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166 दिन जेल में रहे सिपाही, पुलिस ने क्यों मांगी माफी? देखें वारदात

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00:08पुलिस की बहुत सारी कहानिया आपने सुनी होंगी लेकिन आज जो कहानिया आपको सुनाने जा रहा हूं इससे पहले शायद
00:16ही कभी आपने ऐसी कहानी सुनी होगी
00:19यूपी पुलिस में एक सिपाही है अखिलेश तिरपाठी एक रोज पुलिस अखिलेश तिरपाठी के घर पहुंचती है और उन्हें गिरफतार
00:27कर लेती है इसके बाद पहले ठाने फिर अदालत और उसके बाद उन्हें जेल भीज देती है
00:33166 दिन बाद फिर वही पुलिस अखिलेश तिरपाथी के पास आती है
00:38उन्हें सौरी बोलती है और फिर आजाद कर देती है
00:42दरसल पुलिस गलत अखिलेश तिरपाथी को पकड़ लाई थी
00:51अच्छा हुआ कानून के देवी की आँखों से ये पटी हटा ली गए
00:55कम से कम अब वो देख तो पा रही है
00:57कि उसकी आँखों के सामने कैसे कानून और इनसाफ का तमाशा बनाए जा रहा
01:04अगर वो न देख पाती तो शर्तिया अखिलेश तिर्पाथी को कभी आप भी न देख पा रहे
01:11कानून की देवी ने अपनी आँखे खोल कर जब सामने अखिलेश को देखा तब पता चला कि असली अखिलेश तो
01:18ये है ही ने
01:19फिर क्यों ये 166 दिनों तक जेल की सलाखों के पीछे रहा फिर क्यों इसे उस जुर्म की सजा दी
01:26गई जो इसने कभी किया ही ने
01:28कानून की देवी की इन खुली आँखों ने ही हमें ये दिखाया और बताया कि कभी कभार सिर्फ आपका नाम
01:35ही बिना किसी कसूर के आपको जेल की सलाखों के पीछे पहुचा सकता
02:01ये वो कहानी है जिसे काइदे से कानून के विद्द्वानों के साथ साथ कानून के महाफिजों को भी सुननी और
02:09सुनाई जानी चाहिए
02:10ताकि फिर कभी किसी अखिलेश त्रिपाठी को दूसरों के नाम की सजा न काटनी पर को
02:20अखिलेश लखनों के गोंती नगर इलाके में रहते हैं
02:24अखिलेश यूपी पुलिस की खास फोर्स यानि विशेश सुरक्षा बल के सिपाही हैं
02:29मगर पुलिस में होते हुए भी अभी अभी छे महिने जेल की सलाकों के पीछे गुजार कर वापस लोटे
02:36नहीं गलत मत समझेगा इन्होंने न तो अपने पुलिसियार रसूख का इस्तेमाल कर किसी की हकमारी की है और नहीं
02:44कोई कानून तोड़ा
02:45लेकिन इसके बावजूद खुद इनहीं के महकमें ने इन्हें छे महिने के लिए जेल यात्रा करा दी
02:51वो भी बगैर किसी सुनवाई के हथकड़ियों में जकड़ दा
02:55छे महिने तक एक से बढ़कर एक छटे हुए बदमाशों के साथ सेंट्रल जेल में बंदियों की जिंदगी गुजार कर
03:02अखिलेश को अब जाकर
03:04खुली हवा में सांस लेने का मौका मिले
03:08अखिलेश की ये कहानी सुनकर आप ये सोच रहे होंगे कि जब उन्होंने कोई जुर्म किया ही नहीं है
03:13और जब उन पर कोई इल्जाम है ही नहीं तो फिर पुलिस ने उन्हें गिरफतार कर जेल भेजा ही क्यों
03:18तो पहली बार अखिलेश की कहानी सुनकर हम भी इसी सोच में पढ़ दे
03:23लेकिन जब अखिलेश और उनकी धरमपत्नी आराधना ने हमें अपनी पूरी आपबीती सुनाई
03:28तो उसने हमें भी हैरान कर दिया
