00:00आजकल देश में सबको चम्बानी, अडानी, शरणम, गच्छामी हैं, जी हाँ, क्या सरकार और क्या नौकरशा, सेबी, सीवीसी, सीएजी, आरबियाई,
00:10एसबीयाई, आईयोसी, पावर, पोट, होम, फाइनस, ऐसे बड़े-बड़े पदों पर बैठ कर देश की संपत्ति समा
00:19बानने वाले देश की नीतिया बनाने वाले लोग, रिटायर होते ही, मुकेश, अमबानी और गौतम, अडानी के पास कैसे पहुच
00:26जाते हैं, इसे क्या कहा जाए, महस्योग या प्रियोग, क्यों ना पूछा जाए, कि भारत सरकार यानि मोधी सरकार में
00:33बैठ कर, ये लोग
00:34अमबानी अडानी के लिए नीति बनाते रहे, या अब अमबानी अडानी के साथ बैठ कर, भारत सरकार की नीतियों को
00:41प्रभावित कर रहे हैं, दया पता करो, कुछ तो गल बढ़ है, आज सोशल मीडिया पर ऐसे सवाल लगतार उठ
00:49रहे हैं, एक्स यूजर आजय कुमार ख
01:04और सीवीडीटी में रहे, जून 2019 में रिटायर हुए, सिर्फ चार महीने बाद RIL के इंडिपेंडन्ट डारिक्टर हो गए, संजीर
01:12सिंग आईयोसी चेर्मेन रहे, तीजून 2020 में रिटायर हुए, और दो महीने में RIL ग्रुप के प्रेजिडेंट हो गए, राजीव
01:21महरशी
01:21C.A.G. रहे, 2020 में रिटायर हुए, 2023 में जियो फाइनेंशल बोर्ड में शामिल हो गए, M.K.J
01:28.N. RBI के डिप्टी गवर्नर रहे, जून 2023 में रिटायर हुए, और मार्च 2025 में RIL के अडवाईजर हो गए,
01:35खेम का कहते हैं, ये सिर्फ अनुम्भव नहीं है भाईयो, ये सिस्
01:51सम्हालने वाले नौकरशा, आज इंडिपेंडेंट डारेक्टर बन मोटी फीस बटोर रहे हैं, वे सवाल उठाते हैं कि क्या सरकारी कुर्सी
01:59पर बैठ कर, अडानी जी को दी गई छूट, लेंड, क्लिरेंस, पॉलिसी, सौगाते, भविश्य के पैकेज की अग्रिम किस्ते
02:07थी, कूलिंग आउप पिरियट सिर्फ कागजुम है, वियारस इनके लिए एंट्री टिकट है, जहां मादमी साथ पर ठिट उड़ जाता
02:14है, वहीं ये रिटायर होकर करोडों कमा रहे हैं, ये कोई एक, दो, चार, पांच नाम नहीं है, बलकि एक
02:20पूरी लंबी फेहरिस्त ह
02:21सवाल ये है कि क्या ये नौकरशा सेवा काल में निक्षपक्ष थे या रिटायर्मेंट की सुनहरी जॉब के लिए पहले
02:28से पुल बना रहे थे, इस सबका जवाब तो यही लोग दे सकते हैं, लेकिन सवाल तो उठेंगी और सवाल
02:35पूछना जरूरी है
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