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चुनावी चंदे के डर्टी गेम को लेकर बड़ा खुलासा, देखिए खबरदार में
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00:00नमस्कार मैं श्वेता सिंग आपका स्वागत करती हूँ रापके आच बच रहे हैं वक्त है बड़ी खबरों से आपको खबरदार
00:05करने का
00:06आज हम आपके लिए अंजान पार्टियों को मिलने वाले अर्बों के चंदे से जुड़ी बड़ी पड़ताल लेकर आएं
00:14गुजरात, दिल्ली, हर्याना, एंपी, बिहार में हम उन पार्टियों के दफ्तर में गए जिन्हें करोणों नहीं अर्बों रुपए का चंदा
00:23मिला है
00:23छोटी पार्टी, बड़ा खेल, इससे जुड़ी पड़ताल हमारी आज की कवर स्टोरी
00:30इसके बाद बात करेंगे आका शानन्द की, जो बिएसपी से निकाले जाने के बाद अब कहा जाएंगे यूपी की सियासत
00:36से जुड़ा, ये बड़ा सवाल है
00:38तीसरी बड़ी खबर भी यूपी से है, जहां हाई कोर्ट ने SHO SP को जूटों के जूट के उपाधी दी
00:46हाई कोर्ट ने ऐसा क्यूं कहा, पूरी खबर जानने के लिए हमारे साथ बने रहे है
00:50लेकिन सबसे पहले बात दलों की जो काघजों पर है, जिनके खातों में करोडों नहीं
00:57अर्बों रुपए चुनावी चंदे के रूप में जमा किये जाते हैं
01:00ये वो दल है जो नाम के लिए चुनाव लड़ते हैं, जिनका देश में एक भी सांसद या विधायक नहीं
01:07है
01:07लेकिन फिर भी इनका बैंक बैलन्स बड़े बड़े दलों से कहीं ज्यादा है
01:14आखिर कौन इन गुमनाम दलों कुमाला माल कर रहा है, कौन है मुलो जो इन पार्टियों को करोड़ों रुपए का
01:20चुनावी चंदा दे रहे हैं
01:22आप पार्टियों के नाम सुनिए, पूरी संभावना है कि इससे पहले आपने इन पार्टियों के नाम कभी सुने ही नहीं
01:28होंगे, लेकिन फिर भी इन्हें चंदा मिल रहा है, आम जन्मत पार्टी 620 करोड रुपए, सत्यवादी रक्षक पार्टी 330 करोड
01:40रुपए, स्वतंत
01:52पार्टियों के नाम में सत्यवादी जन्मत, अभिव्यक्ति, गरीब कल्यान लगा है, लेकिन इनका असल काम कुछ और ही लग रहा
02:00है, आज तक की टीम ने पांच राज्यों में जाकर, इन काघजी दलों की हकीकत से देश को खबरदार करने
02:07के लिए पड़ताल की है, इसकी �
02:09शुरुआ थमनी की गुजराच से जहां गांधी नगर, एहमदाबाद, आणंद और सुरेंद्र नगर में बनाए गए इन अंजान पार्टियों के
02:15दफ्तर हैं, हमें क्या मिला, आईए देखते हैं
02:22गांधी नगर का मेग मलहर कॉंप्लेक्स
02:25पहली नजर में ये भले ही आपको किसी दूसरे शॉपिंग कॉंप्लेक्स की तरह लगे, लेकिन इसे भारतिय नेशनल जनता दल
02:32का दफ्तर बहत खास बनाता है
02:35भले आपने आज से पहले इस पार्टि का नाम ना सुनाओ, इसके संगस्थापक वियम गजेरा को ना जानते हो
02:41भले ही ये किसी राजनितिक दल से ज्यादा कोई आम ओफिस लगे, लेकिन फिर भी ये खास है, आखिर कैसे?
02:49भारतिय नेशनल जनता दल जिसका रेजिस्ट्रेशन साल 2009 में हुआ और इसकी आधिकारिक जो ओफिस है वो गुजरात के गाधी
02:57नगर में मौझूद है और फिलाल गाधी नगर के उसी बिल्डिंग में हम मौझूद है जहां रेजिस्टर्ड ओफिस यहां पे
03:03मौझूद है
03:04लेकिन आप तस्वीरों में देख पा रहे हैं भारतिय नेशनल जनता दल की सेंटरल ओफिस के साथ ही सकती एंटरप्राइज
03:09का भी बोर्ड यहां पे लगा हुआ है जिसके संस्तापक एसवी गजेरा के तौर पे बताया जा रहा है साथ
03:14ही में हम जब इस ओफिस पर भी पह�
03:30ना कोई संसत इसके बावजूद इस पार्टी ने इतना चंदा जुटा लिया है जिससे सुनकर आप हैरान रह जाएगी भारतिय
03:38नेशनल जनता पार्टी का दफ्तर भले ही सामानी हो लेकिन इसे मिले चंदे के लिए ऐसा नहीं कहा जा सकता
03:43क्योंकि साल 2023 में से 191 करोड रु
04:00इमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट में सामनी आई है जो मुख्य फिलाल इस ओफिस को चला रहे हैं उनसे भी जब
04:07हमारी बातचीत हुई तब उनका कहना था कि आप हमारा जो भी रिपोर्ट है वो इलेक्शन कमिशन से पूछिए जब
04:13हमने उनसे ये भी जानना चाह
04:15कि आपको 957 करोड का चंदा साल 2009 से लेकर अब तक मिला है तो उन्होंने एक उची आवाज में
04:24बात करते हुए हमसे कहा कि ये हमें इसके बारे में आप क्यूं पूछ रहे हैं अब तक आप हमसे
04:29क्यूं पूछने नहीं आए चुनाओ के वक्त आप हमसे क्यूं बातचीत नही
04:45दावा है कि आम जंता पाटी को 620 करोड रुपे, सत्तिवाधी रख्षक पाटी को 330 करोड रुपे, स्वतंतरता अभिव्यक्ति पाटी
04:54को 219 करोड रुपे, न्यू इंडिया युनाइटिट पाटी को 200 करोड, गरीब कल्यान पाटी को 138 करोड रुपे शामेल है
05:03देश में ऐसी कागसी पार्टियों को कैसे इतना ज्यादा चुनावी चंदा मिल रहा है
