00:00Do you know about the world of Udhya and the world of Udhya yodhya?
00:06The Vahabharat Yudhya's head was the world of Udhya and the world of Udhya.
00:16Udhya yodhya is under the body of Udhya and the world of Udhya.
00:31ुप्र योद्धा ने क्रोध में आकर वालमिकी जी के सामने अपनी रामायन जैसी एक और गाथा लिखने की इच्छा जताई।
00:40अब नहर्शी ने मुस्कुरा कर कहा कि है पुत्र रामायन जैसी रचना केवल एक ही हो सकती है तुम्हारी गाथा
00:47अमर तो होगी पर प्रशंसा नहीं पाएगी।
00:50इस रहस्यमेई भेंट ने उस अमर योधा का अहंकार चूर कर दिया और वह पश्चाताप करते हुए फिर से अज्यातवास
00:58में चला गया।
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