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Mohan Bhagwat on Genz भारताची तुलना इतर देशांशी नको; जगाला दिशा देण्याची जबाबदारी आपली ‘लोकमत’च्या व्यासपीठावरून ‘जेन-झी’ला डॉ. मोहन भागवत यांनी हा संदेश दिला. नागपुरातील कस्तुरचंद पार्कवर २०० फुटी तिरंग्याचे ध्वजारोहण मोहन भागवत यांच्या हस्ते करण्यात आले. अनेक पिढ्यांनी स्वतःच्या हिताचा त्याग केला, बलिदान दिले आणि देशासाठी काम केले. त्यामुळे आज आपण भविष्याचा विचार करू शकत आहोत, असे डॉ. भागवत म्हणाले. तरुण पिढी ही देशाची ‘डेमोक्रॅटिक डिव्हिडंट’ आहे. तिचा योग्य उपयोग केला तर भारत विश्वगुरू बनू शकतो; अन्यथा हीच मोठी लोकसंख्या भविष्यात ओझे ठरू शकते. त्यामुळे तरुणांनी केवळ स्वतःच्या भविष्याचा विचार न करता पुढील पिढी आणि देशाच्या भवितव्याचा विचार करावा, असे त्यांनी सांगितले.

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Transcript
00:00हमारा भविश्य कैसा होना चाहिए, हम बाकी देशों किस परदा में कैसे आगे निकलने चाहिए, हमारे देश का आर्थिक्स तरफ
00:07कैसा होना चाहिए, यह सारा विचार हम इसलिए कर सक रहे हैं, कि कुछ पीडियों ने हमारे लिए अपने हित
00:15को बली दे दिया,
00:18उन्होंने ये विचार नहीं किया, कि मुझे क्या मिलेगा, उन्होंने ये विचार किया, कि ये सही काम है, सत्य काम
00:26है, उसको करना है, कुछ मिले न मिले, जान चली जाये तो भी चलेगा, पर उन्तु ये करना ही करना
00:33है,
00:36ऐसे विचार करने वाले अधिकतर लोग युवा होते हैं
00:42क्योंकि रिटार्ड आदमी रस्ता क्रास भी करना है
00:45तो पर रखने के पहले रास्ते पर भाय देखेगा
00:50फिर दैने देखेगा फिर थोड़ा विचार करेगा
00:53और फिर रस्ता क्रास करना कैंसल कर देगा
00:57क्योंकि दुनिया में बहुत थपेड़े खाये हैं, इसलिए हिम्मत करने के हिम्मत नहीं रहती है, यूवाओं में ये हिम्मत रहती
01:05है, यूवाओं ने दुनिया नहीं देखी है, अभी दुनिया के जीवन के उतार चड़ाओं के थपेड़े नहीं खाये है, अनुभव
01:16की कमी
01:16है एक तरफ यह कमी है लेकिन दूसरे तरफ इसी के कारण कि उनको अपने आपको जोग देने की हिम्मत
01:26मिली है वो कुद पढ़ते हैं अंधरे में भी कुद पढ़ते हैं उनकी आशा मुर्जा ही नहीं होती है
01:35उनकी आशा तो आश्मान और सागर से भी व्यापक होती है और इसलिए इस प्रकार का सहास वो कर सकते
01:43हैं अपने में इस सहास को आप बनाय रखिए अपने व्यक्तिगत या पारिवारिक भविश्य की चिंता में इस बात को
01:54आप कम मत कीजिए
01:57आगे अपने काम में अपने परिवार के काम में अपने देश के लिए भी यही आपका सहास हिम्मत और बाकी
02:06दुनिया जिसको अविचार कहिती है वह सहास काम में आएगा
02:11उस साहस के साथ हमको इस भविश्य को सामने जाना है उसका सामना करना है हम अपना भाग्य बनाएंगे अपने
02:21देश का भाग्य बनाएंगे हमको ध्यान रखना है अकेले का भाग्य नहीं बनता
02:28एक परिवार का भी भाग्य नहीं बन था विश्व में सुरक्षा और प्रतिष्ठा चाहिए तो अपना देश अपना समाच जब
