00:00नमस्कार मैं हूँ शम्स ताहर खान और आप देख रहे हैं वारदाद
00:03हाल के वक्त में कई पती अपनी पत्नियों के हाथों मारे गए
00:07लेकिन बारामती का ये वो इंजीनियर पती है जो पत्नी के हाथों मारे जाने
00:13और कब्र तक पहुँचने के बावजूद कब्र से जिन्दा वापस आ गया
00:18जी हाँ मारास्ट के बारामती की ये वो कहानी है जिसे सुनकर भी कोई यकीन नहीं कर पा रहा
00:25एक पत्नी ने अपने पती को मारने के बाद उसकी लाश को घर में दफनाने के लिए घर के अंदर
00:32ही अबरे खोड़ दी
00:33लेकिन सांसे रुकने से एन पहले एक चमतकार हो गया
00:43ये शम्चान है और ये खबरिस्तान जिन्दगी की आखरी मन्जिल
00:51इनसानों के बनाए दस्तूर के मताबर मरने के बाद इन्ही दो जगों पर इनसानी सफ़र खत्म हो जाता है
01:01आम तोर पर शम्चान ये खबरिस्तान इनसानी बस्तियों से कुछ दूर होते है
01:07पर जरा सोचे, अगर यही शम्शान या कबरिस्तान हमारे और आपके घरों में उतर आए, तो क्या हो, जाहिर है,
01:16ना दस्तूर इसकी इजाज़त देता है, और ना ही धर्म या मज़भ
01:26मगर हमारे और आपके बीज ऐसे कुछ इनसान भी बसते हैं, जो शम्शान और कबरिस्तान को उठाकर सीधे अपने घरों
01:34में ले आए, यह चंद तस्वीरें उसी की बानगी है, किसी के घर के बातरूम से कोई कबर बाहर निकली,
01:41तो किसी के ड्राइंग रूम से, किसी कारखान
01:44पताने से कोई कबर बाहर आई, तो किसी बेड रूम से, यहां तक की ड्राइंग रूम तक में हमारे और
01:50आपके जैसे इनसानों ने, अपने ही जैसे इनसान का अंतिम संसकार तक कड़ डाला, घर के अंदर ही जिन्दा जला
01:58करूँ
02:14पता नहीं, यह खुशी के आंसों हैं, यह घम के, पर जो भी हैं, यह पती के आंसों हैं, एक
02:21ऐसे खुशनसी पती के आंसों, जिसकी सांसे बस कुछ मिंटों की महमार थी,
02:26जो लगभग कबर में समा चुका था, परैन मरने से पहले जिन्दा बच गया, हाल के वक्त का शायद यह
02:33पहला ऐसा पती है, जिसने मौत के साथ साथ अपनी पत्नी को भी चक्मा दे दिया, यह बच गया, इसलिए
02:41फिलहाल इसकी पत्नी को कातिल पत्नी नहीं कह सकते हैं, अल
02:56इंद्रपरस्थ सुसाइटी, इस सुसाइटी की तीसरी मंजिल पर यह नौ नंबर का फ्लैट, प्रवीन प्रकाश जक्ताव का है, इस फ्लैट
03:05में 41 साल का प्रवीन, 38 साल की अपनी पत्नी शर्मिला जक्ताव, अपने दो बच्चों, माबाब और छोटे भाही के
03:13साथ रहता
03:14यानि यहां एक पूरा परिवार बस्ता है, यानि इस बस्ती में यह इनसानों का घर है, अब चलिए, आपको घर
03:22के अंदर लिए चलते हैं, यह ड्राइंग रूम है, कमरे में सोफे पड़े हैं, कुरसी हैं, टेबल भी हैं, और
03:28इसी ड्राइंग रूम के बाहर यह एक बालक
03:44अजनी के किनारे दो धाई फीट ऊची दीवार खड़ी कर, इस जगह का इस्तमाल शायद पौदे उगाने के लिए या
03:51फिर घर के किसी और काम के लिए होना है, इस कच्ची दीवार के साथ जमीन पर यह मार्बल का
