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क्या अलग-अलग पीढ़ियों में राष्ट्रवाद- देशभक्ति की परिभाषा बदलती है? कुमार विश्वास ने बताया, Video

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00:00जब राश्ट्रवाद और देशभक्ती की बात आती है तो साहित्य और संस्कृती हमेशा उसमें एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं
00:08और आज के दौर में जब हम संस्कृतिक राश्ट्रवाद को अपनी वाणी देने की बात करते हैं
00:14उसे घर-घर तक पहुचाने की बात करते हैं तो एक ही नाम सामने आता है वो है कुमार विश्वास
00:19का
00:23सुरक्षा सभा में हमारे साथ जुड रहे हैं कुमार विश्वास क्यूंकि जब हम सुरक्षा की बात करते हैं तो उन
00:30शब्दों की बात जरूर आती है
00:32उस युवा पीड़ी को खुद के साथ देश के साथ जोडने की बात जरूर आती है जड़ों से तिरंगे से
00:38जोडने की बात जरूर आती है
00:41कुमार विश्वास वो शक्स जिन्होंने अपनी आवाज, अपनी कलम, अपनी शब्दों, अपने विचारों से देश के करोडों लोगों के मन
00:49में
00:50या तो राष्ट्रवाज जो सोया हुआ था उसे जगाया है या जो जागा हुआ था उसे एक बहुत प्रबल आवाज
00:55दी है
01:09वो सुरीली धुने कोई नहीं भूल सकता चाहे हम कोई दिवाना कहता है की बात करें या फिर है नमन
01:15उनकों की बात करें आज जो उनका पहनावा भी है वो खास सुरक्षा सभा के लिए है तालियों के साथ
01:21स्वागत कीजिए कुमार विश्वास का
01:40मुझे याद नहीं आता है कि कभी भी मैंने उनसे कहा हो कि 15 अगस्त का समय है लदाग जानी
01:47की सोच रहे हैं समय है कभी भी उसके लिए डाइरी नीच चेक बहुत सारी चीजों के लिए डाइरी चेक
01:53करवाते हैं पर अगर देश की सेनाओं के पास सुरक्षा बलों के पास कभी
01:58भी मुझे जाना हुआ है और मैं किसी भी समय उन्हें कॉल कर दूँ कुमार विश्वास ज़रूर आते हैं मुझे
02:05विश्वास रहता है कि आप आएंगे ऐसे क्या मुहबबत है आपको देश की सेनाव से
02:11देखिए आप पिदा होते हैं तो आपके माता पिता के बाद जो दूसरी चीज आपके साथ जुड़ती है वो जुड़ती
02:19है इस भूखंड की वो सीमा र Εखा जिसके कारण आप परिभासित होते हैं तो मैं जिन माता पिता की
02:27संतती हूँ उनकी पहचान एक क्षेत्र विश्यस
02:32लेकिन विश्व के 850 क्रोड लोग जो लगभग हैं, उनमें मेरी पहचान क्या है?
02:38क्या उनमें मेरी पहचान हिंदू होना है? क्या उनमें मेरी पहचान उत्रप्रदेश का होना है?
02:42क्या उनमें मेरी पहचान नॉइडा का होना है? कभी होना है? नहीं है.
02:46अल्बानिया के किसी छोटे से कस्वे में अगर मैं छोटी बिदा रहा हूं, अगर मैं पुलेंड के क्राको में घूम
02:52रहा हूं, तो वहां बहुत सरे लोग जो घूम रहे हैं, उनमें से मुझसे पहली बात क्या पूछी जाएगी, क्या
02:58बिंदू है? नहीं, क्या पोईट है? �
03:01From where you are, और मैं कोगा, I am Indian, मैं भारत से हूँ, तो मेरी पहचान देश है, इसलिए
03:06जो देश की सुरक्षा करती हो, जो देश को आश्वस्त करती हो कि देश अपना काम कर सकता है, उस
03:13अग्रिम पंक्ति के प्रति आभार विक्त करना, मेरा ही नहीं देश के हर नागरिका परम कर
03:20मुझे याद आता है मैंने आपको बहुत शॉट नोटिस पर जब हम पंग गए थे, बहुत रिस्की था हो, मैं
03:28सुना देता हूँ, उन्होंने मुझसे का शुटा जी ने कि पंगउ सौ जाना है, तो मुझे लगा कि जैसे दुनिया
03:33बर में जाते हैं, जाते होंगे कि जी लो
03:48हूँ, खुब प्रसंद हूँ मैं आरंध कैसे, यह हमारे गौरव, यह सब साथ हैं, जो जो लदाख जा चुका है,
03:54और पहली बार के उस हनुखव को जानता है, वो जो से गौरव सावन जरूर हसरे हैं, वो तो फौजी
03:58हैं, उनको समझ में आता है, हमको तो पता नहीं था, ह
04:15यम्राज के दौर के दर्शन किये, वो कपूर सूंगे, और लगा अब गया, अब गया, क्या हो रहा है, और
04:23जब हम लौट के आए, और जब ले अरपोर्ट पर जो कमांडर साप ते, CISF के, वो हमसे मिलने आए,
04:28तो उनने उससे कहा कि, आप कैसे गए, मैंने कहा है, हली से न
04:43लोगों के, बुले बड़े-बड़े सिपाही भी 10-10 दिन, 15-15 दिन लेते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि
04:49वो जो नशा था वहाँ जाने का, परफॉर्म करने का, श्वेता जी, वो स्वास्त का नहीं था, स्वास्त तो मेरा
04:55इतना अच्छा नहीं है, ऐसा मान नहीं हूँ, �
04:56वो शाद इस तिरंगे का था, जो शाती पे लिखा वा, जो हरदाय पे लिखा वा, शायद इस करता है,
05:01क्योंकि वहाँ पर जैसे ही, जब एक बार माईक आपके हाथ में गया था, उसके बाद वो सांसे भी चलने
05:07लगी, उसके बाद सांसे फस क्लास चली है, उटों पे गंग
05:27जम्मु कश्मीर का वो दौर भी याद आता है, जब आराम से हम घूमते फिरते नहीं थे, समय भी हम
05:34लोग गयते वाँप, और मेरे पास एक संस्मर्ण है, मैं सोचता हूँ, लोग कहते हैं कि निजाम कैसे बदला है,
05:40लोग कहते हैं कि भारत में क्या अंतर आ है, तो राजने
05:56जहाँ देश के पास सेना है, आपका देश जहाँ सेना के पास देश है, दोनों में अंतर है, यह समाने
06:01बात है हमारी, वहाँ जब हम गए थे तो मुझे याद है कि सेन्य बलों के लिए कारिकम करने गए
06:08थे हम लोग, और कुछ गाडियां लगाई थी आस तक ने, जो हमको ड
06:13तक ले जाने वाली थी, और हमने डल में भी एक प्रोग्राम किया था, डल का विश्वास, तो जाहिर सी
06:17बात है कि उन गाडियों की, उनके मालिकों की, उनके ड्राइवर्स की, एक चेकिंग भी होगी, जो कि वो आर्मी
06:23केमपस में आ रहा हैं, बाहर जा रहा हैं, हम लोग व