05:07इन पार्टियों की असलियत क्या है इसकी परताल के लिए आज तक के रिपोर्टर बिहार, हरग्याना, दिल्ली, गुजरात और मध्यप्रदेश
05:15तक गए
05:15ताकि गुमनाम पार्टियों की हकीकत से देश को खवरदार किया जा सके
05:21इसी सिलसिले में आज तक समभदाता गुजरात के आनन शहर पहुची, जहां सत्यवादी रखशक पार्टी का दफ्तर है
05:28योगी पुजय नाम की सोसाइटी में बताए जा रहा है इसके आफिस में जब हम पहुचे तो हमें फ्लैट के
05:34दर्वाजे पर ताला लटका मिला
05:35वहाँ ना पार्टी का कोई बोर्ट था और ना ही कोई पोस्टर चिपका था
05:39जिससे पता चल सके कि ये सच में पार्टी का रइस्टर्ड ऑफिस है
05:44अभी मेरी मौजुद की है गुजरात के आनन जिल्ले के सत्यवादी रखशक पार्टी का जो कार्याले है
05:51जो ओफिशियल कार्याले दर्श किया गया है वहाँ पर है
05:54आप देख सकते हैं कि यहाँ पर ताला लगा हुआ है
05:59ये बंद फ्लेट पर न कोई नेम प्लेट है न कोई बैनर है नहीं कोई जंडा है
06:04और नहीं कोई पार्टी का कार्याकरता फिलाल यहाँ पर दिखाई दे रहा है
06:09आपको जानकर ताजुब होगा कि इस पार्टी को साल 2023 में 330 करोड रुपे का चंदा मिला है
06:19आप ही सोचे जिस पार्टी को 330 करोड रुपे का चंदा मिल चुका होगा
06:23उसके बताए गए दफ्तर पर ताला लटकने का मतलब पूरी दाल ही काली है वाला मामला है
06:30क्योंकि इतना बड़ा चंदा मिलने के बावजूद साल 2024 के लोग सभाचुनाव में पार्टी ने सिर्फ एक उम्मिद्वार चुनावी मैदान
06:37में उता रहा था
06:37लेकिन हमारी परताल यहीं नहीं रूखी और आज तक समवताता ने सत्यवाजी रक्षक पार्टी की अध्यक्ष का घर ढूंड निकाला
06:44और बात की
06:46हमारे चुम पार्टी ने साथ संत Señwadi रक्षक पार्टी है ज्योंके प्रेसिडें साथिडीन है उग सार्थीट से राटी हमसे बात
06:53करेंगे सार्थीडन आप्ति जो पार्टी ही ती हो थी 1234 में
06:56320 करोड का चंदा विला था और आपकी पाटी से एक पत्याशी जो है पुचिणावी मैला में होगा था?
07:02अभी पाटी का क्या स्टेटस है और क्या कारूश चारूश चालिश का बारा है और मनंपन पढ़ दया हो साथ
07:34आपने देखा कि जैसे आज तक संबाधाता ने चुनावी चंदे से जुड़ा सवाल किया, सत्यवादी रक्षक पार्टी की अंध्यक्ष रही
07:40इस महिला का मिजाज ही बदल गया
07:55मेरे साथ कोई था ने याप Sif Akiri थी ने मेरे साथ देखा अपर मेरे साथ इस अपर मेरे नाम
08:01से पार्टी मेरे नाम से पार्टी यही नहीं थी इसमें हमध्या बादे सब लोग मनुव में नहीं थी अब लोग
08:10बन पर दो असए क्यों इंटरी पी लेना क appelle बदल एदेखा कि अ�
08:23आप किसी के गुराखेस नहीं गया हुदे, उसा बाचा ने बन पर दर्फ लोग, मुझे पॉसन नहीं है साब, मैं
08:29से दर्वाजाही नहीं कोई लगागी है, इसा नहीं करना चाहिए, हम ले पैसा कहा है, हो सब जानके आपको क्या
08:34पता, क्या करना है, आप तो इतने उपर की ल
08:53हमारे पास जो चंदाया था, अभी जो पार्टी है, वो अभी नहीं चल रही हूँ, पार्टी अभी बन कर दी
08:59गई है, फिर भी इस पार्टी के अध्यक्ष रही महिला, चुनावी चंदे को लेकर कुछ नहीं जाने, चंदा दान में
09:18देने का दावा करती है, लेकिन किसे कब
09:21कुछ नहीं पता देश में भले ही जनता अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए जद्व जहद कर रही हो लेकिन उसी
09:29देश में ना मांत्र के वोट पाने वाली रजिस्टर्ड गैर माननेता प्राप्त राजनेतिक पार्टियां जिन्हें कहा जाता है वो दीन
09:36दुनी राज चोगों
09:36की प्रगति कर रही सबसे बड़ी बात यह है कि ऐसी पार्टियों का नेटवर्क सारे देश में फैला है
10:06योग देख सके कि किस तरह से अर्बोर उपए चुनावी चंदे लेकर ये पार्टियां जनता और कानून सबका मज़ाक उड़ा
10:13रहे है
10:18क्या आपने आम जन्मत पार्टी के बारे में सुना है
10:22यह उसी का उफिस है आप कहें कि कौन सी आम जन्मत पार्टी
10:26तो जवाब आपको हैरान करने वाला है
10:29साल 2023-24 में इस पार्टी के पास 620 करोड डोनेशन के रूप में आए
10:34जो कौंग्रेस पार्टी के मुकाबले दोगुने से भी स्यादा है
10:39एमदाबाद के रगवीर अपार्ट्मेंट में इसी आम जन्मत पार्टी का दफ्तर है
10:58इस पार्टी का दफ्तर भले ही बंद लेकिन इसकी वेबसाइट चल रही जिसमें गौरब मिश्रा को पार्टी का राष्टी अध्यक्ष
11:04बताए गया है
11:05गौरब मिश्रा के बारे में जो लाईने लिखी है उससे पता चलता है कि 10 साल सामाजी कारियों में लगने
11:10के बाद
11:25दुकान को खाली करके आम जन्मत पार्टी के जो प्रेसिडेंट बताए जा रहे हैं वेबसाइट पर गौरब मिश्रा वो तो
11:32यहां से फिलहाल जा चुके हैं
11:34गौरब मिश्रा को लेकर भी हमने जाज परताल करने की कोशिश की लेकिन सीधे तोर पर कोई पता तो नहीं