03:31क्या आप यकीन करेंगे कि अखिलेश को पुलिस ने तो खैर गलत तरीके से गिरफतार किया ही
03:37लेकिन जिस अदालत पर दूद का दूद और पानी का पानी करने की जिम्मेदारी थी
03:41खुद उसी अदालत ने बगैर किसी सुनाई की अखिलेश को सलाखों के पीछे पहुचा दे
03:47जबकि वो पूरी तरब बेकसूर थे
03:53उधर पूरे छे मैने तक जहां अखिलेश इनसाफ की उमीद लिए सलाखों के पीछे एक-एक लम्हा काटते रहे
04:00इधर जेल के बाहर उनकी पतनी और घरवाले अखिलेश को आज़ाद करवाने के लिए ठाने से लेकर अदालत की दहलीज
04:07तक नाम दे रहे
04:08फर्याद करते रहे
04:10असल में अखिलेश की गिरफतारी क्राइम की जुबान में मिस्टेकन आडेंटिटी का एक ऐसा क्लासी केस है
04:16जैसा इससे पहले शायद ही कभी किसी ने सुना हो
04:20इस कहानी के शुरुआत होती है पंदरफ फरवरी से
04:23जब एक बगैर नंबर की ब्लैक स्कॉर्पियों में सवार कुछ लोगों ने उन्हें घर के बाहर से अग्वा कर लिया
04:29अखिलेश और उनके घरवालों ने पहले कुछ ऐसा ही समझा था
04:33लेकिन बाद में पता चला कि उन्हें उठा कर ले जाने वाले कोई और नहीं
04:37बलकि राजस्थान के सवाई माधोपूर जिले की पुलिस थी
04:41अखिलेश को किसी गैंक्स्टर की तरह राजस्थान पुलिस ने तब धर दबोचा
04:45जब शिवरात्री के दिन वो अपने बच्चों के साथ मंदिर में बुजा अर्चना के बाद घर लोट रहे थी
04:51इसके बाद लखनों के सवाई माधोपूर तक पूरे रास्ते वो अपनी बेगुनाही की दलील देते थी
04:57अपनी असली पहचान बताते रहें लेकिन पुलिस वालों ने उनकी एक नहीं सुना
05:04उस दिन सिवरात्री का दिन था मैं मंदिर गया हुआ था जल चड़ा के लोट रहा था बच्चों के साथ
05:12इसके बाद चार लोग खड़े थे रोड पे बिना पूछे ताचे मुझे गाड़ी में बैठा लिया
05:21और बच्चे ने प्रयास किया चुड़ाने का तो उनको धक्का दे दिया और इसके बाद यहां से लेके चले गए
05:28एकदम काली सकार्पियों बिना नंबर की थी
05:32और कोई ना तो वर्दी पहना था ना कुछ एकदम स्विल में थे
06:03खय अखिलेश को उम्मीद थी कि शायद सवाई माधोपूर पहुँच आप ने पहुँआ है
06:07पहुँचने पर उनकी कोई सुनवाई हो लेकिन वहां भी हुआ इसका उल्टा उन्हें सीधे थाने ले जाकर हवालात में ठूस
06:14दिया गया यहां तक की जिस केस में उन्हें पकड़ा गया था उसके आई-ओ यानि इन्विस्टिगेटिव ऑफिसर तक ने
06:20उनसे बूच ता�
06:26थाने में ले गए तो थाने में इस्पेटर महोदय वहां मिले आई-ओ उनसे मैंने बात चिजित करने का प्रयास
06:33किया और बोला कि मैं वो वेक्ती नहीं हूं मैं अखिलेश तिरपाथी इस्पेटर ने मेरी एक न सुनी तो मुझे
06:41कुछ भी नहीं पता उस समें तो मैं 60 था क
06:44कि मैं यहां से ले गए और ना मेरे पास कोई अपना आई-डी मौजूद था और रास्ते से उठा
06:50ले गए थे तो मुझे अपना भी आई-डी हमारे पास नहीं जेम में था ना मुबाइल था मुबाइल भी
06:56घर पर पड़ा हुआ था नहीं से फिर नौ बजे रात को जब हु
07:03हमारे वाइप से बात हुई तब मैंने बताया कि हां कि हमको खुद नहीं पता है किस में उठा के