02:39तक सुरक्षित प्रतिष्ठित नहीं हमको वो मिलेगा नहीं
02:46नोबेल पारितोशक विजयदा हमारे राष्टर के महा कवी कविवर्या रवीन नाट टागोर जापान गए है एक उनिवर्सिटी में उनका भाषन
02:56रखा भाषन के लिए हॉल में गए तो उनिवर्सिटी के सारे प्राध्यापक लोग थे लेकिन विद्यार्थी गायब थे तो
03:05उन्होंने पूछा विद्यार्थी नहीं आये तो लोगों ने उत्तर देना टाल दिया बहुत खोथ-खोथ के पूछा तो कॉलेज के
03:14प्रिंसिपाल ने बताया कि इक्षमा कीजिए हमने उनको कहा तो उन्होंने हमको कहा कि हम जानते आने माले बहुत चिंतक
03:22चिंतंशील वे
03:34अधर है तो उनका देश अंग्रेजों का गुलाम क्यों है कि कविवर्वियर अविद्यनाठ टागोर के प्रतिभा की चारित्र की प्रतिष्ठा
03:44तब है जब भारत स्वतन रहे हम तब वैभाव संपन्न है जब भारत वैभाव संपन्न है और इसलिए हमको जो
03:54विसलेशन बत
04:04मशीलता ज्ञान और शवरिय कि बाद में है शांति अहुंसा निर्मल्चित्त तब सम्रुद्धी आसिल होती है कि तब फिर पर्यावरण
04:19को ठीक रखते हुए विकास कर सकते हैं
04:24हमारा देश बहुत बड़ा देश है उपने सब प्रकार की विविद्धत्ता है भाशा प्रांद वगर वगर तो है ही जाती
04:33पाती तो है ही लेकिन विचार भी अलग-अलग होते ही है
04:39लेकिन अपने द्वच पर जो धर्मचक्र है धम्मचक उसकी रिचना आप ध्यान मिलीजिए उसके आरे भी अलग-अलग दिशाओं में
04:53निर्देश करते हैं
04:54भाग तिक्षण है खुले रहेंगे तो किसी की उंगली काट देंगे शस्त्र के नाति जिस चक्र का उपयोग होता है
05:04वो खुले ही आरे रहते हैं गुम्ते-गुम्ते वो काट देता है शर्यों को
05:10लेकिन यह जो आरे हैं उनको यह भान है कि वो एक ही मूल से निकले हैं जाते अलग-अलग
05:19दिशाओं में अपनी तीवरता के साथ जाते हैं लेकिन एक ही केंद्र से निकले हैं और अपने करने से हानी
05:29नहीं होनी चाहिए
05:31देश के कानुन समिदान के हानी नहीं होनी चाहिए हमारे प्राचीन और पवित्र संस्कृति के हानी नहीं होनी चाहिए हमारे
05:39अपने सद्गुन संस्कारों की हानी नहीं होनी चाहिए हमारे शील बल की हानी नहीं होनी चाहिए इसलिए उसको एक मरियादा
05:49मिली है एक गोल है
05:51उन आरों के चारों और जिससे जो मरिया दित रहते और इसलिए ये धम्म चक्र है धर्मय याने पूजा पाती
05:59नहीं धर्मय याने समाज की धारणा करने वाला नियम
06:03उस नियम में रहकर हमको सारी बाते करनी हैं अलग-अलग विचार है है उसके अलग-अलग अभीव्यक्ती होगी प्रजातंत्र
06:13है इसलिए इसमें समवाद होता है शास्तरार तो होता है पूर्वपक्ष उत्तरपक्ष होता है उसमें परसफ़ विरोधी दुरुष्ट कोन भी
06:22
06:22आते हैं विरोध करना भी पड़ता है हितकारी प्रश्टन जब उठाते तो जोर से उठाना पड़ता है उस पर कृतिव
06:32हो इतना बल लगाना पड़ता है आंगलों होते सब होते हैं लिकिन करते समय ध्यान में रखना सम्विधान निर्माताओं ने
06:40देश की संवसत को सम्विध
06:52सकते हैं, यह हमारी परंपरम है
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