03:57एक बड़ा सा स्लैप पड़ा है, इस स्लैप को देखकर ऐ
04:12अंदर ये जगह कुछ और नहीं, बलकि एक अधूरी कबर है, एक ऐसी कबर जिसमें एक अधूरे मुर्दे को लिटाया
04:20जा चुका था, उसके ऊपर चादर तक्या सब रखी जा चुके थे, यह स्लैप भी लगभग रखा जा चुका था,
04:27वो तो एन वक्त पर हवा चली और �
04:30अधूरी लाश के पैरों तरे जरा सी चादर खिसकते, और इस तरह आसूं से रो रहा ये पती, बस मरते
04:37बरते बच गया हुआ, अब चलिए सिलसलेवार पूरी कहानी सुनते हैं, इस फ्रैट का मालिक प्रवीन प्रकाश जक्ताब, पेशे से
04:50एक इंजीनियर है, पत्नी शर्
04:55मिला दवाओं की जानकार है, बात एक अगस्त की है, दोपहर का वक्त था, एक मुखमिर इलाके के पुलिस इंस्पेक्टर
05:03स्री शैल जिवडशेट्टी को फोन करता है, फोन पर बताता है कि इंदरप्रस सुसाइटी के फ्लैट नंबर 9 में एक
05:11शक्स जिन्दा समाधी लेने
05:13की कोशिश कर रहा है, खबर मिलते ही पुलिस फोरण मौके पर पहुंच जाती है
05:43पुलिस फ्लैट के अंदर एक जिन्दा समाधी लेने के कोशिश चाली हो रहे, ऐसे उन्हों में लिए इंफर्मिशन दे, और
05:48इंफर्मिशन के तब हम दो-तिन स्टाफ दो है, डिटिक्शन ऑफिसर और कोई स्टाफ है, अमारे लेडिस पुलिस उनको लेके
05:54आम उस वारदा
05:56जहां पुलिस फ्लैट के अंदर दाखिल होने की कोशिश कर रही थी, तब घर में मौझूद शर्मिला उन्हें देखकर अचानक
06:09घबरा गई, पुलिस ने शर्मिला से पूछा कि क्या यहां कोई जिन्दा समाधी लेने की कोशिश कर रहा है, शर्मिला
06:16ने घबराते हुए कह
06:17कैसा कुछ नहीं है, सब जूड है, शर्मिला पुलिस को दर्वाजे से लोटाना जाती थे
06:56पुलिस जब घर के अंदर दाखिल हुई, तो पहले तो सब कुछ नॉर्मल दिखा, लेकिन जैसे ही पुलिस बालकनी में
07:02इस जगा आई, हैरान रहे गई, यहां दो-धाई फीट उची इस बॉक्स जैसी जगा के अंदर तक्यों चादर पड़े
07:09थे
07:12अच्छे की अमेल गर में तो एक पैसेज एक गालरी एक गालरी के आंदर एक जो धाय फूट का हैट
07:22का एक पीट का चरह शन किया था और कंस्ट्रक्शन करने के लिए एक जार ऐसा दो-इंच का कडपा
07:32जो हीवीवेट रहता था तो हीवीवेट का कडपा है वहां रखा था �
07:36अर उसके अंदर जो चोपकुन के अंदर मैंने देखा तो वहां तक्षी और चादर वगर्ण थी तो मैंने पूछ उनको
07:43ये तक्षी चादर किसले रखा है आपनी मैंने वहीसा ही रखा था था थो थोड़वेट रेस था तो थोड़ा सब
07:50मुझे डाउट हो एक जह सहीं में
08:04मजदूर ने फोन कर ये जानकारी दी थी
08:07कि घर में एक शक्स
08:08शायद जिन्दा समाधी ले रहा है
08:10हुआ ये था कि उसी मजदूर
08:13ने स्रैब रखते वक्त
08:14चादर हिलने की वज़ा से प्रवीन के पैक
08:16देख लिये थे उसे लगा
08:18शायद वो समाधी ले रहा है
08:20फिर 112 नंबर पर फोन भी किया
08:22तब पुलिस आई
08:23लेकिन शर्मिला ने उन्हें दरवाजे से ही तरका दिया था
