00:16।
00:30He was working on the way to work on the way he was working on the way.
00:32He was working on the way to work on the way.
00:37He told us that he was asking,
00:40Arian, what do you think about here?
00:43Is that you have to do so that you can't get to work on the way?
00:48You don't have to do that.
00:50You don't have to do that.
00:53Arian has a coat on the way to work on the way.
00:55Here are my people's men and their bosses.
01:00पिताजी के गुजरने के बाद मैंने कभी गाउं आने का नहीं सोचा था
01:03लेकिन अब लगा कि वो जमीन बेकार पड़ी है उसे बेच कर शहर में ही बिजनस बढ़ा कर लूँ तो
01:09बहतर होगा
01:14विचार तो अच्छा है साहब पर मुझे लगता है आपको इस मौसम में खास कर पूट की इन रातों में
01:19यहां नहीं आना चाहिए था
01:21खैर अब आही गए हैं तो काम निप्टा कर सूरज धलने से पहले निकल जाईएगा यहां की हवाओं में कुछ
01:27ठीक नहीं लगता
01:29बाते करते करते बैलगाडी गाओं के सुनसान खेतों के बीचों बीच पहुँच गई
01:34दूर तक फैले खेतों में गहरा अंधेरा था और बारिश की बूंदे माहौल को और भी डरावना बना रही थी
01:41अचानक बैलगाडी एक जटके के साथ रुख गई
01:44जैसे किसी अद्रिश दीवार ने रास्ता रोक लिया हो
01:47उसी पल बैल रंभाने लगे और बुरी तरह चट पटाने लगे जैसे उन्होंने मौत को सामने देख लिया हो
01:56साहब अब ये बैल एक इंच भी आगे नहीं बढ़ेंगे
01:59इन्हें वो दिखाई दे रहा है जो हमारी आँखों से उजल है
02:02आज ये खेत कुछ ज़्यादा ही प्यासे लग रहे हैं
02:05आपको हवेली तक पैदल ही जाना होगा
02:07मैं चंद रुपयों के लिए अपनी जानदाओं पर नहीं लगा सकता
02:12अरे ये क्या पागलपन है भोलू
02:14पैसे पूरे अडवांस लिए हैं और अब बीच रास्ते में ड्रामा कर रहे हो
02:18बैल ठक गए होंगे इसलिए रुख गए
02:20तुम इसे भूतों की कहानी मत बनाओ
02:22शहर छोड़कर यहां आना ही मेरी बेवकूफी थी
02:24सोचा था विरासत मिलेगी
02:26लेकिन यहां तो तुम जैसे अनपढ़ लोग और ये कीचड़ ही नसीब में है
02:30सहब आप चाहे तो भाड में जाए पैसा
02:33वो रख लीजिये लेकिन मैं यहां से आगे कदम नहीं बढ़ाऊंगा
02:36अगर आपको जाना है तो आप अकेले जाएए
02:38हवेली यहां से बस थोड़ी ही दूर है
02:42इतना कहकर भोलू ने बैल गाड़ी घुमाई और भागने की रफतार से वापस लोट गया
02:47आर्यन घुस्से और हताशा में वहां अकेला खड़ा रह गया
02:51चारों तरफ मौत जैसा सन्नाटा था
02:54थोड़ी देर बाद उसने हिम्मत जुटाई और आगे बढ़ा
02:59कुछ दूर चलते ही उसे लगा जैसे कोई उसके ठीक पीछे चल रहा है
03:07मगर पलटने पर वहां सिर्फ अंधेरा था
03:12चलते चलते वो गाउं के उस पुराने रास्ते पर जो किसी गुफा जैसा लगता था
03:17ये संकरा रास्ता सीधे उसकी पुष्टैनी हवेली तक जाता था
03:21आर्यन भारी कदमों से आगे बढ़ा
03:24हर कदम के साथ उसकी धड़कने तेज होती जा रही थी
03:31आखिरकार वो हवेली के पुराने लोहे के गेट पर पहुँचा
03:35हवेली वक्त की मार से जरजर और वीरान हो चुकी थी
03:38गेट पर एक बुजर्ग लालटेन लिये खड़े थे
03:41जैसे बरसों से उसी का इंतजार कर रहे हूँ
03:44ये रगुपती काका थे हवेली के पुराने केर ठेकर
03:50आओ बेटा आर्यन इतना वक्त कैसे लग गया
03:53सब ठीक तो है न और तुम पैदल क्यों आ रहे हो
03:56भोलू की गाड़ी नहीं मिली क्या
