलके दुश्मन के लिए
04:58एक मुकम्मल बिचाया हुआ जाल था
05:01इस जंग के बाद
05:02कयादत का जो मेयार देखने को
05:04मिलता है वो कमाल है
05:06एक तरफ सुल्तान ने जंग के
05:08उसूलों को निभाते हुए कैद किये
05:10गए शागाय को ठंडा अरके
05:12गुलाब पेश किया और उसकी चान
05:14बख्ष दी लेकिन दूसरी तरफ
05:16रेनॉल्ड उसकी बार बार
05:18की घदारी और धोके बाजी
05:20के लिए कोई रियायत नहीं थी
05:22सुल्तान ने खुद अपने हाथों से
05:24उसको उसकी एहद शिकनी की सजाए
05:26मौद दी ये रहम
05:27और सख्त इनसाफ का एक बिलकुल
05:30बहतरीन तवाजन था
05:31और ये सब हमें एक इंतहाई
05:34एहम और तारीही हिंद से
05:36की तरफ ले जाता है अठासी साल
05:38जी हाँ ठीक
05:40अठासी साल ये वो अरसा था
05:42जबसे यरुश्यम मुसल्मानों के
05:44हाथों से निकल कर सलीबियों के
05:46कबजे में जा चुका था
05:47हतीन की इस अजीम फतह के बाद
05:49रास्ते खुल चुके थे और
05:51सुल्तान ने आखरकार इस शेहर का
05:53महासरा करके इसे वापस
05:55हासिल कर ही लिया
05:56लेकिन यहाँ जो बात सबसे
05:59ज्यादा हिरान करती है न वो यह है
06:01कि इस शेहर की दुबारा
06:03फतह में कतरे बराबर भी
06:05खुन रेजी नहीं हुई जरा सोचिए
06:0788 साल पहले
06:09जब सलीबियों ने कबजा किया था
06:11तो वहाँ खुन की नदियां बहा
06:13दी थी मगर सुल्तान ने
06:15उन्होंने इंतकाम लेने के बजाए
06:17बहुत मामूली फिदिया मकरर किया
06:19मर्दों के लिए सिर्फ दस दीनार
06:21औरतों के लिए पांच
06:22और जो गरीब ये पैसे नहीं दे सकते थे
06:24उन्हें गुलाम बनाने के बजाए
06:26बिलकुल मुफताजाद कर दिया गया
06:28ऐसी मिसाल तारीख में कहा मिलती है
06:30इस रहम दिली को अगर हम थोड़ा सा मुवाजना करें
06:33तो तारीख का एक बड़ा ही तलख तजाद सामने आता है
06:37एक तरफ यरूशिलम में सुल्तान सलाह الدین थे
06:40जिनोंने शहरियों की जान बक्षी और गरीबों को आजाद किया
06:44और दूसरी तरफ तीसरी सलीबी जंग के दौरान
06:47अक्का के मकाम पर रिचर्ड शेर दिल
06:50जब वहां जंग रुकी तो रिचर्ड ने इंतहाई बेदर्दी से
06:54चार हजार कैदियों का कतल आम करवा दिया
06:57इन दोनों का मवाजना करें तो सच में रॉंक्टे खड़े हो जाते हैं
07:01लेकिन इतनी खौफनाक दुश्मनी के बावजूद
07:04एक वाक्या ऐसा है जो सोचने पर मजबूर कर देता है
07:07जब जंग बहुत लंबी खेंच गई और इंगलिस्तान का वही बादशा रिचर्ड शेर दिल
07:12बुरी तरह बीमार पढ़ गया तो पता है सुल्तान ने क्या किया
07:15उन्होंने इंसानी हमदर्दी की बुनियाद पर अपने इस सबसे बड़े और जानी दुश्मन के लिए
07:37निडाल हो चुकी थी तो एक हकीकत पसंदाना अमन मौाहिदा तैपाया
07:41इस से ये साबित हो गया कि दोनों में से कोई भी दूसरे को मुकमल तोर पर खत्म नहीं कर
07:46सकता
07:47सलीबियों के पास जाफा और अक्का जैसे साहिली शहर रहे गए जबकि मुसल्मानों ने यरुशलम पर अपना कंट्रोल बरकरार रखा
07:54और इस मौाहिदे की सबसे खुबसूरत बात ये थी कि मजभी आजादी का इहतराम करते हुए
07:59बगेर हतियार के आने वाले इसाई जाहरीन को यरुशलमानी की मुकमल और महफूज इजाज़त दे दी गई
08:05वक्त गुजरता गया और जंग के खात्मे के बाद 1192 के आखिर में सुल्तान वापिस दमिश्क आ गए
08:12उनके आखरी दिन बड़े ही पूर्सकून थे लेकिन एक बहुत गहरी हस्रत के साथ
08:17उन्होंने पूरी जिंदगी मैदान जंग में गुजार दी और इस वज़ा से वो कभी हज अदा नहीं कर सके थे
08:23जब उन्होंने हाजियों का काफला देखा न तो वो खुद को रोक नहीं पाए और उनकी आँखों से आंसू आ
08:28गए
08:29इसके ठीक कुछ अर्से बाद वो बिमार पड़े और चार मार्च 1193 को कुरान मजीद की तिलावत सुनते सुनते इंतहाई
08:37सुकून से इस दुनिया से रुखसत हो गए
08:38अब अगर हमें लगता है कि ये कहानी यहीं खतम हो गई तो जरा ये सुनिए
08:43जराय बिलकुल गेर जानिबदाराना तोर पर बताते हैं कि सदियों बाद पहली जंग अजीम के दोरान जब एक फ्रांसीसी जेनरल
08:50हेंरी गरूड वहां पहुँचा तो उसने सुल्तान सलाओदीन के कबर पर ठोकर मारते हुए कहा हम वापस आ गए हैं
08:57ये वाकिया दिखाता है कि जदीज जिग्राफियाई सियासत में भी इन सदियों पुरानी सलीबी जंगों को आज तक इसी नजर
09:03से देखा जाता रहा है
09:04तो इस कहानी से हमें आखर मिलता क्या है सुल्तान सलाओदीन अयूबी की मिरास सिर्फ एक फाते होने तक महदूद
09:11नहीं
09:11वो एक ऐसे लीडर थे जिन्होंने दिलों को जोड़ा और जिसकी पहचान उनकी सकती नहीं बलके उनका बेपनाह रहम, उनकी
09:19फराखदिली और उनका इनसाफ था
09:22और ये हमारे लिए एक बहुत ही एहम सवाल छोड़ जाता है
09:25क्या हमारी आज की ये मुनकस्म दुनिया और जदीद रहनुमा माजी के इस अजीम सुल्तान के रहम और आला जर्फी
09:33से कुछ सीख कर वाकी बहतर और पुर अम्न दुनिया की बन्याद रख सकते हैं?
09:37जरा सूचिएगा
Comments