11:38चल पा रहा है लेकिन मैं आपको एक वेबसाइट भी बताऊंगा जो की
11:42ए जी पर नाम से वेबसाइट भी अभी भी मौजूद है और जब उसके साथ हम कॉंटेक करने की किसी
11:48को कोशिश भी कर रहा है तो एक फोन नमबर यहां पर दिखाई पड़ता है
11:50720-392-2922
11:53इस नंबर पर भी जब हम बात करने की कोशिश कर रहे हैं
11:56तो incoming call इस नंबर पर बंद होने की जो information है
12:01वो हमारे सामने आ रहे हैं
12:04तो party की website चल रही है
12:05लेकिन नेताओं का आता पता नहीं है
12:07phone पर बात भी नहीं हो रही है
12:13फिर हमें हितेश भाई मिले हैं
12:15जिनकी इसी मार्केट में दुकान है
12:18हितेश भाई ने बताया
12:19कि सवा साल से 620 करोड रुपे चंदा पाने वाली party का दफ्तर बंद है
12:26यह लास्ट एक सवा साल से ओफिस यहां तो है ही नहीं उसकी
12:31वो लोग यहां से चले गए बंद करके
12:33और अभी दुकान भी बिख गई है अभी किसने लिए वो तो मालूम नहीं है
12:39और वो लोग तो यहां से सब सामान बामान बरके चले गए
12:41पहले यहां चालू था उनका आम जन्मत पार्टी के नाम से
12:45कौन-कौन आम जन्मत पार्टी के नाम से यहां आते थे जैसे गवरो मिश्रा नाम बताया जा रहा है
12:49तो वो नाम था गवरो मिश्रा और एक दर्मेंद्र भाई करके कोई है बस और मेरे को मालूम नहीं है
12:55नाम और थे तिन चार आदमी साथ में थे
12:59वेबसाइट पर जैसे हम जब देख रहे हैं अमित व्यास और बाकी विजेसी परमार इन सब का भी नाम है
13:03क्या इन लोग ये भी कोई आगे थे हाँ हो नाम से तो नहीं पता लेकिन वो लोग आते थे
13:07यहां चार-पांच आदमी बेटते थे एसा मेरे को मालूम है
13:32सोची एक ऐसी पार्टी जिसका दफ्तर बंद पड़ा अध्यक्स दे संपर्क ना हो पारा उसकी वेबसाइट खुलेयां डोनेशन मांग रही
13:39है
13:39पैसे भीजने के लिए तीन-तीन बेंट थातों की जानकारी दी गई
13:46दिल्चस्प बात यह है कि आम जन्मत पार्टी को बिहार में साल 2020 में रईस्टर किया गया
13:51पार्टी को अगले दो साल सिर्फ 20,000 तक ही चंदा मिला
13:54फिर अचानक से 2022-23 में आम जन्मत पार्टी ने 216 करोड का चंदा जमा कर लिए
14:04पड़ी बात यह है कि रईस्टर होने के बाद पार्टी एहमदाबाद शिफ्ट रोबे और उसे मिलने वाले चंदे में भी
14:09बेतहाशा एजाफा हुआ
14:13लेकिन ऐसी पार्टियों के एहमदाबाद में कमी नहीं है
14:16अब आपके सामने शूर इंडिया युनाइटिट पार्टी का दफ्तर है
14:21जिससे साल 2023-24 में 200 करोड का चंदा मिला
14:24जिसके आधिकारिक वेबसाइट पर ऑफिस का पता एहमदाबाद के नरोड़ा का उर्वी कम्पलेक्स दर्ज है
14:31जब हम इस पार्टी की परताल करने उर्वी कम्पलेक्स की दूसरी मंजिल पर पहुंचे
14:36तो यहाँ भी हमें ताला लड़का हुआ दिना
14:39कम्पलेक्स की तीसरी मंजिल पर न्यू इंडिया युनाइटेट पार्टी का उफिस है
14:42लेकिन कम्पलेक्स में न्यू इंडिया युनाइटेट पार्टी का कोई बोर्ट तक नहीं लगा
14:48जब हम इस उफिस के दफ्तर पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं
14:52तो दूसरी मंजिल पर एक दर्वाजा है, इसी दर्वाजे पर आप देख पा रहे हैं, एक बड़ा सा ताला यहां
14:58पर लटका हुआ दिखाई पड़ रहा है, और इसी ओफिस के अंदर पिछले कई समय से जो स्थानिये लोग हैं,
15:04आसपास के दुकानदार हैं, वो कह रहे हैं क
15:06New India United Party की office यहां पर चल रही थी, जो website भी है, वो website भी मैं कुशिश
15:12करूँगा आपको दिखाने की, क्योंकि New India United Party की website और उसके उपर जो इस party को चलाने वाले
15:20सभी लोग हैं, उनके बारे में information भी है, leadership की जानकारी देते हुए बताया गया है कि Amit Chaturvedi
15:26जो की national president है New India United Party के, साथ
15:32जो की वाइस प्रेसिडेंट यहां पर बताये जा रहे हैं और जनरल सेक्रेटरी के तौर पर डाया भाई मोधी का
15:38नाम यहां पर दर जानकारी देते हैं, उसके मुताबिक साल 2019 से 2024 तक 608 करोड रुपे इंकम हुई, फिर
15:51भी उसकी पार्टी के दफ्तर का हाल बेहाल देखा ह
15:56काज़ी पार्टीों को लेकर हमारी परताल हमें एहमदाबाद से 145 किलोमेटर दूर स्तुरेंदर नगर लेकर गई, जहां पर हमें सौराष्ट
16:04जन्ता पार्टी के दफ्तर पर ताला लटका मिला
16:08सौराष्ट जन्ता पार्टी के नाम से जो पक्स की स्टापना की दी और ये पक्स है जो 2021-22 में
16:14तारा सब्यों के लिए यहां उमेदवार भी खड़े किये थे
16:32सौराष्ट जन्ता पार्टी के दरब से जारी आएके आखड़े बताते हैं कि इस पार्टी को 2019-2024 तक 200 करोड