03:59परेशानी की तो बात ही मत पूछिये काका
04:01मैं तो आराम से आ रहा था
04:03लेकिन खेतों के पास पहुँचते ही बैल गाड़ी रुख गई
04:07बैलों ने आगे बढ़ने से मना कर दिया
04:09और वो गाड़ी वाला वो तो डर के मारे मुझे वहीं उतार कर भाग गया
04:14काका के चहरे का रंग उड़ गया
04:15क्या खेतों के पास
04:17हे भगवान बेटा तुमने वहां किसी और को तो नहीं देखा
04:22या किसी ने तुम्हारा नाम तो नहीं पुकारा
04:25सच-सच बताना आर्यन वहां तुम्हें कुछ अजीब महसूस तो नहीं हुआ
04:30नहीं नहीं काका सब ठीक हैं
04:32आप लोग बस वहम पाल कर बैठे हैं
04:34चलिए अब अंदर चलिए ठंड लग रही है
04:38दोनों हवेली के बड़े हॉल में आ गए
04:40आर्यन सोफे पर निढ़ाल होकर बैठ गया
04:43काका तुरंत खिडकियों के भारी भरकम परदे खीचने लगे
04:46उनके हाथ काप रहे थे
04:48जैसे बाहर कोई उन्हें घूर रहा हो
04:52आर्यन ने चिड़कर कहा
04:53काका रहने भी दीजिए
04:55कमरा वैसे ही बंद पड़ा था
04:57थोड़ी ताजी हवा आने दीजिए
04:58ये अजीब सी बद्बू और उमस दम घोट रही है
05:01परदे हटा दीजिए
05:04काका ने पलटकर गंभीर स्वर में कहा
05:07नहीं आर्यन ये परदे बंध ही रहने दो
05:10ये गाओं वैसा नहीं है जैसा शहर से लगता है
05:13यहां की हवा में ठंडक नहीं
05:15पुराने गुनाहों की आहटे हैं
05:17ये बद्बू सीलन की नहीं
05:19उन रहस्यों की है जो इस जमीन के नीचे दफन है
05:22अगर खिड़की खुली
05:24तो वो आवाजे सीधे तुम्हारे दिमाग पर कबजा कर लेंगी
05:27जैसे तुम्हारे परदादा के साथ हुआ था
05:31ओ गौड, काका बस भी कीजिए
05:34आर्यन ने माथा पीट लिया
05:36पहले वो गाड़ी वाला और अब आप अंदविश्वास की भी हद होती है
05:40मैं यहां सिर्फ प्रॉपर्टी बेचने आया हूँ
05:42भूत प्रेत की कहानिया सुनने नहीं
05:45काका ने कोई जवाब नहीं दिया
05:47उन्होंने बस इतना कहा
05:49बेटा बहस का वक्त नहीं है
05:51तुम ऐसा करो अंदर वाले कमरे में
05:53हीटर जल रहा है वहां जाओ
05:55तुम्हें थोड़ा सुकून मिलेगा
05:58आर्यन बड़बडाते हुए
06:00अंदर वाले कमरे में चला गया
06:04हीटर की गर्मी से उसे थोड़ी राहक मिली
06:06अभी उसे बैठे हुए कुछ ही पल हुए थे
06:09कि अचानक बाहर दर्वाजा पीठने की आवाज आई
06:13इस तूफानी रात में कौन आ गया
06:15आर्यन ने हैरान होकर पूछा
06:18रुको बेटा तुम यहीं रहना
06:20खिड़की की तरफ देखना भी मत
06:22मैं देख कर आता हूँ
06:24काका ने चितावनी दी और बाहर चले गए
06:30काका ने दर्वाजा खोला तो बाहर गाउं के ठाकुर साहब खड़े थे
06:33उनके हाथ में चाता और लाल्टेन थी
06:36चहरे पर गहरी चिंता और एक अजीब सी साजिश का भाव था
06:39ठाकुर ने धीमी आवाज में पूछा
06:42रहुपती क्या लड़का आ गया
06:44क्या उसे कुछ भनक लगी कि हम किस मुसीबत में है
06:49काका ने फुस फुस आते हुए जवाब दिया
06:51नहीं ठाकुर साहब मैंने अभी उसे कुछ नहीं बताया
06:55उसे जरा भी अंदाजा नहीं है कि उसे यहां क्यूं बुलाया गया है
06:58हमने अपनी जान बचाने के लिए उन शक्तियों से जो समझोता किया था
07:02ये रड़का उसी की आखरी कड़ी है
07:05बहुत अच्छे
07:06उसके परदादा का साथ देकर हमने बहुत बड़ी गलती की थी
07:10आज उस गलती का प्राश्चित पूरा होगा
07:12चलो अब अंदर चलते हैं
07:14उसे शक नहीं होना चाहिए
07:17दोनों कमरे में दाखिल हुए
07:19आर्यन ने उन्हें देखते ही पूछा
07:22ये कौन है काका?
