00:00यहां पर जो प्रिंसिपल आ रहे थे, दारूपीकर आ रहे थे, बच्चों के सामने दारूपीकर सो जाते थे, तो उसके
00:07लिए हमने कहा था, अगर उनको नहीं हटाया जाता है, तो हम अंदुलन करेंगे, हम अंदुलन पर बैठे, तो लेकिन
00:25अभी अभी पता चला है कि उस प
00:27मांडे, दो और टीचर चाहिए, जब तक वो दो और टीचर का अपॉन्मेंट आता नहीं है, तब तक गाउवाले पीछे
00:33नहीं आटाएंगे, और गाउवालों के साथ में यही पर बैठा रहूँगा, जब तक यह आ बैठे रहेंगे, आगे तो हम
00:37यह पुरा देश भर अं�
00:50अच्छे करने के लिए सरकारी, आपने क्या किया, किया अच्छे, आपने नहीं किया, आप अपने बच्चों को भेचते हो प्राइवेट
00:56स्कूलों में, और आपके बच्चे को मिलती है, डिजिटल क्लासरूम, बेंचेस मिलते है, आरो का पानी मिलता है, लेकिन आपके
01:02पास
01:03जिन स्कूलों की जिमेदारी दी थी
01:05उन स्कूलों में ना पानी आता है
01:07ना बेंचेस है ना डिटल क्लास्रूम है
01:09तो आप अपना काम ठीक नहीं कर रहे हो
01:11तो आपको अपना काम ठीक करना पड़ेगा
01:12और अगर आप वो भी नहीं करोगे तो
01:14फिर तो यही करना पड़ेगा कि आपके बच्चों का एडमिशन यहां करवाना पड़ेगा
01:18जब सारे एजूकेशन डिपार्टमेंट के ओफिशल्स के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ने चले जाएंगे
01:22तब देखना अपने आप सारे स्कूल के से दो दिनों में ठीक हो जाएंगे
01:25क्योंकि जब इनके बच्चों की बात आएंगी ना तब इनको समझ में आएगा
01:28कि क्या जहिलना पड़ता है गाउं में पढ़ने वालों बच्चों को
01:31यह जहाँ पर गरीबों के बच्चों को अच्छे शिक्षा मिले यह अब्दूल है यह सब के लिए हीरो होना चाहिए
01:40आज नफरत की राजनीति के वज़े से अब्दूल ने अपने पिता को खो दिया
01:44क्या बात कर रहे थे उसके पिता, क्या बात कर रहा था अब्दुल, किस चीज के लिए लड़ रहे थे,
01:48स्कूल्टी कराने के लिए लड़ रहे थे, क्यों उनके उपर हमला किया गया, दूसरों के लिए लड़ रहे थे ना
01:55वो, लेकिन जैसे कि हमने देखा इस देश में नफर
02:12का देश फ्रेम है कि वो कह रहा है कि भईया कोई बात नहीं
02:15मैं फिर से कल बाहर निकोलाँगा
02:16मैं फिर से स्कूल जाँगा
02:18जब मेरी हिम्मत तूड़ गए थी अबदुल से
02:20बात करते वक तब उसी अबदुल ने मुझे हिम्मत दिया
02:26जब फ्रिंसिपल को फायर किया गया है
02:30मैं अबदुल को घंटनेवाद देश्चोंते ऑश्कूल
02:35दसी और पिता के लिए राओ वालों ने अब way दग पाच
02:41पाच बार कंप्लेंद कियर स्थी ऑसकी बाद भी यहां की जो
02:52ये मुद्दा उठाया चनिवार को
02:54और हमने कहा
02:56कि अगर उस प्रिंसिबल को हटाया नहीं जाता है
02:58तो हम यहाँ पर अंदोलन करेंगे
03:00और जैसे कि आप देसे कि पिछे गाउवाले अंदोलन पर बेथे हुए
03:03आज सुबह उस प्रिंसिबल को हटाया गया
03:05और यह कह रहें कि हमने तुरंट एक्शन ले लिया
03:07दो साल तक सो रहे थे आप लोग
03:10शिक्षन आधिकारी जो है मैं उनसे पूछना चाहता हूँ
03:12अगर उनके बच्चियों के सामने
03:14कोई इंसान दारू पीकर सोता
03:16क्लास्रूम में उनके बच्चियों के सामने
03:19दारू पीता दारू की बॉतल क्लास्रूम में लेकर आता
03:22तो ऐसी चुप रहे थे यह दो साल तक
03:25यह जितने भी ओफिशल से
03:27एजुकेशन डिपार्टमेंट में काम करने वाले
03:30यह अपने बच्चे तो प्राइवेट स्कूल में भेज़ देते हैं
03:32बड़े बड़े प्राइवेट स्कूल में
03:36एक सेगन एक सेगन
03:37यह अपने बच्चे तो प्राइवेट स्कूल में भेज़ देते
03:39और जो इनकी जिमेदार यह सरकारी स्कूल ठीक करना
03:55यह उसी पर ही काम नहीं करते, जब तक इनके अपने बच्चे सरकारी स्कूलों में नहीं बढ़ेंगे, यहाँ पर नीचे
04:02नहीं बैठेंगे, जमीन पर नहीं बैठेंगे, तब तक इनको नहीं समझ में आएगा एक किसान के बच्चे को, एक मजदूर
04:07के बच्चे को क्या प्र
04:39कर जाएंगे लाखों की फीज बर कर जाएंगे बड़िया से बड़िया स्कूल बचेंगे
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