16:39रुपे के आए हुई
16:40लेकिन इतना पैसा किस ने दिया ये बताने वाला हमें कोई नहीं मिला
16:47लोकसवा चुनाओ से पहले के वित्के वर्ष में सबसे ज्यादा चंदा पाने वाली इन सभी रैस्टर्ट गहर माननेता प्राप्त राजनेतिक
16:54पार्टियों की पर्ताल के दौरान जो एक बात निकल कर आई वो थी फंड को लेकर पार्दर्शिता की कमी
16:59अतुम्तिवारि एहमदाबाद आज तरब
17:04अब गुजरात के बाद हमारी पर्ताल दिल्ली हर्याना होते हुए बिहार भी पहुंची इसके बाद हम मध्यप्रदेश के जबलपूर भी
17:12गए
17:13खबरदार करने वाली बात ये है कि इस तरह की पार्टियों की जानकारी जुटाना कोई मुश्किल काम नहीं है
17:18फिर भी इन पार्टियों पर किसी जाज एजनसी की नजर नहीं पड़ती हो सकता है कुछ दलों पर छापे मारी
17:25भी की गई हो
17:26लेकिन जिस तरह खुलकर ये सब कुछ हो रहा है वो वाकई हैरान करता है
17:33साल 2015-16 में 4.37.000.000 के मुकाबले 2022 से 2024 के बीच 10.000.000.000 करोड़ों
17:41से ज्यादा का जुनावी चंदा दिया गया
17:43भारत में कई अंजान राजनितिक डलों की आउडिक और चंदे की रिपोर्ट से पता चलता है कि उन्हें मिलने वाला
17:49चंदा देश की राष्ट्य पार्टियों को मिलने वाले चंदे से भी ज्यादा हो गया है
17:56यह खेल सिर्फ गुजरात तक्सी में नहीं है राजधानी दिल्ली की भारती जनक्रांती दल की कहानी भी अलग नहीं है
18:11दक्षणी दिल्ली में जो पता दिया गया जब हम वहां पढ़ता हल के लिए पहुँचे तो पार्टि को मिले चंदे
18:21को लेकर जवाब देने वाला कोई नहीं मिला
18:22यहां पे दो परिवार किराय पे रहता है कई महीने से रहता है उन्होंने कैमरे पे तो कुछ नहीं बोला
18:28लेकिन कैमरे के बज़ाए उन्होंने बताया कि वो यहां कई महीने से रहते हैं और किसी भी तरह का कोई
18:34दफ्तर यहां पे काम नहीं कर रहा था
18:36पॉल्टिकल दफ्तर जो जिसकी बात कही जा रही है जो एड्रेस यहाँ पर दिया गया है वो दफ्तर यहाँ पर
18:42कभी नहीं था
18:43दोनों ही फ्लोर पर फैमली रहती है कई महीने से रहती है और आसपास के लोगों को किसी को पता
18:49नहीं है इसके बारे में
18:52यह जो पता है वो पूरी तरह से रहाय शीला का है जिन्वे यह घर गली के कोने में है
18:56ऐसी जगह पर पार्टी दफ्तर का होना भी अपने आप में संद्यास पद्र आसपास के लोगों ने बताया कि कुछ
19:02महीने पहले पुलिस के लोग भी आये थे और नूटिस भी लगाया था
19:21दिल्ली की तरफ फरिदाबाद में भी छोटी पार्टियों को मोटे चंदे का ये खेल चल रहा है फरिदाबाद में इस
19:27पते पर राष्टी विकास पार्टी का दफ्तर बताये गया जब हम यह परताल करने पहुंचे तो इस घर के मालिक
19:32शलभ अगरवाल ने किसी भी सियासी
20:03दल के दफ्तर से इंकार किया
20:04आपको नहीं पता किसे पहले कोई रेंड पर आया हो किसी ने इस्तमाल किया हो यहां पर पार्टी की दफ्तर
20:09बनाया हो
20:11कि ऐसा मेरी याददाशना गाली के अ कंई महलव कि हल लोग रहे हैं तो यह कोई पार्टी कि बना
20:17रहा है की या क्या काम कर रहा है था पत अब धास के वादी बात
20:42चुनायोग में राष्टी विकास पार्टी एक पंजिकृत अमानी दल के रूप में रईस्टर है जिसके अध्यक्ष महेश प्रताब शर्मा है
20:48फरिदाबाद में उनकी तरफ से पार्टी का कारियाले बताया गया है हम यहाँ भी गए
20:53परिवार के सदस्यों से बात की तो उन्होंने बताया कि यह जो पार्टी है यह जो रईस्टर्ड ऑफिस है यह
21:00पिछले का पंदरा से भी जादा सालों से यहाँ रईस्टर्ड है और महेश प्रताब शर्मा यहाँ दो बार 2019 में
21:07और 2014 में पार्लियमेंट का चुनाव लड़ च�
21:21कि उनकी पत्नी ने भामे बताया है इस वारे में जब हमने महेश परताब शर्मा जी से संपर करने की
21:27कोशिश की तो उन्होंने अपने जो उनका असोसेट है या जो भी उनके सहायक है उनके माद्दम से जो बात
21:33की उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि जो मामला है विचारा धीन है
21:40पिछले साल चुनायोग ने 800 से ज्यादा RUPP को सूची से हटा दिया था
21:45आयोग की प्रेस रिलीज में वज़ा ये बताई गई थी
21:48कि इन पार्टियों ने पिछले 6 सालों में किसी भी चुनाव में एक भी उमिद्वार नहीं उतारा था
21:52बियार के सीता मड़ी में भी भारत प्रवल पार्टी को रईस्टर दिखा दिया
21:56इस पार्टी ने साल 2019 से 2024 के बीच 103 करोड रुपे की आय दिखाई
22:02लेकिन हमारी परताल में पार्टी का कोई भी कारियाले नहीं मिला
22:05सीता मड़ी जिले के परसौनी प्रखंड के इजहार गौ में प्रवल भारत पार्टी का नामों निशान नहीं मिला
22:11आसपास के लोगों ने भी इस सवाल पर चुपी साग ली
22:16तो चुनावी चंदे के लिए देश में राजनितिक दलों को रेजिस्टर तो करवाय जाता है
