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सज्जन कुमार के निधन के बाद कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा के उन्हें ‘रोल मॉडल’ बताने वाले बयान ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के दर्द और न्याय के सवाल को फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है. पीड़ितों के साथ-साथ बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल उठाए हैं कि जिन परिवारों ने 1984 की हिंसा में अपनों को खोया, उनके दर्द को राजनीतिक योगदान की बहस में कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है.


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00:001984 के सिख्विरोधी दंगों के जख्मों पर 42 साल बाद भी दर्द की परतें जमी हैं।
00:07लेकिन अब सर्जन कुमार की मोत के बाद कॉंग्रेस नेता के बयान ने उन जख्मों को फिर कुरेद दिया है।
00:13कॉंग्रेस सांसत दिपेंदर सिंग हुड़ा ने सर्जन कुमार को रोल मोडल बताते हुए उनके निदन को राजनितिक प्रिदर्श्य की अपुरूनिय
00:22शती बताया।
00:23बस फिर क्या था? 1984 की पिडिता निरप्रीत कोर ने हुड़ा के दिल्ली आवास के बाहर पोस्टर लगा कर सिधा
00:30सवाल दाग दिया।
00:31अगर सर्जन कुमार रोल मोडल थे तो फिर 1984 के दोशी कौन थे? पिडितों का सवाल बेहद सीधा है, जिन
00:39परिवारों ने अपने बेटे, पती, पीता और भाई खोए, उनके लिए किसी ऐसे व्यक्ति को आदर्स बताने की बात कितनी
00:46पीड़ा दायक होगी? जिसे अदालतो
00:48ने 1984 के मामलों में दोशी टहरा कर उमर केद की सजा सुनाई.
01:18जिसे गर के बाहर हम इनका पुतला देहन करेंगे और इनको बताएंगे कि ये इन्होंने किस तरह से सिख्वों का
01:26कतल्याम लिया थी?
01:27सबसे बड़ा दूल था सजन कुमार का, ये लोग पर ही नहीं था, ये गुंडा था एक सजन कुमार जिसने
01:34हजारों सिख्वों का कतल्याम करवाया, हमारी जो बहुत बेटी हो थी, उनकी इंचत लूटी गई, और हजारों की जो प्रोपर्टी
01:42है, उसको जला दिया गया, द
01:59कॉंग्रेस के इस ब्यान ने बीजेपी को भी हमलावर होने का मोका दे दिया, बीजेपी ने कड़ा पलटवार करते हुए
02:05कॉंग्रेस की नियत पर सवाल उठाए, उनका आरोप है कि जिस पार्टी के नेताओं पर 1984 के हत्याकांड को लेकर
02:12गंबीर सवाल उठते रहे, उसी �
02:14पार्टी के नेता अब सज्जन कुमार को रोल मोडल बता रहे हैं, तो फिर कॉंग्रेस से और क्या उमीद की
02:20जाए?
02:46मैं राहूल गंदी नूँ और उना दे चम्चिया नूँ कहना चाहांगा, जाओ कदी देखो दिल्ली देवीच सिख विद्वा कलो नहीं
02:54है, यह सिखा दियां विद्वावाने, जिना नूँ कॉंग्रेस पार्टी दे, वरकराने, जिन्दा जला देता, मार देता.
03:01कॉंग्रेस के लीडर, विरिष्ट लीडर अगर ये कह रहे हैं, भी हमारा रोल मॉडल है, तो फिर तो इससे, मैं
03:10समुझना हूँ, तरसनाक और बुरी बात नहीं हो सकती.
03:13कॉंग्रेस की मुश्किल यहीं खतम नहीं होती, अब शिरोमनी अकाली दल पूछ रहा है, कि क्या राजनितिक योगदान गिनाते समय,
03:201984 के उन पिडितों का दर्द बुलाया जा सकता है, जिन्नों ने अपनी परिवार और अपना सब कुछ खो दिया.
03:27जगदीश टाइटलर को मंतरी जरूर बनाया, मगर कारवाई कभी नहीं करी.
03:32तो आज समा है, पंजाब कॉंग्रेस के लीडर्शिप और गांधी परवार अपनी स्तितिस पष्ट करें और अगर उसकी कोई अंतिम
03:41रस्मों में कोई कॉंग्रेस का लीडर भाग लेके ऐसी बड़ी-बड़ी बाते करेगा, तो फिर बड़ी सिंपल और पंजाबियों को
03:50
03:52बात समझ आ जानी चाहिए कि कॉंग्रेस कहां स्टेंड करता है जेनोसाइड के मुथे, वही तो बात है कि अब
03:58जाने के बाद भी आप फिर डिफेंट करने लगे हो, पहले सारी जिन्दगी डिफेंट करकर के 40 साल से ज्यादा
04:06समय हो गया 84 को, तो अभी भी आप फिर कांग्
04:21अपनों को खोया, जिन घरों में पिता नहीं लोटे, जिन बच्चों ने अपने परिवार का सहारा खोया, और जिन परिवारों
04:28ने दशकों तक इंसाफ का इंतजार किया, उनके जखम किसी पार्टी के बयानबाजी से नहीं भर सकते,
04:351984 के पिडितों और उनके परिवारों के परती सम्वेदना और सम्मान सबसे उपर होना चाहिए, सियासत आती जाती रहेगी, बयान
04:44बदलते रहेंगे, लेकिन जिन परिवारों ने उस हिंसा की कीमत अपनी पूरी जिंदगी दे कर चुकाई, उनके दर्द को ने
04:51तो भुलाया
04:51जा सकता है और नहीं किसी राजमीतिक रोल मोडल की भहस के नीचे दबाया जा सकता है
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