06:41तो मुझे याद है कि मेरी आदत है बात्षीत करने की लोगों से, ड्राइवर्स से, वेटर्स से, बटलर्स से, मैं
06:48बात करता हूँ, जहां भी जाता हूँ, पॉलिटिकल सिचुएशन के बारे में, तो मैंने ड्राइवर्स से पूछा कि, और भाई,
06:53क्या हाल है, शृता जी �
06:54गाड़ी में थी, और क्या चलना है यहां, तो उसने मुझे से काया कि सब देख तो रहे ही हैं,
07:00क्या चलना है, तो मैंने गया, फिर क्या होगा, आपको क्या लगता है, दिखिए सब हिंदुस्तान को एक दिन वापिस
07:06तो जाना पड़ेगा, यह उसका स्टेटमेंट था, अ�
07:22हमारी गौर्मेंट प्रोमिस की हैं वो तौड़ा पूरा हो जाए, थोड़ा यहां फैक्टरी आजाए, थोड़ा अच्छा काम हो जाए, अब
07:27वह हमारी गर्मेंट हो गई, तो यह जो परिवर्तन आया है, इसमें बहुत सारा हिससा राजनेटेटिक इछा शक्तिका भी है,
07:35
07:35लेकिन उस दुर्गम समय में, उस भीशड इंसरजेंसी के समय में, बिना शिकायत के, चहरे पे मुसकान, दिल के अंदर
07:43कश्मीरियत और हिंदुस्तान दौनों को समेट के, वहां गोमने वाले उस फौजी का भी योगदान है, जिसने गालियां भी खाई
07:50हैं, लेकिन उसके बा
08:05वह कहानियां भी बहुत एहम होती हैं, और साहित की भूमिका भी बड़ी एहम होती है, जहां पर, जिसको दूसरे
08:12शब्दों में कहता है ना, नारेटिव, जो पहला ड्राइवर आपको जिसने जवाब दिया, वो शायद उस जहर को सुलता आया,
08:21लिये हुए था, पूरी दो
08:33शरीर में पड़े हुए कैंसर के सैल हैं, यह हो सकता है, आज हाट ना कर रहे हो, कल किड्नी
08:38खाएं, बड़सों लीवर खाएं, किस दिन हार्ट फिल कराएं, यह तो होता ही है, और कश्मीर में, यह पुराने लोग
08:47बैठे हुए हैं, जुनोंने सब काम करा हैं, कश्मीर में �
08:51सैन्य के जानका रहे हैं, मैंने शबसे पहली कश्मीर पर जो किताब पढ़ी, मैं शायाद ग्यारवी क्लास में था, तो
08:59मेरे हमारे चोटे से कस्वे में कोई मनुरंजन तो था नहीं, टीवी तो था नहीं, एक रेडियो था बुश का
09:05जो सुबह और शाम चलता था, समाचार
09:07के लिए, सुबह ब्रजमाधूरी आती थी, और शाम को देविकी नंदन पांडे से समाचार सुनिये, यह आता था, इसके अलावा,
09:15पत्रिकाएं, किताबें ही थी, तो मेरे पिता जी, जो कि प्रोफेसर है, तो प्रोफेसर थे, वो एक किताब लेके आये,
09:21जगमहन साहब की,
09:23और इस किताब का टाइडल मुझे आज भी याद है कुछ लोगों को याद होगा, My Frozen Turbulence in Kashmir,
09:27तब तक Kashmir मेरे लिए शमी कपूर का कश्मीर था, कश्मीर की कली का कश्मीर था, मेरे लिए वो जो
09:36राजिंदर कुमार और साधना की फिल्म है, आरजू, उसका कश्मीर था, लेक
09:53जो गलत प्यम ही बोई गई थी, उसका संक्रमण राजनीती ने ने जेला, उसका संक्रमण जेला सैना ने, उसका संक्रमण
10:02जेला कश्मीर के उन्यरपराध नागरिकों ने, जो वहां से भगाए गए और जो अपने सरसब्ज खेतों को और अपने सरसब्ज
10:11सेब के बगीचों
10:13को छोड़ कर यहां दिल्ली, इनोइडा, गुडगाओं के छोटी-छोड़ जगों पर बसे, पुरशार्थी लोग थे, कि उन्हाने अपना समय
10:21सही कर लिया, लेकिन ये भी इस देश के माते पर कलंक आजीवन रहेगा, कि 47 के बाद, 47 में
10:28तो चलो अंग्रेज था, उसने कर दि
10:42जब तक कि वही कश्मीरी अपनी पीडियों के साथ, दुबारा जाकर उसी तरह से ना बस जाएं, अपने घरों में
10:47दुबारा ना पहुंच जाएं.
10:50एक कवी जो हर पीड़ी, हर वर्ग के लिए लिखता है, सुनाता है, क्या उसको भी ऐसा लगता है, कि
10:57अलग पीड़ी का राष्ट्रवाद अलग होगा, अलग पीड़ी की राष्ट्रभक्ती अलग होगी, उसकी परिभाशा अलग होगी?
11:04दिखिए शरीर में जब आप ब्लड टेस्स कराते हैं, हमें पता नहीं चलता है, श्वेता जी कि सुबह उट के
11:08आलस क्यों आ रहा है, रात बर सुहें फिर क्यों आ रहा है, ब्लड टेस्स कराते है, डॉक्सर बोलते हैं,
11:13विटामिन डी की कमी हैं भईसाद, दूप में आप �
11:15बैठते नहीं, यसी में बैठ रहते हैं, दो शैशे पीजिए आप, छाहे दिन तो रोज पीजिए, फिर हफ्ते बर में
11:19पीजिए, तो क्या है यह उनको पता चलता है राष्ट्रवाद, जिनको उसकी जरूरत होती है, 47 की पीड़ी को राष्ट्रवाद
11:40पूचिए कितना ज�
11:40आपको दिखता था, एक बड़ा मशूर जुम्ला है कि किसी बिश्विद्या ले के कारकर में पंडित नहरू गए थे, किसी
11:50महिला ने नाराजगी थी, उसकी कोई कभजय की समस्या थी, वो भीड़ चीरती हो गई, उसने नहरू का कालर पकड़ा
11:54और कहा कि क्या आजादी आ�
12:04यही फ्रीडम है, तो जिनोंने जेला नहीं है, उनको लग सकता है कि राष्ट्रवाद आउट्डेटिव फिरोमिना है, लेकिन जिनोंने इसको
12:18जेला है, जिनोंने पंजाब का समय देखा है, जिनोंने असाम का समय देखा है, जिनोंने कश्मीर का समय देखा है,
12:24जिनोंने व
12:28परते साथ सुनते जानते हैं, राष्ट्रवाद विश्व के नक्षे में इस समय जो इस्थिति है, पिछले इतने अवसालों से और
12:35आगे होने वाली, उसमें कभी अप्रासंगिक नहीं होगा, और जिन देशों ने भी राष्ट्रवाद को अप्रासंगिक समझा है, वो देश
12:43
12:43तरकी की तरह फॉल हुए, यॉरप अपने फॉल के कगार पर है, मैं पिछले 20 सालों से लंदन जाता हूँ,
12:49मैंने लंदन तब भी देखा है, और आज का लंदन भी देखा है, मैं भविश्य वक्ता नहीं हूँ, लेकि अगर
12:53यॉरप अपने राष्ट्रवाद के लिए नहीं
13:13कि पगड़ी पर किसी अत्याचारी का हाथ सेहन नहीं कर सकते, उसी तरह इस धरती पर, किसी भी प्रकार की
13:19नापाक हरकत को अगर आप सेहन करते हैं, या उस विमर्ष के साथ हैं, तो आप इस राष्ट में रहने
13:23योग्य नहीं हैं, आप राष्ट विरोधी हैं.