22:20लेकिन इनका जन कल्यान से कोई वास्ता नहीं होगा
22:22आज तक की परताल में जवलपूर में भी यही बात साम्में आई
22:26जहां भरतिये जन क्रांती दल डेमोक्रेंटिक का यहां कोई दफ़तर नहीं मिला
22:30जबकि दस्तावेजों में पकाślड़ा इस पाρ्टी का ओफिस
22:33जवलपूर के शक्ति नगर सेनिक सोसाइटी में दिखाये गया है
22:37भारतिय जन्द क्रांती दल डेमोक्रेटिक जिसका पता है सैनिक सोचाइटी जबलपूर्ट हम आज तक की टीम जब इधर आके पूरा
22:47पता करा कि कहा आफिस है क्या है तो जमीनी हकीकत में पाया कि यहां पर किसी तरह का कोई
22:54आफिस नहीं है और लोगों ते भी चर्चा की तो
23:06मानिता नहीं मिली है फिर भी साल 2019 से 2024 के बीच 2316 करोड रुपए की आये इनकी तरफ से
23:16बताई जाती है इन अंजान पार्टियों को
23:18registered unrecognized political parties या RUPP कहा जाता है यह ऐसी पार्टी होती है जो भारत की चुनाव आयोग के
23:29पास तो अपचारी क्रूप से
23:30registered होती है लेकिन इन्हें मानिता प्राप राज्यस्तरिय पार्टी या राश्ट्रिय पार्टी का दर्जा नहीं मिलता है लेकिन फिर भी
23:38इन में से कई दल बड़े-बड़े राश्ट्रिय दलों से ज्यादा चंगा जुटाने में काम्याब हो जाते हैं सवाल है
23:44कैसे और क्य�
24:00आप देने वाला कोई नहीं है अब सवाल यह है कि इन पार्टियों को चंदा कौन दे रहा है और
24:04उसे से क्या फाइदा होगा इसके अलावा सवाल चुनायोक भूले कर भी कि अगर ऐसी पार्टियों का गलत इस्तिमाल हो
24:10रहा है वो चुनाव नहीं लड़ रही है तो फिर ऐ
24:26नहीं असली खेल होता है जो कॉर्परेट डूनेशन है जो डूनेशन है बलैक मनी को वाइट करने का कोई साधर
24:35नहीं है बैसे मैंने कहा कि एक डेमोक्रिटिक सेट अप में यह सोचा गया था कि भी पॉलिटिकल पार्टि को
24:42अपनी एक्टिविटी केरियाउट करने के लिए
24:44अपनी वर्किंग जारी रखने के लिए पैसे चाहिए और इंकम चाहिए एक पहला तरीका है कि पैसे कैश में आएंगे
24:52अन्रेकोगनाई सोर्स से आएंगे इसको रोकने के लिए यह इंकम टेक्स में प्रोविजन लाया गया कि जो भी पॉलिटिकल पार्टि
25:00को चंदा दे�
25:12लेकिन जो कार्पोरेट इसलिए जो पैसा देती है और जो इंडिजल पैसा जैनुरी देते हैं उनको ठेक्स में छूट मिलती
25:19है और पॉलिटिकल पार्टि का काम चलता है अब उसी प्रोविजन को मिस्यूज करने के लिए कुछ लोगों ने मिस्यूज
25:26करने के लिए उन प�
25:41फाइल नहीं करते एडियार के एक रिपोर्ट में कहा गया था कि 2019 बीस में 219 आरियू पीपी ने 608
25:47करोड रुपे की टैक्स जूट का दावा किया था लेकिन उनमें से 66 में सरूरी रिपोर्ट जमा नहीं की इसमें
25:54ये भी दावा किया गया कि एसी आई के डेटा के नुसार 2013
25:57और 2016 के बीच केवल 5 प्रतिशत आरियू पीपी ने ही दान की रिपोर्ट जमा कि
26:02जो जैन्मीन पॉलिटिकल पार्टी है उनको चंदा इसमें आता है लोग एंकरेस करे जाते हैं देते हैं लेकिन जो इस
26:09प्रोविजन को मिस्यूज करने के लिए कुछ लोगों ने अपने ऐसे ही पॉलिटिकल पार्टी रिजिस्टर करा ली और फिर वो
26:16टेक्स पेर को इधर
26:30काट के पैसे वापिस कर देंगे और आपको 30% का जो टेक्स का सलैब लगता उसमें छूट मिलेगी तो
26:36बहुत सारे लोग इस ट्रैप में आ गए और इसी वज़े से यह पॉलिटिकल पार्टी को पैसे अगर आप इन
26:41सब पॉलिटिकल पार्टी के बैंक अकाउंट देखें�
26:45तो पता लगेगा कि जितने पैसे चेक से आएं कुछ दिनों बाद पैसे वही कैश में निकाल लिए गए और
26:50वह पैसे वापिस जिसने कंट्रिबूट के थे उन्हीं को वापिस कर दिये गए और कुछ 5-10% की कमिशन
26:56उन्होंने अपने पास रख लिए
26:59चुनावी पार्टियों को रेस्टर करवा कर भरष्टाचार का एक तरीका पोच लिया गया है
27:03बड़ी बात ये है कि ये खेल डशकों से चल रहा है
27:06मामला मनी लॉंडरिंग तक का हो सकता है जिसमें शेल कमपनियों का इस्तेमाल भी शामिल है
27:11इस तरह इसमें कई तरह के भरष्टाचार की भारी गुझाईश है
27:14इससे ये सवाल पैदा होता है कि जो चीजें आम आदमी देख समझ रहा है
27:19वो लोगपाल, E.D. और C.B.I. जैसी एजन्सियां क्यों नहीं देख पादे
27:24पूर्व मुख्य चुनायूप, S.Y. कुरेशी का कहना है
27:27क्यार्यू पीपी का कॉंसेट कई सालों से मौझूद है
27:30लेकिन हमारे पास ये पता लगाने का कोई तरीका नहीं है
27:33क्यों नहीं क्या मिल रहा है या ये कितना पैसा कमा रहे है
27:36उन्हें अपने रिटर्ण जमा करने होते हैं
27:38लेकिन वो अगर ऐसा नहीं करते हैं
27:40तो भी हम कुछ नहीं कर सकते
27:42क्योंकि हमारे पास उन्हें टी रिस्टर करने की शक्ती नहीं है
27:45लेकिन क्यों?
