Skip to playerSkip to main content
  • 1 week ago
जानिए महाभारत के अंत में पांडव पुत्र धर्मराज युधिष्ठिर के शरीर सहित स्वर्ग जाने का अद्भुत और रहस्यमयी सच। इस शॉर्ट में देखिए कैसे धर्म और सत्य की राह पर चलने वाले युधिष्ठिर ने सहोदर भाइयों और द्रौपदी के बिना अकेले यह दुर्लभ यात्रा पूरी की। सनातन धर्म और महाभारत के ऐसे ही अनसुने रहस्यों के लिए लाइक और फॉलो करें!
Transcript
00:00Fr.
00:01युधिष्थिर के शरीर सहित स्वर्ग पहुचने का सबसे बड़ा रहस्य महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने हिमालय की और महाप्रयान
00:09की कठिन यात्रा शुरू की थी एक एक करके सभी भाई और द्रौपदी रास्ते में अपनी कमजोरियों के कारण गिरते
00:16चले �
00:16केवल धर्मराज युधिष्थिर ही बिना रुके अकेले आगे बढ़ते रहे क्योंकि वे निश्कलंग थे
00:22अचानक आकाश में स्वयन देवराज इंद्र अपना स्वर्ण रत लेकर युधिष्थिर को लेने प्रकट हुए
00:29इंद्र ने कहा हे युधिष्थिर तुम सश्रीर स्वर्ण चलोगे रत पर विराज मान हो जाओ
00:35लेकिन युधिष्थिर ने अपने वफादार कुट्टे को साथ ले जाने की शर्त रख दी
00:40इंद्र बोले स्वर्ण में कुट्टों का कोई स्थान नहीं है इसे यहीं छोड़ दो
00:45युधिष्थिर ने कहा जो शरण में आया हो उसका त्याग करना सबसे बड़ा पाप है
00:50अब वह कुट्टा कोई और नहीं स्वया धर्मराज यम का ही रूप प्रकट हो गया
00:55सत्य और धर्म की ऐसी निश्था देखने के लिए सनातन धर्म के रहसियों को अभी लाइक और फॉलो करें
Comments

Recommended