00:00Oh, Shikhandi
00:02No, Shikhandi
00:16Jaha sab swikar hai
00:19Waha bada kaisi
00:21Maha dhanywaad karnei aai thi Vasudew
00:30आप पहले व्यक्ति है जिन्नोंने मुझे इतने आदर और सम्मान से देखा
00:39मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर कितने प्रेम से कहा
00:48Shikhandi कितना सुन्दर नाम है
00:52मैं तो आज तक अपने नाम से घ्रणा करती आई thi
00:57परन्तो क्यों
00:58कई बाहर सोचा
01:01इस महल और शरीर को छोड़ कर कहीं भाग जाओ
01:07परन्तो वो भी नहीं कर पाई
01:16शिकhandi आओ बाहर चलते हैं आओ
01:32प्रतेक व्यक्ति में पूरिश और स्त्री का जोड़ होता है
01:37जिसमें पूरिश अंच्प्रबल होता है वो पूरिश होता है और जिसमें स्त्री अंच्प्रबल होता है वो स्त्री हो जाता है
01:46परन्तु जब धोनों अंच समान हो तो व्यक्ति पूरी तरह से ये सुविकार नहीं कर पाता है कि वो पुरुष
01:53है या स्त्री
01:56तुम्हारी दुविदा भी यही है परन्तु इसे दुविदा की तरह मतलो हम शिव को भी अर्दनारीश्वर कहकर बुकारते हैं आदा
02:07पुर्ष आदे इस्त्री अपने आपको जैसे भी हो सुविकार करो पूरे आर्यवर्ट केवल एक पुर्ष तुम्हारी साहिता कर सकता है
02:19�
02:20जो तुम्हें केवल पुर्ष नहीं है बलकि लोफ पुर्ष बना सकता है और वे है आचारी द्रोण पिता की आग्या
02:29मानकर एक वीर योदा बनना एक योगी शिश्य को एक सच्चा ब्रह्म कभी भी शिक्षा देने से अस्विकार नहीं करता
02:38और फिर गुरुद्रोण केवल
02:41एक ब्राह्मन नहीं है वे तो महान गुरु है तुम उनके सामने पूरी विनम्रता पूरी निष्ठा पूरी निष्कपड़ता और सच्चाई
02:53के साथ जाना उनसे कुछ मत चुपाना
03:02आज तक मैंने किसी स्त्री को भी दरपन के सामने इतना समय लेते हुए नहीं देखा है यह किसने कहा
03:10कि सोंदरी केवल स्त्रियों का विशेश अदिकार है और एक पुरुष का अपने सोंदरी की देखबाल करना अनुच्चित है पुरुष
03:18हटा-कटा और कठोर ही अच्छा �
03:22क्या तुम्हें सदेव अपने आपको पुरुष की ही द्रिष्टी से देखना आवशक है पुरुष की द्रिष्टी में आकर शक दिखना
03:29ही तो स्त्री के संदर की सार्फ़ता है वासुदेव आप पहले पुरुष हैं जो पुरुषों को इतना नीचे रख रहा
03:36है कोई पु
03:49पुरुष्ट्री से नीचे है और नस्त्री पुरुष से नीचे तो क्या दोनु समान है केवल अपनी असमानता में समान है
03:58और दोनों समान रूप से अनुपम है
04:04जैसे पिटाश्री की आपके केश कुंदलों में बढ़िव सुकता है
04:10नहीं कृष्णा यह तो मैं सौंदर्य के लिए कर रहा हूं सौंदर्य तो परमात्मा है हो गया अब चले
04:21कृष्णा शिखंडी की पूर्णता उसके पुरुष होने में है और केवल द्रोन उसकी सायता कर सकते हैं
04:30जब शिखंडी द्रोन की युद्धिशाला से अस्त्र शस्त्र की विद्या पूरी करके लोटेगा तो वो पांचाल के लिए धिश्ट दुम्न
04:39की तरह एक वीर युद्धा से दोगा
04:42और तब महराज दुरुपद को उसका स्वागत करने में अभिमान होगा महराज दुरुपद हमारी प्रतिक्षा कर रहे होंगे चले
04:51प्रणाम पितरश्री प्रणाम महराज अयुश्मान भवा महराज का स्वास्त कैसा है कहीं आप शिखंडी के लिए अधिक चिंति तो नहीं
05:01है
05:04मुझे शिखंडी की चिंता नहीं वासुदेव उस दिन तुम अपदी के स्वेंबर के विश्य में कुछ कह रहे थे
05:15स्वेंबर के लिए तयार है महराज वो स्वेंबर में एक ऐसे धर्णुदारी का वर्ण करेगी जो युद्ध में द्रौन के
05:22शिश्यों को परास्त कर सके
05:26मुझे एक वचन दो
05:29मैं वचन देता हूं महराज परंतु विश्वास कीजिए क्रिश्णा को जीतना किसी के लिए भी इतना सरल नहीं है
05:37क्यों कि श्वेंबर का निम्न भेश्दे समग है मैं तो रहोंगा ही और बलराम भया भी अवश्य रहेंगे इससे आपका
05:57पक
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06:45I think that my problem is because
06:49my life will not be
06:49I think that my life will not be
06:53so much
06:54and my life will not be
06:57so much
06:57I think that all is full of
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