28:33जानकारों का कहना है
28:34कि देश में राजनितिक पार्टिक के तोर पा
28:36रेइस्टर करना आसान है, पहले इसके लिए 30 लोगों की जरुरत होती है, लेकिन अब कम से कम 100 रेइस्टर्ड
28:41वोटरों के संगठन की जरुरत होती है, लेकिन इसका गलत फायदा उठाए जा रहा है, जिससे रोकना ज़रूरी हो जाता
28:47है.
29:06उनको डी रेइस्टर करने की पावर, एलेक्शन कमिशन को देने ये जरूरी है.
29:36भारत की चुनाव आयोग के पास तो अपचारी क्रूप से रेजिस्टर्ड होती है, लेकिन इन्हें मानिता प्राप राज्यस्तरिय पार्टी या
29:44राश्ट्रिय पार्टी का दर्जा नहीं मिलता है.
29:45लेकिन फिर भी इन में से कई दल, बड़े-बड़े राश्ट्रिय दलों से ज्यादा चंड़ा जुटाने में काम्याब हो जाते
29:52हैं.
29:52सवाल है कैसे और क्यूं?
30:01आज तक की पर्ताल में आपने देखा कि कैसे कांग्जों पर चल रही पार्टियों के दफ्तरों में ताले लगे हुए
30:06हैं, जहां ताला नहीं है, वहां चंड़े का हिसाब देने वाला कोई नहीं है.
30:09अब सवाल ये है कि इन पार्टियों को चंड़ा कौन दे रहा हैं और उसे इससे क्या फाइदा होगा? इसके
30:15अलावा सवाल चुनायोक भूले कर भी है कि अगर ऐसी पार्टियों का गलत इस्तिमाल हो रहा है, वो चुनाव नहीं
30:20लड़ रही है, तो फिर ऐसे दलों की मानने
30:39कॉर्परेट डूनेशन है, जो डूनेशन है, बलैक मनी को वाइट करने का कोई साधर नहीं है, बैसे मैंने कहा कि
30:46एक डेमोक्रिटिक सेटप में, ये सोचा गया था कि भी पॉलिटिकल पार्टि को अपनी एक्टिविटी केरियाउट करने के लिए, अपनी
30:54वर्किंग जारी
30:54रखने के लिए पैसे चाहिए और इंकम चाहिए, एक पहला तरीका है कि पैसे कैश में आएंगे, अन्रेकोगनाई सोर्स से
31:03आएंगे, इसको रोकने के लिए ये इंकम टैक्स में एक प्रोविजन लाया गया, कि जो भी पॉलिटिकल पार्टि को चंदा
31:09देगा, उसको हम उस
31:23इसलिए जो पैसा देती है और जो इंडिजल पैसा जैनुरी देते हैं, उनको ठैक्स में छूट मिलती है और पॉलिटिकल
31:28पार्टि का काम चलता है, अब उसी प्रोविजन को वेनिफिट करने के लिए कुछ लोगों ने मिस्यूज करने के लिए
31:35उन पॉलिटिकल पार्टि �
31:37उन कार्पोरेट पे इंडिजल पे पहुँच गए कि आप हमें चंदा दो और हम पैसे वापिस कर देंगे, तो ये
31:42एक अलग त्रेक ही वर्किंग की गई जिसको के प्रोविजन को मिस्यूज किया गया
31:47ये अनजान पार्टियां अक्सर अपने रिटर्ण फाइल नहीं करतें, एडियार के एक रिपोर्ट में कहा गया था कि 2019-20
31:53में 219 RUPP ने 608 करोड रुपे की टैक्स जूट का दावा किया था, लेकिन उनमें से 66 में सरूरी
32:01रिपोर्ट जमा नहीं की, इसमें ये भी दावा कि
32:03कि ECI के डेटा के अनुसार, 2013 और 2016 के बीच केवल 5 प्रतिशत RUPP ने ही दान की रिपोर्ट
32:10जमा किया, जो जैनमीन पॉलिटिकल पार्टी हैं, उनको चंदा इसमें आता है, लोग एंक्रेस करे जाते हैं, देते हैं, लेकिन
32:17जो इस प्रोविजन को मिस्यूज करने के लिए, क
32:32कहते हैं कि आप एक लाग रुपे का हमें चेक दो, दो लाग रुपे का चेक दो पॉलिटिकल पार्टी के
32:36नाम में, हम आपको पांच, दस या पंदर परसेंट काट के पैसे वापिस कर देंगे, और आपको 30 परसेंट का
32:42जो टेक्स का सलैब लगता है, उसमें छूट मिलेग
32:44तो बहुत सारे लोग इस ट्रैप में आ गए और इसी वज़े से ये पॉलिटिकल पार्टी को पैसे, अगर आप
32:50इन सब पॉलिटिकल पार्टी के बैंक अकाउंट देखेंगे और इनके बैले शीटे देखेंगे, तो पता लगेगा कि जितने पैसे चेक
32:56से आए हैं, कुछ �
32:57जिनों पार पैसे वही कैश में निकाल लिए गए और वो पैसे वापिस जिसने कंट्रिबूट के थे उन्हीं को वापिस
33:02कर दिये गए हैं, और कुछ पांच-दस परसेंट की कमिशन उन्होंने अपने पास रख लिए हैं
33:07चुनावी पार्टियों को रेइस्टर करवा कर भरष्टाचार का एक तरीका कोच लिया गया है, बड़ी बात ये है कि ये
33:13खेल डशकों से चल रहा है, मामला मनी लॉंडरिंग तक का हो सकता है, जिसमें शेल कमपनियों का इस्तेमाल भी
33:19शामिल है, इस तरह इसमें कई तरह क
33:34SY कुरेशी का कहना है, क्यार यू बीपी का कॉंसेट कई सालों से मौजूद है, लेकिन हमारे पास ये पता
33:40लगाने का कोई तरीका नहीं है, क्यों उन्हें क्या मिल रहा है, या ये कितना पैसा कमा रहे है, उन्हें
33:46अपने रिटर्ण जमा करने होते हैं, लेकिन वो अगर ऐस
33:48नहीं करते हैं, तो भी हम कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि हमारे पास उन्हें डी रिस्टर करने की शक्ती नहीं
33:53है, लेकिन क्यों?