13:25तो क्या अगर देश से नकसलवाद हट जाएगा, कश्मीर की समस्या आपको सुधार की तरफ नजर आएगी, तो फिर देश
13:35में कोई भी सेना को ये बोल दे कि तुम्हारी तनख्वाह तो हमारे पैसों से आती है, या फिर कुछ
13:43भी अनाप्शन आप, क्योंकि सेना इस नो ल
13:55आप लोगों ने भी चला है, दुनिया भी चला रहे हर बीडी जैंजी होती है साथ, मैं भी जैंजी था,
14:00मैं अक्सर कहता हूं हिंदुस्तान में हर आदमी 16 साल के बाद, अब 15 हो गया है, 14 हो गया
14:06है, 16-17 साल के आसपास कम्मिनिस्ट होता है, उसे अपने पिता में हिटलर द
14:24कारण ही है, आप इने सब जाना है, तो ये, ये एक फाजतु का विमर्श है, भई क्या, ये बैटे
14:34हमाई बच्चे, भई आप अलग तरीके से रोटी खाते हो कि मूसे ही खाते हो ना, ये क्या है, बस
14:39ये है कि मैं मक्का की रोटी, दूद में चूर के, और गुड में लाके �
14:44पाता था, तुम वो एक सूखी हुई रोटी के ओपर सबजी बिची रहती हो, से क्या कहते हो, पिज्जा पास्ता,
14:49वो खाते हो, ये ही तो अंतर है, बस, इसमें कौनसी मेरी तुमारी पीड़ी है लग हो गई, और मैं
14:54तो बड़ा खुश हूँ, आज चौराय पर खड़े हो
15:14बेटा आओ, सड़क पर आओ, नौकरी देखो, घर के खर्चे देखोगे, शादी होगी जिसके साथ, उसकी निगाहें देखोगे, स्कूटर पे
15:22किदर पीचे बिठाओं, एल्टो लूँ के का लूँ, सारे, तुमको जितने भी इश्वर तुमारे घर में रखे हुए हैं औ
15:43रोजी रोटीन पर चलती हैं और दूसरा आप भी समझती हैं, राष्ट्रवाद को अप्रासंगिक करना पॉलिटिकल मैटर है, नंबर टू,
15:52कोई से एक तरफा न समझे, राष्ट्रवाद को अत्यधिक प्रासंगिक बनाकर अपनी बेइमानिया, अपने भिष्टाचार, अ
16:01अपने वंश्वाद, अपनी थ्योरी से डिवियेट होना, इस सब को छिपाना भी पॉलिटिक्स है, कि कुछ समझ में नाय तो
16:10भारात माता कीज़े, यह क्या है, मंतरी जी आप से पूछने सणक कहा चली गई, वो पूछने की साब ऐसा
16:15हो गया, वो बच्चे मर गए, भारात
16:17माता कीज़े, भारत माता कीज़े, तेरे को इस काम के लिए लगाया गया, यह तो हर आर्मी की अपनी विंग
16:23का अपना वार क्राई है, हमारे जट बटालियन का अलग है, मराठास का अलग है, पंजाब का अलग है, सिक
16:28का अलग है, यह वो कर लेंगे, यह इस एक अंब्रेला
16:32कि नीचे बात छिपा लेना
16:33क्या ये सब बंधू एक बार दौनों हाथ उठा कर
16:36कहिंगे भारत माता कीज़े भाई काम बता
16:39तो ये दौनों ही
16:40राजिनिती हैं बेसी कली और हम
16:42इसलिए बोल पारें कि हम उसमें नहीं है
16:45हाँ
16:46हाँ, नहीं , पर रम तब भी बोले
16:48हमारा जगला तो इसी बात पे भाता
16:50कि बगी वो सेहना के सबोत मांग रहा था
16:52और मैं सेहना के समर्ड़ने कवैता लिख राध, ये भात पर ऐहा था
16:54तो जगला तो इसी बात पे हुआ Today
16:56का भाई सेना ने अंदर घुस के भारत के पराक्रम को प्रदर्शित किया है
17:02और तू जिस प्रदान मंत्री से दुखी है उनके लिए तू कह रहा है सबू तू उन पर कुछ भी
17:08आरोप लगा
17:08सेना पर मत लगा पूरा देश ताली बजा रहा है तू भीच में मूह दे रहा है
17:13और फिर कह रहा है लोग मुझे तपड़ के मार रहे है तो सेना तो तब भी दे अब भी
17:20है
17:23सेना के बारे में लिखना या मतलब हमारे सैनिकों के तियाग उनके बलिदान के बारे में लिखना चुनौति पूर्ण होता
17:31है
17:32में देखिए, आपको मैंक सूचना दू,
17:35चुछिए में रुची और हमने, मेरी खाद से श्यक्ड़ों शो,
17:37मैंने आपके साथ किये हैं, आज तक के साथ किये हैं,
17:41हिंदी साहित्यक्तिका थो उदभकव ही,
17:44सेने प्रशनशाउं से हुआ.
