00:00सभी कलाप्रे में सज्जिनों को साधर प्रणाम
00:02आज विज्ञान भवन नई दिल्ली में महामहिम राश्ट्रपती श्रीमती द्रोपदी मुर्मुजी के करकमलों से
00:11संगीत नाटक अकादमी पुरसकार प्राप्त करना मेरे जीवन का अत्यंत गौरोपून क्षण है
00:19यह सम्मान के ओल मेरा नहीं बलकि हिमाचल की समरिद लोग संस्पिती, हाटी समोधाय की गौरोशाली संस्पिति विरासत
00:28और उन हजारों लोग कलाकारों की दशकों लंबी साधना का सम्मान है
00:34जो आध्वनिक्ता की तेज आंधी के बीच भी अपनी लोग परमपराओं की मौलिक्ता और शुद्धता को बरकरार रखते हुए संस्किती
00:44की ज्योती को निरंतर प्रज्वलित किये हुए है
00:47इस सम्मान का श्रे भाषा एवं संस्कृती विभाग हिमाचल प्रदेश, कलागुरू पद्मश्री विद्यानन सरेक जी तथा चुडेश्वर मंडल और आसरा
01:01संस्था के समर्पित कलाकारों को जाता है
01:03क्योंकि इन्हीं लोग कलाकारों की दिर कालिन साधना के परिणाम सुरूप जहां सिर्मोरी नाटी ने अंतर राश्ट्री अस्तर पर अपनी
01:14विशिष्ट पहचान बनाई हैं
01:16वहीं सिहिटू, बढ़ाल्टू और डग्यारी नाच जैसी विलुप्त लोक विधाओं को भी वैश्विक पहचान मिली है
01:24इस एतिहासिक सम्मान के लिए मैं संगीत नाटक अकादमी, संस्थिती मंत्राले भारत सरकार, हिमाचल प्रदीश सरकार
01:33तथा सभी विभागिये अधिकारियों और उन पत्परदर्शकों का दिल की गहराईयों से आभार विक्त करता हूँ, जिनकी मारदर्शन और सयोग
01:45ने इस संस्रितिक यात्रा को निरंतर नई उन्चायों तक पहुँचाया है
01:50धन्यवाद
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