00:00दुकान की गद्दी पर जहां दद्दा बैठते हैं, वहां एक दिन मैं भी बैठूँ, दद्दा मरमुरा गए, एक दिन तुम
00:09वहां जाके बैठ गए, हसरत पूरी हो गई, क्योंकि तुमने चीजी इतनी सस्ती मांगी थी जो मिलनी इती, सोला शुकरवार,
00:16विदी अनुसा, म
00:29कभी नौकरी न लगी हो, वो तो ऐसी बिमारी है, जो सबको लगी जानी है, कोई इंसान बताओ, जिसको नौकरी
00:38चाहिए हो, और 40 का भी हो के बेरोजगार भूमरा हो, मिली जाती है, सभी को मिल जाती है, क्योंकि
00:43जितनी इधर आग लगी है, उतनी दूसरी तरफ भी तो ल�
00:58सब्सक्रांगी जो थोड़ी कठिन थी पाने में, पर आपके भीतर आग जबरदस थी, तो आपने बिलकुल रॉकेट बनकर अपने विशय
01:08का पीछा करा, रॉकेट कैसे पीछा करता है, आग छोड़ते हुए, ऐसे आप पीछा कर रहे थे, और जो विशय
01:19चाहिए था, जाकर
01:21सीदे फिर घुस गए उसमें रॉकेट घुस जाता है, और जब रॉकेट जाके इसी विशय में घुस जाता है, तो
01:27फिर क्या होता है, विश्फोट, न रॉकेट बचता, न विशय बचती, जो आग बस रॉकेट के पिछवाडे में थी, वही
01:38फिर चारो और नजर आती है, ब
01:51समझ ले ना आग ही आग बचेगी और आग भी थोड़ी देर में फिर राख हो जाएगी
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