08:29तो इन्फोर्मेर का भी वही कहना था कि
08:31अंदर जो बॉक्स है
08:33जो पीट का जो कंस्ट्रक्शन है
08:35कंस्ट्रक्शन के अंदर जो चादर हो तकिया है
08:50तो बड़ा के लिए जो बुलाय था
09:06तो मजूर्लोक के लिए गए
09:10तो अंदर चादर थोड़ी सि हिल गई
09:19अब ये पुलिस घर के अंदर इस अधोरी कब्र की परताल करी रही थी
09:23कि तब इगर के कोने में उसे एक शक्स नजरा है जो जमीन पर गिरा हुआ था
09:28शायद नीम बेहोशी की हालत में था
09:31कपड़े भटे हुए थे सिर से खून डिस रहा था
09:34पुलिस ने जब शर्मिला से पूछा कि ये कौन है तब पता चला
09:38ये शर्मिला का फती प्रवीन परकाष्ट जगता अब
09:41जब प्रवीन के जखमी होने के बारे में पुलिस ने पूछा तो शर्मिला ने कहा कि मैंने ही इसे बैट
09:48से मारा है
09:52अंदर वो महल है महीला को पूचा कि अंदर जो दो बेडरूम में कुन-कोन है तो फुल निखोल को
09:58मुझे बताइए दिखाइए मुझे तो वो थोड़ी डर गई तो वो लिए अंदर सास है जो बहुत बीमार है आपको
10:04अगर उनिफॉम में दिखेंगे तो उदर जाएंगे औ
10:10बाद में मैं उसके दिखाये तो नहीं तो उसके रिष्टेदार जो है जो उसका देवर है उस वसी वक्तु जगपे
10:19आगा है तो उन्होंने बताए क्या बात है आप क्यो आया तो मैंने बताए आप इससे इंपरमेशन हैं इसको चाल्मिं
10:25करने के लिए विरिफाइए करने के
10:27क ona में विरूद पूलीस को नई दिखा रहे हैं तो उनने आंदर जाकर थे उन्होंने रूम ख्लना चालू किया
10:39तो उसकी ज्यग हार ती दूसरे बेडरूम में देखा तो उसका वह जो है अदमी
10:54तो उसके बाजू में एक बैट पड़ा हुआ था तो मैंने वो लीडी से पूचा तो लीडी गुछ्चे में उसके
11:04सर पर मैंने पिंचर बार बैट से मार गया है
11:25अब पुलिस घायल और नीम बेहोश प्रवीन को फॉरन पास के ही सिलवर जूबली हस्पता ले जाती है
11:31जहां दीरे दीरे उसकी हालत सुधरती है पर मामला कुछ ऐसा अनोखा था कि पुलिस अभी शर्मिला को गिरफतार नहीं
11:39करती है
11:39वो घर पर ही थी इस दोरान पुलिस मामले की जांच करती रहती है फिर पर प्रवीन के ठीक होने
11:45पर उसका बयान लेती है
11:47और इसके बाद चार अगस्त को आखिरकार शर्मिला को गिरफतार कर लेती है
11:51इसके बाद प्रवीन और शर्मिला जो कहानी सुनाते है वो कहानी कुछ यहूं है
11:57जुलाई के आखरी हफते में शर्मिला अपने घर की इस बालकनी के कोने में दो से ढ़ाई फीट उची एक
12:04दिवार खड़ी करती है
12:05गहराई और लंबाई अतनी के एक आदमी इसमें आसानी से समा जाए
12:10फिर 31 जुलाई की रात शर्मिला अपने पती के खाने में बेहोशी की दवा मिला देती है
12:15साथी वही दवा सास को भी दे देती है
12:18चुकि शर्मिला ने भी फार्मा किया हुआ था इसलिए उसे दवाओं की पूरी जानकारी थी
12:23एक अगस्त की सुभा जब बच्चे और उसका देवर घर पर नहीं थे
12:28और जब प्रवीन बेहोशी के आलम में था तब उसने उसे घर में रखे बैट से सर पर कई बार