07:08लाए हैं लोग नो कुछ बता रहे हैं अंदर मुझे उसमें कटगरे में कर दिया है
07:15असल में सवाई माधुपूर पुलिस ने अखिलेश त्रिपाठी को एक ऐसे मुल्जिम की गलत फैमी में पकड़ा था जिसका नाम
07:22भी अखिलेश त्रिपाठी ही था और जिसके खिलाफ राजस्थान में ठगी का केस दर्ज था
07:27धीरे धीरे यूपी पुलिस के सिपाही अखिलेश को इस सच का पता चल गया
07:32और जब अगले दिन यानि 16 फर्वरी को उन्हें सवाई माधुपूर में चीफ जूडिशियल मजिस्ट्रेट यानि सीजेम फर्स्ट की अदालत
07:40में पेश किया गया
07:41तो रिहाई की उम्मीद से उन्होंने अदालत में अपनी पहचान बताते हुए एक एफिडेविट यानि हलफ नामा भी पेश किया
07:48ताकि वो ये बता सके कि वो वो अखिलेश नहीं है जो पुलिस उन्हें समझ रही है
07:54तब तक उनके घरवालों को भी उन्हें सवाई माधोपूर ले जाने की खबर मिल चुकी थी
07:59और वो भी वहाँ पहुंच चुके थी
08:01मगर कमाल देखिए कि पुलिस तो पुलिस खुद अदालत ने भी अखिलेश निपाठी के हलफ नामे को जूठा बताते हुए
08:09उन्हें सीधे जेल भेजने का हुकुम सुना दे
08:13इसके बाद 16 तारिको 49 CGM 1 के हां ये लोगों ने पेश किया
08:19महां मैंने एफी डेविड लगाया कि मैं वो अख्रेश्त पाठी जब बताया गया उस अख्रेश्त पाठी गवारे तो मैंने का
08:27वो मैं अख्रेश्त पाठी नहीं हूँ
08:28मेरा भाई वहां पहुँच चुके थे मेरे भाई सब हमारे रिकार्ड्स पेपर ले करके CGM महोदय के दिखाये लेकिन CGM
08:36महोदय ने हमारी एक न सुनी
08:40और पुलिस का साचसत मानते हुए हमारा एफी डेविड जूठा बताके मुझे जेल बेद दिया गया
08:48मगर ये तो अंधे हो चुके कानून से त्रिभाटी परिवार के जंग की महज शुरुवात पर थी
08:53पती के अगवा हो जाने की खबर मिलने से डरी सहमी आरधना सब से पहले लखनों के ही गोमती नगर
09:00थाने पहुचिए
09:00जहांसे काफी मुश्किलों के बाद उन्हें पता चला कि राजस्थान की गंगापूर सिटी की पुलिस उनके पती को अपने साथ
09:08ले कर गई
09:08इसके बाद जब वो बाकी के घरवालों के साथ राजस्थान गई तो वहां पहुँच कर उन्हें इस गिरफतारी की असली
09:15कहानी का पता चला
09:16असल में अखिलेश को राजस्थान पुलिस ने एक ऐसे अखिलेश त्रिपाठी होने के शक में पकड़ा था जो लखनों के
09:23ही अलिगंज का रहने वाला था
09:25और जिसने लाइन्स म्यूच्वल बेनिफिट कमपनी लिमिटेड नाम से एक फर्जी कमपनी बना कर कथी तोर पर धोखे से लोगों
09:33से लाखों रुपए वसू लेती
10:23अखिलेश त्रिपाठी की मौत
10:2526 साल पहले यानि साल 1999 में ही हो चुकी थी और तोर आरुपी के पिता का नाम विश्वनाथ त्रिपाठी
10:33था और सिवाए मुल्जिम के नाम के गिरफतार अखिलेश के साथ उनकी कोई समानता नहीं थी
10:41सर्द हमें तो ये 31 जुलाई को ही पता चला कि उसकी डेथ 99 में हो गई थी इससे पहले
10:47हमें नहीं पता था क्योंकि वो कौन है कहा है क्या करता है इस बर्दमान में हमें कुछ नहीं पता
10:53हमें तो सिर्फ पेपरों से इतना पता चल पाया था कि कोई अखिलेश त्रिपाठी �
10:57नाम का सक्स है जिसकी डेट आफ बर्थ 19 डेट आफ यर 1957 है और वो सेक्टर जे अली गंज
