00:01चायापूर गाउं में पिछले कुछ दिनों से लोग रात में गायब हो रहे थे।
00:06कोई नहीं जानता था कि उन्हें कौन ले जा रहा है।
00:10सुबह सिर्फ मिट्टी पर काले निशान मिलते थे।
00:14शहर में रहने वाला सोहन कई सालों बाद अपने गाउं लोट रहा था।
00:19उसके चाचा की अचानक मौत हो गई थी और अब जमीन के कुछ जरूरी कागजात पूरे करने के लिए उसे
00:28चायापूर आना पड़ा था।
00:30शाम ढल चुकी थी। आसमान में बादल चाय हुए थे। एक पुरानी सफेद कैब सुनसान सड़क पर धीरे धीरे आगे
00:41बढ़ रही थी।
00:43दोनों तरफ घना जंगल, हवा में धूल और धुन्द तैर रही थी। कैब की हेडलाइट्स मुश्किल से कुछ मीटर आगे
00:52तक पहुँच पा रही थी।
00:54ड्राइवर लगातार सड़क पर नजरें टिकाये हुए था। कुछ देर बाद सोहन बोला।
01:01इतना सनाटा क्यों है यहाँ? ड्राइवर ने उसकी तरफ देखे बिना कहा, मैं रात हो रही है साब, तो बस
01:10जल्दी गाउं पहुच जहें तो अच्छा है।
01:13उसकी आवाज में अजीब घबराहट थी। कैब आगे बढ़ती रही। अचानक ड्राइवर ने प्रेक दबा दिया। टायर सड़क पर घिसट
01:24गए।
01:25क्या हुआ? सोहन घबरा गया। ट्राइवर कुछ नहीं बोला। उसकी नजर सड़क के बीचों बीच टिकी हुई थी। सोहन ने
01:35भी सामने देखा। सड़क के बीच कोई खड़ा था। धुन्द के कारण चेहरा साफ दिखाई नहीं दे रहा था। बस
01:43इतना देख रहा था क
01:54और वह आकरती गायब हो गई। सड़क खाली थी। सोहन तुरंत बाहर निकला। चारों तरफ नजर दोड़ाई। लेकिन वहां कोई
02:04नहीं था। खेतों में भी नहीं। सड़क पर भी नहीं। मानो कुछ था ही नहीं। करीब आधे घंटे बाद कैब
02:13गाउं पहुँच ग�
02:14पुराना घर गाउं के किनारे था। घर के पीछे जंगल था। सामान रखने के कुछ देर बाद उसकी बचपन की
02:24दोस्त पूजा आई। उसका चेहरा डरा हुआ लग रहा था। उसके साथ उसका छोटा भाई राजू भी था। राजू डरते
02:35हुए चारों तरफ देख रह
02:38था॥। तुम इतने साल बाद आए हो। पूजा बोली। हां कुछ जरूरी काम था। तभी पूजा ने कहा। रात में
02:48बाहर मत निकलना। क्यों बस मत निकलना। यह कहकर वह चली गई। रात गहरी होने लगी। सोहन अपने कमरे
03:27It was very strange.
03:28Sekind के लिए, और फिर गायब.
03:31Sohan का दिल तेजी से धड़कने लगा.
03:35सुभए होने पर उसने पूजा को यह बात बताई.
03:38पूजा का चेहरा पीला पड़ गया.
03:40कल रात सुरेश घर नहीं पहुँचा.
03:43मतलब?
03:44वो गायब हो गया.
03:46कुछ पल दोनों चुप रहे.
03:59It was the next morning.
04:58The sound of the night was very loud.
04:58not given a few days later, then there was a voice. This time, it was a little close.
05:06Sohan?
05:07He was listening to this, as if he looked at the door in the middle of the house.
05:13Sohan was sitting on the door. He looked at the door.
05:18He looked at the door.
05:23He looked at the door.
05:28THREE SRI PAND
05:29AND ARCHANAK
05:31SAB SHANTH HO GAYA
05:33KAY MINUTE BEAT GAYE
05:34KOI AWAZ NAHI
05:35SOHAN NNE RAHAT KI SANS LAY
05:38LECIN TABHI
05:40KHIDKI KE BAHAR SE
05:41KISI KE DAUđNEKI AWAZ AAY
05:43WAH TURANTH KHIDKI TAK GAYA
05:46BAHAR ANTHERA THA
05:48PHIR ACANAK USE PEDKI KE PAS
05:50KOI DIKHAI DIYA
05:51WAH POOJA THI
05:53WAH TAYZI SE USKI TARF BHAG RAHI THI
05:56SOHAN
05:57दर्वाजा खोलो
05:58सोहन चौक गया
06:00पूजा?