07:24काका ने परिचय कराया
07:27बेटा ये गाओं के मुखिया ठाकुर साहब है
07:30तुम्हारी जमीन बिक्वाने में यही मदद करेंगे
07:34नमस्ते ठाकुर साहब
07:35मैं चाहता हूँ कि काम जल्द से जल्द हो जाए
07:37मुझे अच्छे दाम चाहिए
07:39कमिशन आपको अच्छा मिलेगा
07:41थाकुर साहब भी की हसी हसे
07:43आरेन बाबू
07:44आप बेफिक्र रहिए
07:46आपको आपकी जमीन की वो कीमत मिलेगी
07:49जो आपके खानदान ने कभी सोची भी नहीं होगी
07:51मैं खुद सुनश्चित करूँगा
07:53कि सौदा पूरा हो
07:55वे बात कर ही रहे थे
07:57कि तभी बाहर से एक दिल देहला देने वाली चीक सुनाई दी
08:01ऐसा लगा जैसे कोई बहुत दर्द में चिल्ला रहा हो
08:04आरेन अपनी जगह से उचल पड़ा
08:08ये क्या था?
08:09इतनी रात को कौन चिल्ला रहे?
08:11यहां खिर हो क्या रहे?
08:14काका ने उसे पकड़ने की कोशिश की
08:17बैट जाओ बेटा, कुछ नहीं है, हवा की आवाज होगी
08:20तुम खिड़की मत खोलना
08:23लेकिन आरेन ने उनकी बात अनसुनी कर दी
08:25और जटके से खिड़की खोल दी
08:27बाहर का नजारा देखते ही
08:30उसके पैरो तले जमीन खिसक गई
08:32हवेली के बाहर
08:34पुराने बरगत के पेड़ों पर
08:36गाओं के कुछ लोग अजीब तरीके से लटके हुए थे
08:39लेकिन वे मरे नहीं थे
08:41वे हिल रहे थे
08:43और पलक जपकते ही
08:45वो सारी आकरितियां खिड़की के बिलकुल सामने आ गई
08:48उनकी आखें अंगारों जैसी लाल थी
08:51और चहरा काला
08:53आरियन का गला सूख गया
08:55वो पीछे हटा
08:56ये ये सब क्या है
08:59काका
09:00तभी पीछे से काका और ठाकुर की आवाज बदल गई
09:04काका ने बोला
09:06ये वो लोग है आरियन
09:08जिनकी जमीन तुम्हारे पर दादा
09:11ने धोके से हड़ पी थी
09:12और उन्हें जिन्दा दफन करवा दिया था
09:15तब से ये गाउन
09:17के श्राप में जल रहा है
09:18तुम्हें यहां बुलाना कोई संयोग
09:20नहीं था ये एक बली थी
09:23हमें माफ करना बेटा
09:25लेकिन हम इस अभिशाब को और नहीं जहल सकते
09:28तुम्हारे खून से ही
09:29ये पुराना हिसाब चुकता होगा
09:31अब तुम भी इन्ही का हिस्सा बनोगे
09:35आरियन को समझ आ गया
09:37कि वो एक भयानक जाल में फस चुका है
09:39तुम दोनों ने मुझे धोकी में रखा
09:42मैं तुम लोगों को छोड़ूंगा नहीं
09:45वो जान बचाने के लिए उपर की मंजल की तरफ भागा
09:49सीडिया चड़ते हुए उसकी सांसे फूल रही थी
09:52वो सबसे उपर वाले कमरे में घुसा
09:54और दर्वाजा बंद करने ही वाला था
09:56कि उसने मेज पर एक पुरानी टैरी देखी
09:59उसमें उसके परदादा की तस्वीर थी
10:02और बगल में खड़े थे यही रगुपती काका और ठाकुर सहाब
10:06लेकिन तस्वीर पचास साल पुरानी थी
10:09और ये दोनों तब भी उतने ही बुड़े दिख रहे थे
10:12तभी दर्वाजा एक जटके से खुला
10:14काका और ठाकुर वहाँ खड़े थे
10:16अब उनकी आँखे भी वैसी ही लाल थी
10:21प्लीज मुझे जाने दो मैंने कुछ नहीं किया
10:24मेरे पूरवजो की सजा मुझे क्यों दे रहे हो
10:27मैं वादा करता हूँ मैं कभी वापस नहीं आऊंगा
10:31ठाकुर ने कहा
10:33वापसी का कोई रास्ता नहीं है आर्यन
10:36कमरे में घहना अंधेरा चा गया
10:38अजीब सी फुस फुसा हटें और जीखें गूजने लगी
10:44अगले सीन में हवेली का दर्वाजा खुलता है
10:46बारिश रुक चुकी थी
10:48रगुपती काका और ठाकुर सहब बाहर निकलते हैं
10:51उनके ठीक पीछे आर्यन भी चल रहा था
10:54लेकिन अब उसके चहरे पर कोई डर नहीं था
10:57उसकी आँखें भी अब अंगारों की तरह लाल थी
11:01वो भी अब उसी रहसिमई साय का हिस्सा बन चुका था
11:05जो सदियों से इस गाउं को जकड़े हुए था
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11:16अगर कहानी अच्छी लगी हो तो वीडियो को लाइक और चैनल को सब्सक्राइब जरूर करना
11:21मिलते हैं अगले वीडियो में और भी इंट्रेस्टिंग और खौफना कहानियों के साथ
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