34:25लेकिन डी रेजिस्टर्शन की पावर इलेक्शन कमिशन को मिले बिना आगे कुछ इसमें फाइदा होई नहीं सकता, अनलेस पार्टी को
34:35ये थ्रेट महसुज हो कि डी रेजिस्टर हो जाएगी, तो वो असारी एपनी इलिगल एक्टिविटी बंद करेंगी.
34:41जानकारों का कहना है कि देश मेराजनितिक पार्टी के तौर पर रेजिस्टर करना आसान है, पहले इसके लिए 30 लोगों
34:47की जरुवत होती है, लेकिन अब कम से कम 100 रेजिस्टर्ड वोटरों के संगठन की जरुवत होती है, लेकिन इसका
34:53गलत फायदा उठाय जा रहा है, ज
35:09पार्टी पुलिटिकल एक्टिविटी विल्कुल नहीं करनी है, पर्दी है, नाम के बाती है, उनको डी रेजिस्टर करनी की पावर, इलेक्शन
35:17कमिशन को दे दे, ये ज़रूरी है, एक समय था जब मायवती की पार्टी बहुत ही मजबूत हुआ करती थी,
35:24लेकिन जिस समय �
35:25पार्टी को एक जुट करना चाहिए था, तब बीएस्पी में बुआ भतीजे की लड़ाई, पार्टी के लिए शुक्त संकेत तो
35:31नहीं है, क्योंकि बीएस्पी के वोट पर उनके विरोधियों की भी नजर है, अगर आप बीएस्पी के वोट की बात
35:36करें, तो आज से 20 साल �
35:37पहले पार्टी को विधान सभा में 30 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले था, मायवती यूपी के मुख्यमंत्री बनी, 2009 के
35:45लोगसभा चुनाओ में भी यूपी में बीएस्पी का हाथी मजबूत था, उससे विरोधी घबराते थे, लेकिन इसके बाद कहानी बदलने
35:52लगी, 2014
35:53में बीएस्पी का वोट 25, फिर दो साल बाद 22 प्रतिशत रह गया, 2019 के चुनाओ में अखिलेश के साथ
36:01आने के बावजूद बीएस्पी के वोट में गिरावट नहीं था भी, 2022 के विधान सभा चुनाओ में इसमें अप्रत्याशत कमी
36:08आई और बीएस्पी का वोट 12 प्रति�
36:26अखिलेश यादव की पहली प्रतिक्रिया आई है, अखिलेश यादव से जब सवाल किया गया कि आप पीएस्पी का अंधुरूनी मामला
36:36है, दूसरे दल के लोग कोई बात नहीं कह सकते
36:45कि आपको अंकल करके अपने राइले में संभूलित किया था, आज उनकी भूण उनको पार्टे इसे निश्काशिक कर दिया है,
36:51पोड़ी तरीके में, क्या कुछ कहके इस पूरे राजनेती गटना करना है, दिखिए जो अंकल शब्ध है, वो कोई भी
36:58रिष्टा हो, चाचा,
37:00ताउ, मौसा, फूफा, वो उनकी पार्टी का अपना फैसला है, उनकी पार्टी का अपना फैसला है, इसमें दूसरे दल के
37:11लोग कोई बाद नहीं कह सकते, अगर तुम ले के आओ तो ले जएंगे, उत्तर प्रदेश के दिवरिया से अगली
37:21खबर है, जहां पुलिस को इला
37:27जुन तक बोल दिया गया, मामला हत्या के मामले में तीन महलाओं समेट चार लोगों को गयर कानूनी तरीके से
37:33हिरासत में रखने का है, जिस पर अदालत नाराज हुई ही, लेकिन एसेचो से जब सीसी टीवी को लेकर सवाल
37:40हुआ, तो अदालत ने बेहत कड़े शब्दों का
37:43इससमाल किया, थाने में सीसी टीवी मिला गायव, तो पुलिस को हाई कोट ने फटकारा, अवय धिरासत के मामले में
37:53हाई कोट ने स्पी एसेचो को जूटों का जुन्ड करार दिया, उत्तर प्रदेश पुलिस को इलाहबाद हाई कोट ने खबरदार
38:02किया,
38:15मामला देवरिया का है, जहाँ पांच महीने पहले एक हत्या के मामले में गौरी बाजार थाने में तीम महिलाओं समेथ,
38:22चार लोगों को अवय धिरासत में रखने का आरोब पुलिस पर लगा था.
38:53पुलिस के खिलाफ परिवार ने हाई कोट का दर्वाजा खट-खटाया, जहां पुलिस को लेने के देने पड़ गए.
