00:00पांचाल नरिश, मैं अभी भी ये देखने के लिए असमर्थ हूँ, कि पांचालों का यादों से संबन बनाकर क्या लाव
00:08होगा, जो स्वायम जरासन के भैसे भागे-भागे फिर रहे हैं।
00:13मुझे केवल तुम्हारा सहयोग चाहिए वासुदेव, यदि तुम मेरे साथ होगे, तो अधर्म से लड़ने की शक्ती होगी मेरे साथ।
00:22हस्तिनापूर में दुर्योधन और उसके भाईयों का समर्थन करने वाला द्रोन धर्म के लिए संकट है।
00:29द्रोन के रिदे परिवर्तन का कोई मार्ग नहीं है।
00:34द्रोन और परिवर्तन? आसुदेव मैं द्रोन को तब से जानता हूँ जब से हम दोनों बच्चे थे।
00:41वो गमंडी है, कठोर है, छमा करने में क्रिपन है।
00:47यदि उसके लिए संभव होता तो वो सारे संसार को आग लगा देता है।
01:05संभवता ये आपका अपमानित ख्षत्रिय वर्म बोल रहा है पाचान नरेश।
01:10दुष्ट से दुष्ट व्यक्ति के अंदर भी कहीं न कहीं किसी न किसी कोने में कोई न कोई सद्गुन तो
01:18अवश्य चपा रहता है।
01:22संसार परिवर्तन शील है, हर व्यक्ति, हर वस्तू परिवर्तन शील है।
01:28Yes, when you can be a good person, then you can be a good person.
01:47How would you like the Lord?
01:48Raja kumari ko
01:51कि तुझे प्रयोजन कि प्रयोजे न सही चिंता तो है आखिर अपनी
01:57Raja kumari का विवा करना है उसके भविष्य का प्रश्ण है पूरे जीवन का प्रश्ण है हाँ क्या कह रहे
02:07थे वासुदेव
02:08क्रिश्ण उन्होंने कहा तुम अपनी प्रेमवदार नितंबिनी नाम की चुदासियां हैं उन्हें छुट्टी दे दो फिर तुम जो कहो वो
02:19करने के लिए मैं ततपर हूँ
02:23हाई उन्होंने हमारा नाम लिया राजकुमारी वासुदेव क्रिश्ण के होटों पर बासुरी के स्थान पर नितंबिनी का नाम हाई मैं
02:33तो गई
02:34हाई अगर मेरी साथ सज्जा हो गई है तो आप दोनों कृपा करके जा सकती हैं देखा प्रियमवदा वासुदेव क्रिश्ण
02:46ने हमारा नाम लिया तो राजकुमारी भी हमें आप कहकर बुलाने लगी
02:51सच बताईए राजकुमारी आपका रिदय अपनी स्थान पर है या पता नहीं चलिए इतना तो निश्चित हो गया कि आपको
03:04पता ही नहीं कि आपका रिदय आपके पास है या
03:15द्रौपदी का रिदय द्रौपदी की इच्छा के बाहर नहीं है प्रियमदा द्रौपदी के रिदय को वही ग्रहन कर सकता है
03:22जिसका अपना रिदय आकाश जितना अंतहीन और विशाल हो
03:27आपकी बाते सुनकर कभी कभी ऐसा लगता है राजकुमारी जैसे आप आज की नहीं आज से हजारों वर्ष बात की
03:35नारी है आपकी बातों में भविश्य की नारी की अनुगूंच सुनाई पड़ती है
03:43वो सब मैं नहीं जानती प्रियमधा मैं बस इतना जानती हूं कि आज यहां से हजारों वर्ष बात द्रवपदी जहां
03:54भी जनम लेगी यहीं कहेगी जो मैं कह रहे हूं
04:00। । । ।
04:28सत्यадів
04:30मात्र एक व्यक्ति की ग्रना
04:35सबको कितना प्रभावित करती है सत्यादिव
04:38दृपत और द्रोण
04:42एक युवा ना समझ राजकुमार
04:44एक युवा अभिमानी ब्रामन का अपमान कर देता है
04:49ब्रामन अपनी ग्रना का विश्ष
04:51अपने शिश्यों में भर कर
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05:06He will be a good and strong king of the world.
05:13The king of his true king,
05:16he will be able to expand his own own this circle,
05:19the king of his king,
05:19and the king of his king,
05:26his king of his king,
05:26his king of his king,
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