11:05में कहीं उसने अपना आफिस बनाया था जिसमें उसने अपनी बैंक टाइप की जो भी था फर्म बनाई थी वहाँ
11:10पे वो अपना चला रहा था और राजस्थान में उसने लोगों से �
11:13पैसे जमा करवा रखे थे उनके पैसे लेके ये भाग गए थे इसलिए उनलों ने केस कर रखा था बाकी
11:19वो बरतमान में कहा है इसकी हमें कोई जानकारी नहीं थी और वो मर चुका है ये भी हमें 31
11:24जुलाई को जब पुलिस ने लिखित में दिया कोट में तब हमें पता से �
11:30अब सीजेम के कोट से निराशा हाथ लगी तो फिर अखिलेश के घरवाले हाई कोट पहुचे वहाँ उन्होंने हेबियस कॉर्पस
11:37की आचिका लगाई लेकिन हाई कोट ने उन्हें अरजी वापस लेने का हुकम देते हुए वापस एडिजे यानि अडिशनल डिस्ट्रिक
11:45
11:45जज़ की अदालत में जाने को कहा अब पिडित परिवार एडिजे की अदालत में पहुचा लेकिन एडिजे की कोट ने
11:51क्या कहा आप वो भी सुनी
11:55क्योंकि वहां के जो वकिल ले थे उन्होंने सहला दी कि आप हैवियस कॉर्पस लगा दो हाई कोट में तो
12:01उससे रहत मिल जाएगी तो हम लोग हैवियस कॉर्पस के लिए वहां चले गए वहां जब हैवियस कॉर्पस लगाई तो
12:06वहां के जो जज थे हमारे उन्होंने कहा क
12:09कि आप आप की हेवियर्ज कोरपस मेंट इने वल नहीं है है call इसे वापस एडीजे में जाओ
12:13वहांसे जमानत कराओ जाएकर तो फिर अमनों वहां से एडी जोए आप जोरी-जोर्ष बंच में ने कूरी जाच कर
12:33ली है
12:33और सीजेम ने सारी जाच करने के बाद ही आपको मुझरिम गोसित किया है और उनका कहिना है कि अगर
12:39इसको जमानत मिल गई तो ये फिर से भाग जाएगा क्योंकि बहुत दिनों बाद ये पकड़ में आया है
12:44यानि पहले पुलिस ने फिर सीजेम ने और फिर एडीजे की कोट ने तमाम तक्थियों की अंदेखी कर दी और
12:50पुलिस कर्मी अखिलेश को जमानत देने से मना कर दिया
12:53जबकि गिरफतार अखिलेश त्रिपाठी की बेगुनाही के कई सबूत थे
12:58ऐसे में ADJ की अदालत से मिली निराशा के बाद
13:01त्रिपाठी परिवार ने एक बार फिर हाई कोट के दर्वाजे पर दस्तक दी
13:06हाई कोट को बताया कि जब लोगों के पैसे ठगने वाली
13:09लाइन्स म्यूच्वल बेनिफिट कंपनी लिमिटेड नाम की कंपनी का 1994 में
13:14रेजिस्टेशन हुआ था तब गिरफतार अखिलेश की उम्र महस 17 साल की थी
13:18और वो स्कूल में पढ़ रहे थी और जब 4 साल बाद यानि साल 1998 में
13:23इस कंपनी पर ठगी का मुकदमा दर्ज हुआ तो गिरफतार अखिलेश त्रिपाथी
13:28इंटर्मीडियेट की पढ़ाई कर रहे थी ऐसे में भला उनका ठगी के उस केस से क्या वास्ता हो सकता है
13:36हमारे जो वकीर साब थे वहाँ पर उन्होंने जमानत लगाई थी इस मतलब आधार के साथ में कि मैं वो
13:42सक्स नहीं हूं
13:43मुझे गलत तरीके से उठाया गया है मैं मुझरिम नहीं हूं क्योंकि ये 98 का केस है
13:4998 में मेरे पती इंटर कश्क्षा में पढ़ रहे थे और उसकी हमारे पास मार्कशीट्स थी तो हमने सबुत के
13:56तौर पे लगाई थी
13:57और हम लोगों ने जो कमपनी थी लाइंस मीच्वल बेनिफिट्स लिम्टेट करके उसके पेपर कानपूर रजिस्टार आफिस से निकल वाई