17:46भारत का जो हिंदी साहित्य का इतिहास है, उसमें सबसे पहला जो चैप्टर रहता है, वह होता है वीर गाथा
17:52काल, जिसे हम आधिकाल कहते हैं, वो किसली है, हमारे राजिस्थान में एक जाती है, बड़ी तेजस्वी जाती है, चारण,
18:00आजकल करनी माता का मंदिर, मेरा बड�
18:05देशनौक में जाके, लोगबाग आजकल उस शब्द का प्रियोग अपनी निजिक उंठाओं के लिए कर लेते हैं, लेकिन मूलत है,
18:13वो बड़ी अच्छी जाती है, वो बड़ी वीड जाती है, लेकिन वो शस्त्र और शास्त्र दौनों में निपुन है, तो
18:31राजिस्थान
18:32अगर पत से विचलित हो, तो उसको बोध भी कराता था कि तू गलत कर रहा है, उसके विरुद भी
18:38कविता लिखता था, तो जो पहली हमारी कविता है, प्रतवीराज रासो, महाकभी जगमल की लिखी हुई, जगनिक की लिखी हुई,
18:46जगमाल रासो जीसे कहते हैं, वो बेसि
19:00सही कि मैं अपने कारेस्टल को
19:02मंदिर समझू लेकिन
19:04अगर इसे को इंडोर्स कर दे
19:06वीर तुम बढ़े चलो धीर तुम
19:08बढ़े चलो सामने पहाड हो
19:10सिंग की दहाड हो पर कदम रुके नहीं
19:12आदमी बहुता हाँ ये ठीक है
19:14तो वो मार्चिंग भीट जो हमारे
19:16फौजी लोग कहते है तो उसको लगता है ठीक है
19:18तो कवी की जो जिम्मेदारी है
19:20जो उसने आजादी में भी
19:22निभाई जो उसने
19:23जो उसके बाद युद्ध हुए उनमें भी निभाई
19:27प्रति समय युद्धो नमाद पैदा करना
19:29कवी की जिम्मेदारी नहीं है
19:31पर अपनी कौम को
19:33अपने देश को
19:34और उसके सैनिक को
19:36मनोबल देना
19:37उसको पुष्ट करना
19:39और उसको ये कहना कि हम तेरे साथ खड़े हैं
19:42और अगर उसने बलिदान दिया है
19:43तो उसके प्रति करतग्यता का गीत गाना
19:46ये उस कवी की जिम्मेदारी है
19:48जैसे आपने जहां से बात शुरू की
19:50कि मैं
19:51मेरे काज़े सैना के भी
19:53मैंने सैंकुनो प्रोग्राम कर दी होंगे
19:54हर जगे हम लोग गए आप भी गई
19:56आपके चैनलस में सब जाद गया
19:58बाकी लोगों के साथ भी गया
19:59उसके कारण क्या है
20:00इश्वर ना करे अगर सीमा या सुरक्षित हो जाए
20:03और जो हाल दुनिया के दूसरे देशों का चला है
20:06कि दस-दस साल से इल्जे ही पड़े हुए
20:08आज इतने दुन गई आज इतने दुन गई
20:10इश्वर ना करे हमारे याँ होता
20:12तो क्या मैं कुमार विश्वास होकर
20:14इतने शो कर पा रहा होता
20:15मैं इतनी सुकपूर्ण संबृद जीवन जी रहा होता
20:19मुझे नौईडा गुडगाओं में रहते वे रात को सुनते वे
20:21साइं साइं साइं दुबई को सबसे सेफ हेवन माना जाता था
20:25मेरा एक ब्रदर इनलॉव दुबई में रहता है
20:27वो भी आया था
20:29पिछले 25 साल से दुबई की प्रशनिशा के गुडगा आता है
20:32कहता है बहुत अच्ची जिंदगी है
20:34बहुत अच्ची जिंदगी इस बार आया तो मैंने क्या चलना है
20:36वोला गुरू बड़ी परिशानी हुई
20:39रोज रात को सौन साइं होती थी
20:41अरे उधर गिरा क्या इधर गिरा क्या
20:43यही होता रहता था
20:44तो जब आपका देश असुरक्षित होता है
20:47तो केवल सीमाएं ही असुरक्षित नहीं होती
20:50हर व्यक्ती असुरक्षित होता है
20:52इतनी बड़ी असुरक्षा से
20:55बचाने वाली सेना
20:56कृतक गयता की पात्र है
20:58कि आप कभी हैं, तो उसके लेकर तक गेता का गीत लिखें।
21:01इसलिए बंगलादेश विजय के जब पचास वर्ष पूरे हुए,
21:05तो उससे में जनल लावत शरीर में थे,
21:07तो ये तैह हुआ कि इसका गीत लिखा जाना चाहिए।
21:11और इस पर एक बढ़िया बनना चाहिए।
21:12तो उस समय उरी में जिनका संगीत था,
21:15उनको कहा गया कि आप इसका गीत बनाई है।
21:17तो मीटिंग होई सबकी,
21:20तो जनल लावत ने कहा गी आप तैकल लीजिए, कुछ भी करना हो,
21:22लेकिन लिखवाई है कुमार विश्वाजी से।
21:26तो ये जो भरोसा था जनल लावत का,
21:28और मैंने वो गीत लिखा,
21:30बेफिक्र की हमें चौकस।
21:33चला चला है अभी,
21:34और उसके, मेरे खाल से 20-30-25 दिन बाद,
21:37किसी एक प्रोग्राम में मैं जनल साब को मिला,
21:40तो मैं सामने से जाके,
21:41मैंने उनको प्रोग्राम किया,
21:42कि सर, नमस्ते,
21:44तो उन्होंने मुझे हाथ बढ़ाया,
21:45रहे कहा, बेफिक्र की हमें चौकस।
21:46तो उनको याद था ये गाना।
21:48तो अगर मैंने फिल्मों में गाने लिखे,
21:51अक्षर कुमार जी की फिल्म लिखिया,
21:53आप रामायन लिख रहा हूँ,
21:54ये मैं रील हीरोज के लिए लिख रहा हूँ,
21:58ठीक है?
21:59तो जब मैं रील हीरोज के लिए कुछ पैसे पर लिख सकता हूँ,
22:01तो कुछ सांसों के लिए मुझे रियल हीरोस के भी लिखना चाहिए
22:04हर कभी को लिखना चाहिए
22:08और किवल
22:10सेनाओं के लिए ही क्यों
22:11आपको याद होगा जब हम जलियाँ वाला बाग गए थे
22:15और वहाँ
22:16ठीक है
22:17वो जब संघर्ष उस दौर का है
22:19जब भारत
22:21स्वाधीन नहीं था
22:23लेकिन
22:24ये वो भी बताती है बात
22:26कि आपको
22:28देश के लिए कुछ करने के लिए
22:30वर्दी पहनना ज़रूरी नहीं है
22:33देखिए देश कैसे
22:34बनते हैं कौमे कैसे बनती है
22:36कौमे बनती है जब वो
22:38ये समझ लेती है कि ये हमारा
22:40इतिहास है, यह हमारी परंपरा है
22:43इसे एक हजार साल पहले
22:44जाहिल इंदुस्तान में आया
22:46गजनवी
22:49आपको
22:50या मुझको, यह नहीं पता कि उसने
22:52मेरे परदादा के परदादा के परदादा के साथ
22:54क्या किया
22:56आपको मुझे ये भी नहीं पता कि उन्होंने हमारी परदादी की परदादी की परदादी की साथ क्या किया
23:00या उस गाउं का क्या किया लेकिन फिर भी मुझे आज भी गुस्सा है
23:04क्या मैं अपने सामने देखूंगा गजने भी रिपीट हो
23:07यह क्या है यह DNA का प्रोसेशन है एक DNA जिस थौट से बनता है तो वो प्रोसेशन अगर कमजोर
