00:00प्यारे देश्वाजियों, 21 सदी में दसोकों पुरानी जो चुनोतियां हैं, उन चुनोतियों को खत्म करना बहुत अनिवार यह हैं।
00:13नकसलवाद माववाद लाखों युवाओं के भविश्य को तबाह कर दिया, अनेक माताओं के दुद्मल नौजवानों को छिल लिया, बरबाद कर
00:27दिया, हर माबाप के सपनों को चूर चूर कर दिया।
00:31इस नकसलवाद में चार-चार दसक तक हिंदुस्तान के बहुत बड़े हिस्चे को, बहुत बड़ी आबादी को दबोच करके रखाता।
01:02जादा हमारे पुलीस जवानों को जान की बाजी लगानी पड़ी, ताकि देश के सामान ने मानवी को सुरक्षा भी ले,
01:09ये नकसलवाद ने धर्ती को लहु लहान कर दिया था, दोहजार चूदा में आपने जब हमें मौका दिया, उसी दिन
01:20हमने संकल पर लिया था, कि हम द
01:32आखरी साथ बिशाद रहने के अब तो ताकत नहीं रही है, पूरी तरह उसे खत्व करने के दिशा में, जहां
01:40पर कभी नकसलवादियों की गोलिया चलती थी, जहां पर कभी धर्ती रक्त रंजीत रहा करती थी,
01:49आज उसी नकसल छेत्र में, उसी इलाकों में नकसल मुक्त होने के कारण विकास, विश्वास और प्रयास का तिरंगा लहरा
02:03रहा है, मेरे प्यारे देश्वासियों, लेकिन इस चुनोती को हमने कम नहीं आतना है, इस चुनोती से हमें और भी
02:13सावधान रहने के जरूत है,
02:16बर्षों तक देश की सत्ता में मावबादी सोच के लोग गलियारों में अपनी जगा बना करके बैठे थे, सरकारी कमिटियों
02:28में सलाहकार के रुपे भी ये मावबादी सोच ने नीतियों को प्रभावित किया था,
02:34मेरे प्यारे देश स्वासियों, जंगलों में हमें हत्यारी नक्षलों का खात्मा बुलाने में,
02:45उस संकड से देश को मुक्त कराने में सफलता मिली है, लेकिन हत्यारी नक्षल तो गए, लेकिन दिमागी नक्षल, ये
02:59दिमागी नक्षल मोके की तलास में है,
03:03हिंसा अराजगता के वो रास्ते खोज रहें, समाज को गलत रहा पर, गशिटने के लिए भाति-भाति के दाव कर
03:15रहें,
03:15इन दिमागी नक्षलियों को पहचानना होगा, इन दिमागी नक्षलियों को आईसोलेट करना होगा,
03:22और रास्त को विक्षित रास्त मनाने की मुक्ख धारा कियो और देश की यूआ पीडिय को जोडना होगा
03:31मेरे प्यारे देश हमाथिओं
03:35का क्या है
03:50ग्रुमन्तरी से जवाब आता है
03:52कि अर्बन नकसल कोई चीज नहीं है कोई परिभाशा नहीं है आज प्रधान मंत्री लाल के लिए से दिमागी नकसल
03:59की भाशा इस्तिमाल करते हैं अपने राजनेतिक विरोधियों को लेकर बात बात यह है हकीकत यह है कि जो मुद्दा
04:08अर्बन नकसल उठाते हैं जो प्रधान
04:22साल पहले कि अर्बन नक्सल सोच है ठीक एक साल पहले उन्होंने
04:26घोशना की कि मूधी सरकार का सिंस करा एंगे जन्गनना करांगी जाती अधारी
04:31जन्गना करा chaîne तो पहले धाली दो अर्बन नक्सल कहो दिमागी नक्सल कहो और बाद में
04:38जो वो लोग कह रहे हैं अपने राजनीतिक विरोधी उनको अपना उनके जो सोच हैं उनके जो सला हैं उनके
04:44जो मांगे हैं उसको पूरी यह पूरे राजनीतिक भाशन में आज बारह साल के बाद कुछ नई बात नहीं वही
04:53बात वही राग वही जो दावा करते थे पहले से व
05:0722 अक्तूबर 1937 को कॉंग्रेस कारी समती की बैठब को गांधी जी मौजूद थे नीता जी शुबास चंदर बोस थे
05:16सरदार पटेल थे मौलाना अब्दुलकलाम थे अजाद थे जमालाल नेरू थे गोविंद बल्लप पंध जी थे राजगोपालाचारी जी थे और
05:26उन्होंने
05:26निर्ने किया कि गुरुदेव रबिंदर नाट तगोर के सलाप बंदे मात्रम कॉंग्रेस अधिविशनों में गाया जाएगा पहले कुछ पंक्तियां ली
05:38जाएंगी और वो ही गाना गाया जाएगा ये कॉंग्रेस वरकिंग कमिटी की बैठक हुई अक्तोबर 1937 में रबिं
05:56कॉंग्रेस अधिविशन में वही पंक्तियां लोग आ रहे हैं हमारे सीवदल गाता है हमारे कारी करताएं गाता है इसने कोई
06:05वाद विवाद करता है
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