14:04और उन पेपरों के वेस पे हम वहाँ पे साबित कर रहे थे कि हमारे पती जो हैं वो मुझरिम
14:09नहीं है
14:09क्योंकि वो कमपनी 1994 में रजिस्टर रुई थी और 1994 में मेरे पती जो थे वो है स्कूल में पढ़
14:16रहे थे और 17 एर एज थी उनकी
14:18तो ये सारे आधार लेते हुए हमने वहाँ पे जमानत लगा रखी थी
14:23हाई कोट में सिर्फ अखिलेश की जमानत पर ही तकरीबन तीन साड़े तीन महिने तक सुनवाई चलती रहे
14:28और आखिर में कोट ने सवाई माधुपूर की S.P. को अदालत में तलब किया
14:33और ये पूछा कि मुल्जिम तो खुद को बेगुनाह बता रहा है और इसका सबूत भी दे रहा है
14:38अब आप ये बताएं क्या कि आपके पास मुल्जिम के कसुरवार होने के क्या सबूत है
14:44खासकर इस बात के क्या प्रमान है कि ये वही अखिलेश त्रिपाठी है जिनकी आपको तलाश है
14:50यही वो घड़ी थी जब पहली बार सवाई माधुपूर की पुलिस को मानना पड़ा कि उन्होंने गलत अखिलेश त्रिपाठी को
14:57पकड़ा रहे
14:58क्यूंकि उनके पास गिरफ़तार अखिलेश के खिलाफ कोई सबूत ही नहीं था
15:02तो उसी पे हाई कोट ने लगवक तीन साड़े तीन महीने उनकी सुनवाई चलती रही
15:08आईो से रिपोर्टस मंगाई, कोट से रिपोर्टस मंगाई
15:10ही यह सब करते हुए जब उन्होंने आएस पी सापको प्रूट में तलब किया और उनसे मतलब का
15:17कि आप यह कह रहे हैं कि मैं वो सक्स नहीं हूँ और यह प्रूफ भी दे रहहे हैं अब
15:21आप प्रूफ दो कि आक करसे आ
15:24तो जब ये बात उन लोगों के सामने आई तो साइद उनके पास प्रूफ नहीं थे क्या कारड़ता तब उन्होंने
15:30जाके सीजियम में ये कबूल किया कि हम गलत आदमी उठाना है और जो सही मुझरिम है वो मर चुका
15:36है अकलेश तिरपाथी शनौक श्री सिगना तिरपाथी क
15:41तो गंगापूर प्रिलिस के द्वारा लखनों से लाकर 166 दिन बे बज़य उसको जेल में रहना पड़ा जिसकी बज़य से
15:51हमारे द्वारा यहां पर नियायले के शमक्चुस को जब प्रस्तुत किया गया तो भिविन कारवाईयं की गई ताकि उसको नियाय
15:59मिल पाए लेकि
16:00नियायले स्रीमान ACJM के द्वारा लंगापूर्ट के द्वारा भी उनको तीन महने का अत्रिक्ट कारवास एफिडेविक लेने के बाद भी
16:10कर दिया गया बाद में उनकी डिटेंशन को इलीगल प्रूब करने के लिए हमारे द्वारा राइस्तान उच्छी नियायले के शमक
16:30यह जात हुआ कि वह वह आदमी ही नहीं है जिसकी पुलिस को चाहत थी और पुलिस की इस कारे
16:38सेली की बज़े से उसे 166 दिन जील में रहना पड़ा और यह सारी चीजें सिर्फ इस बज़े से हुई
16:46क्योंकि जिस बिक्ति की चाहत थी पुलिस को जो वारंटी था उसके उप
16:5025,000 रुबे का इनाम था यानि तक्रीबन 6 महीने के बाद अखिलेश की रिहाई का रास्ता फाई कोट से
16:58खुला लेकिन इन 6 महीनों में खुद अखिलेश और उनके परिवार ने जो कुछ छेला जितना गवाया और जो कुछ
17:05बरदाश्त किया उसकी शायद ही कोई भरपाई ह
17:10सर मांसिक प्रेसर तो था ही सर मैं हाउस वाइफ हूँ मेरे पती ही कमाते हैं दो बच्चे हैं हमारे
17:16और जब से इनको उठा के ले गए ते तब से इनकी सैलरी भी बंद थी 6 महीने से अभी