23:14हुआ तो आजादी भी कमजोर हो जाएगी जैसे मैं आज भी मानता हूं कि 47 की लड़ाई सौ साल लड़ते
23:20लड़ते देश के जो युद्धा थे जो लड़ रहे थे उस लड़ाई
23:35कि जाए दस साल बाद मिले ऐसे कैसे हो जाएगा कि मेरी मा के दो बाँ है एक मा इधर
23:39काड़ दो के एक मा इधर काड़ दो कि क्या मतलब है जहां माता गांधारी का निवास है जहां महर्शी
23:44पाणनी जहां पैदा हुए है जहां मेरे राम के पुत्र लवने लाहौर बसाया ह
23:52जहां पुष्पपर बसाया है
23:54शुंग परंपरा का मैं उस जगे को कैसे दे दूँगा
23:56मिठाकिश्वरी मंदिर को कैसे दे दूँगा
23:58लेकिन ठक गए थे
23:59कवी का काम है कि जब कौम ठके
24:02तो उसे जगाय जिन जोड़के कि ठकना नहीं है
24:05वो लड़ने तो जा नहीं सकता
24:05लड़ने भी जाना चाहिए अगर जा सकता हो
24:07हमारे भरतपुर के बड़े प्रिसिद्ध राजा हुए है
24:10बड़े तिजस्वी और बड़े कूट नितिग्य
24:12जाट राजा सूरजमल
24:13उनके एक मित्र थे सूदन
24:16वो कवी भी थे और योद्धा भी थे
24:18और वो महराज के साथ युद्ध महीं शहीद हुए
24:20तो ऐसे बहुत सारे लोग हैं
24:22जो कवी भी थे और योद्धा भी थे
24:25वो सब जो है
24:27एक प्रिथिराज राठोर जिनकी किताब है
24:29बेली कृष्ण रुकमनीरी
24:30वो भी कवी थे और योद्धा थे
24:32वो भी शहीद हुए
24:33लेकिन अब अगर कभी सेना में नहीं है
24:35मैं तो सेना में नहीं हूँ
24:36लेकिन मेरा काम ये तो है कि
24:38अगर मेरे देश की सेना
24:39या कोई सिपाही जो काम से जाता है
24:41इसलिए
24:42मैंने अपनी बेटियों को
24:44बच्पन से सिखाया, तब मैं कारकोट चलाता था, आगे श्रीमती जी बैठती थी गोदी में लेकर, चोटी बेटी चोटी, बड़ी
24:49बेटी चोटी थी, इसकी अब विवा हुआ, तो उनको मैंने सिखाया कि कभी भी फॉज का ट्रक जा रहा हो,
24:55परामिलिटरी का को ट्रक जा �
24:56तो पीछे आपने देखा, वो जमान बैठे रहते हैं, राइफलियों बैठे रहते हैं, उस ही दिवाली पे, वो बहार की
25:01तरफ देखते रहते हैं, आप उसकी मानसिक्ता समझे, उसको लगता है, मैं अलग हूँ और ये चमचमाती गाडियों में चलते
25:08वोग अलग है, इनका
25:08सुख अलग है और मेरा ड्यूटी अलग है, तो आप क्या कर सकते हैं, आप उसको वेतन नहीं बढ़ा सकते
25:13हैं, कुछ नहीं कर सकते हैं आप उसका, आप सर्फ इतना कीजिए, कि आपको जब वो देखे आपकी तरफ नजर
25:19जाएं, तो उसे मुस्कराईए और अगर आपके हा
25:34आप काम करते हैं, हम काम करते हैं, सैनिक वेतन के लिए ने वतन के लिए काम करता है, आप
25:40यह कहता है, तनकवा मिलती है, चलिए जी तनकवा मिलती है, आप देश के सब से बड़े समाचार संस्थान में
25:49काम करते हैं, कोई भी जो काम करता हो, अच्छा वेतन हो, कल को समाचार
26:05यहां उससे कोई कहने वाला नहीं था
26:09युगिंदर
26:10यादव से कोई कहने वाला नहीं था
26:12तू गोली खा ले
26:13यार मेरे गाउं का है
26:15मैं बुलेंशेट जी लेका हूँ
26:16मेरे प्रॉस के गाउं का है वो
26:1824 हाजमोला नहीं खा सकता है
26:20यह जो नेता बकवास करता है
26:34सुबह तक पूरा घर दो पैर तक वेट करेगा कि वाश्रूम कौन जा तू ही बेठा रहेगा अंदर
26:38वो गोली खा रहा है तेरे लिए
26:42और तू इतना कृतगन है कि उसको तू मजाक बना रहा है
26:46मैं तो
26:48अभी आंदोलन वा मैंने आंदोलन देखा
26:50ठीक है बच्चों की मांग थी
26:52जायज मांगे उनके पसीने की उनके खून का मजाक उड़ाया सस्थान ने
26:56उसके खिलाफ उन्यांदोलन करना चीए
26:58लेकिन अर्थ सैनिक बलका लड़का खड़ा हुआ है
27:00उसके सामने एक बकवास कर रहा है
27:20लोग होते हैं उनसे कहता हूँ इस देश में
27:22दो चार पांस संस्थान बचे हैं
27:24जिनकी वज़े से ये देश दुनिया के देशों में अच्छा माना जाता है
27:28उनकी इज़त करिए उन्हें सम्मान दीजिए और उनके लिए
27:32कुछ नहीं कर सकते तो जहां वो मिलें एक बार मुस्वरा के उन्हें धन्यवाद तो बोलिए
27:35थैंक्यू तो बोलिए
27:37अच्छा आपकी तो दुनिया भर में आप कभी सम्मेलन आपके होते हैं
27:43पाकिस्तानी भी बड़े आपके फैंस हैं
27:45आपकी कविताओं को पसंद करते हैं
27:48क्या कहते हैं वैसे मतलब जब वैसे तो आपको सुन रहे हैं वो मंच पर
27:52जब आप उनको सुनते हैं तो वो क्या कहते हैं
27:55दिखिए उस पार मेरे बहुत दोस्त हैं
27:57बहुत प्रशन शक हैं
27:59और मुझे बहुत बुलावे मिलें पिछले 10-15 सालों में, वाहकर जो सबसे बड़ा प्रोग्राम है, हसना मना है, उसने
28:05भी क्या ही बार मुझे अप्रोच किया, और मेरा बड़ा मन है कि में जाओं, कभी ना कभी मैं लहोड
28:09जाओं, कभी ना कभी मैं करांची जाओं, फैसला�
28:26बड़ना की शिकार है, एक ऐसा देश जो इतिहास के बारे में जूट बोल ला है, कितना बड़ा अपराद है
28:32कि अब लगातार जूट बोल ला है, आपके जो रॉल मॉडल हैं वो गजनी और गौरी हैं, जिनसे आपकी वल्दियत
28:39का दूर-दूर का संबन नहीं है, उनके पस
28:42इतिहास भी नहीं है, उनके पस केवल एक भ्रम उन्हें दिया गया है, और दूसरा, मैं आपको बता दूँ, फौज
28:48के हैं लोग बैठें, पूरा सम्मान हैं, फौज के सम्मान के लिए कारिक्टिम कर रहे हैं, यहां एक ब्रिगेडियर भी
28:54अगर छुट्टी पे जाता है, �
28:59तो वो अपनी यूनिट से आग्या लेता है, यह गौराव सब बैठें, पुरा प्रोसेस चलता है, छुट्टी मिलेगी, नहीं मिलेगी,
29:08कैसे, क्यों जा रहे हो, कहां कहां जाओगे, यह क्या चक्कर है पड़ासी मुल्क वालों, उनके अवाम को पूछना चाहिए,
29:14कि आप
29:15आपके सारे ब्रिगेडियर, आपके सारे जनरल जो हैं, जब चाहे मूँ उठा के अमेरिका जाते हैं, और सबके महाँ प्रफर्टीज
