00:00हमारा भविश्य कैसा होना चाहिए, हम बाकी देशों किस परदा में कैसे आगे निकलने चाहिए, हमारे देश का आर्थिक्स तरफ
00:07कैसा होना चाहिए, यह सारा विचार हम इसलिए कर सक रहे हैं, कि कुछ पीडियों ने हमारे लिए अपने हित
00:15को बली दे दिया,
00:18उन्होंने ये विचार नहीं किया, कि मुझे क्या मिलेगा, उन्होंने ये विचार किया, कि ये सही काम है, सत्य काम
00:26है, उसको करना है, कुछ मिले न मिले, जान चली जाये तो भी चलेगा, पर उन्तु ये करना ही करना
00:33है,
00:36ऐसे विचार करने वाले अधिकतर लोग युवा होते हैं
00:42क्योंकि रिटार्ड आदमी रस्ता क्रास भी करना है
00:45तो पर रखने के पहले रास्ते पर भाय देखेगा
00:50फिर दैने देखेगा फिर थोड़ा विचार करेगा
00:53और फिर रस्ता क्रास करना कैंसल कर देगा
00:57क्योंकि दुनिया में बहुत थपेड़े खाये हैं, इसलिए हिम्मत करने के हिम्मत नहीं रहती है, यूवाओं में ये हिम्मत रहती
01:05है, यूवाओं ने दुनिया नहीं देखी है, अभी दुनिया के जीवन के उतार चड़ाओं के थपेड़े नहीं खाये है, अनुभव
01:16की कमी
01:16है एक तरफ यह कमी है लेकिन दूसरे तरफ इसी के कारण कि उनको अपने आपको जोग देने की हिम्मत
01:26मिली है वो कुद पढ़ते हैं अंधरे में भी कुद पढ़ते हैं उनकी आशा मुर्जा ही नहीं होती है
01:35उनकी आशा तो आश्मान और सागर से भी व्यापक होती है और इसलिए इस प्रकार का सहास वो कर सकते
01:43हैं अपने में इस सहास को आप बनाय रखिए अपने व्यक्तिगत या पारिवारिक भविश्य की चिंता में इस बात को
01:54आप कम मत कीजिए
01:57आगे अपने काम में अपने परिवार के काम में अपने देश के लिए भी यही आपका सहास हिम्मत और बाकी
02:06दुनिया जिसको अविचार कहिती है वह सहास काम में आएगा
02:11उस साहस के साथ हमको इस भविश्य को सामने जाना है उसका सामना करना है हम अपना भाग्य बनाएंगे अपने
02:21देश का भाग्य बनाएंगे हमको ध्यान रखना है अकेले का भाग्य नहीं बनता
02:28एक परिवार का भी भाग्य नहीं बन था विश्व में सुरक्षा और प्रतिष्ठा चाहिए तो अपना देश अपना समाच जब
02:39तक सुरक्षित प्रतिष्ठित नहीं हमको वो मिलेगा नहीं
02:46नोबेल पारितोशक विजयदा हमारे राष्टर के महा कवी कविवर्या रवीन नाट टागोर जापान गए है एक उनिवर्सिटी में उनका भाषन
02:56रखा भाषन के लिए हॉल में गए तो उनिवर्सिटी के सारे प्राध्यापक लोग थे लेकिन विद्यार्थी गायब थे तो
03:05उन्होंने पूछा विद्यार्थी नहीं आये तो लोगों ने उत्तर देना टाल दिया बहुत खोथ-खोथ के पूछा तो कॉलेज के
03:14प्रिंसिपाल ने बताया कि इक्षमा कीजिए हमने उनको कहा तो उन्होंने हमको कहा कि हम जानते आने माले बहुत चिंतक
03:22चिंतंशील वे
03:34अधर है तो उनका देश अंग्रेजों का गुलाम क्यों है कि कविवर्वियर अविद्यनाठ टागोर के प्रतिभा की चारित्र की प्रतिष्ठा
03:44तब है जब भारत स्वतन रहे हम तब वैभाव संपन्न है जब भारत वैभाव संपन्न है और इसलिए हमको जो
03:54विसलेशन बत
04:04मशीलता ज्ञान और शवरिय कि बाद में है शांति अहुंसा निर्मल्चित्त तब सम्रुद्धी आसिल होती है कि तब फिर पर्यावरण
04:19को ठीक रखते हुए विकास कर सकते हैं
04:24हमारा देश बहुत बड़ा देश है उपने सब प्रकार की विविद्धत्ता है भाशा प्रांद वगर वगर तो है ही जाती
04:33पाती तो है ही लेकिन विचार भी अलग-अलग होते ही है
04:39लेकिन अपने द्वच पर जो धर्मचक्र है धम्मचक उसकी रिचना आप ध्यान मिलीजिए उसके आरे भी अलग-अलग दिशाओं में
04:53निर्देश करते हैं
04:54भाग तिक्षण है खुले रहेंगे तो किसी की उंगली काट देंगे शस्त्र के नाति जिस चक्र का उपयोग होता है
05:04वो खुले ही आरे रहते हैं गुम्ते-गुम्ते वो काट देता है शर्यों को
05:10लेकिन यह जो आरे हैं उनको यह भान है कि वो एक ही मूल से निकले हैं जाते अलग-अलग
05:19दिशाओं में अपनी तीवरता के साथ जाते हैं लेकिन एक ही केंद्र से निकले हैं और अपने करने से हानी
05:29नहीं होनी चाहिए
05:31देश के कानुन समिदान के हानी नहीं होनी चाहिए हमारे प्राचीन और पवित्र संस्कृति के हानी नहीं होनी चाहिए हमारे
05:39अपने सद्गुन संस्कारों की हानी नहीं होनी चाहिए हमारे शील बल की हानी नहीं होनी चाहिए इसलिए उसको एक मरियादा
05:49मिली है एक गोल है
05:51उन आरों के चारों और जिससे जो मरिया दित रहते और इसलिए ये धम्म चक्र है धर्मय याने पूजा पाती
05:59नहीं धर्मय याने समाज की धारणा करने वाला नियम
06:03उस नियम में रहकर हमको सारी बाते करनी हैं अलग-अलग विचार है है उसके अलग-अलग अभीव्यक्ती होगी प्रजातंत्र
06:13है इसलिए इसमें समवाद होता है शास्तरार तो होता है पूर्वपक्ष उत्तरपक्ष होता है उसमें परसफ़ विरोधी दुरुष्ट कोन भी
06:22�
06:22आते हैं विरोध करना भी पड़ता है हितकारी प्रश्टन जब उठाते तो जोर से उठाना पड़ता है उस पर कृतिव
06:32हो इतना बल लगाना पड़ता है आंगलों होते सब होते हैं लिकिन करते समय ध्यान में रखना सम्विधान निर्माताओं ने
06:40देश की संवसत को सम्विध
06:52सकते हैं, यह हमारी परंपरम है
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