12:34मारा
12:34शर्मिला को लगा कि प्रवीन मर चुका है इसके बाद वो उसे घसील्ट कर इसी अधूरी कबर में ले है
12:40प्रवीन को तक्की और चादर से ढख दिया इरादा ये था कि इसके बाद उसके उपर मारबल का ये स्लैब
12:47रखकर इसे हमेशा के लिए बंद कर देगी
12:49और इस तरह घर के अंदर ही प्रवीन की कबर तयार हो गई दी
12:57पर मसला तब आया जब शर्मिला से ये भारी स्लैब अकेले नहीं उठपाया
13:03तब उसने मजदूरों को बुलाने का फैसला किया
13:06प्रवीन को मुर्दा समझ कर उसके उपर और ज़्यादा चादर और तक्ये रख दिये
13:10दो पहर दो मस्दूर घर आये
13:13स्लैब को उठा कर अभी वो उपर रखी रहे थे
13:16कि तब ये हवा की वज़ा से चादर का एक सिरा सरक जाता है
13:20और मस्दूर को एक इंसानी पैर दिखाई देता है
13:23ये देखते ही घबराकर दोनों मस्दूर वधावास घर से भाग निकलते हैं
13:28फिर उनी में से 112 नंबर पर पुलिस को कॉल करता है
13:31ठीक होने के बाद प्रवीन ने आज तक को उस रात और उस अधोरी कबर की कहानी सुनाई
14:01ि की मैर कोणी तरी भरपूर मारते मिनो थोता है आणी त्यानों अंतर त्यानी उचलून जो गैलरी में डग्त बांद
14:18ला था
14:18त्या डग्ट में त्यानी माला टाकनलेल होता थे परन जो गवान्टरी आल स кажется त्यानी बगईत ल घड़ ऑक टाकता
14:28हाथना
14:44प्रवीन ने आगे बताया कि उसकी मां को भी बेहोशी की दवा दी गई थी लेकिन शायद मेरे चीखने पर
14:50मेरी मां को कुछ होश आया
14:52त्यावेश शन्होरिजा वहा प्रकार गड़ला माला मारने चानी पूरुण टाकने चाअ ते विस्थो, कहा मारी चागे लेकिन झात।
15:08त्यामों माजी आई पूर्ण बेश्व दावसेत होती त्यामों माज आई लाएचे कैच कलपना नो उती पन जादिवशी मला मारथी तैस
15:17मी ओर दो त्यामों तिला थोड़ीची जागाली आने जावेस तिला हे काल की काई तरी प्रब्लम चल लाए तर त्यावेस
15:27आमच्या आ
15:54प्रवीन ने एक और अजी बात बताई उसने कहा कि उसके घर पर एक कैलेंडर तंगा है जिस पर 13
16:00और 14 जुलाई की तारी के खाने में
16:03नो रिजल्ट लिखा है उसका कहना है कि इन ही तारीखों में आम आवस्या भी थी उसे लगता है कि
16:09ये किसी साज़िश का हिस्सा है उसका ये भी कहना है कि घर के अंदर एक बिल्कुल नई कुलहाडी भी
16:14रखी थी
16:16पन आमचे घर चे सगे लोक प्रचंड घाबरलेल होते तका तपस होवा याचे सरुआ एंगल मंजे कैलेंडर वाती 13 और
16:2514 जुलाई मजे ज्या दूश आमोश होती त्या दूशी त्या दूशी त्यानी नो रिजल्ट असल यहलेलेले तर त्याचा आर्थ काई
16:31एक दुश्�
16:45पुलिस के मताबिक कैलेंडर की इन तारिखों या इसके पीछे की कुछ और वजहों का इससे कोई लेना देना नहीं
16:51पुलिस का ये भी कहना है कि प्रवीन को मारने के लिए कुलहारी का इस्तेमाल नहीं किया गया
16:58गर में कैलेंडर था जिस पर नो रिजल्ट ऐसे लिखा था क्या वजह आप उस एंगल से भी जांच कर