06:02जल्दी दर्वाजा खोलो
06:03पूजा की आवाज काप रही थी
06:06वह मदद मांग रही थी
06:08सोहन दर्वाजे की तरफ बढ़ा
06:10लेकिन तभी उसे एक बात याद आई
06:14पूजा का घर गाउं के दूसरी तरफ था
06:18इतनी रात को वह यहां क्यों आईगी?
06:21वह दर्वाजे के पास रुक गया
06:23उसने खिड़की से फिर बाहर देखा
06:25इस बार उसका खून जम गया
06:28बाहर खड़ी चीज पूजा जैसी जरूर दिख रही थी
06:33लेकिन उसके पैर जमीन को छून ही रहे थे
06:36वह कुछ इंच हवा में खड़ी थी
06:39अगले ही पल उसका सिर धीरे धीरे एक तरफ मुड़ गया
06:44और वह अंधेरे में गायब हो गई
06:48सोहन पूरी रात नहीं सो पाया
06:51सुबह होते ही वह पूजा के घर पहुँचा
06:53वह दर्वाजा खोल कर बाहर आई
06:56उसे देखकर सोहन रुक गया
06:58वह बिल्कुल सामान्य थी
07:00ऐसा लग ही नहीं रहा था
07:03कि वह रात में सोहन के घर के बाहर गई होगी
07:06जब सोहन ने सारी बात बताई
07:09तो पूजा का चहरा उतर गया
07:11उसने तुम ही देख लिया है
07:14किसने?
07:15पूजा ने जवाब नहीं दिया
07:17बस धीरे से बोली
07:19आज रात घर से बाहर मत निकलना
07:22चाही कुछ भी हो जाए
07:23उस रात सोहन ने खिड़की भी बंद कर दी
07:28लेकिन करीब एक बजे
07:30अचानक घर के पीछे से किसी के चीखने की आवाज आई
07:34बचाओ
07:36आवाज सुरेश की थी
07:38वही सुरेश जो कुछ दिन पहले गायब हुआ था
07:42फिर दूसरी चीख आई
07:44पहले से ज्यादा दर्दनाक
07:47सोहन के शरीर में सहरन दोड़ गई
07:50उसे समझ नहीं आ रहा था कि बाहर जाए या नहीं
07:54तब ही
07:55घर की दीवार पर एक लंबी परचाई दिखाई दी
07:59जैसे कोई बाहर खड़ा हो
08:01परचाई धीरे धीरे खिड़की के पास पहुँची
08:04कुछ सेकंड रुकी
08:06और फिर गायब हो गई
08:09उसी समय बाहर की सारी आवाजें भी बंद हो गई
08:14फिर ऐसा सन्नाटा च्छा गया
08:17कि वीरेंदर को अपनी सांसों की आवाज सुनाई देने लगी
08:21लेकिन उसे बिलकुल अंदाजा नहीं था
08:24कि अगली रात उसका सामना उस रहस्य से होने वाला था
08:29जिसकी वजह से चायापुर में लोग एक एक करके गायब हो रहे थे
08:34उस रात उसने तय कर लिया था कि अब वह सिर्फ डर कर नहीं बैठेगा
08:41उसे पता लगाना था कि आखिर हर रात क्या हो रहा है
08:46रात के लगभग बारह बजे थे
08:49चारों तरफ वही सननाटा पहला हुआ था
08:53हवा भी जैसे रुक गई थी
08:56सोहन कमरे की बत्ती बुझा कर खिड़की के पास बैठ गया
08:59वह बाहर जंगल की तरफ देखता रहा
09:02कुछ देर तक कुछ नहीं हुआ
09:04फिर अचानक उसे दूर एक हलकी सी रोशनी दिखाई दी
09:09जैसे कोई लालटेन लेकर खड़ा हो
09:12रोशनी धीरे धीरे जंगल के अंदर जाने लगी
09:16और उसके पीछे एक काली आकरिती चल रही थी
09:21सिर्फ कुछ सेकंड के लिए
09:23फिर दोनों अंधेरे में गायब हो गए
09:26सोहन खुद को रोक नहीं पाया
09:29वह टॉर्च लेकर घर से बाहर निकल गया
09:32वह धीरे धीरे जंगल की तरफ बढ़ने लगा
09:35चारों तरफ अजीब खामोशी थी
09:38जैसे पूरा गाउव सो नहीं रहा हो
09:41बलकि किसी डर से छिपा बैठा हो
