00:00चलिए आज के इस खास जाइजे में एक ऐसी शक्सियत की कहानी में उतरते हैं, जिसने तारीख की सबसे बड़ी
00:05जमीनी सलतनत की बुनियाद रखी, मतलब एक तनहा और जलावतन लड़का, और उसका सफर जो इंदहाई बेबसी से शुरू होकर
00:13बेपना टाकत पर खतम होता है
00:15अब इस हैरातंगेज मवाजने पर जरा गोर कीजिए, रूमी सलतनत की वुस्त के बारे में तो हम सभी जानते हैं,
00:22लेकिन तारीख पताती है कि जिस इलाके को फता करने में रूमियों को पूरे 400 साल लग गए, वही जमीन,
00:29जी हाँ, वही जमीन, मंगोल फौज ने सिर्फ 25 स
00:45चाकत की कहानी इंतेहाई संगीन हालात से शुरू होती है, ग्यारा सो बासट में जब तेमजन पैदा हुआ, तो कहा
00:53जाता है कि उसकी मुठी में खोन का एक लोथड़ा था, जिसे तब एक अजीम जंगजू बनने की अलामत समझा
00:59गया, जिसे तब एक अजीम जंगजू बन
01:15बेरहम हकीकतों ने बच्पन से ही उसके अंदर हर हाल में जिन्दा रहने की एक सक्त कीर जहनियत पैदा की,
01:22बाब दो, धोका, इंतकाम और ताकत, खून से बनने वाले इत्ताद, कहा जाता है ना कि अकेले कोई बड़ी मन्जल
01:30तैनी होती, तिमुझन ने एक ताकतवर कभील
01:43बड़ा इंतिहान था, उसने अपने बच्पन के दोस्त जामुका के साथ मिल कर बीस हजार की फौज इकठी की और
01:50एक जबरदस्त हमले के बाद अपनी बीवी को वापिस लाया, इस वाक्या ने उसके लोगों में उसकी वफदारी और सलाहियतों
01:56का लोहा मन्वा लिया, बलक
02:13के सतर साथियों को उबलतेवे पानी में डाल कर मार दिया, इस सफाकियत ने इंतिकाम की एक ऐसी आग भड़काई
02:20जिसने सब कुछ बदल दिया, बिलाखिर एक फैसला कुन जंग हुई जिसमें जामुका को शिकस्त का सामना करना पड़ा, जब
02:27उसे गिरफतार करके लाया ग
02:43बापतीन, मंगोल कबीलों का इत्धाद, एक शेहनशाह की पैदाईश, बारा सो छे, वो साल था जब तमाम मंगोल सरदारों ने
02:52मुत्तफिका तोर पर तिमु जिन को चंगेज खान का खिताब दिया, जिसका मतलब है दुनिया का हुकमरान, ये सिर्फ एक
02:59नया नाम नहीं थ
03:00ये इस बात का एलान था कि जो मंगोल पहले आपस में लड़ते थे, अब वो एक मुतहित ताकत बन
03:06चुके हैं, पड़ोसी रियासतों के लिए यकीनन ये एक बहुत बड़ी खत्रे की घंटी थी
03:10अब सवाल ये पैदा होता है कि इन बाहर के हमलों की वज़ा क्या थी? असल में ये एक मुआशी
03:16जरूरत थी, मंगोल चरागाउं में अनाज, रेशम और धातों की शदीद कमी थी, इन्हीं जरूरियात ने उन्हें बाहर का रुख
03:24करने पर मजबूर किया, उनकी नजरें च
03:41अब ये बात बहुत दिलचस्त है कि रिवायती मैदानी जंगों से निकल कर चंगेस खान अब किलों के महासरे की
03:48जंगों का माहर बन रहा था, जोंगदू जो आज का बेजिंग है उस वक्त का एक इंतहाई मजबूट शहर था,
03:55इसे कैसे गिराया गया? चंगेस खान ने 500 च
04:07को खाना शुरू कर दिया और बिलाखिर 40 फुट उंची दिवारों को तोड़ कर शहर को तेहो बाला कर दिया
04:14गया, 1214 के अमन माइदे के तूटने के बाद होने वाली इस तबाही का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया
04:21जा सकता है कि जलते हुए शहर जॉंगदू का धु�
04:24वहां से कई मील दूर से भी साफ दिखाई देता था, ये वाकिए में एक बहुत बड़े पैमाने की तबाही
04:30थी, बाप पांच, खुवारिजम सल्तनत की तबाही, मगरिब पर नाजल होने वाला कहर, चीन के बाद ये तूफान मगरिब की
04:39तरफ मुड़ा, और हकीकत तो ये
04:41है कि ये पहले से सोचा समझा मनसूबा नहीं था, बस एक मंगोल तजारती काफले और सफीर के गतल जैसी
04:48बड़ी स्यासी घलती ने चंगीज़ खां को खुवारिजम की ताकतवर इसलामी सल्तनत के खिलाफ एक मुकमल और तबाकुन जंग का
04:56जवास फरहाम कर दिया, नतीज
05:11खुवारम शा को भागना पड़ा जबकि उसका बेटा जलाल अद्दीन लड़ता हुआ दरियाए सिंध तक पहुँचा और उसने हिंदुस्तान में
05:17पनाह ली, इस फता में दहशत को बिलकुल एक हत्यार की तरहां इस्तिमाल किया गया था, और तस्वीर का दूसरा
05:24रुख �
05:25तो इसके काबल एतमाद जरनेलों, सबुताए और जेबे ने उसी वक्त सलतनत की सरहदों को मजीद मगर्ब की तरफ पहलाना
05:34शुरू कर दिया, इन मुहिमात में जॉर्जिया, आर्मेनिया और आजर्बाइजान को रॉन डाला गया, यहां तक के रूसी शेजादों और
05:43कुम
05:55पहर आता है साल 1227, एक शिकार के दोरान घोड़े से गिरने के बाइस जंगेज खान की मौत वाके हो
06:02गई, लेकिन हैरत की बात ये है कि इस मौत को एक इंतहाई गहरा राज रखा गया, क्यों? ताके फौज
06:08का होसला न तूटे और दुश्मन इस अचानक खला का फाइदा न
06:14रखा गया कि उसकी मगबरे की जगा आज तक पूरी दुनिया में किसी को नहीं पता।
06:44टुकडों में बढ़ गई, मगर उनकी बुनियादी सिकाफ़ती पहचान कभी खतम नहीं हुई, 1911 में जदीद मंगोलिया का क्याम अमल
06:52में आया, जिसने आज भी इस तारीखी और सिकाफ़ती विरसे को बहुत फखर से जिन्दा रखा हुआ है, और आखिर
06:58में जरा इस हैरत
07:11चंगेज खान की उलाद में से है, सदियां गुजर जाने के बाद भी इनसानी आबादी पर छोड़ा गया ये गहरा
07:17जिस्मानी असर एक सवाल सोचने पर मजबूर करता है, क्या वाकई में कोई सल्तनत कभी मुकमल तौर पर खतम होती
07:23है, या वो आज भी हमारे डिने में कहत
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