17:04रहें नहीं वाईसा कुछ उदर लिखा नहीं था ऐसा कुछ आमने देखा नहीं है यह आप जो एह इंपरमेशन आपको
17:10यह गलते ऐसा कुछ उदर गहता नहीं ता जो म
17:31प्रवीन का यह भी कहना है कि उसे बेहोश करने के लिए नीन की गोलियां दी गई थी प्रवीन अपने
17:37दोनों बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी परेशान है उसने कहा कि उसके दोनों बच्चे इस वक्त शर्मिला के घर
17:43पर हैं
17:45तो जिने गे गुवा थे आ अउस्ष जे गुण्गीज आउस्ष दे कि मात जोप्पी चार कोअरे घड़ अंध टे त्सीने
17:49कुछ नवल ते त्ससीने बच्चल शर्मिलें घंटे रविशाकितUMीcoliseffbek jour
18:13रिंव्भ्
18:25माजी दोणी मुल गायवाय को को बंख़ा यानि माजी हो लगी कुटाय धानी तनला जिट्टी जा पसंद्धोकाए आनि माज है
18:35साचरकड़फा सलोंकन पसंद्धोकाए तर त्याज माजी मुल नमाज सोदिन करवी हीप माजी निंत्या है
18:43वसंत मोरे बारामती आज तक
18:50अब सवाल ये है कि शर्मीला ने आखिर घर के अंदर ही कबर क्यों खो दी
18:55और उससे भी बड़ा सवाल ये कि वो अपने पती को घर के अंदर ही कबर में क्यों दफनाना चाहती
19:01थी
19:01तो बकौल बारामती पुलिस शर्मीला ने अपना जर्म कुबूल कर लिया
19:06और साथी ये भी बता दिया कि आखिर वो अपने पती को मारना क्यों चाहती थी
19:14फिलाल शुरुआती तफ्तीश के बाद पुलिस का कहना है
19:17कि शर्मीला ने अपने पती को इसलिए मारने की कोशिश की
19:21क्योंकि वो उसे नौकरी करने नहीं दे रहा था
19:24साथ ही उसके साथ मारपीट भी क्या करता था
19:45पुलिस का ये भी कहना है कि शर्मिला डिप्रेशन में थी
19:47उसे ये भी पता नहीं था कि पती को मारने के बाद क्या करें
19:51ज़ी जो लिडी चो डिप्रेशन में उसके वासे गिए उसके वो जही
20:04यह वे संहर वजदी मुस्त अपनले के शथा न ऑज जा है कि आप करेंगे कि
20:15करेंगी लेकिन उन्होंने बोले घर का मामला है आमको सर गुना दाखिल करने का नहीं और तीन-चार दिल के
20:20बाद उसको फिर आइसास होगा है कि वह जो भी गटा है गलत है चार तारी को खूद आए और
20:25उन्हें केस रिश्टर की और हमने कुना दाखिल करके जो आगे का जो इ
20:45सबसे अजीब पहलू यह है कि बारामती में जैसे ही लोगों को घर के अंदर बनी इस अधूरी कबर के
20:51बारे में पता चला लोग इस सुसाइटी को देखने चले आए इसी वजह से फिलहार घर के लोग इस फ्लैट
20:58को बंद कर कहीं और चले गए अब यहां सिर्फ ताला लग
21:02अब चलते चलते एक बार फिर आपको प्रवीन के इन आसूं के साथ छोड़े जाता हूं जो पता नहीं पत्नी
21:09के हाथों मिले जखम के हैं या फिर उसी पत्नी के हाथों मरते मरते बच जाने के प्रवीन खुशनसी पती
21:18था जो बच गया वसंत मोरे बारामती आज तक
21:26तो वारदात में फिलाल इतना ही
21:28मगर देश और दुनिया की बागी खबरों के लिए
21:30आप देखते रही आज तक
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