00:0084,000,000 वियोनियों के बाद ये मनुष्य का स्वानिम जनम मिलता है
00:05तो अचारे जी जो 83,99,99 तो इस वक्त बड़े चैन से सो रही हैं अपने घरों में
00:12और अचारे जी हम यहाँ पर नोट्स बना रहे हैं हिंकार का कुछ हो
00:20तो अचारे जी यह गेम हमारे ही साथ क्यों हो रहा है इससे तुम यह देखो ना कि यह जो
00:30राग अलापते रहते हो
00:32कि मनुष्य होनी सरुष्रेष्ठ ही होनी है और मनुष्य समस्त प्राणियों में उच्चतम है यह राग कितना बेसुरा है
00:47जादा तर तो इस वक्त गर्मी से मर रहे हैं लेकिन अगर वो मर भी रहे हैं तो उतना दुख
00:56नहीं पा रहे है अपने मरने में जितना हम अपने जीवन में पा रहे है
01:01कुट्टे के पाउच हुए थे एक बार मैंने
01:04क्योंकि अपनी दशा देख रहा था उसकी देख रहा था
01:06कैमपस की बात है
01:08बैठा हुआ हूँ और अपनी ही हालत से
01:12असंतुष्ट बेजार बिलकुल
01:14हवाईयां ओड रही है
01:17वैसे ही कुट्टा है कैमपस में
01:19आकर के बैठ गया एकदम पास आकर बैठ गया
01:23इन जीवों का मुझसे कुछ है
01:26एकदम ही आ जाते है
01:28मैं उसको देखता रहा
01:30वो मुझे देखता रहा
01:36मैं कैसे श्रेष्ट हूँ
01:37वो मुझसे श्रेष्ट सानिसंदे
01:41कहां वो इतनी उलज़न
01:42इतनी तडप इतनी बेचैनी में था
01:44और वो भी ऐसा नहीं कि कोई मेरी
01:46बड़ी उच्चकोटी की उलज़न
01:48व्यर्थ की बात, दो कॉड़ी की बात
01:50और उसमें अपने लिए
01:52नरक बना रखा है मैंने
01:54कुट्ता बहतर ही था मुझसे
01:58कुट्ता बहतर ही था
02:00आरे ही बात था मुझसे
Comments