29:21हैं, सबके महाँ बंगले हैं, सबका महाँ काम हैं, तो एक विचारे गरीब देश को, जो 400 रुपे किलो प्याज
29:29खरीद रहा है, 200 रु�
29:33हमारी है, पानी भरा हुआ है शेहरों में, उनको आपने एक जूटी कहानी सुना कर फसा रखा है, तो मुझे
29:40जब भी वो मिलते हैं, बाहर मिलते हैं, बाते करते हैं, मुझसे बाते करते हैं, तो मैं उनसे यह कहता
29:45हूं कि भाई, और आज भी आपका चैनल देखा जाएगा,
29:48यह क्लिप भी वहाँ जाएगी, हिंदुस्तान के आम नागरिक की ओर से मैं उनसे कहता हूं, यहां की सरकार के
29:55लिए के कारण भी कहता हूं, हम सब आप से बहुत प्यार करते हैं, क्योंकि आप सब लोग कोई अलग
30:01नहीं हो, 200 साल पहले, 400 साल पहले, 500 साल पहले, किसी परेश
30:17लेकिन अंतिमति उनों का बाप का नही अला निकलता है, लास्ट में, तो चलिए आप चले गए, कोई दिक्कत नहीं
30:27होता है, घरों में बटवारे हो जाते हैं, दिवारें खिज जाती हैं, आप उधर चले गए, लेकिन अब उस जनता
30:33के साथ जो मजाक वो लोग कर रहे हैं,
30:37कल वो एक मैच हार गए हुआ की लड़कियां, इंडिया से मैच हार जी चलती रहती है, हम भी कई
30:42बार हार हैं, वो जादा बार हार गए हैं, कोई दिक्कत नहीं, चलता रहता है, बच्चिया हैं हमारे लिए तो,
30:52बई मेरी अब जो उँवर है तो मैं तो बेटिया ही है, तिस
30:55इसमृती हमारे लिए घर की लड़की जैसी है, दीपती हमारे बच्ची रखे हमारे बेटी जैसी है वो भी, बहुत हम
31:01उसे प्रेम करते हैं, ऐसी वो बच्चिया हैं, लेकिन आप देखिए उनका मैदान पर पूरा जो विमर्ष है, वो खेलने
31:06की बजा है, वो जो उनकी जो
31:07सेन्य कतिविदिया हैं, के जाज यू गया, यू आया, भाई मुल्क जा रहा है नीचे, मेरा जाज मत देख, मेरे
31:13पस तो बहुत है, मैं और खरीद लूँगा, मतलब, अभी दिवाली आने वाली है, एक युद के बराबर का बारुत
31:21तो हम दिवाली में फूक लेते हैं, सु
31:37एक पड़ोसी आपका है, एक साथ आपसे आजाद हुआ था, आप एक दिन पहले आजाद होगे थे, सीनेर हो बाई
31:42साब आप, आपको एक दिन फालतु मिला था, हिंदुस्तान इस जुगाड में लगा हुआ है, कि वो मंगल पर कैसे
31:48जाए, चंदरमा पर तो पहुँची गय
31:51वो अंतरिक्ष की सीमाएं क्रोस करने के जुगाड में है, ये सीमाएं क्रोस करने के जुगाड में है, कि हम
31:57ये बाल कैसे पार करेंगे, कल भी मारे गये हैं, तो मुझे उस देश के नागरिकों को लेके दुख होता
32:03है, मुझे उन धरोहरों को देके, आपने देखा होगा, �
32:06आजकर वहाँ एक काम चला है,
32:0947 में जो लोग इधार आये थे,
32:11वो अगर अमेरिका चले गए,
32:12लंदन चले गए, या भारत में धनी परिवारों में हैं,
32:15तो वहाँ की दादियां,
32:17दादा, जो 95 के हैं, 93 के,
32:18वो कहते हैं कि मैं चंब में रहता था,
32:21मुल्तान में हमारी गली में तीसरा मकान था,
32:23गुर्द्वारा साहिब के,
32:24तो वहाँ के कुछ बच्चे, वो 100 डॉलर लेके,
32:2650 डॉलर लेके, या कभी वैसे भी,
32:29वो वीडियो पर उन घरों को दिखाते हैं,
32:32आपने देखे होंगे, वो वीडियो अकसर आते हैं,
32:35कि वो बर्मिंगम से एक माताजी ने बोला है,
32:38कि हम चंब में रहते थे,
32:40तो आज अपन वहाँ जा रहे हैं,
32:41मसला ये हैं, देखते हैं,
32:43और फिर वो जाके वो घर दिखाते हैं,
32:45गो घर वैसा ही निकलता है,
32:4780 साल हो गए,
32:49आज आप भारत के शेहरों में घूम लीजिए,
32:51भारत के शेहरों से भी तो लोग गए थे,
32:53आपको एक भी 80 साल पुरानी इमारत मिलती है,
32:56मैं जिस कस्बे में पैदा हुआ,
32:5870 के दर्शक में, तो आजादी 25 साल पहले ही तो आई थी,
33:19जनल सहाब आप इस पे लगा रहे हैं,
33:21पता नि, वो तमगे कौन सी सेल से ले के आए,
33:25कहां जीते हैं, ये चाती कम पड़ गई है,
33:29मुझे लगता पीट पलटकाना चीए उने,
33:32बई, यहां जो है,
33:35सेम की फोटो है,
33:36हमारे फिल्ड मार्शल की फोटो है,
33:38तो सब को समझ में आता है,
33:39कि उन्होंने क्या किया था,
33:41कैसे एक युद्ध उन्होंने जीता,
33:42और कैसे फाल के दो टुकड़े एक मुल्क के,
33:44किये उनके नित्रत में हुए,
33:46आपने तो कोई युद्ध लडाई नहीं है,
33:47युद्ध लडाई तो आप सब के सामने आप हा रहे हैं,
33:50अभी कारगिल पे लगातार वो अपने दिवंगत जो राश्रपती थे,
33:53जिन्होंने सत्ता का परहन किया था,
33:55मुशरफ साब, उनको कूप गालियां देते हुए मिलते हैं,
33:57कि उसने हरवा दिया,
33:58नवा शरीफ साब कहते ही थे,
34:00कैसा देश है भाई साब की,
34:0280 साल में आज तक एक प्रधान मंतरी,
34:065 साल पूरे नहीं कर पाया है,
34:09और मैं जानता हूँ ये बात वह जाएगी,
34:12इमरान खान साब जेल में बंद है,
34:13मैं उनका खिलाडी के रूप में प्रिशन्शक हूँ,
34:15मेरे को तो क्या मतलब,
34:17बट मैं अकसर ये मानता हूँ,
34:18अकेले में बैठके,
34:19कि वो मुल्क इमरान खान को डिजर्व नहीं करता,
34:23क्या कमी थी इमरान खान के पास,
34:25इतना हैंडसम आदमी,
34:27हाट्थ्रॉब था,
34:28इतना बढ़िया क्रिकिटर,
34:29पहली बार वर्ड कप उठाया,
34:31एक छोटे से गरीब देश को दुनिया के नक्षे पे लाया,
34:33पहला कैंसर होस्पिटल लेके आया,
34:35फिर दूसरा कैंसर,
34:36उसने सोचा है, चलो में करके देखता हूँ,
34:38बढ़ उससे गल्ती ये हुई,
34:40कि आका उससरे बदलने की कोशिश की,
34:43मैं एक छोटा था आपने मुशायरे की जिकर की,
34:45मैं एक दुबाई का मुशायरा था,
34:46दुबाई अशार्जा का मुशायरा था,
34:47पाकिस्तान के हमारे एक सीनिर दोस्तें वह आयोए थे,
34:50तो शंगाई उनवेस्टी से,
34:52� अउर्दू डिपार्टमेंट के हैड भी आयोए थे,