17:21तक कोई सैलरी नहीं आ रही है फिर घर के खर्चे भी थे और फिर कोट में लड़न
17:38और लगा के हमने किसी तरह से यहां तक लड़के ओम छुड़ा के लेके आप आए हैं बहुत ज़्यादा इस
17:45पे मेरा पैसा भी खर्चुगा और इसमें सबसे ज़्यादा मेरे बच्चों की पढ़ाई डिस्टर्ब हुई क्योंकि मैं यहां पे रह
17:51नहीं पाती थी आना जान
17:54और तो और 166 दिनों की जेल ने अखिलेश को कभी न भूलने वाला एक सदमा भी दिया भतीजे के
18:01जेल जाने के गम में उनके चाचा को हाट अटैक आ गया और करीब महीने भर तक अपने भतीजे का
18:06इंतजार करते हुए आखिरकार चाचा ने 20 जून को दुनिया छोड़ दी
18:12फिलाल अखिलेश ने अपनी नोकरी दोबारा तो जॉइन कर ली है खुद उनका महकमा इस बात से संतुष्ट है कि
18:19वो गुनेगार नहीं है उन्हें जूटे केस में गिरफतार किया गया था लेकिन इसके बावजूद जेल में बिताए गए इन
18:26166 दिनों ने उन्हें बेग�
18:41को लेकर उनकी पत्नी जहपुर से यूपी दरदर भटक रही थी और दोश कुछ भी नहीं था क्योंकि राजिस्थान पुलिस
18:50ने अखलेश तर पार्टी को किसी दूसरे सक्स जिसकी मौत तकरीबन 26 साल पहले हो गई थी उसकी जगह पर
18:59गिरफतार करके जेल भेज दिया था
19:02अब ऐसे में यह अपने आपको थाबित करते रहे, पिजसर करते रहे, अपनी लड़ाई लड़ते रहे, उसके बाद 166 दिनों
19:10बाद इनको अधालश से राहत मिल पाई। लेकिन इस बीच नहीं मैजिस्ट्रेट ने इनकी बाद सुनी, नहीं पुलिस ने इनकी
19:18बाद सुनी
19:19ना ही लोकल पुलिस ने इनकी बात सुनी ना ही किसी प्रशासन ने
19:23अब ऐसे में पूरा परिवार लाखों रुपए इस पूरे केस में लगा के
19:28जो पहले से ही निर्दोस थे वापस घरा सके हैं
19:33सिस्टम के इस फेलियर को लेकर पूरा परिवार काफी परिशान रहा
19:38और कहीं ना कहीं ऐसे दोशियों के खिलाफ कारवाई की बात कर रहा है
19:45सवाई माधुपूर से सुनील जोशी के साथ आशीश शिवास्तो लखनव आच्छतो
19:54बैंगलूरू में एक पत्नी ने अपने पती का कतल कर दिया
19:57पर इस पत्नी ने सिर्फ अपने पती को नहीं मारा
20:00बलकि पती के बराबर में सो रहे पांच साल के बेटे को भी मा डाला
20:05हुआ यूं कि जब पत्नी अपने पती का कतल कर रही थी
20:09तब बेटा जाग गया
20:10मा को लगा कि उसने सब कुछ देख लिया है
20:13और वो एक चश्मदीद है
20:15बस सर्फ इसी वज़ा से उसी मा ने अपने हाथों से अपने बेटे का गला घोंट डाना
20:32इस मास्क के पीछे एक पिता है
20:34एक ऐसा पिता जो पांच साल के अपने बच्चे के साथ इस वक्त खेल रहा है
20:39और उसे हसाने की कोशिश कर रहा है
20:46कैमरे के आगे से उस बच्चे के हसने की आवाज भी आ रही है
20:58और ये है वो बच्चा
21:00मास्क वाले उसी पिता का बेटा
21:03और ये रहा वो फैमिली अल्बम जिसमें पिता, बेटा और मां तीनो एकी फ्रेम में मौजूद है
21:09फ्रेम में कैद इस तस्वीर को देखकर हर गोई यही कहेगा कि क्या परफिक्ट और कम्प्लीट फैमली है
21:18लेकिन जरार रुकिए इससे पहले कि आप अपनी कोई राय बना ले इस घर के अंदर चलते हैं