09:44जंगल के अंदर पहुँचते ही उसे जमीन पर कुछ निशान दिखाई दिए
09:48काले पैरों के निशान
09:51सोहन उन निशानों के पीछे पीछे चलने लगा
09:54कुछ दूर जाने के बाद
09:56निशान एक पुराने सूखे कुएं के पास जाकर रुक गए
10:00कुएं आधा टूटा हुआ था
10:03उसके आसपास घास उगी हुई थी
10:06तभी उसको लगा जैसे कुएं के दूसरी तरफ कोई खड़ा है
10:10उसने टॉर्च की रोशनी उधर डाली
10:13लेकिन वहां कोई नहीं था
10:15उसी समय उसके पीछे से किसी के चलने की आवाज आई
10:22सोहन तुरंत पलटा
10:23लेकिन वहां कोई नहीं था
10:25आवाज बंद हो गई
10:27अचानक कुएं के अंदर से हल्की फुसफुसाहट सुनाई देने लगी
10:31इतनी धीमी कि शब्द समझ नहीं आ रहे थे
10:35वह धीरे धीरे कुएं के किनारे पहुँचा
10:38उसने नीचे जहांका
10:39अंदर सिर्फ अंधेरा था
10:41लेकिन तब ही
10:43उसे नीचे दो सफेद आँखें दिखाई दी
10:46बस एक पल के लिए
10:48और फिर गायब
10:50सोहन घबरा कर पीछे हट गया
10:52तब ही उसके पीछे
10:54किसी ने बहुत धीमी आवाज में
10:56उसका नाम लिया
10:58सोहन
10:58इस बार आवाज बिलकुल उसके कान के पास से आई थी
11:02वह तेजी से पलटा
11:04और उसका दिल रुकते रुकते बचा
11:07उससे कुछ दूरी पर
11:08एक लंबी काली आकरती खड़ी थी
11:10चहरा दिखाई नहीं दे रहा था
11:13सिर्फ अंधेरा
11:14कुछ सेकंड तक वह आकरती
11:17बिलकुल स्थिर रही
11:18फिर धीरे धीरे पीछे हटने लगी
11:21और धुंद में
11:23गायब हो गई
11:24उसी समय अचानक तेज हवा
11:27चलने लगी
11:27जंगल के सारे बेड़ एक साथ हिलने लगे
11:32ऐसा लग रहा था
11:34जैसे कोई चीज तेजी से
11:36उनके बीच तौड रही हो
11:38सोहन बिना पीछे देखे भागने लगा
11:41कुछ देर बाद
11:42वह अपने घर पहुंच गया
11:44तर्वाजा बंद किया
11:46और पूरी राद जाकता रहा
11:49सुबह होते ही
11:51वह पूजा के पास पहुंचा
11:52सब कुछ बताने के बाद उसने कहा
11:55मैं आज ही यहां से जा रहा हूँ
11:58पूजा ने पहली बार राहत की सांस ली
12:01यही ठीक रहेगा
12:03लेकिन वो चीज है क्या
12:06कुछ पल चुप रहने के बाद
12:09पूजा बोली
12:10किसी ने कभी नहीं जाना
12:12जो जानने गया
12:14वो वापस नहीं आया
12:17उसी शाम
12:18सोहन गाउँ छोड़कर चला गया
12:21कैब धीरे धीरे
12:23चायापुर से दूर निकल गई
12:24उसने पीछे मुड़कर देखा
12:27धुंद के बीच गाव
12:29धीरे धीरे ओजल हो रहा था
12:32सब कुछ सामान्य लग रहा था
12:34जैसे वहां कभी कुछ हुआ ही नहो
12:37लेकिन कई महीने बाद
12:39एक रात
12:41सोहन अपने शेहर वाले घर में
12:43सो रहा था
12:45अचानक उसकी नींद खुल गई
12:47कमरे में अंधेरा था
12:49और खिड़की के बाहर से
12:51वही आवाज आई
12:54जैसे कोई सूखी
12:55पतियों पर चल रहा हो
12:57सोहन धीरे धीरे खिड़की की तरफ देखने लगा
12:59और उसके चेहरे का
13:01रंग उड़ गया क्योंकि
13:03सड़क के उस पार अंधेरे में
13:06कोई खड़ा था
13:07बिलकुल स्थिर
13:09और उसकी तरफ देख रहा था
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