34:56तो हम लोग सुबै खाना खाने शंगाई से,
34:58उर्दू डिपार्टमेंट है वा,
34:59तो उसके जो अर्दू के हैड से चाईनीज थे वो,
35:02तो वो भी आयोए थे,
35:03तो आम लोग चल लए थे तो वो गैल्री छोटी सी थी
35:05तो वो चलने की तो आप चलेंगे
35:07आप चलेंगे तो मैंनों से का रहिए बाई आईए ना
35:11तो वो चाइनीज जो महमान थे उनको बोले
35:13नहीं नहीं इनको चलने दे अब यह हमारा फ्यूचर है
35:17Can you believe
35:18और वो हस पड़े इस बात को कहके
35:19इस देश में ये बैठे में बच्चे
35:21ये उसी पीडी का प्रतिनित करते हैं
35:25जो अभी जमा थी
35:26कोई कह सकता है कि कोई देश भारत का फ्यूचर है
35:29भारत का फ्यूचर भारत खुद है
35:31वो अपनी तकदीर खुद लिख रहा है
35:33अपना काम खुद कर रहा है
35:36हमारे
35:37हमारे जन्रल का प्रमोशन
35:40पेंटागन नहीं करता
35:42वहाँ एक मेजर का प्रमोशन नहीं होता बिना पेंटागन के
35:46CIE पहले महर लगाती है
35:47कि आकाओं के साथ ठीक है कि नहीं है
35:49उसके बाद प्रमोशन होता है
35:51तो ऐसे में भारत के पास एकमत रिविकल्प ये है
35:53कि भारत अपनी सैन्य तयारियों को अद्बुत करें
35:56और विश्व के सैन्य बाजार में
35:58खुद को एक सैलर के रूप में
36:00प्रस्तुत करें
36:01भारत की मेधा, भारत की प्रतिभा, भारत के वैग्यानिक
36:04ये सब इसमें निवेश करें
36:06और मैं अपने पाकिस्तान के दोस्तों से यही निवेदन करता हूँ
36:10देखिए जब तक आप लोकतंतर का स्वाद नहीं चखेंगे
36:13आप इन जनरलों की मुठी से बाहर नहीं आएंगे
36:18आपने चखा ही नहीं, कायद आजम गए
36:21सोचनी की बात है कि कैसे गए
36:24एक एंबुलेंस नहीं मिली
36:26कराची के सड़क के किनारे डेड़ गंटे आपका
36:28जिसने मुल्क बनाया
36:29जिसको और मुझे दुख क्या होता है कि
36:32कल्चर में इतने बढ़ी आते हैं, कल्चर भी चली गई
36:34देदी हमें आजादी बिना खड़क बिना ढाल
36:37प्रदीप जी ने लिखा यहां का गीत है न
36:40देदी हमें आजादी
36:41उसी को कायद आजम कर दिया
36:44उसी में
36:48अरे भाई धुन तो दूसरी लिया आता
36:49शब्द तो दूसरे लिया आता
36:51तो एक जिसे कहते न
36:54जिसे हमारे यह
36:56मार्केट में
36:57फडजी एडिशन आता है
36:59एपल का फडजी फोन आता है
37:01तो एक
37:03फडजी सा देश बनके रह गया है
37:04इसके पाद ना कल्चर है ना जबान है
37:06जबान भी दिल्ली की है खाना भी उदर काई है
37:08मुझे वहाँ के लोगों के बारे में दुख है
37:11देखो श्विता जी
37:12यह डिजिटली रिकॉर्ड तो रहेगा ही
37:15हम रहे ना रहे
37:17हाला कि अब एसेट नहीं बचा पड़ा है
37:21लेकिन यह लाइबिलिटी भी एक ना एक दिन
37:23भारत को जहलनी पड़ेगी
37:24यह सीमा एमाए टूतेंगी
37:26और जहां तक तिरंगा था वहां तक जाएगा
37:29बर एक ना एक दिन भारत को ही ठीक करना पड़ेगा
37:32आज करें, कल करें, पचास साल बद करें, सो साल बद करें
37:35चुकि उन्हें दे दिया, नहीं चल रहा
37:37हो नहीं पा रहा
37:38वो जो एक अनुरा कशिप की फिल्म में
37:41तिकमाशू का डायलोग है ना कि बेटा तुम से नहो पाएगा
37:45तो वो
37:45हो नहीं पा रहा उनसे
37:48जैसे राजनाजी बस आने ही वाले हैं और राजनाजी कहते हैं ना कि P.O.K हमारा होगा वही के
37:54लोग कहेंगे
37:54कुछ ऐसा ही होगा
37:56देखिए आज वही बात हो गई
37:58जो टिपिकल गल्ती जनरल अयूब ने की थी बंगालियों के साथ
38:03वही टिपिकल गल्ती जनरल आशिप मुनीर साहब
38:06वो कर रहे हैं आज बलोचों के साथ
38:09और वो कर रहे हैं आज हमारे इन P.O.K वालों के साथ
38:14इनके साथ भी वही कर रहे हैं
38:15क्योंकि फॉज को जैसे भारत में है
38:20भारत में फॉज का बड़ा सम्मान है
38:22लेकिन फॉज तया नहीं कर सकती
38:24कि मेरा प्रदानमंत्री कौन बनेगा
38:26कितनी स्मूथली हमारे इहां
38:29जनरल सहाब दूसरे आ जाते हैं
38:30अब पता नहीं चलता
38:32अचानक एक दिन हमें पता चलता है
38:34कि आस तक यह जनरल है अब यह जनरल होंगे
38:35और हमको यह भी नहीं पता चलता
38:37अभी मेरे काल से उपेंद्र दुएदी जी तो
38:40सेवा निवरित हो गए
38:43मुझे अभी जब वो सेवा निवरित हो है
38:45उसके 15-20 दिन बाद पता चला
38:48मैंने किसी से काया कि यह जनरल सहाब से मिलने जाना
38:50उपेंद्र दुएदी जी से बाद करने कि लो
38:52उनने का हाँ मिल सकते हैं वो तो सेवा निवरित हो गए
38:551500 करोड का जनरल
38:58चुप चाप अराम से विदाई लेता है
39:00चुप चाप उसका दूसरा जो यक्ति है
39:02जो सेवा में वरिष्ठ है वो आके जोइन कर लेता है
39:05यहां यही चलता रहता है कि
39:07आठवे नंबर का जिया उलक बना दिया था भुट्टो ने
39:09फिर उसने भुट्टो को टंग दिया
39:10फिर यह हो गया फिर वो आसिम मुनीर ले आए
39:13अब वो आसिम मुनीर एक वो लेके आए
39:15संविधान शर्शुधन
39:17कि मैं मरते दम तक
39:19मेरे को इम्मुनिटी है
39:21मैं बचा रहूँगा
39:22मैंने का वो यूरेनियम जो मिला है
39:24उसकी सुबह साम एक एक चमच और खाओ ता कि और
39:26कि भई मैं यूरेनियम खाके बैठा हुआ हूँ
39:29ऐसे कही होता है
39:30हमारे यह कभी आपने किसी फोजी को
39:33कोई पलिटिकल स्टेट्मेंट देते हुए
39:35नेशनलिस स्टेट्मेंट देते हुए
39:37तो वह तो उसकी मूर्कटा है
39:42तो ये जो भारत ने सैन्य anुशाशन
39:45पेदा किया है
39:46ये भी भारत की बहुत बड़ी उपलबदी है
39:47दुनिया के इतनी बड़ी सैना, लेकिन एकदम अनुशाषित, राजनिती से एकदम अलग, अपने कर्तव पे अविचलित रहती है, उससे कोई
39:54फरह नहीं पड़ता, जब तक वो उस जमूरियत में नहीं आएंगे, पड़ोसी मेरे, तब तक वो अपने लिए भी कष्ट
39:59पैद
