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Transcript
00:12भारतियों के घर घंदियह नहीं होती है jest बातव ना भूंक्षय के पास है लेकिंन गिरी से गिरी मांनता भी
00:23भारतियों में
00:23पाई जाती है और गिरी से गरी माननेता यह है कि मुझे अपना बस ठीक रखना है वो अस्पतालों में
00:29देखिए दीवालों पे लोग ने क्या कर रखा है वो क्या धोखे से हो गया उनसे हम किदी परेटन स्थल
00:33पर जाते हैं कोई बहुत पुरानी इमारत हो सकती है और वहां प
00:51गंदा है इसका रिष्टा गरीबी से नहीं है इसका रिष्टा संसकार से है हमारे जो लोकधार में संसकार है ना
00:58उनने गरिमा आत्मसमान की बहुत कमी है आत्मा आत्यंतिक निजता का नाम है हमारी रहने ही नहीं दी जाती और
01:06जब हमें हर तरफ से हर कोई हक रखके बैठा�
01:11जाएगा हम डीयों गंडा करते हैं whereby निजिता जैसे तो कुई बात होती ही नहीं ना कुछ होता रहे हैं
01:21महांने बर भाष्ट हो जाता है
01:22जक lScott लेते हैं इसकों कहा देते हैं कि हम तो भड़े सहीश्रू है संतोशी है ना साहियू है कईसे
01:28बन सकता है कःतर सबसे
01:31पहले तो कुछ ऐसा थोड़ा बहुत ही सही आंशी की सही पाईए तो जो पूरी तरह अपना है फिर उसकी
01:37रक्षा में आप जीजान लगा दोगे जो सच मुझ अपना होता है ना इंसान उस पर किसी को थूकने नहीं
01:42देता
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