00:07अगर बढ़ रहे हैं यह तस्वीर देश के किसी सुदूर या जंगली इलाके की नहीं बलकि बिहार के शिवहर जिले
00:15की है
00:16जहां एक अदद पुल के लिए ग्रामिन पिछले धाई साल से अपनी जान दाउं पर लगा कर चल रहे हैं
00:24लक्षमिनिया गाउं का ये टुटा हुआ पुल सिर्फ इट पत्थर का धाचा नहीं बलकि प्रशासनिक लापरवाही का जीता जाकता सबूत
00:33है
00:33जब तमाम जन प्रतिनीधियों ने इस समस्या से मुह मोड लिया तो ग्रामिनों ने हार नहीं मानी
00:39अपने खेतों तक पहुँचने और दो पहिया वाहनों को निकालने के लिए खुद के बल पर इस चचरी पुल का
00:47निर्मान किया
00:48अगर यह चचरी ना हो तो लोगों को पांच किलोमेटर का लंबा चक कर काटना पड़ेगा
01:18दिकत होगा यहां से पांच किलोमेटर भूम के जाना पड़ेगा तो क्या इस पूल से कैसे जाते हैं दिकत होता
01:27है बहुत कैसे सब्सक्राइब करेंगे
01:41ग्रामिडों का कहना है कि अगर स्थाई पूल बन जाए तो हर साल बरसात के मौसम में उनको इस तरह
01:47से चचरी पूल के सहारे जान जोखिम में डाल कर सफर नहीं करना पड़ेगा
02:11परनल बहुत जादे हैं महुत जादे हैं गरामिनों के दोवारा जो है यह चचरी को बनाया गया है चचरी का
02:19नियमान किया गया है जो हम आपको दिखा पा रहे ही कैसे
02:25foreign
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