00:00अश्टावक्र जनक की सभा में गए थे और शरीर से टेढ़े टपरे थे कुछ जन्मकत दोश था उन में और
00:05उग्यानियों की सभा थी वहाँ एक तो इनकी उमर कम थी और उपर से शरीर पुल्टा पुल्टा था चाल टेड़ी
00:10मेड़ी थी तो हाँ जो बैठे थे इनको देख
00:29मतलब यह कि मुझे लगा कि यह सूक्षम ज्यानियों की सभा है पर यह तो स्थूल खाल के सवदागरों की
00:38सभा है मेरी कल्ती कि मैं आ गया यहां पर मैं ज्यानी सोच के आया था यह तो चर्म के
00:44सवदागर है अश्टवक्र जैसे ज्वाब दे दिया बोले कुछ बातों को ब
00:58अपा कर जाूँ
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