00:00साल में मुख्य रूप से दो प्रमुख शिवरात्रियां मनाई जाती हैं
00:02पहली फालगुन माह की माहा शिवरात्री और दूसरी सावन माह की सावन शिवरात्री
00:06पौरानिक मान्यताओं के अनुसार सावन माह में ही समुद्र मंथन हुआ था
00:09इसमें से निकले हला हल विश को भगवान शिव ने संपूर्ण सृष्टी की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारन
00:14कर लिया था विश के प्रभाव और जलन को शांत करने के लिए देवी देवताओं ने उन पर जल अर्पित
00:18किया था इसी परंपरा के तहट सावन शिवरात्र
00:20पर जल चढ़ाने का नियम है सावन शिवरात्री के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सनान के बाद भगवान शिव का
00:25स्मरण कर व्रत का संकल्प लिया जाता है शिवलिंग पर जल, दूद, दही, शहर, गंगा जल, बेलपत्र, धतूर, भांग और
00:31अक्षत अर्पित किये �
00:53साथ ही ओम नमह शिवाय मंत्र का लगातार जाब किया जाता है
01:01समय जल में थोड़ा सा कच्चा दूद और दूर्वा मिलाए इसके बाद महामरित्यूंजे मंत्र का कम से कम 11 या
01:0621 बार जाब करें
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