21:25यह घर 38 साल के अभिनंदन का है इस घर में अभिनंदन उसकी पत्नी हरीनी और 5 साल का बेटा
21:32रहते हैं
21:32बेंगलूरू में मौझूद अभिनंदन के इस घर में इस वक्त पुलिस आई हुई है
21:37में गेट से पुलिस वाले इस कॉरिडॉर में आते हैं और फिर अंदर बेडरूम की तरफ चले जाते हैं
21:43इस कॉरिडॉर को अगर आप गौर से देखेंगे तो साफ पता चलता है कि अभिनंदन ने मास्क पहन कर जिस
21:50जगर वीडियो शूट किया था ये वही कॉरिडॉर है
22:07तो देखा दोनों सो रहे हैं जब उसने उन्हें उठाने की कोशिश की तो काफी आवाज देने पर भी दोनों
22:14नहीं उठी इसी के बाद बदहवास उसने पुलिस को फोन किया
22:18अभिनंदन और उसके बेटे को पुलिस फोरण अस्पताल ले जाती है लेकिन अस्पताल जाने के बाद पता चलता है कि
22:25दोनों की मौत हो चुकी है
22:26अब पुलिस इस उलजन में थी कि ऐसा क्या हो सकता है कि बाप बेटे की मौत एक साथ हो
22:32गई
22:32अब तक यही लग रहा था कि मामला संदिग्ध तो है पर शायद मर्डर नहीं लेकिन हाल के वक्त में
22:39देश भर में ऐसे इतने केस हो चुके हैं कि बेंगलूरू पुलिस ने इस केस को भी शक्की निगास से
22:45देखना शुरू किया
22:46इसी दोरान डॉक्टरों से पुलिस को पता चला कि अभिनंदन के जिस्म पर जख्मों के कुछ निशान है पुलिस का
22:54शक थोड़ा और गहराया पर पुलिस अभी ये समझ नहीं पा रही थी कि अगर मामला कतल का है और
23:00हरीनी नहीं ये कतल किया है तो वो अपने बेटे को क्य
23:16पतनी में अक्सर जगड़ा होने लगा यहां तक की करीब साल भर पहले से पती और पतनी दोनों एक ही
23:23घर में रहते हुए भी अलग-अलग कमरे में सोते थे हरीनी अलग कमरे में सोती जबकि अभिनंदन अपने वेटे
23:29के साथ दूसरे कमरे में अब पुलिस ने जब हरीनी के
23:33मोबाइल फोन को खंगाला तो अजीब चीज पाई हरीनी ने 16 अगस्त की रात से पहले के सारे चैड, कॉल
23:40डिटेल, वीडियो गैलरी, फोन गैलरी, फोटो गैलरी सब खाली कर रखी थी एक और अजीब चीज पाई वो ये कि
23:4816 अगस्त की रात घर का CCTV कैमरा बंद हो गया था
23:52अब शक की विना पर पुलिस हरीनी से पूछताच करती है, हरीनी पुलिस के सवालों का ठीक ठीक जवाब नहीं
23:59दे पा रहे थी, कुछ वक्त बाद ही पुलिस की सकती के आगे हरीनी ने सच बोलना शुरू कर दिया,
24:05दो साल पहले हुए जगड़े के बाद हरीनी की जिंदग
24:21का वैसला करती है, 16 गस्त की रात अभिनंदन अपने बेटे के साथ दूसरे कमरे में सोने चला जाता है,
24:27इधर हरीनी तभी विना को घर बुला लेती है, घर के अंदर कॉरिडॉर में वो इसी कार के पीछे छुपा
24:34रहता है, फिर रात करीब साढ़े बारा बचे हरीनी और व
24:51रातों पिता को मरते वो देख लेता है, पस इसी लिए हरीनी पती के बाद अपने बेटे का भी गला
24:57घोट डालती है, विजय और हरीनी इस वक्त बेंगलूरू पुलिस की कस्टडी में हैं, और इस तरह एक और पत्नी
25:05के हाथों एक पती मारा गया, पर अफसोर वो पत्नी ज
25:21इस लालत रही है, मगर देश और दुनिया की बाकि खबरों के लिए, आप देखते रही है आज तरह.
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