40:17सब वो युद्ध हो जाएगा, मैंने का हमारे सेठ ने ब्या करा था ना, उससे कह देंगे एक ब्या और,
40:22साल बर करा था ना ब्या, अभी यहाँ चला है, अभी यहाँ चला है, अभी यहाँ चला है, तो सेठ
40:28जी सेठ जी एक ब्या और होना है ज़रा पटा के चुटने, तो �
40:43800 करोड़ लोग हैं, स्वाबिमानी लोग हैं, खुद का पैदा कर रहे हैं, दुनिया के किसी दादा की आउकात हमने
40:49आज नहीं, मैं तो शेरनी को भी याद करता हूं, कॉंगरेसी, यहां कोई हो तो मुझे बताएं, जिसने जाके निक्सन
40:55को कह दिया था कि नहीं मिलूंगी, �
40:56बिना निक्सन से मिलके लोट आई थी वो, हमने उस समय तो हमारे पास टीके तक नहीं थे, हमारे पास
41:02सडके नहीं थी, आज तो क्या चीज हमने बनाते हैं, तो मुझे तो पूरी उम्मीद है कि आने वाले समय
41:09में भारत, सैन्य हतियारों का, सैन्य बिजनिस का, दुनिया के �
41:14जो पहले दो, तीन, चार लोग हैं, उनमें इसका नाम होगा, और हमने अभी अपने कुछ मिसाइल की टेस्टिंग करके
41:20दुनिया को दिखाई के कैसे जाती हैं, कैसे गिरती हैं, कैसे एरबेस तोड़ती हैं, कैसे बाकी चीज तोड़ती हैं, ने,
41:27मैं तो उसे प्रदरश्�
41:28लोगों उनने का बहुत अच्या बहुत अच्छी, बहुत अच्या बहुत अच्या
41:34उनमे को भी दे दीजे, आपी दे लेझे लोगों ने
41:36और कंट कैसे कव्यदे दाभ धालgen को में ने सुना लेकिन अव कभी कुमार विस्वास के लिए, मैं मन्च
41:44ने ने आप एठे दिये, मैं एक गीस सोना जेता हूं, जो मैंने कारगिल के दौरान लिखा था, कारगिल में
41:52मैं जब युद्ध चलना था, तो मैं ननिताल गया था एक बार, तो वहां आचानक देखा कि शहर पूरा बंद
41:59हो गया, तो मैंने पूछा कि भी शहर क्यों बंद हो
42:01तो बुले कि हमारे भीमताल के एक युवा अधिकारी थे, वो कारगिल में उन्हेंने सरवच बल्दान दे दिया, मेजर राजेश
42:10अधिकारी, तो मैं उनके श्रवदाह में चला गया, बच्चों को छोड़के, और फिर मन नहीं लगा, आमने निताल से लोट
42:16आए, हल्दवा
42:31इस देह को अमरात्व देकर, है नमन उनको कि जो इस देह को अमरात्व देकर, इस जगत में शौर्य की
42:44जीवित कहानी हो गए है, रगली पंक्ती लहरे यहाँ पर,
42:49है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमाल है, जो धरा पर गिर पड़े, पर आसमानी हो गए है, है
43:10नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमाल है,
43:16एक बंद सुना देता हूं के बंद और ये बंद भारत के नए तेवर का बंद है कि हमने लोटाए
43:24सिकंदर सर जुकाए मात खाए सभी तो रिकॉर्ड कर रहे हैं तो ताली कौन बजाएगा
43:34हमने लोटाए सिकंदर सर जुकाए मात खाए हमसे भिड़ते हैं वे जिनका मन धरा से भर गया है और पड़ोसियों
43:50के बारे में बात हुई तो एक ही पंक्ति उन्हें में सौपता हूं
43:53कि नर्क में तुम पूछना अपने बुजुर्गों से कभी भी उनके माथे पर हमारी ठोकरों का ही बया है
44:08सिंग के दातों से गिंती सीखने वालों के आगे शीश देने की कला में क्या अजब है क्या नया है
44:21मैंने कह रहा हूं कि परलेमेंट में उनके एक नेता ने कहा कि जब एक व्यक्ति इनके यहां से आ
44:26गया था
44:27रक्षा मंतरी जी की टांग का परे थी गला सूख रहा था कहा कि तुरंत वापिस भेजो नहीं तो नौ
44:32बजे ले जाएंगे ले जाने वाले
44:42मैं पंक्ति पढ़ रहा हूं उसका नाम यहां आ जाए तो गुझे
44:49जूजना यम्राज से आदत पुरानी है हमारी उत्तरों की खोज में फिर एक अभिनंदन गया है
45:03तो है नमन उनको है नमन उनको कि जिनको मृत्यु पाकर हुई पावन
45:14युद में बोले साब वो तीन देशों का गुट बन गया है ना जी यह तरकी आ गया यह साओधी
45:22हम तो गली के पलेवे बच्चे हैं चोटे से कसमे में पैदा हुए
45:27कितने भी गुट बना लो वो जो सबसे दबंग का पहला हाथ चुटता न कान के पास तो बच्चे वे
45:33निकल के चल जाते हैं बोले तू पिट तो इनको यह पता नहीं है कि जब दबंग का हाथ चुटेगा
45:39तो कुछ नहीं हो पाएगा
45:41कि सिंग के दातों से गिंती सीखने वालों के आगे शीश देने की कला में क्या अजब है क्या नया
45:53है जूजना यमराज से आदत पुरानी है हमारी उत्तरों की खोज में फिर एक नचकेता गया है
46:05तो है नमन उनको के जिनको मृत्य उपा कर हुई पावन है नमन उनको के जिनको मृत्य उपा कर हुई
46:17पावन
46:17शिखर जिनके चरण छूकर और मानी हो गए हैं है नमन उनको के जिनके सामने बौना ही मान
46:37बहुत जन्यवास
46:42नहीं मुझे तो
46:43हमने आपके सेशन का नाम आपकी दूसरी कविता पर रखा था
46:47इतनी सारी कविता हैं मैंने सेना पर लिखी हैं
46:49और मैं आशा करता हूँ कि ये
46:51सब कविताएं कभी काम ना हैं
46:55मैं
46:55बुद्ध के देश का निवासी हूँ
46:58लेकिन हमारा कविता का संसार ये भी कहता है
47:01युद्ध की संभावना में जी रहा हर देश सुन ले
47:05इधर वाला चाह उदर वाला
47:08युद्ध की संभावना में जी रहा हर देश सुन ले
47:12बुद्ध भी है युद्ध भी है जिसे चाहे उसे चुले
47:15थो हम तो नहीं चाहते,
47:16कि हमको योद्ध की कविता लिखे,
47:19हम चाहते हैं कि हमारे सैनी किसी प्रकार रहे,
47:21उनके सैनी उसी प्रकार रहे.
47:23ऐसा ना हो जाए कि उनके आएं,
47:25और फिर दफना ने हमें पढ़े,
47:26पिछली बार हमने यही किया,
47:27आए अच्छा नहीं लगा ना वो किसी का बेटा होगा
47:30किसी का पती होगा वो आया
47:31और यहां दफनाये गया
47:34यह भी नहीं होना चाहिए
47:35आशा करते हैं दुनिया प्रगती के पत पे रहे
47:38भाई थोड़ी अकल आए
47:39आटे की लड़ाई में रही है
47:41कहा कि चक्कर में पड़ गया भारत देगा
47:42बहुत धन्यवाद बहुत बहुत आबाद
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