39:00इलाहबाद हाई कोट के न्यायमूर्थी अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्थी दिवेश चंद्र सामन्त की खंडबीठ ने महंद्र गौर की याचिका पर
39:08सुनवाई के दौरान,
39:09एसपी और थानेदार की कारे प्राणाली पर तल्ख टिपनी की, कोट ने उन्हें जूटों का जुन्ड तक कह दिया।
39:39होने की तकनिकी खराबी होने का हवाला देते हुए कोई साक्ष नहीं प्रस्तुत कर सके। जिसके बाद हाई कोट ने
39:48इस दलील को स्विकार नहीं किया। और इस मामले में एक बड़ी कारवाई करते हुए थानेदार के वेतन से 65
39:57,000 रुपए वसूल कर जिन लोगों को थाने
40:01हैं बिठा कर प्रतारित किया गया था उन्हें देने का आदेश दिया है।
40:31दिल को अविश्वस्नियां बताते हुए खालिच कर दिया है। खनफीट ने कहा है कि सुप्रीम कोट के नियदेश के अनुसार
40:37प्रत्येक ठाने में CCTV कैमरे 24 घंटे चालू रहने चाहिए। और बैक अप सुरक्षित रखना अनिवारे है।
40:44CCTV और बैक अप व्योस्था का काम न करना पुलिस अधिक्षक की तरफ से फर्ज निभाने में गंभीर लापरवाही माना
40:51जाएगा।
40:52कोट ने इसके बाद चारो याचियों को कुल 65 हजार रुपए मुआउजा देने का आदेश दिया। सबसे बड़ी बात ये
40:59है कि ये मुआउजा थाना धक्ष के वितन से वसूला जाएगा।
41:13ये मामला देवरिया के गौरी बाजार के बैतालपुर धाबे पर एक बुज़ुर्द की हत्या से जुड़ा है।
41:19अप्रेल में हुई इस वारदात में पुलिस पर तीन महिला समीद चार रुगों को अवै धिरासत में रखने का आरोप
41:25लगा।
41:26और मामला हाई कोर्ट तक पहुँच गया। अगर ठाने का ये सीसी टीवी काम कर रहा होता तो ये नौबत
41:32नहीं आगी।
41:33बड़ी बात ये है कि मुख्यमंत्री योगी आधितनात सभी ठानों में सीसी टीवी लगाने का निर्देश दे चुके हैं।
41:39ताकि ठानों में जहां जन्सुलवाई होती हो वहां कैमरे जरूर लगे।
41:43लेकिन देवरिया में इस आदेश का भी पालन होता नहीं बिखा।
41:47और इसे चोएसपी को अदालत के घुस्से का सामना करना पराए।
41:53अब बात पंजाब की करते हैं जहां गुलजार सिंग आत्महत्या मामले में भगवंत मान सरकार पूरी तरीके से घिरती हुई
42:02नज़र आ रही।
42:09पंजाब में नशेच से शुरू हुई सियासत अब दलित पॉलिटिक्स पर आ गई है।
42:13गुलजार सिंग के परिवार ने गवार फिर प्रशासन पर संगीन आरुप लगाए। परिवार का कहना है कि प्रशासन ने जबरन
42:18गुलजार सिंग का अंधिम संसकार कराया।
42:52पहले गुलजार के आतमत्या और फिर दवाब डालकर अंतिम संसकार।
42:56पंजाब के भगवंधमान सरकार सीधे सीधे कड़गरे में कड़ी दिख रही है।
42:59बीजेपी डेलिकेशन ने गुलजार के परिवार से मुलाकात कर भगवन्तमान के सरकार से पूछा है क्या खिर उसकी संवेथना इस
43:05हक्ता कैसे मर गई
43:53संगरूर में गुलजार के घर के दरवाजे पर मिलने वालों का ताता लगा है
43:56कॉंग्रिस के प्रतिनी धुमंडल ने राजीपाल से मुलाकात किया
43:59उन्होंने जबरन किया उनके कार्ण जो गुलजार सिंग मरा है और उसकी डाइंड डेकलेरेशन है
44:07राइंड डेकलेरेशन पे आदा पर्चा गिया गया एफम पे भी पर्चा होना चाहिए उसकी रेस्टोने चाहिए और उसका अस्तीवा होना
44:14चाहिए
44:15मरने से पहले उनकी जो अखीरली वीडियो है गुलजार सिंग की वो क्लेरली नशे के जो प्रॉबलम चल रही है
44:25बहुत बड़ी संग्रूर में और पंजाब में जो संग्रूर होम डिस्ट्रिक्ट है
44:30चीफ मिनिस्टर का फाइनेंस मिनिस्टर को और ये उसकी कॉंस्टुएंसी में है
44:34उसने उसको लेके अवाज उठाई थी
44:50अनुजूची तायोग ने भी परिवार से मुलाकात की
44:52और पंजाब सरकार के रवईये पर सवाल खड़े की
44:56परिवार्ट की भी मांग ऐसकर करके उनकी मांग हैं
45:00कि उनको ढराया धंकाया जा रहा है साथ-साथ
45:04फित गुलडारेजि जी को दिर्व धिके उनलाया धंकाया और उसके कारण
45:11कि उन्होंने खुदकुशि
45:12की तो जो भी दोशी हैं उनके खिलाब कठोर से कठोर कारवाई होनी चाहिए परिवार ने मांग रखी है उनका
45:24कहना है कि उनको डराया धंका जा रहा है तो सुरक्षा मिलनी चाहिए साथ-साथ मंत्री जी के खिलाब भी
45:32उन्हों
45:33कि उनके खिलाब भी कारवाई होनी चाहिए और आयोग परिवार की जो भी मांग है वो मांग पूरी होनी चाहिए
45:42इस दिशा में आयोग आगे बड़ेगा है पंजाब में चुनाव होने वाला है और एक दलित के आत्मत्या पर सियाश्री
45:49शोर है ऐसे में मान सरकार मामले में ए
46:03देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए आप देखते रहे हैं आज तक
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